इस घर में प्यार मना है - 36 Sonam Brijwasi द्वारा महिला विशेष में हिंदी पीडीएफ

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इस घर में प्यार मना है - 36

घर में आज खास दिन था…नन्ही परी के नामकरण का। सब हॉल में बैठे थे…बीच में छोटी सी गुड़िया… सबकी आँखों का तारा ✨

सबसे पहले मोहन कूदा —
मैं नाम रखूँगा!
इसका नाम है — ‘चुलबुली’ 😄

सब हँस पड़े।

पारो बोली - 
ये कोई नाम है??

पारो ने प्यार से बच्ची को देखा —

पारो बोली - 
मुझे लगता है इसका नाम ‘आराध्या’ होना चाहिए… कितना प्यारा है ना 💛

संस्कृति हल्की मुस्कान के साथ बोली —

संस्कृति बोली - 
मुझे ‘सान्वी’ अच्छा लग रहा है…

सबकी नज़र अब कार्तिक पर गई। वो चुप था…बस अपनी बेटी को देख रहा था। कार्तिक धीरे से उठा…और बच्ची को गोद में लिया।
उसने प्यार से उसकी छोटी उँगली पकड़ी…

कार्तिक (धीरे, भावुक होकर) बोला - 
मैंने इसका नाम पहले ही सोच लिया था…

सब उत्सुक हो गए।

मोहन बोला - 
जल्दी बोलो भैया! सस्पेंस मत बनाओ!

कार्तिक ने संस्कृती की तरफ देखा… फिर बच्ची को…

कार्तिक बोला - 
इसका नाम होगा…‘संशिका’ 💛

एक पल के लिए सब शांत…फिर संस्कृती की आँखें भर आईं।

संस्कृति बोली - 
सं…शिका...

कार्तिक मुस्कुराया।

कार्तिक बोला था 
संस्कृति का ‘सं’…और मेरी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत ‘शिका’…

पारो की आँखें भी नम हो गईं।

पारो बोली - 
बहुत प्यारा नाम है… 💛

मोहन ने तुरंत हाथ उठाया और बोला—
मैं भी agree करता हूँ!
संशिका… हमारी princess 😎

संस्कृति ने बच्ची को सीने से लगाया और बोली—
मेरी बेटी… संशिका…

कार्तिक ने दोनों को गले लगा लिया। उस पल में…सिर्फ प्यार था…
सिर्फ अपनापन…और एक नई शुरुआत 💛 अब घर में हर तरफ एक ही नाम गूंज रहा था —
“संशिका…” 👶✨

सुबह का समय…संशिका अपने छोटे से पालने में लेटी थी…और मोहन उसके पास बैठा उसे घूर रहा था 😄

मोहन (धीरे से) बोला - 
संशिका… सुनो…इस घर में सबसे ज्यादा प्यार कौन करता है?

तभी कार्तिक पीछे से आया और बोला—
पापा करते हैं।

मोहन तुरंत बोला—
गलत जवाब! चाचा करते हैं 😎

पारो भी आ गई —

पारो बोली - 
अच्छा? तो रात को कौन उठकर दूध बनाता है?

मोहन अटक गया…

मोहन बोला - 
वो… वो teamwork होता है 😅

संस्कृति हँस पड़ी —

संस्कृति बोली - 
फेवरेट तो वही होगा… जो diaper भी बदलेगा 😄 और इसको अपना दूध पिलाएगा।

मोहन ने तुरंत बच्ची को गोद में उठाया —

मोहन बोला - 
ठीक है! आज से diaper duty भी मेरी!

2 मिनट बाद…

मोहन (चिल्लाकर) बोला - 
भाभी!!! ये कैसे करते हैं?? 😭

पूरा घर हँसी से गूंज उठा 😂

शाम का समय…सब संशिका के आसपास बैठे थे। कार्तिक उसकी उँगली पकड़कर धीरे-धीरे हिला रहा था…तभी…संशिका के होठों पर हल्की सी मुस्कान आई। सब एकदम रुक गए।

संस्कृति (धीरे से) बोली - 
देखो… मुस्कुराई…

कार्तिक की आँखें चमक उठीं।

कार्तिक बोला - 
मेरी बेटी… मुस्कुरा रही है…।

मोहन उछल पड़ा —

मोहन बोला - 
ये मुझे देखकर मुस्कुराई है! मैं ही फेवरेट हूँ 😎

पारो ने तुरंत जवाब दिया —
नहीं… ये तो मेरी आवाज सुनकर मुस्कुराई है 💛

संस्कृति ने प्यार से कहा —
ये हम सबकी खुशी है…

और सच में…उस छोटी सी मुस्कान नेसबके दिल जीत लिए 💖
रात का समय…सब सो चुके थे…पारो अकेले बैठी थी…एक हाथ अपने पेट पर रखे हुए। वो धीरे से मुस्कुरा रही थी…और आँखों में हल्की नमी थी। मोहन पीछे से आया —

मोहन बोला - 
क्या सोच रही हो?

पारो ने उसकी तरफ देखा…

पारो (धीरे से) बोली - 
जब हमारी बच्ची आएगी ना…मैं उसे ऐसे ही गोद में लूँगी…

उसकी आवाज भर गई। मोहन ने उसके पास बैठकर उसका हाथ थाम लिया।

मोहन बोला - 
हमारा बच्चा बहुत lucky होगा…क्योंकि उसकी माँ तुम हो 💛

पारो मुस्कुरा दी…और अपना सिर मोहन के कंधे पर रख दिया।
उसी घर में…एक तरफ नई ज़िंदगी मुस्कुरा रही थी… 👶
और दूसरी तरफ…एक नई ज़िंदगी आने का इंतज़ार हो रहा था 💖

रात का समय…अचानक पारो को तेज दर्द शुरू हुआ।

पारो (कराहते हुए) बोली - 
मोहन जी… मोहन जी… बहुत दर्द हो रहा है…

मोहन घबरा गया 😰

मोहन बोला - 
भाभी!!! भैया!!! जल्दी आओ!!

संस्कृति तुरंत उठी, कार्तिक ने तुरंत गाड़ी निकाली। हॉस्पिटल पहुँचते ही…डॉक्टर पारो को अंदर ले गए। मोहन बाहर टहल रहा था…पूरी तरह पसीने में 😓

मोहन बोला - 
भैया… कुछ हो तो नहीं जाएगा ना?

कार्तिक ने उसके कंधे पर हाथ रखा —

कार्तिक (शांत) बोला - 
कुछ नहीं होगा… तुम मजबूत बनो… पारो को तुम्हारी जरूरत है।

अंदर पारो दर्द सह रही थी…लेकिन उसकी आँखों में एक ही सपना था —
“मेरे बच्चे को मैं अपनी गोद में लूँ…” 💛

बाहर…मोहन कभी बैठता… कभी खड़ा होता…कभी भगवान से प्रार्थना करता 😄

मोहन बोला - 
भगवान जी… बस मेरी पारो और बच्चा ठीक रखना…
मैं रोज पूजा करूंगा… पक्का वाला 🙏

तभी डॉक्टर बाहर आए।

डॉक्टर (मुस्कुराते हुए) बोलीं - 
कांग्रेसुलेशन्स… बेटी हुई है।

मोहन कुछ सेकंड के लिए freeze 😳 फिर…

मोहन (चिल्लाकर) बोला - 
मैं papa बन गया!!!! 😍

वो खुशी में उछलने लगा…

मोहन बोला - 
भैया! मेरी भी परी आ गई!!!

कार्तिक हँस पड़ा…और संस्कृती की आँखें खुशी से भर आईं 💖
थोड़ी देर बाद…नर्स ने नन्हीं सी बच्ची को बाहर लाकर मोहन की गोद में दिया। मोहन उसे देखकर बस रो पड़ा…

मोहन (धीरे से) बोला - 
मेरी बेटी…

अंदर पारो थकी हुई थी…लेकिन चेहरे पर सुकून था। संस्कृति उसके पास बैठी थी। तभी कार्तिक संशिका को गोद में लेकर अंदर आया।

कार्तिक बोला - 
देखो… तुम्हारी छोटी बहन आई है…

संशिका अपनी छोटी-छोटी आँखों से उस नन्हीं बच्ची को देख रही थी…जैसे समझ रही हो… 💛 संस्कृति मुस्कुराई —

संस्कृति बोली - 
अब हमारी संशिका दीदी बन गई…

पारो ने अपनी बेटी को सीने से लगाया…

और धीरे से बोली —
मेरी गुड़िया…

पूरा कमरा खुशियों से भर गया… अब उस घर में दो नन्हीं परियाँ थीं… 👶👶💖
एक — संशिका
और दूसरी — अभी नाम का इंतज़ार… ✨

घर में छोटा सा फंक्शन रखा गया…सभी खुश थे…नन्हीं सी बच्ची पालने में लेटी थी…

पंडित जी बोले —
अब बच्ची का नाम रखा जाए।

सब अपने-अपने नाम बताने लगे 😄

मोहन बोला - 
मैं कहता हूँ — ‘मिश्री’… क्योंकि मेरी बेटी मीठी है 😎

पारो बोली - 
नहीं… ‘आराध्या’ अच्छा लगेगा 💛

संस्कृति बोली - 
‘काव्या’ भी बहुत प्यारा नाम है…

सबकी नज़र अब कार्तिक पर गई…वो चुपचाप बच्ची को देख रहा था…

फिर उसने धीरे से कहा —
इसका नाम… ‘अंशिका’ होगा। संशिका की बहन अंशिका।

सब एक पल के लिए शांत… फिर संस्कृती मुस्कुरा दी 💖

संस्कृति बोली - 
क्यों?

कार्तिक ने बच्ची को प्यार से देखते हुए कहा —
क्योंकि ये हम सबका ‘अंश’ है…हम सबके प्यार का हिस्सा… ‘अंशिका 💛

सबकी आँखें नम हो गईं…

पंडित जी बोले - 
तो आज से इसका नाम ‘अंशिका’ हुआ।

कुछ महीनों बाद…

संशिका अपनी मम्मी संस्कृती की गोद में बैठी थी…और कार्तिक अंशिका को गोद में लेकर प्यार कर रहा था। संशिका का छोटा सा मुँह बन गया 😒 वो धीरे-धीरे चलकर आई… और कार्तिक का हाथ खींचने लगी 😄

संशिका (तुतलाकर) बोली - 
मुझे भी… गोदी… पापा…

सब हँस पड़े 😂 कार्तिक तुरंत उसे भी उठा लेता है —

कार्तिक बोला - 
अरे मेरी बड़ी वाली परी नाराज़ हो गई क्या?

अब दोनों बहनें एक साथ उसकी गोद में…और कार्तिक का बैलेंस बिगड़ गया 😄

मोहन (हँसते हुए) बोला - 
भैया! एक-एक करके संभालो… दोनों साथ में heavy पड़ जाएंगी 😂

एक बार शाम का समय…अंशिका पालने में लेटी थी…संशिका उसके पास बैठी थी…धीरे-धीरे उसके हाथ को पकड़ने की कोशिश कर रही थी…अचानक…अंशिका ने अपनी छोटी सी उंगली से
संशिका की उंगली पकड़ ली…संशिका खिलखिला दी 😄💛

संस्कृति (धीरे से) बोली - 
देखो… दोनों का रिश्ता शुरू हो गया…

पारो की आँखों में आँसू आ गए…

पारो बोली - 
ये दोनों हमेशा ऐसे ही साथ रहें…

मोहन मुस्कुराया और बोला—
और मैं दोनों का फेवरेट चाचा रहूँगा 😎”

कार्तिक ने दोनों को देखते हुए कहा —
अब ये घर पूरा हो गया…

अब उस घर में हँसी… प्यार… और शरारत दोगुनी हो चुकी थी 💖👶👶
संशिका ❤️ अंशिका