तेरे मेरे दरमियान - 94 CHIRANJIT TEWARY द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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तेरे मेरे दरमियान - 94

आदित्य :- पहली बात तो ये , के वो कहां है मुझे ये नही पता और मैने उसे क्यों पिटा ये जाकर तुम अपने पापा से पूछो । रही बात पुलिस की तो वो विकास को जरुर ढुडं लेगें । 

जानवी :- मुझे किसी से कुछ भी जानने की जरुरत नही है । अगर विकास को कुछ भी हूआ तो मैं तुम्हें नही छोड़ूगीं ।

जानवी के रवैया को दैखकर कृतिका अपने गुस्से पर काबु नही रख पायी और कहती है --

कृतिका :- जानवी तुम्हें सरम नही आती , तुम हर बार ये विकास और तुम्हारी रोना लेकर हर बार आदित्य के पास चली आती हो । विकास ने ऐसा क्या जादू कर दिया है के तुम्हें सच्चाई दिखाई नही देती । अभी भी समय है सुधर जाओ और सच्चाई को जानने की कोशिश करो , वरना कही ऐसा ना हो के समय हाथ से निकल जाऐ और तुम्हारे पास पछतावा के अलावा और कुछ भी ना रहे ।

कृतिका की बात पर जानवी कहती है --

जानवी :- ठीक है दैखते है , समय किसका साथ देती है ।

इतना बोलकर जानवी वहां से चली जाती है , जानवी के जाने के बाद कृतिका कहती है --

कृतिका :- आदित्य ... तुम क्यों जाते हो ऐसे लड़की को बचाने , तुमने जब - जब इसे बचाया है , इसने तुम पर ब्लेम डाला है । 

आदित्य :- अब समय आ चुका है सच्चाई सबके सामने लाने का । मुझे ही विकास को ढुडंना होगा और अब उससे ही सारी सच्चाई उगलवानी पड़ेगी । 

इतना बोलकर आदित्य इंस्पेक्टर को कॉल लगाता है , इंस्पेक्टर आदित्य का कॉल दैखकर फोन रिसिव करता है और कहता है --

इंस्पेक्टर: - हां आदित्य सर कहिए कैसे याद किया ?

आदित्य :- ये विकास का क्या चक्कर है ?

इंस्पेक्टर आदित्य को सब बोलकर सुनाता है , और कहता है --

इंस्पेक्टर: - सर मैं आपको कॉल करने ही वाला था , मुझे बस इतना जानना है के कल रात को क्या हूआ था ?

आदित्य कल रात की सारी बात को इंस्पेक्टर को बोलकर सुनाता है और कहता है --

आदित्य :- वहां से वो भाग निकला था पर उसके बाद वो कहां गया ये पता नही है ।

इंस्पेक्टर :- मुझे पता सर के यही हूआ होगा । ठिक है मैं विकास ते फोन को अशोक सर से ले लूगां और वो विडियो ही विकास की सच्चाई को सामने लायेगा । 

आदित्य :- ठिक है आपलोग उसका पता लगाइए । मैं भी पता लगाता हूँ के वो कहां है ।

इंस्पेकटर: - ठिक है सर , जैसे हमे कुछ पता चलेगा , मैं आपको inform करुगां ।

आदित्य :- ठिक है ऑफिसर ।

आदित्य फोन कट कर देता है । आदित्य अपना टीम को लगा देता है विकास तो ढुडने मे । 

इधर विकास एक अनजान जगह पर बेहोश था , विकास कुर्सी मे बैठा और उसके हाथ पैर रस्सी से बंधा हूआ था । विकास की आँखें धीरे-धीरे खुलीं उसका सिर भारी था। माथे पर दर्द धड़क रहा था।
उसे कुछ याद नहीं आ रहा था उसने दैखा के वो किसी अनदान जगह मे है , उसने उठने की कोशिश कीलेकिन शरीर हिला ही नहीं।
तभी उसे एहसास हुआ… के उसके हाथ पीछे की तरफ कसकर बंधे हुए थे। पैर भी कुर्सी से रस्सी से जकड़े हुए।

विकास अपने आपको बंधा दैखकर घबरा जाता है और अपने आपको छुड़ाने की कोशिश करता है पर कोशिश बेकार जाती है । विकास घबराते हूए कहता है --
विकास :- क… कौन है? 

विकास की आवाज़ सूखी हुई थी , कोई जवाब नहीं।
कमरा आधा अंधेरे में डूबा था। एक टिमटिमाता बल्ब छत से लटक रहा था , दीवारें खाली कोई खिड़की नहीं था तो बस सन्नाटा।

विकास की साँस तेज़ होने लगी और फिर चिल्लाकर कहता है --

विकास :- मुझे यहाँ किसने लाया? और कौन हो तुम , क्या चाहते हो ?

उसके दिमाग में कुछ तस्वीरें चमकीं—जैसे रेस्टोरेंट…जानवी…गिलास…आदित्य के साथ लड़ाई फिर होटल से बाहर आना और फिर…पीछे से किसी का वार। विकास की आँखें फैल गईं।
विकास अपने से कहता है --

विकास :- होटल के बाहर मुझे किसने मारा था ?

तभी किसी के आने की आहट होने लगती है उसका दिल धक-धक करने लगा।

अचानक…कर्क…लोहे का दरवाज़ा धीरे से खुला।
विकास की साँस अटक गई। बाहर से आती हल्की रोशनी ने कमरे को काट दिया। फिर कदमों की आवाज़…धीमी और सुनियोजित…जैसे कोई अंदर आया था। तभी विकास को एक परछाई दिखाई देती है ।

विकास चेहरा साफ़ नहीं देख पा रहा था। उसे बस एक परछाईं दिखाई दे रही थी , वो आदमी उसके सामने आकर रुक गया। विकास को उसका चेहरा साफ दिखाई नही दे रहा था । वो आदमी कुछ पल तक कुछ नहीं बोला सिर्फ विकास को देखता रहा , कमरा एक दम से खामोश था और उस खामोशी में ही डर था।

विकास का गला डर से सुख रहा था , विकास अपने कांपते हूए आवाज से कहता है --

विकास :- कौन हो तुम… तुम चाहते क्या हो? तुम्हें पैसे चाहिए
मैं दे दूँगा! 

विकास के इतना कहने पर भी वो आदमी कुछ नही बोलता है ।
विकास दुबारा से पूछता है --

विकास :- बताते क्यों नही , तुम्हें क्या चाहिए ?

आख़िर सामने वाले ने कहा—
" पैसे " मुझे पैसे चाहिए ।

हल्की-सी हँसी गूँजी। विकास का गला सूख गया।
 विकास डर से कहता है --

विकास :- ठि... ठिक है , तुम्हें जितना चाहिए मैं देने को तैयार हूँ । 

तभी वो आदमी सामने आता है और कहता है --

" जब जान पर बनी तब देने को तैयार हो गए और ऐसे मे तो देने को तैयार नही थे । "

विकास जब उसका चेहरा दैखता है तो हैरान रह जाता है वो कोई और नही बल्की काली था । काली को दैखकर विकास कहता है --

विकास :- काली. ....!

काली :- हां ... काली , जिसे तुमने मरने के लिए छोड़ दिया , मेरे पिछे पुलिस कब से पड़ी है , अरे जब तुम्हें पता था के ये मामला छोटी - मोटी नही है तो फिर क्यों कराया मुझसे ये काम, इतने पावरफूल आदमी को उठवा कर खुद चैन की निंद सो रहे हो ? तुम्हों पता है के मैं कही पर भी एक या दै दिन से ज्यादा नही रुक सकता । पुलिस से पहले उसके आदमी मेरे पास पहूँच जाता है ।

काली की बात पर विकास हैरान था , विकास हैरानी से कहता है --

विकास :- पावरफुल आदमी ? पर जानवी और अशोक तो ...

काली विकास की बात को बिच मे काटकर कहता है --

काली :- अरे , वो लोग नही रे , जानवी को जो प्यार करता है उसकी बात कर रहा हूँ । इस देश के सबसे बड़े आदमी विद्युत तिवारी का बेटा । 

विकास ये सुनकर हैरान रह गया --

विकास :- विद्युत तिवारी का बेटा ? पर ये कैसे हो सकता है , जानवी ने तो कभी उसके बारे मे बताया ही नही और ना ही कभी तिवारी जी का बेटा यहां आया और ना कभी मिला , फिर वो जानवी से प्यार कैसे कर सकता है और तुम्हारे पिछे लोग कैसे लगाके रखा है ? तुम्हें जरुर कोई गलतफहमी हूई है ।

काली हल्की मुस्कान देता है और कहता है --

काली :- गलतफहमी और मुझे ? लगता है तुमने उसे अभी तक पहचाना ही नही है ।

विकास :- पहचानी नही का मतलब ?

काली विकास के सामने जाता है और कहता है --

काली :- आदित्य ! आदित्य तिवारी ।

विकास आदित्य का नाम सुनकर चोंक जाता है और कहता है --

विकास :- आदित्य? क्या तुम उस आदित्य की बात तो नही कर रहे हो ?

काली :- सही समझा तुमने , मैं उसी आदित्य का बात कर रहा हूँ , जिससे जानवी की शादी हूई है और जिससे तुम दुश्मनी मोल लियो हो । वो तुम्हारे बारे मे सब जानता है । 

विकास :- ये नही हो सकता । ये कैसे हो सकता है , वो तो एक साधारण सा लड़का है जिसके पास नोकरी तक नही है ।

काली विकास को सब बोलकर सुनाता है के कैसे आदित्य घर से निकला था कैसे उसने अपना मॉल खुला और अब आदित्य ने नई कंपनी भी खोल दिया है । ये सब सुनकर विकास के पैरो तले जैसे ज़मीन खिसक गई । विकास वो सब याद करने लगता है , जब विकास आदित्य को उसके ही मॉल पर उसका मजाक बना रहा था । और कई बार आदित्य को निचा भी दिखाया , ये सब सौच कर विकास कहता है --

विकास :- ये मैने क्या कर दिया , मैने अपने पैर पर ही कुल्हाड़ी कैसे मार लिया । 

तभी काली हंसकर कहता है --

काली :- तुमने पैर मे कुल्हाड़ी ही नही , बल्कि अपने बर्बादी का रास्ता खुद चुना है । आदित्य इतना पॉवरफुल है के वो तुम्हें और तुम्हारी कंपनी को एक सेकेंड मे बर्बाद कर सकता है । जो तुमने आदित्य को साथ किया है… उसका भरपाई तो तुम इस जन्म मो नही कर सकते । 


काली विकास के पास आकर धीमी मगर खतरनाक तरिके से कहता है --
 
काली :- जो किया उसका हिसाब तो देना पड़ेगा।

अब विकास समझ चुका था—के उसकी सज़ा की शुरुआत हो चुकी थी।

विकास :- ये मुझसे अनजाने मे क्या हो गया ? काली प्लिज मुझे जाने दो । मुझे सब कुछ ठिक करना होगा , वरना सब बर्बाद हो जाएगा । आदित्य कौन है मुझे पता नही था , मुझे उससे माफी मांगनी है ।

काली :- अब बहुत दैर हो चुकी है ।

काली हसने लगता है और फिर कहता है --

काली :- तुमने मुझे बर्बाद कर दिया विकास , मुझे तो उसी दिन पता चल गया था के आदित्य कौन है ।

विकास :- जब तुम्हें पता था , तो मुझे बताया क्यों नही ?

काली :- बताने की कोशिश की थी , पर तुमने सुना नही और मा ही मुझे मुसिबत से निकालने की कोशिश की , इसिलिए मैं भी इंतजार करने लगा , तुम्हारे बर्बादी का इंतजार । मेरा क्या है मैं आदित्य जी से माफी मांग लूगां और जो सजा होगी काटते फिर से नई सुरुआत करुगां , पर तुम ... तुम्हारा तो सू कुछ चला जाएगा। तुम मुझे बर्बाद करते बड़े चैन से सो रहे थे ना ? अब दैखो आदित्य तुम्हारा क्या हाल करता है ।

काली से ये सब सुनकर विकास डरा हूआ था क्योकी विकास जानता था के काली का क्या है वो जेल जाएगा और फिर नई सुरुआत कर लेगा , उसके पास खोने का कुछ है ही नही । पर विकास को पास उसकी कंपनी , नाम , सोहरत सब चली जाएगी । विकास गुस्से से काली से कहता है --

विकास :- काली ये तुने क्या किया ? तुने मुझे पहले क्यों नही बताया ... तुने मुझे बर्बाद कर दिया काली । 

काली विकास के करीब आकर उससे कहता है --

काली :- बर्बाद तुझे मैने नही , तुने खुद अपना बर्बादी का रास्ता चिना विकास ....तूने सोचा था सबको खरीद लेगा…पैसे से, डर से, झूठ से… तुझे लगा था के आदित्य एक साधारण सा इंसान है और उससे तु जानवी को छीन लेगा और वो चुप चाप दैखता रहेगा ।

वो एक पल रुका, फिर बोला—
काली :- मैं बचना चाहता था…पर तूने मुझे भी अपने साथ खींच लिया। और दैख आज कु भी मेरे साथ फस चुका है , अब हम दोनो के पास कोई रास्ता नही है ।

विकास की बेचैनी बज़ जाती है वो विकास कुर्सी पर बंधा हुआ
छटपटाने लगा।

विकास :- मुझे इससे निकाल काली , तू चाहे तो सब संभल सकता है! हम चल कर आदित्य से माफी मांग लेते है ।

अब उसकी आवाज़ में वही घमंड नहीं था , बस गिड़गिड़ाहट थी।

काली का जवाब आता है --

काली :- अब कुछ नहीं संभलेगा,

काली ने धीरे से कहा।

काली :- मेरा क्या है? मैं सज़ा काट लूँगा…फिर नई ज़िंदगी शुरू कर लूँगा।


To be continue.....881