डॉक्टर के कमरे में हल्की-सी शांति थी। संस्कृति बेड पर लेटी थी और कार्तिक उसके पास कुर्सी पर बैठा उसका हाथ पकड़े हुए था।
डॉक्टर ने मशीन ऑन की। कमरे में अचानक धक-धक-धक…धक ...जैसी हल्की-सी आवाज गूंजने लगी।
डॉक्टर मुस्कुराकर बोली -
ये… आपके बच्चे की धड़कन है।”
कार्तिक जैसे पत्थर बन गया। उसने ध्यान से उस आवाज को सुना…छोटी-सी… मगर ज़िंदा धड़कन। उसकी आंखें अचानक भर आईं। वो धीरे से संस्कृति का हाथ और कसकर पकड़ लेता है।
वो बोला -
हमारा… बच्चा…
उसकी आवाज कांप गई। संस्कृति ने उसकी तरफ देखा तो वो सच में रो रहा था।
संस्कृति हल्का-सा मुस्कुराई और बोली —
इतने बड़े आदमी होकर रो रहे हो?
कार्तिक हंसते हुए आंखें पोंछता है और बोला—
ये खुशी के आंसू हैं… मैं पापा बनने वाला हूं।
उसी समय मोहन भी कमरे में घुस आता है।
मोहन बोला -
क्या हुआ… क्या हुआ… रिपोर्ट आ गई क्या?
डॉक्टर हंस पड़ी। मोहन तुरंत मशीन की तरफ देखने लगा।
मोहन बोला -
डॉक्टर साहब… ये बच्चा मेरे जैसा शरारती तो नहीं होगा?
डॉक्टर ने मजाक में कहा —
अगर चाचा आप जैसे हैं… तो बच्चा थोड़ा शरारती तो होगा ही।
मोहन छाती चौड़ी करके बोला —
बस फिर तो घर में मज़ा ही मज़ा रहेगा!
कार्तिक ने तुरंत उसे घूरा और बोला—
मेरे बच्चे को अपने जैसा मत बनाना।
मोहन हंस पड़ा और बोला—
भैया… चाचा का असर तो पड़ेगा ही।
संस्कृति और पारो दोनों हंसने लगीं। कमरे में पहली बार एक नए जीवन की धड़कन के साथ चारों के दिल भी खुशियों से धड़क रहे थे।
घर का माहौल अब पहले से बिल्कुल अलग हो गया था। संस्कृति के प्रेग्नेंट होने की खबर के बाद जैसे पूरे घर की दुनिया बदल गई थी। सुबह का समय था। संस्कृति किचन में पानी लेने उठी ही थी
कि अचानक पीछे से कार्तिक की आवाज आई —
रुको!
संस्कृति चौंक गई।
कार्तिक जल्दी से उसके पास आया और बोला —
तुम्हें उठने की क्या जरूरत थी? मुझे बुला लेती।
संस्कृति हंस पड़ी और बोली—
कार्तिक… मैं प्रेग्नेंट हूँ, बीमार नहीं।
कार्तिक तुरंत बोला —
मेरे लिए तो अभी तुम दोनों बहुत कीमती हो… तुम भी और हमारा बच्चा भी।
इतना कहकर उसने खुद ही उसे पानी लाकर दिया और कुर्सी पर बैठा दिया। उसी समय मोहन कमरे में आया।
उसने ये सीन देखा तो नाटकीय अंदाज़ में बोला —
भाभी… आप खड़ी क्यों हैं? आपको आराम करना चाहिए।
संस्कृति हंसते हुए बोली —
आप भी शुरू मत हो जाओ।
मोहन छाती पर हाथ रखकर बोला —
अरे मैं चाचा बनने वाला हूँ… मेरी भी जिम्मेदारी बनती है।
फिर वो जोर से चिल्लाया —
पारोऽऽ!
पारो भागते हुए आई और बोली—
क्या हुआ?
मोहन बहुत सीरियस बनकर बोला —
आज से भाभी कोई काम नहीं करेंगी।
पारो ने भौंहें चढ़ाईं और बोली—
तो फिर काम कौन करेगा?
मोहन मुस्कुराया और बोला—
हम!
कार्तिक ने तुरंत कहा —
बिल्कुल… संस्कृति सिर्फ आराम करेगी।
संस्कृति ने माथा पकड़ लिया और बोली—
हे भगवान… ये लोग मुझे सच में बीमार बना देंगे।
पारो उसके पास बैठ गई और प्यार से बोली —
देखो भाभी… मज़ाक अपनी जगह है, लेकिन अब आपको सच में अपना ख्याल रखना होगा।
संस्कृति ध्यान से उसकी बात सुनने लगी।
पारो बोली —
समय पर खाना… ज्यादा थकान नहीं… और सबसे जरूरी बात — खुश रहना।
मोहन बीच में कूद पड़ा और बोला—
और चाचा की बात मानना।
पारो ने उसे घूरा और बोली—
आप चुप रहो जी।
मोहन हंस पड़ा।
फिर वो अचानक संस्कृति के पेट की तरफ देखकर बोला —
छोटू… जल्दी आना… तुम्हारा चाचा तुम्हें बहुत बिगाड़ने वाला है।
कार्तिक ने तुरंत कहा —
पहले पैदा तो होने दो।
पारो मुस्कुराई और बोली —
लगता है इस बच्चे के आने से पहले ही घर में चार पागल हो गए हैं।
और सच में…उस छोटे से आने वाले मेहमान ने इस घर को पहले ही खुशियों से भर दिया था।
रात का समय था। बाहर बहुत ठंड थी और पूरे घर में शांति थी।
कार्तिक गहरी नींद में सो रहा था। संस्कृति भी उसकी बाहों में लेटी थी। अचानक संस्कृति की आंख खुल गई। उसे पता नहीं क्यों… लेकिन अचानक उसका मन अजीब चीज खाने का करने लगा।
वो धीरे से उठकर बैठ गई। कार्तिक की नींद हल्की थी।
उसने आंखें खोलीं और तुरंत पूछा —
क्या हुआ संस्कृति?
संस्कृति थोड़ी झिझकी।
संस्कृति बोली -
वो… मुझे कुछ खाने का मन कर रहा है।
कार्तिक तुरंत उठकर बैठ गया।
कार्तिक बोला -
क्या?
संस्कृति धीरे से बोली —
मुझे… खट्टे आम के साथ चॉकलेट खाने का मन कर रहा है…
कार्तिक कुछ सेकंड तक उसे देखता रहा।
फिर बोला —
क्या?
संस्कृति शर्म से लाल हो गई।
संस्कृति बोली -
पता नहीं क्यों… लेकिन वही खाने का मन कर रहा है।
कार्तिक हल्का सा हंस पड़ा।
कार्तिक बोला -
बस इतनी सी बात?
उसने तुरंत coat उठाया और बोला —
मैं अभी लेकर आता हूं।
संस्कृति चौंक गई और बोली—
अभी? आधी रात है!
कार्तिक मुस्कुराया —
मेरी पत्नी और मेरे बच्चे की पहली क्रेविंग है… इसे कैसे मना कर सकता हूं?
इतना कहकर वो बाहर जाने लगा।
तभी पीछे से आवाज आई —
कहां जा रहे हो हीरो?
दोनों ने मुड़कर देखा। दरवाजे पर मोहन खड़ा था। वो नींद में था लेकिन ड्रामा करने से नहीं चूक रहा था।
वो बोला -
रात के दो बजे घूमने जा रहे हो?
कार्तिक बोला —
संस्कृति को खट्टे आम और चॉकलेट खाने का मन है।
मोहन की नींद तुरंत गायब हो गई।
मोहन बोला -
क्या?
फिर उसने सीना चौड़ा किया और बोला—
मैं भी चलूंगा!
कार्तिक बोला —
तुम सो जाओ।
मोहन नाटकीय अंदाज में बोला —
नहीं… मैं चाचा बनने वाला हूं।
मेरी भी जिम्मेदारी है।
इतने में पारो भी उठ गई।
पारो बोली -
ये शोर क्यों हो रहा है?
मोहन तुरंत बोला —
भाभी को खट्टे आम और चॉकलेट चाहिए।
पारो हंस पड़ी।
पारो बोली -
ओह… पहली क्रेविंग।
फिर उसने कार्तिक से कहा —
जाओ ले आओ… नहीं तो पूरी रात इन्हें नींद नहीं आएगी।
मोहन तुरंत बोला —
और मुझे भी!
कार्तिक ने माथा पकड़ लिया और बोला—
तुम्हें क्यों?
मोहन मुस्कुराया और बोला—
अरे… मैं भी तो चाचा हूं।
मुझे भी टेस्ट करना पड़ेगा कि भतीजे की पसंद कैसी है।
संस्कृति हंसते हंसते लाल हो गई। कुछ देर बाद…कार्तिक और मोहन दोनों ठंड में आधी रात को दुकान ढूंढने निकल पड़े।
और जाते जाते मोहन बोला —
इतिहास में पहली बार कोई आदमी आम और चॉकलेट साथ में खरीदने जा रहा है।
संस्कृति दरवाजे पर खड़ी उन्हें जाते देख रही थी। उसकी आंखों में हल्की मुस्कान थी…क्योंकि उसे महसूस हो रहा था वो सच में बहुत खुशकिस्मत है।
रात के लगभग ढाई बजे थे। सड़कें लगभग खाली थीं। कार्तिक और मोहन मोटी जैकेट पहने ठंड में चलते हुए एक छोटी सी 24 घंटे खुली दुकान तक पहुँचे। दुकान का मालिक एक अंग्रेज आदमी था। वो उनींदी आंखों से काउंटर पर बैठा था। जैसे ही दरवाजा खुला उसने ऊपर देखा।
वो बोला -
Hello…
कार्तिक बोला —
Hello… do you have raw mango?
दुकानदार ने थोड़ा सोचा… फिर फ्रिज में देखकर बोला —
Yes… we have sour mango slices.
कार्तिक ने राहत की सांस ली।
कार्तिक बोला -
Good… give me that.
फिर उसने कहा —
और चॉकलेट भी दे दीजिए।
दुकानदार ने चॉकलेट भी रख दी। लेकिन जब उसने देखा कि दोनों चीजें एक साथ खरीदी जा रही हैं,
तो उसकी भौंहें सिकुड़ गईं।
वो बोला —
Wait… you will eat mango with chocolate together?
मोहन तुरंत हंस पड़ा।
मोहन बोला -
नहीं… हम नहीं खाएंगे।
दुकानदार और भी कन्फ्यूज हो गया।
दुकानदार बोला -
Then who will eat?
मोहन गर्व से बोला —
My sister in law… she is pregnant.
दुकानदार कुछ सेकंड तक उन्हें देखता रहा… फिर अचानक हंस पड़ा।
दुकानदार बोला -
Ahhh… pregnancy cravings!
फिर उसने सिर हिलाया और बोला —
I once saw a pregnant woman eating ice cream with pickles.
मोहन बोला —
तो ये तो फिर भी ठीक है।
दुकानदार मुस्कुराया —
You husbands are brave men.
कार्तिक हल्का सा मुस्कुरा दिया। पैसे देकर दोनों वापस घर आ गए। घर पहुंचते ही पारो और संस्कृति दरवाजे पर खड़ी मिल गईं।
मोहन नाटकीय अंदाज में बोला —
लो भाभी… आपकी ऐतिहासिक डिश आ गई।
संस्कृति हंस पड़ी। वो सोफे पर बैठ गई। सबकी नजरें उसी पर थीं।
उसने पहले खट्टे आम का टुकड़ा उठाया…फिर उस पर चॉकलेट रख दी।
मोहन ने मुंह बना लिया —
हे भगवान…
पारो भी हंसते हुए बोली —
ये सच में खाओगी?
संस्कृति बोली —
हां!
और उसने वो अजीब कॉम्बिनेशन खा लिया। सबकी आंखें उस पर टिकी थीं। कुछ सेकंड तक वो चुप रही…फिर अचानक उसकी आंखें चमक उठीं।
वो बोली -
वाह!
मोहन चौंक गया —
सच में अच्छा है?
संस्कृति बोली —
बहुत अच्छा!
मोहन बोला —
मुझे भी टेस्ट करना है… आखिर मैं चाचा हूं।
उसने भी वही कॉम्बिनेशन बनाया…और जैसे ही खाया उसका चेहरा बिगड़ गया।
“ऊऊऊ…”
पारो हंसते हंसते लोटपोट हो गई। कार्तिक भी हंस पड़ा।
मोहन बोला —
भाभी… ये बच्चा अभी से मुझे तंग कर रहा है।
संस्कृति हंसते हुए पेट पर हाथ रखकर बोली —
सुना… तुम्हारे चाचा शिकायत कर रहे हैं।
कमरे में जोरदार हंसी गूंज गई। उस रात चारों बहुत देर तक हंसते रहे…और उस छोटे से घर में एक नए आने वाले मेहमान की खुशी और भी बढ़ गई।