मेरा नाम सिया है और यह कहानी मेरे साथ तब हुई जब मैं दिल्ली की एक पुरानी 14 मंज़िला बिल्डिंग में काम करती थी। उस बिल्डिंग में लोग अक्सर देर रात रुकने से डरते थे, लेकिन मुझे कभी उन बातों पर विश्वास नहीं था।
उस बिल्डिंग में लोग अक्सर देर रात रुकने से डरते थे, लेकिन मुझे कभी उन बातों पर विश्वास नहीं था।
एक रात मैं ऑफिस से देर तक काम करके निकली। बिल्डिंग लगभग खाली थी और सिर्फ लिफ्ट की हल्की आवाज़ आ रही थी। मैंने लिफ्ट का बटन दबाया और वह धीरे-धीरे नीचे आने लगी।
सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन जैसे ही लिफ्ट 12वीं मंज़िल पर पहुँची, वह अचानक रुक गई। मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई क्योंकि लिफ्ट का दरवाज़ा नहीं खुला।
अचानक डिस्प्ले पर '13' नंबर चमकने लगा, जबकि इस बिल्डिंग में लोग कहते थे कि 13वीं मंज़िल मौजूद ही नहीं है। लिफ्ट अपने आप चलने लगी और दरवाज़ा खुल गया।
बाहर कोई कॉरिडोर नहीं था, सिर्फ एक अंधेरा गलियारा था जहाँ लाल रोशनी टिमटिमा रही थी। मैंने पीछे हटने की कोशिश की लेकिन लिफ्ट का दरवाज़ा बंद हो चुका था।
गलियारे से एक धीमी आवाज़ आई—‘नई आई हो?’
मैं डर गई, और तभी एक परछाई मेरे सामने आने लगी। उसका चेहरा साफ नहीं था, बस एक धुंध जैसा खालीपन था।
वह धीरे-धीरे बोला, ‘यहाँ समय रुक जाता है लेकिन लोग नहीं।’ मैंने लिफ्ट का बटन बार-बार दबाया लेकिन कुछ नहीं हुआ।
अचानक लाइटें बंद हो गईं और पूरा गलियारा और भी डरावना हो गया। मुझे अपने पीछे किसी के चलने की आवाज़ सुनाई दी।
मैंने जैसे ही मुड़कर देखा, वहाँ कोई नहीं था, लेकिन ठंडी सांस मेरे चेहरे पर महसूस हुई। तभी लिफ्ट का दरवाज़ा फिर से खुला और अंदर से आवाज़ आई—‘अब तुम यहाँ रहोगी।’
मैंने भागने की कोशिश की लेकिन मेरे पैर जैसे जकड़ गए थे। और फिर सब कुछ अंधेरा हो गया।
सुबह जब सिक्योरिटी गार्ड ने मुझे ढूंढा, तो मैं लिफ्ट के बाहर बेहोश पड़ी थी। लेकिन सबसे डरावनी बात यह थी कि डिस्प्ले पर अब भी '13' चमक रहा था…
और लिफ्ट किसी भी हालत में 13वीं मंज़िल से नीचे नहीं आ रही थी।
आज भी उस बिल्डिंग में लोग कहते हैं कि रात 10 बजे के बाद लिफ्ट अपने आप 13 पर रुक जाती है। और कभी-कभी किसी लड़की की आवाज़ लिफ्ट से आती है—‘मुझे बाहर निकाल दो…’
लेकिन कोई उसे सुन नहीं पाता… क्योंकि लिफ्ट अब सिर्फ ऊपर ही जाती है।
और मैं… अगर कभी उस बिल्डिंग के सामने से गुजरूँ, तो मुझे लगता है कोई मुझे अंदर से बुला रहा है।
सबसे डरावनी बात यह है कि मेरे फोन में आज भी एक अनजान कॉल लॉग सेव है… जो हर रात 2:13 बजे अपने आप आ जाती है, और उसमें सिर्फ एक ही आवाज़ होती है—‘अब तुम वापस आ जाओ।’
और जब भी मैं नींद में उस आवाज़ को सुनती हूँ… तो लाइट अपने आप बंद हो जाती है… और लिफ्ट की आवाज़ मेरे कमरे तक आने लगती है।
और फिर… सब कुछ फिर से 13वीं मंज़िल पर रुक जाता है…
जहाँ मैं अब भी हूँ…
यही सच है
यही सच है मेरी रूह उस