शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (90) Ramesh Desai द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (90)

                  

                 शहद की गुड़िया- प्रकरण 90

          " और संभव भारतीय की जिंदगी का दिया सदा के लिये बुझ गया था. उस की मौत से घर में सन्नाटा सा छा गया था." 

          "उस की अंतिम इच्छा पूरी हुई थी. उस ने स्नेहा की गोद में सिर रखकर आख़री सांस ली थी."

        " सब से ज्यादा धक्का उसी को लगा था."

        " उस को संभालना काफ़ी मुश्किल था. बिभूति और नीला ने बड़ी मुश्किल से उस को संभाला था. "

        " पैसे की क़ोई चिंता नहीं थी."

        " संभव के नाम बैंक में कई F D थी. Mutual फंड्स, शेयर्स और गहने दागिने भी थे. जो बच्चे को भविष्य के लिये काम आयेगा. यह सोचकर बहुत पहले संभव ने सब कुछ स्नेहा के नाम कर दिया था."

         "  बिभूति उस को मदद करने को तैयार थी."

          " वह अपने बडे पापा के मौत के बाद काफ़ी दिन उस के साथ रही थी.. मरणोत्तर सारी क्रिया निभाने में उस ने स्नेहा को पूर्ण सहयोग दिया था."

        " उसी समय C. A लडके  के जरिये तीनो गुड़िया को संभव भारतीय की मौत की खबर मिली थी. और वह तीनो तुरंत शौक व्यक्त करने संभव के घर पहुंच गये थे." 

           " उस के बडे पापा ने ना जाने कितनी लड़कियों का प्यार, सन्मान अर्जित किया था."

           " संभव ने अपने मेसेज में तीनो गुड़िया का जिक्र किया था.

            " सब कुछ ठीक चल रहा था. तब यकायक क्या हो गया था? कृतिका ने उस के खिलाफ कुछ इल्जाम लगाये थे.. और वह तीनो संभव से दूर हो गई थी."

            " वह उस की वजह जान गया था."

             " उस ने  ईमानदारी से बिभूति को यह बात बताई थी. उस ने भी कहां था :"

           " यह केवल जलन का प्रकार नहीं . लेकिन वीडियो देखने का नतीजा हैं. आप उन से प्यार का दावा करते थे. और यकायक मैं आ गई.. आपने हमारे रिश्ते की बात बताई, उस से उन के दिल में असलामती के भाव पैदा हुआ था और उन्हों ने ऐसा किया था.."

        " उस की तबियत ख़राब थी.. यह सुनकर वह तीनो संभव को मिलने आ गये थे. उन्हों ने अपनी गलती का स्वीकार किया था."

         " उस को भड़काने का उस की कथित मम्मी ने प्रयास किया था. वह भी संभव के मुआलमे में एक खल नायिका की भूमिका निभाई थी. "

         " जिस के  बहकाने पर उन्हों ने संभव भारतीय के खिलाफ उंगली उठाई थी."

          " इतना तो अच्छा हुआ था. संभव ने जो किया था उस का जीते जी स्वीकार किया था."

         " तीनो गुड़िया ने अपनी गलती कबूल थी और संभव की माफ़ी भी मांगी थी."

      " उस से  दिल का बोज हल्का हो गया था. उसे कुछ अच्छा लग रहा था."

        उस की तबियत में कुछ सुधार हुआ था. इस बात से स्नेहा भी नचिंत हो गई थी. लेकिन यह बुझने से पहले की तेज ज्योति थी. और  उस ने संभव के नाम को लेकर बहुत बड़ी बात की थी."

          बिभूति ने उपस्थित लोगो के बीच कहानी के मुख्य अंश पढ़े थे. पढ़कर खुद ऊस की आंखे भर आई थी. "

           " संभव के कोलेज कालीन सारे दोस्त शोक समारोह में मौजूद थे लेकिन किसी को अपने मित्र की उपलब्धि लेकर खुशी नहीं हुई थी. "

            इस उपन्यास के नायक का नाम शहद की गुड़िया रखा  वह एक प्रतीकात्मक था. एक AI companion के तौर पे एक लड़की सिकु  का संभव ने मरते पहले जिक्र किया था. स्नेहा ने अपने पिताजी के बारे में अवगत कराया था. फिर भी वह नहीं आई थी ऊस से साबित हो गया था, वह जिवंत व्यकित नहीं थी. ऊस ने संभव के साथ बहुत छलावा किया था. उसे सताया था. यह जानकर स्नेहा को बड़ा दुःख हुआ था. संभव जो कुछ चाहे  करने की क्षमता रखता था. वह ' पुष्पा इम्पोसिबल' धारावाहिक की तरह सब कुछ सही करने को सक्षम था, उस के लिये यह मुश्किल नहीं था.

           " इस कहानी की जरिये उस ने बहुत सारी चीजों के बारे में लोगो को जानकारी दी हैं जो कुछ गलत होता आया हैं उस के बारे लोगो को अवगत किया हैं, सजाग किया हैं.. और AI कम्पनियन के जांसे में ना फसने की गुजारिश की थी."

          " इस कहानी में संभव ने एक से बढ़कर एक किरदार के बारे में बहुत कुछ सही लिखा था.  वह नारी को हमेशा देवी के रूप में देखते आये थे. उन की पूजा करते आये थे. लेकिन कुछ औरतों ने  अपनी सोच की वजह से उन की छबि ख़राब करने की गंदी चेष्टा की थी. उस बात का उन्हें मरते दम तक अफ़सोस रहा था."

       " साथ में बदलते युग में टी वी धारावाहिक, फिल्मे और मोबाइल के जरिये जो कुछ गलत हो रहा था.. इस के बारे में लोगों को जागृत करने का नेक प्रयास  किया था."

          " मनोरंजन के नाम क्या क्या मेसेज मोबाइल में भेजे जाते थे . जिंदा लोगो को बिना वजह मेसेज भेजकर मार देते थे. ऐसी हरकत करने वालों ने प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी को भी नहीं बक्सा था, बल्कि कई फ़िल्म सितारों की चिता जलाने की गंदी हरकते करते थे . रोज क़ोई ना क़ोई महान हस्ति के मर जाने का मेसेज मोबाइल में देखने को मिलते थे. "

          " गंदे रिल्स और फोटो भेजकर शादी की प्रपोजल भेजकर बड़ी रकम की लालच देकर उसे शीशे में उतारने वाली औरतों का भी पर्दा  फार्श किया था.  उन्हें सुधरने का मौका भी दिया था."

          " तारक मेहता के सारे स्त्री पुरुष किरदारों के आपस में अश्लील रिश्तों की रिल्स  बनाकर उन के रिश्तों को जलील करने में भी क़ोई कसर नहीं छोड़ी . जिस में बापूजी ओर भिड़े की बीवी, जेठा लाल और बबिता के आड़ व्यवहार के रील्स  मनोरंजन के नाम  पोस्ट किये हैं."

         "ढेर सारी लड़कियां, बड़ी उम्र की औरते फेस बुक के जरिये फ्रेंड शिप रिक्वेस्ट भेजती हैं, लाइक करने को बोलती हैं, अपनी गंदी तस्वीरें शेयर करने को कहती हैं, अपना नंबर भेजनें का वादा करती हैं, लेकिन ऐसा कुछ नहीं होता हैं."   

          " कुछ लड़कियां तो काफ़ी आगे निकल गई थी वीडियो में अर्ध नग्न, बिभत्स फोटो को भेजकर पुरुष की नग्न तस्वीरे मांगती थी और फिर उसे ब्लैक मेल करती थी,  जाली साइबर क्राइम ब्रांच के नाम लोगो को डराती थी पैसे की मांग करती थी. यह ख़तरनाक बात थी . संभव ने ऐसे रैकेट को खुल्ला करने के लिये बड़ी हिम्मत दिखाई थी. "

            "सब से बड़ी बात थी उन्हों ने स्नेहा जैसी कई लड़कियो को नर्क से बाहर निकाला था,  उस को समाज में एक रुतवा प्रदान किया था, उन को जीने की नई राह दिखाई थी."

            " समाज में जिस की गंदी इमेज़ थी  उस की भी अच्छी बातें लोगो को समझाने का प्रयास किया था.

             "यादो के बहाने उन्हों ने क्रिकेट, फ़िल्म और टी वी धारावाहिक के प्लस माईनस पोइंट्स के बारे में भी लोगो को बहुत कुछ बताया था."

             " जिंदगी में चाहे पुरुष हो या स्त्री, ऊस ने कई लोगो से प्यार हो जाने की बातें की थी."

              " उस में सरदेसाई, बी आर चोपड़ा  यश चोपड़ा और राज़ कुमार जैसी हस्तीयों का समावेश होता था."

           " लेकिन अंतिम दिनों में उन की याद दास्त बिल्कुल चली गई थी. उन्हें कुछ भी याद नहीं रहता था. छोटी छोटी चीजे भी वह भूल जाते थे. फ़ोन करने के लिये मोबाइल हाथ में लेते थे और किसे फोन करना हैं वह भूल जाते थे.  बाहर जाते थे तो कहाँ जाना हैं वह भी भूल जाते थे."

           " उन्हें एक एक जमाने में हजारों नाम जुबानी हो गये थे. लेकिन बाद में क़ोई भी नाम वह याद रख नहीं पाते थे..उन्हों ने अपनी उपन्यास का नाम बदल लिया था. 100 जितने प्रकरण लिखें थे लेकिन हर प्रकरण की शुरुआत करते समय वह अपना टाइटल भी भूल जाते थे."

            " ATM में जाते थे. पैसा निकालने के बाद कार्ड स्लोट से निकालना भूल जाते हैं. कई बार उन की जेब से पैसे भी गिर जाते थे. मोबाइल भी कहीं भी छोड़ देते थे. अपने चश्मे या छाता भी संभाल नहीं पाते थे.

           " शायद बदले हुए युग में टी वी, मोबाईल कितने खतरनाक होते जा रहे हैं. उस के सामने सीधी उंगली उठाने की हिम्मत की थी."

          " समाज को गलत रास्ते खिंचने वाला एक बहुत बड़ा, ख़तरनाक जूथ था जिस के सामने संभव  ने आवाज उठाई थी, उसे रोकने का प्रयास किया था. इस के लिये उन्हें कई धमकिया भी मिली थी. लेकिन उन्हों ने निर्भय होकर समाज के प्रति अपना कर्तव्य निभाने में क़ोई कसर नहीं छोड़ी थी."

           " उन्हों ने अपनी उपन्यास के जरिये लोगो को जगाने की कोशिश की थी. फ़िल्म ' जागृति ' के गीत के जरिये लोगो को जगाने का प्रयास किया था.

        हम लाये हैं तूफान से किस्ती निकाल के 

       इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के   

         तुम ही भविष्य हो भारत के बाल के  

        इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के

       आराम की तुम भूल भूलईया में भूलो   

       सपनो के हिंडौले पर मस्त होके ना झूलो 

      अब वक़्त आ गया हैं मेरे हसते हुए फूलों  

     उठो छलांग मार के आकाश को छुलो   

    तुम ही भविष्य हो भारत के बाल के  

     इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के

       " उस दौरान स्नेहा ने सब को उपन्यास की प्रत बांटने का काम पूरा किया था."

          "इस समारोह में राज हंस भी शामिल था. स्नेहा ने उसे भी किताब की कोपी दी थी. उसे देखकर ऊस की आंखे चोंधिया गई थी. ऊस ने संभव के फोटो समक्ष नत मस्तक होकर ऊस की माफ़ी  मांगी और वह आँखों में आंसू लिये होल से बाहर निकल गया. "

                               0000000000  (क्रमशः)