The Deathless and His Shadow - 2 Dewy Rose द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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The Deathless and His Shadow - 2


Ep 2: जो मौत को मुड़कर देखता है

अगले सात दिन आर्यन के लिए एक अजीब सी सपनों भरी दुनिया में गुजरे। वह छत वाली रात के बाद से बदल गया था, और सिर्फ उसकी सेहत ही नहीं, बल्कि कुछ और भी।

उसकी रिपोर्ट्स चमत्कारिक रूप से सुधर रही थीं। हीमोग्लोबिन जो पिछले छह महीने से गिर रहा था, अब सामान्य स्तर पर आ गया था। वह थकान जो उसे दोपहर में ही घेर लेती थी, अब गायब हो चुकी थी। न्यूरोलॉजी के डॉ. शर्मा ने अपने चश्मे को नाक पर ठीक करते हुए कहा था, "आर्यन, यह तो लगता है जैसे तुम्हारा शरीर खुद को ठीक कर रहा है। ऐसा मैंने पहले कभी नहीं देखा।"

पर आर्यन जानता था कि यह कोई चमत्कार नहीं था। यह उस छाया की देन थी। वह युवती जिसने उसे छुआ था... या छूने की कोशिश की थी।

वह हर रात छत पर जाने लगा। 3:07 बजे। उसकी घड़ी अब नियमित चल रही थी, पर वह उस समय का इंतजार करता। कभी-कभी उसे लगता कि हवा ठंडी हो जाती है। कभी लगता कि कोई पीछे से देख रहा है। पर वह युवती फिर कभी नहीं दिखी।

आज रात भी वह छत पर था। उसने अपनी जेब से एक छोटी सी नोटबुक निकाली, जिसमें उसने पिछले हफ्ते से अपने अजीब अनुभव लिखने शुरू किए थे।

दिन 1: छत पर वह दिखी। मेरी घड़ी रुक गई। मैंने ठंड महसूस की। बाद में असामान्य ऊर्जा।
दिन 3: सपने में लाल गुलाब देखा। बारिश में भीगा हुआ। किसी की याद दिलाता है... पर किसकी?
दिन 5: ऑपरेशन के दौरान अचानक एक ठंडी हवा का झोंका आया। मरीज की हार्ट रेट सामान्य हो गई। संयोग?
दिन 7: आज मेरे केबिन के फूल (लिली) अचानक मुरझा गए। दोपहर तक वे फिर से ताज़ा थे।

आर्यन ने पेन उठाया और लिखना शुरू किया: दिन 8: कल रात से मुझे एक धुन याद आ रही है। पुरानी लगती है...

तभी उसकी कलम हाथ से छूटकर नीचे गिर गई। वह झुका ही था कि उसकी नजर अपने बाएं हाथ पर पड़ी।

उसकी कलाई पर, जहाँ आमतौर पर घड़ी होती थी, अब एक अजीब सा निशान था। हल्का सा नीला, जैसे कोई रक्त वाहिका फट गई हो, पर आकार में... वह एक हाथ जैसा दिख रहा था। एक स्त्री का हाथ, जो उसकी कलाई को पकड़े हुए थी।

आर्यन ने अपनी कलाई को मोड़कर देखा। निशान गायब नहीं हुआ। उसने उसे रगड़ा। दर्द नहीं हुआ। यह तो जन्मजात निशान जैसा लग रहा था, पर वह जानता था कि कल तक यह वहाँ नहीं था।

"तुम हो न?" उसने हवा में कहा। "तुम मुझे छू रही हो, है न?"

कोई जवाब नहीं।

पर हवा और ठंडी हो गई। आर्यन ने अपनी सांसों को भाप बनकर उड़ते देखा, जून की रात में।

"मैं तुम्हें देख सकता हूँ," उसने दृढ़ता से कहा। "पिछले हफ्ते देखा था। दिखो। बात करो।"

एक क्षण के लिए कुछ नहीं हुआ। फिर, धीरे-धीरे, चाँदनी के ठीक सामने, हवा काँपने लगी। यह बिल्कुल वैसा ही था जैसे पहली रात हुआ था। एक धुंधली छाया, फिर आकृति, और अंततः...

वह युवती।

पर आज वह पहले से कहीं ज्यादा स्पष्ट थी। आर्यन उसके चेहरे के भाव देख सकता था, उदासी, उलझन, और एक अजीब सी जिज्ञासा।

"तुम हो," आर्यन ने फुसफुसाया।

युवती ने सिर हिलाया, हालाँकि आर्यन को यकीन नहीं था कि यह जवाब था या सिर्फ हवा का झोंका।

"तुम कौन हो?" आर्यन ने पूछा।

युवती के होंठ हिले, पर कोई आवाज नहीं निकली। उसने अपने गले पर हाथ रखा, और आर्यन को समझ आया, वह बोल नहीं सकती। या शायद उसकी आवाज उस तक नहीं पहुँचती।

"ठीक है," आर्यन ने कहा। "संकेतों से बात करेंगे। क्या तुम... तुम मौत हो?"

युवती ने झटके से सिर हिलाया, फिर तुरंत सिर हिलाकर 'न' कहा। उसने अपने हाथ उठाए, और उन पर वही नीली रोशनी दिखाई दी जो पहली रात दिखी थी।

"तुम आत्माएं ले जाती हो," आर्यन ने कहा, धीरे-धीरे समझ रहा था।

हाँ। युवती ने सिर हिलाया।

"और तुम मेरी आत्मा लेने आई थीं?"

हाँ।

"पर तुम ले नहीं पाईं। क्यों?"

इस बार युवती ने अपने कंधे उचकाए, पता नहीं। उसने आर्यन की ओर देखा, और फिर अपने हाथों की ओर, जहाँ वह नीली रोशनी फिर से जगमगा रही थी। उसने हाथ बढ़ाया, धीरे से, डरते हुए।

आर्यन ने अपना हाथ आगे बढ़ाया। "करो। कोशिश करो।"

युवती की उँगलियाँ आर्यन की हथेली के पास आईं। नीली रोशनी निकली, और जैसे ही वह आर्यन की त्वचा से टकराई, वह फिर से बिखर गई। पर इस बार, कुछ और हुआ।

आर्यन ने एक झटका महसूस किया। एक चमकती हुई छवि उसके दिमाग में कौंधी:

एक पुरानी हवेली। बारिश। कोई रो रहा है। एक लाल गुलाब जमीन पर पड़ा है...

और तभी, युवती पीछे हट गई, अपने सिर को पकड़े हुए। उसके चेहरे पर दर्द का भाव था। वही छवि उसे भी दिखी थी।

"तुम्हें भी दिखा?" आर्यन ने पूछा, साँस फूली हुई।

युवती ने हाँ में सिर हिलाया। उसकी आँखों में आँसू थे, या शायद चांदनी की चमक थी जो आँसू जैसी दिख रही थी।

"यह क्या है?" आर्यन ने पूछा। "यह हवेली कहाँ है? वह गुलाब... तुम्हारा है?"

युवती ने फिर से कंधे उचकाए। उसने अपने सिर पर हाथ रखा, फिर हिलाया, याद नहीं।

"तुम्हें याद नहीं? तुम कौन हो, यह भी नहीं याद?"

नहीं। एक दुख भरी मुस्कान। नहीं, कुछ नहीं याद।

आर्यन ने एक लंबी साँस ली। उसने महसूस किया कि उसकी कलाई जहाँ वह निशान था, वहाँ एक गर्मी फैल रही थी। "तुम्हारा नाम," उसने अचानक कहा। "तुम्हारा नाम मृया है।"

युवती की आँखें फैल गईं। उसने पीछे की ओर कदम रखा, हैरान।

"मुझे नहीं पता मैं यह कैसे जानता हूँ," आर्यन ने कहा। "पर जब तुमने मुझे छूने की कोशिश की, तो यह नाम मेरे दिमाग में आया। मृया।"

युवती, मृया, ने अपना हाथ अपने दिल पर रखा। उसके होंठ हिले: मृया।

"हाँ," आर्यन ने कहा। "मृया। और मैं हूँ आर्यन।"

मृया ने सिर हिलाया। वह जानती थी। उसने अपना हाथ दिखाया, जहाँ आर्यन का नाम और "अनिश्चित" लिखा हुआ था।

"अनिश्चित?" आर्यन ने पढ़ा। "इसका मतलब?"

मृया ने अपने कंधे उचकाए। उसने आर्यन की ओर इशारा किया, फिर अपने हाथ से मृत्यु का संकेत बनाया, और फिर सिर हिलाकर 'न' कहा।

"मेरी मृत्यु... अनिश्चित है?" आर्यन ने पूछा। "मतलब मैं नहीं मर सकता?"

मृया ने हाँ में सिर हिलाया, फिर ना में। उसने अपने सिर पर हाथ रखा, पता नहीं।

तभी, मृया अचानक चौंक गई। उसने पीछे मुड़कर देखा, जैसे कोई उसे बुला रहा हो। उसके चेहरे पर डर आ गया।

"क्या हुआ?" आर्यन ने पूछा।

मृया ने उसे चुप रहने का इशारा किया। वह फिर से धुंधली होने लगी। अपने जाने से पहले, उसने आर्यन की ओर देखा और अपनी उँगलियों से एक संकेत बनाया, तीन, शून्य, सात।

3:07.

और फिर वह गायब हो गई।

आर्यन अकेला खड़ा रहा, उसके मन में अनगिनत सवाल उमड़-घुमड़ रहे थे। पर एक बात स्पष्ट थी, वह अब अकेला नहीं था। और वह जो बीमारी उसे मार रही थी, शायद वह बीमारी थी ही नहीं।

शायद यह एक श्राप था।

या शायद एक वरदान।

•••••

उसी समय, अस्पताल से कई मील दूर, एक पुराने कब्रिस्तान के बीचों-बीच, एक और 'दूत' प्रकट हुआ। वह मृया से कहीं ज्यादा लंबा था, और उसका रूप इतना धुंधला था कि केवल उसकी आँखें दिखाई दे रही थीं, जलते हुए कोयलों जैसी लाल।

"मृया," उसकी आवाज़ एक सर्प की फुफकार जैसी थी। "तुमने नियम तोड़ा है।"

मृया, जो अब कब्रिस्तान में एक पुरानी कब्र के पास खड़ी थी, उसने डर से सिर झुका लिया।

"एक इंसान से बातचीत," लाल आँखों वाले दूत ने कहा। उसका नाम 'काल' था, और वह इस क्षेत्र के सभी दूतों का प्रमुख था। "तुम्हें पता है सजा क्या है?"

मृया ने हाँ में सिर हिलाया। सजा थी, शाश्वत विस्मृति। वह जो कुछ भी थी, वह भी खत्म हो जाएगी।

"फिर भी तुमने किया," काल ने कहा। "यह आर्यन वर्मा... उसके बारे में क्या खास है?"

मृया ने अपना सिर उठाया। उसने अपने हाथ दिखाए, जहाँ "अनिश्चित" लिखा था।

काल की लाल आँखें चौड़ी हो गईं। "अनिश्चित? यह असंभव है। हर जीव की एक समय सीमा होती है।"

मृया ने अपने कंधे उचकाए। उसने अपनी यादों के टुकड़ों के बारे में सोचा, लाल गुलाब, पुरानी हवेली। पर वह काल को यह नहीं बता सकती थी। उसे पता था कि अगर काल को इसके बारे में पता चला, तो वह आर्यन को खत्म कर देगा।

"मुझे उसे देखना है," काल ने कहा। "कल रात। अगर तुम्हारी बात सच है, तो हमें उसे विशेष निगरानी में रखना होगा। अगर झूठ है... तो तुम्हें अपनी गलती का अहसास हो जाएगा।"

मृया ने डर से सिर हिलाया।

काल गायब हो गया, पर उसकी चेतावनी हवा में लटकी रही।

मृया ने आर्यन की ओर देखा, जहाँ अस्पताल की रोशनियाँ दूर टिमटिमा रही थीं। उसने अपने दिल पर हाथ रखा। वहाँ, जहाँ कुछ नहीं होना चाहिए था, अब एक धड़कन सी महसूस हो रही थी।

एक इंसानी धड़कन।

वह समझ गई थी, आर्यन उसे याद दिला रहा था। उसकी यादों को वापस ला रहा था। और अगर काल को इसका पता चल गया, तो वह दोनों को खत्म कर देगा।

उसे चुनना था, अपने कर्तव्य को निभाना, या उस इंसान को बचाना जो उसे वापस जीवित महसूस करवा रहा था।

रात के अंधेरे में, मृया ने फैसला किया।

वह आर्यन को चेतावनी देगी।

भले ही इसकी कीमत उसे अपने अस्तित्व को खतरे में डालकर चुकानी पड़े।