तेरे मेरे दरमियान - 96 CHIRANJIT TEWARY द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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तेरे मेरे दरमियान - 96

आदित्य विकास को थपथपाते हूए कहता है --

आदित्य :- Good , अब जाओ । जानवी तुम्हारा इंतजार कर रही है ।

सभी वहां से चला जाता है , पुलिस भी विकास को छोड़ देता है और वहां से सभी चला जाता है । 

इधर जानवी विकास के लिए बहुत परेशान थी , तभी विकास वहां पर आ जाता है , विकास को दैखकर जानवी बहुत खुश हो जाती है , जानवी विकास के पास जाती है और कहती है --

जानवी :- विकास ... तुम , तुम आ गए ? कहां चले गए थे तुम ?

विकास :- जानवी वो मैं ..

तभी वहां पर अशोक आ जाता है , विकास को दैखकर अशोक गुस्से से लाल हो जाता है और विकास का कॉलर पकड़कर अशोक कहता है --

अशोक :- हरामजादे ... तुम ने यहां आने की हिम्मत कैसे की ?

अशोक के गुस्से मे दैखकर जानवी हैरान हो जाती है , तब जानवी अपने पापा अशोक से कहती है --

जानवी :- पापा .. आप ये क्या कर रहे हो ?

अशोक :- इसे मैं जिंदा नही छोड़ूगां , इसने यहां पर आने की हिम्मत कैसे की ?

जानवी अपने पापा से चिल्लाकर कहती है --

जानवी :- पापा ... आप हमेशा से ही विकास को गलत समझते आए है , पता नही आपको विकास से क्या प्रॉब्लम है , आखिर क्यों आप विकास के साथ ऐसा करते हो ? 

अशोक :- मैं इसके साथ गलत करता हूँ या ये तुम्हारे साथ गलत करता है और मैं उसे रोकने की कोशिश करता हूँ , पर तुम इस विकास पर अंधे की तरह भरोसा करती है । और आदित्य को अपना दुश्मन समझती हो । क्या हो गया है तुम्हें जानवी , तुम्हें सच दिखाई क्यों नही पड़ता है । 

जानवी :- मुझे सब दिखाई पड़ता है पापा । पर लगता है , अब समय आ गया है , के मैं यहां से अब चली जाउ , क्योकी पता नही पापा आप मेरी खुशी क्यों नही चाहते , आप हमेशा से मेरे और विकास के बिच दरार पैदा करने की कोशिश की , और आदित्य को अच्छा बनाने की कोशिश की । ऐसा आप क्यों कर रहे हो पापा ? जब आप जानते हो के मैं विकास से कितना प्यार करती हूँ , तब भी आप ऐसा करते हो , आपको मेरी खुशी क्यों नही दिखती है पापा ?

जानवी के ऐसा कहने पर अशोक वही पर स्तब्ध होकर खड़ा हो गया , जानवी कभी उससे ऐसा कुछ कहेगी ये उसने सौचा भी नही था । अशोक का मन भारी हो गया । अशोक जानवी से अपने भारी मन से कहता है --

अशोक :- बेटा आज तुने मेरी आंखे खोल दी । मैं सोचता रहा के मैं एक अच्छा बाप हूँ और जो कुछ भी कर रहा हूँ उसे तुम समझोगी । पर नही मैं गलत था , क्योंकी तुम्हें लगता है कै मैं तुम्हारी खुशीयों के बीच आ रहा हूँ । बेटा एक बाप कभी भी अपनी बेटी के खुशीयों के आड़े नही आता है , एक बाप हमेशा यही चाहता है के उसका बेटी एक ऐसे इंसान के साथ रहे जो उसे उसके बाप से भी ज्यादा प्यार करे और उसका ख्याल रखे और मैने बस यही करने की कोशिश की है । पर अफसोस के मैं कभी अच्छा बाप नही बन पाया । ठिक ही कहा है तुमने बेटा , के मैं ... तुम दोनो के बीच दरार पैदा कर रहा हूँ । बाप हूँ ना ... आदत हो गई है मेरी ये दरार पैदा करने की , तुम्हे खुश देकर मुझे दुख होता है ना , जाओ । तुमने जब सैच ही लिया है के मैं ही तुम्हारा दुश्मन हूँ , तो जाओ । जहां जाना है तुम वहां पर जाओ । ये अशोक आज थक चुका है । हार गया है एक बाप अपने बेटी से ।

अपने पापा से ऐसा सुनकर जानवी को बहुत दुख होता है पर जानवी विकास के लिए गलत सुन नही पा रही थी , तभी विकास जानवी से कहता है --

विकास :- जानवी ... अंकल सही बोल रहे है ।

विकास के ऐसा कहने पर कुछ दैर के लिए सभी चुप हो जाते है , अशोक विकास के सच्चाई कबुलने पर चोंक गया था और जानवी हैरान थी , जानवी विकास को बस दैखे जा रही थी । 

विकास फिर से कहता है ---

विकास :- हां ... जानवी , तुम्हारे पापा सही बोल रहे है , मैं ... मैं अच्छा इंसान नही हूँ । मैं तुम्हारे लायक ही नही हूँ ।

जानवी को लगता है के विकास ये सब थक हारते बोल रहा है , जानवी विकास के पास जाकर उसे समझाकर कहती है --

जानवी :- विकास तुम्हें घबराने की कोई जरुरत नही है , तुम क्यों ऐसा बोल रहे हो ?

तब अशोक जानवी से गुस्से से कहता है --

अशोक :- कैसे पागलो जैसे बात करती हो , जब वो खुद तुम्हें सच बोल रहा है , पर फिर भी तुम्हें सच दिखाई नही दे रहा है ? अंधी हो गई हो तुम जानवी । 

जानवी :- पापा ...

अशोक :- ठिक है , मेरे पास सबूत है । 

इतना बोलकर अशोक जानवी को विकास का फोन निकाल कर देता है और कहता है ---

अशोक :- ये लो , ये विकास का फोन है , इसे कहो के इसका लॉक खोलकर दे , इसके अंदर जो कुछ भी है शायद तुम्हें उससे मेरे बातो पर भरोसा हो जाए ।

अशोक विकास के फोन को जानवी के हाथो मे दे देता है , जानवी फोन को लेकर विकास की और हैरानी से दैखती है और फिर अशोक से कहती है --

जानवी :- पापा ... ये फोन आपके पास कैसे आया ?

अशोक :- ये बात तुम... विकास से पुछ लो ।

जानवी :- विकास ये सब क्या है , मैने तुम्हें कल से फोन लगाने की कोशिश कर रही हूँ और तुम्हारा फोन पापा के पास है । क्या है इस फोन पर ?

विकास घबराता नही है , क्योकी वो खुद सारी सच्चाई जानवी को बताने के लिए आया था , विकास समझ जाता है के फोन पर वो विडियो रिकॉर्डिंग होगा , विकास जानवी से कहता है --

विकास :- इसमे मेरी सच्चाई है जानवी । 

विकास जानवी से अपना फोन ले लेता है और कहता है --

विकास :- जानवी ... इसमे कल रात का विडियो है ।

जानवी ( हैरानी से ) :- कल रात का विडियो? 

विकास :- हां जानवी ... आज मैं तुमसे कुछ नही छुपाउगां , मेरी आखों पर बंधी लालच की पट्टी अब उतर चुकी है जानवी , आदित्य ने मुझे सही रास्ता दिखाया है , आज मैं तुम्हें सारी सच्चाई बताने के लिए ही आया हूँ । पता नही सच जानने के बाद तुम मुझ माफ करोगी या नही , पर जानवी मेरी आंखे अब खुल चुकी है , मैं बदल गया हूँ और हो सके तो मुझे माफ कर देना । 

इतना बोलने के बाद विकास जानवी के हाथो से अपना फोन ले लेता है और विकास काँपते हाथों से फोन अनलॉक करता है।

कमरे में एक अजीब सा सन्नाटा छा जाता है…जानवी की धड़कन तेज हो जाती है। लॉक खोलने के बाद कल रात वाली विडियो को विकास प्ले करता है और जानवी को दे देता है ।

मोबाइल स्क्रीन पर वही रात दिखाई देती है…विकास का असली चेहरा…उसकी बातें…उसकी साजिश…जानवी को नशा देने की योजना…काली से मिलकर आदित्य को खत्म करने की बात…सब कुछ। वीडियो चल रहा था…पर जानवी की दुनिया रुक चुकी थी।
उसकी आँखें स्क्रीन पर थीं…पर विश्वास टूटकर जमीन पर बिखर चुका था। उसके हाथ काँपने लगे…

विडियो मे जानवी दैखती है विकास उसके नशे मे होने का फायदा उठा रहा था के तभी वहां पर आदित्य आ जाता है और विकास को जानवी के साथ गलत करने की कोशिश पर उसे मारता है तो विकास वहां से भाग जाता है । विकास के जाने के बाद आदित्य जानवी की और प्यार से दैखता है उसके बालों को सहलाता है , और जानवी से कहता है --

आदित्य :- जानवी , मेरे रहते तुम्हें कोई छु भी नही सकता । 

आदित्य जानवी को अपने गौद मे उठा लेता है और फिर विकास के फोन को ले लेता है , विडियो मे आदित्य का चेहरा सामने आता है और विडियो बंद हो जाती है ।


ये दैखकर जानवी हैरान थी उसका भरोसा उसका प्यार सब बिखर चुका था , आदित्य का प्यार दैखकर जानवी फुट- फूट कर रोने लगती है , जिसे जानवी सबसे गलत समझी वही उसका प्यार निकला । जानवी के आंखो के सामने कल रात वाली सारी चीजें याद आने लगी थी , आदित्य का उसके लिए खाना बनाना , होटल से घर चक लेकर आना , उसे कमरो मे प्यार से सुलाना । ये सब जानवी के आंखो के सामने घुमने लगता है , जानवी के हाथो से फोन लगभग गिर ही गया था ।

जानवी (टूटी आवाज़ में) :- ये… ये झूठ है… ये… एडिट किया हुआ है… ऐसा नहीं हो सकता…

अशोक कुछ नहीं बोले और विकास सिर झुका कर खड़ा रहा।
वीडियो खत्म होता है वहां पर सिर्फ सन्नाटा था इतना गहरा… कि जैसे समय भी डर गया हो।
जानवी धीरे-धीरे विकास की तरफ देखती है। उसकी आँखों में अब प्यार नहीं…सवाल नहीं… सिर्फ टूटा हुआ भरोसा था।

जानवी :- बस एक बार… बस एक बार कह दो…कि ये सब झूठ है…
मैं मान लूँगी…कह दो विकास…

जानवी विकास ता कॉलर पकड़ के विकास से पूछती है पर विकास अपना सिर झुकाए वही पर खड़ा था , विकास की आँखों से आँसू गिरते हैं। वह जानवी के सामने घुटनों पर बैठ जाता है और जानवी से सारी सच्चाई कहता है --

विकास :- सब… सच है जानवी…मैंने तुम्हें इस्तेमाल करना चाहा…तुमसे शादी करके तुम्हारी कंपनी लेना चाहता था…और… आदित्य…वो हमेशा तुम्हें बचाता रहा…।

इतना सुनकर जानवी पीछे हट जाती है जैसे किसी ने उसे छू लिया हो।

जानवी (सिसकते हुए) :- आदित्य…वो… उस रात…वो मुझे बचा रहा था…?

तभी अशोक जानवी के पास आता है और उससे कहता है --
अशोक :- हाँ बेटा…जिसे तुम गलत समझती रही…वो तुम्हारी ढाल बना रहा। हर कदम हर मोड़ पर उसने तुम्हें संभाला । 

जानवी :- तो फिर वो किडनेपिंग, उस रात गुडें, रेस्टोरेंट मे मुझे बचाना, वो सब ..?

विकास जानवी से कहता है --

विकास :- जानवी ... वो सब मैने कराया था । जब मेरी कंपनी डुबने वाली थी और तुम्हारी शादी आदित्य से बो चुकी थी तो मुझे और कुछ समझ मे नही आ रहा था । मेरे हाथ से सारी दौलत दुर जा रही थी , तब मैने और काली ने मिलकर तुम्हें किडनेप कराया ताकी तुम्हें डरा कर तुमसे तुम्हारी सारी दौलत ले सकु ।

जानवी हैरानी से --

जानवी: - और वो 50 लाख.... जो तुमने मेरे रिहाई के लिए दिए थे ?

विकास :- वो पैसे मैने तुम्हें छुड़ाने के लिए नही , तुम्हें किडनेप करने के लिए दिया था । मैने तो सौचा था के तुम्हें सारी सच्चाई का पता चल जाएगा । पर उससे पहले ही तुमने आदित्य के उपर सारा दोष डाल दिया और मुझे बचा लिया । जानवी तुमने हर बार आदित्य को गलत समझा , ये मैने नही किया , और ना ही ये सब तुम्हें सोचने पर मजबुर किया । पर तुमने हर बार उसे ही गलत समझा ।

To be continue.....902