तेरे मेरे दरमियान - 95 CHIRANJIT TEWARY द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

तेरे मेरे दरमियान - 95

काली ने धीरे से कहा।

काली :- मेरा क्या है? मैं सज़ा काट लूँगा…फिर नई ज़िंदगी शुरू कर लूँगा।

उसने विकास की तरफ सीधा देखा—

काली :- पर तू…तेरी दुनिया यहीं खत्म होगी।

ये सुनकर विकास का गुस्सा फूट पड़ा।

विकास :- तूने मुझे बर्बाद कर दिया, काली!

वो चिल्लाया।
 विकास :- तू चाहता तो मुझे रोक सकता था! तू चाहता तो ये सब नहीं होता! जब तुझे पता था तो बोलना था ना काली ।

काली :- क्या करता बोलके , बता .. तु क्या कर लेता , तुने मुझे फंसा के खुद बचना चाहा , अरे मैने तेरा हर काम किया , जब भी तुने कहा बिना सोचे समझे तेरा काम किया , तेरी कंपनी मे आये हर मुश्किल को मैने दुर किया , पर जब मैं मुश्किल मे था वो भी तेरी वजह से तो तुने क्या किया , मुझे. मरने छोड़ दिया ?

विकास: - अब हम क्या करें , कुछ तो सौचो । कुछ तो रास्ता जरुर होगा ।

तभी तभी पीछे से एक शांत, मगर भारी आवाज़ आई --

“नहीं, विकास…" ये सब उसी दिन तय हो गया था…जब तुमने गलत रास्ता चुना।

विकास और काली दोनों ने पलटकर देखा , आदित्य दरवाज़े के पास खड़ा था। उसका चेहरा सख्त था, लेकिन आँखों में गुस्से से ज़्यादा
निराशा थी।

आदित्य फिर कहता है --

आदित्य :- किसी को बर्बाद करने की शुरुआत हमेशा आदमी खुद से करता है,

आदित्य ने कहा।

आदित्य :- बाकी लोग तो सिर्फ सच सामने लाते हैं। तुम दोनो ने मिलकर जानवी को धोका दिया , विकास ने उसके साथ प्यार का नाटक किया ताकी उसकी दौलत को पा सके । तुम बहुत बेवकुफ हो विकास , जानवी जैसी लड़की को धोका दिया तुमने , अरे वो तुमसे प्यार करती है और तुमने उसके प्यार का गलत फायदा उठाया ?

कमरे में सन्नाटा फैल गया।
तभी दूर से पुलिस की गाड़ियों की आवाज़ अब साफ़ सुनाई दे रही थी। विकास की आँखों में अब गुस्सा नहीं था सिर्फ एक सवाल था क्या सच में सब खत्म हो चुका है? विकास आदित्य से कहता है --

विकास :- मुझे अब समझ मे आ गया है के मैं कितना गलत था , जिसने मुझसे प्यार किया मैने उसे ही धोका दिया । उसके साथ गलत किया । आदित्य .. हो सके तो मुझे माफ कर देना । मै अपने आपको पुलिस के हवाले तर दूगां और सब जुर्म कबुल कर लुगां । 

काली भी आदित्य के के पास आता है और हाथ जौड़कर कहता है --

काली :- आदित्य सर ... मुझे भी माफ कर दिजिए, मुझे नही पता था के आप कौन हो , मुझसे गलती हो गई , मैं भी अपने आपको पुलिस के हवाले कर दूगां और अपना जुर्म कबूल कर लूगां ।

आदित्य काली के पास आता है और उससे कहता है --

आदित्य :- मुझे खुशी है के तुम दोनो को अपने किये पर पछतावा है , ये जुर्म की दुनिया मे कुछ नही है सिवाय तकलीफ के । 

काली :- क्या करु भाई .. मैं भी एक अच्छा इंसान बनना चाहता था , मेकी भी फैमिली है भाई, और उसे सब खुशी देना चाहता था , पर मैं एक अनपढ़ हूँ , और एक अनपड़ को कौन काम देगा भाई । जहां पर भी गया काम मांगने वहां से मुझे जिल्लत और धक्के मारके बाहर निकाला गया । मेरा कसुर क्या था भाई के मैं एक गरीब हूँ बस ... एक गरीब को ये समाज अच्छा इंसान नही समझता है भाई , उसे एक नाली का कीड़ा मानता है । बस तब से भाई , मैं इस रास्ते पर आ गया ।

आदित्य काली के कंधे पर हाथ रखता है ।

काली :- भाई , मैं तो अब अपने आपको पुलिस से हवाले कर दूगां पर मेरा फैमिली का क्या होगा ? मेरी दौ बेटीयां है भाई , मेरी बीवी है और उन सबको ये पता नही है के मैं क्या करता हूँ । अगर मेरी बीवी को ये पता चला के मैं क्या हूँ तो मर जाएगी भाई ।

आदित्य काली के कंधे पर हाथ रखता है और कहता है --

आदित्य :- दैखो काली , मैं तुम्हें इन सबके लिए तो बचा सकता हूँ , पर तुमने इससे पहले भी बहुत सारे जुर्म किये है । 

काली :- मैं समझ गया सर ... एक दिन सबको किये की सजा मिलकर ही रहता है ।

तभी वहां पर इंस्पेक्टर भी पहूँच जाता है , इंस्पेक्टर को दैखकर काली भागता नही है , वही पर खड़ा रहता है और विकास पुलिस को दैखकर घबरा जाता है । 

काली :- आईए इंस्पेक्टर सर ... लिजिए अरेस्ट किजिये मुझे । अब मैं कही नही भागने वाला । मैं खुद को सरेंडर करता हूँ ।

काली अपना किया सारा जुर्म स्वीकारता है , तब आदित्य इंस्पेक्टर से कहता है --

आदित्य :- इंस्पेक्टर , काली अब बदलना चाहता है , तो इसिलिए मैं अपने से जुड़े सारे कंम्पेलन वापस लेता हूँ । जो कुछ भी आज तक काली ने मेरे या जानवी के साथ किया है , वो सब कंम्पलेन वापस लेता हूँ , ताकी इसकी सजा कम हो । 

आदित्य से इतना सुनकर काली की आंखे छलकने लगता है , तब इंस्पेक्टर कहता है --

इंस्पेक्टर: - पर आदित्य सर , अगर आप कम्पलेन वापस लेगें तो विकास भी छुट जाएगा।

आदित्य एक गहरी सांस लेता है और कहता है --

आदित्य :- कोई बात नही सर , काली के किस्मत का फायदा ये विकास भी उठा लेगा । और वैसे भी ...मैं जानवी के नजरो मे और विलेन बनना नही चाहता । आप बस इतना किजिये को काली के घर वालो को इसका जेल जाने का पता ना चले और इसकी सजा कम से कम हो ।

इंस्पेक्टर: - पर सर आप इन लोगो को क्यों माफ करना चाहते हो , इन्होने जो आपके साथ किया है उसके लिए इन दोनो को सजा मिलनी ही चाहिए ।

काली :- हां.. आदित्य सर .. आप दया मत दिखाओ , और वैसे भी , अगर मैं जेल चला गया तो मेरे परिवार को पता चलना ही है क्योकी जब मैं घर नही जाउगां और पैसे नही भैजुगां तो वो लोग तो ऐसे ही भुख से मर जाएगें । हमपर दया मत करो सर ...

इतना बोलकर काली रोने लगता है , तब आदित्य काली के पास जाता है और कहता है --

आदित्य :- अभी तुमने ही तो कहा था ना , को जब तुम अच्छे बनके कमाना चाहते थे तब लोग तुम्हों काम नही दिया और फिर तुम्हें मजबुरी मे ये रास्ता चुनना पड़ा । तो फिर अब जब तुम सुधरना चाहते हो तो क्यों ना तुम्हें मौका दिया जाए । तुम अपने परिवार की चितां मत करो । उन सबसे मैं बोल दूगां के तुम मेरी कंपनी मे काम करते हो और काम के सिलसिले मे बाहर गए हो , जब तक तुम जेल के अंदर रहोगे मैं तुम्हारे परिवार को हर महिना पैसा भेजता रहूगां और जब तुम बाहर आओगे तब तुम मेरी कंपनी ज्वाइन कर लेना ।

आदित्य से इतना सुनकर काली उसके पैरो पर गिर जाता है और रेने लगता है --

काली :- आपको मेरी वजह से कितना दुख पहूँचा , फिर आप मेरे लिए इतना सौच रहे हो , आप मेरे लिए भगवान हो । मैं वादा करता हूँ , आज से अभी से ये काली कोई बुरा काम नही करेगा और हमेशा आपका गुलाम रहेगा ।

आदित्य काली को पकड़कर उठाता है और कहता है --

आदित्य :- नही काली .. तुम मेरा गुलाम नही , मेरा कंपनी का हिस्सा बनकर रहना । 

विकास ये सब दैखकर उसे भी पछतावा हो रहा था । क्योंकी उसने आदित्य के साथ जो चाले चली , आदित्य के साथ जो बुरा किया , फिर आदित्य ने उसे बचाया , विकास को अपने किये पर पछतावा हो रहा था , विकास आदित्य के पास आता है और कहता है --

विकास :- आदित्य .. मुझे माफ कर दो , मैं तुम्हारा गुनेहगार हूँ , मैने तुम्हें और जानवी को अलग किया , काली के साथ मिलकर मारना चाहा , मुझे लालच आ गई थी आदित्य , मोरी कंपनी लॉस मो चल रही थी और दिवालिया होने वाली थी , सारे इंवेस्टर ने हाथ खड़े कर दिये थे , तब मैने जानवी की दौलत को पाना चाहा ताकी उससे शादी करके मैं इसकी कंपनी का मालिक बन जाउ ।

विकास आदित्य के पैर पकड़ लेता है और कहता है --

विकास :- मुझसे गलती हो गई आदित्य , अब मुझे समझ मे आया के क्यों मैं जानवी को तुमसे दुर करके भी उससे पा नही सका , क्योंकि तुम सच्चाई का साथ दे रहे थे और मैं बुराई का । अब से मैं तुम्हारे और जानवी के बिच कभी नही आउगां और ना ही कभी जानवी से मिलूगां । उसे मैं सारी सच्चाई बता दुगां ।

आदित्य :- कोई फायदा नही होगा विकास. . जानवी मुझे कभी अच्छा इंसान समझा ही नही , अगर तुम उससे कुछ भी कहोगे ना .. तो समझेगी के मैं तुमपर कोई दबाव बनाकर ये सब करवा रहा हूँ ।

विकास :- पर जब उसे पता चलेगा के तुम कौन हो , तब तो उसे यकीन हो जाएगा ना ।

आदित्य: - पता नही ...

विकास :- आज तक मैने जो कुछ भी किया वो अपने स्वार्थ के लिए था , मुझे जानवी जैसी अच्छी लड़की से प्यार नही था बल्की उसकी दौलत से प्यार था । एक इंसान को अच्छा हमसफर चाहिये होता है पर मैने हमेशा दौलत को चुना । पर अब मैं सब कुछ ठिक कर दूगां। आदित्य सर .. आपने जो मेरे लिए किया वो मैं कभी नही भुलुगां ।

आदित्य विकास के कंधे पर हाथ रखता है और कहता है --

आदित्य :- विकास ... तुम अभ जो कुछ भी करना सौच समझ कर करना , क्योकी मैने अभी के लिए तो तुम्हें पुलिय से बची लिया पर अगर जानवी को ये सब पता चला तो वो तुम दोनो को नही छोड़ेगी । ऐर फिर तुम्हारे साथ - साथ काली को भी सजा हो जाएगी । इसिलिए ये सब जानवी को धिरे - धिरे हालात दैखकर बताना ताकी वो समथ सके। 

विकास :- पर सर .. अगर जानवी को सच का पता नही चलेगा तो वो आपको तो गलत ही सोचेगी ना । आपके बारे मे कभी जान ही नही पाएगी ।

आदित्य हल्की मुस्कान देकर कहता है --

आदित्य :- जानवी ने मुझे कभी अच्छा इंसान समझा ही नही । क्या फर्क पड़ता है के वो मुझे क्या समझती है ।

विकास :- पर सर आप तो जानवी से प्यार करते हो ना ?

आदित्य :- हां .. पर वो नही करती है , वो तुमसे प्यार करती है । इसिलिए तुम अब से ये गलत रास्ते को छोड़ दो और जानवी को अपना लो । ये पैसो का लालच, प्रॉपर्टी का लालच ये सब छोड़ दो , जानवी को अपना लो और उसे फिर धोका मत देना , बाकी रही तुम्हारी कंपनी की बात तो उसमे मैं इंवेस्टर करुगां ।

आदित्य से इतना सुनकर विकास के आंखो से आंशु बहने लगे , विकास आदित्य को पैरो मे गिर पड़ा और कहने लगा --

विकास :- आप सच मे महान हो सर.. मैने आप जैसे महान इंसान के साथ बहुत गलत किया सर , मैं आपके इस दया के लायक नही हूँ । मुझपर दया मत किजिए सर । मुझे मर जाने दिजिए, मुझे बर्बाद होने जाने दिजिए, यही मेरी सजा होगी ।

आदित्य विकास को उठाकर कहता है --

आदित्य :- मैं कोई दया नही कर रहा हूँ, तुम्हारे साथ बिजनेस कर रहा हूँ , पर हां , आगे से दुबारा अगर तुमने जानवी को दुख पहूँचाया या उसके साथ गलत करने या उसकी प्रॉपर्टी को हड़पने के लिए ऐसा वैसा कुछ किया तो मैं तुम्हें बर्बाद कर दूगां , और उसके लिए मुझे एक मिनट लगेगा ।

विकास :- सर .. मेरी आंखे अब खुल चुकी है , मैं अब कभी उस रास्ते पर नही जाउगां ।

आदित्य विकास को थपथपाते हूए कहता है --

आदित्य :- Good , अब जाओ । जानवी तुम्हारा इंतजार कर रही है ।

सभी वहां से चला जाता है , पुलिस भी विकास को छोड़ देता है और वहां से सभी चला जाता है ।

To be continue....891