सुबह की हल्की धूप शहर की इमारतों पर फैलने लगी थी. रात की बारिश के बाद मौसम ठंडा और ताजा लग रहा था.
सावी केयर Hospital में रोज की तरह चहल- पहल शुरू हो चुकी थी. मरीजों की भीड, नर्सों की भागदौड और डॉक्टरों की बातचीत से पूरा अस्पताल जीवंत लग रहा था.
लेकिन तीसरी मंजिल के एक प्राइवेट कमरे के बाहर असामान्य सन्नाटा था.
दरवाजे के बाहर चार आदमी खडे थे. काले कपडे, सख्त चेहरे और चौकन्नी नजरें. अस्पताल के स्टाफ को समझ आ गया था कि यह कोई साधारण मरीज नहीं है.
कमरे के अंदर बिस्तर पर रुद्राक्ष शेखावत आधा लेटा हुआ था.
उसके कंधे पर पट्टी बंधी थी, लेकिन उसकी आंखों की तीखी चमक अभी भी वैसी ही थी. सामने खिडकी से आती धूप उसके चेहरे पर पड रही थी.
रुद्राक्ष की नजरें दरवाजे पर टिकी थीं.
जैसे वह किसी का इंतजार कर रहा हो.
तभी दरवाजा खुला.
सफेद कोट पहने सावी अंदर आई.
उसके हाथ में मरीज की फाइल थी. चेहरे पर वही शांति और आत्मविश्वास.
कैसा महसूस कर रहे हैं? उसने सामान्य स्वर में पूछा.
रुद्राक्ष कुछ पल उसे देखता रहा.
फिर बोला,
जिंदा हूं. इसका मतलब अच्छा ही महसूस कर रहा हूं।
सावी ने हल्की- सी नजर उठाकर उसकी तरफ देखा.
मजाक करने की हालत में हैं. इसका मतलब रिकवरी अच्छी है।
उसने फाइल खोलकर पट्टी Check की.
लेकिन आपको कम से कम एक हफ्ते तक आराम करना होगा. जख्म गहरा था।
रुद्राक्ष ने मुस्कराते हुए कहा,
अगर डॉक्टर खुद देखने आती रहें. तो आराम करना आसान हो जाएगा।
सावी ने बिना प्रतिक्रिया दिए शांत स्वर में कहा,
मैं अपने सभी मरीजों को देखने आती हूं।
यह सुनकर रुद्राक्ष हल्का- सा हंस पडा.
आपको सच में पता नहीं है. मैं कौन हूं?
सावी ने सीधा जवाब दिया,
मुझे जानने की जरूरत भी नहीं है।
उसका जवाब सुनकर कमरे में खडे रुद्राक्ष के आदमी थोडे चौंक गए.
क्योंकि इस शहर में शायद ही कोई ऐसा था जो रुद्राक्ष शेखावत से इस तरह बात करे.
लेकिन रुद्राक्ष के चेहरे पर गुस्सा नहीं था.
बल्कि एक अजीब- सी दिलचस्पी थी.
वह धीरे से बोला,
दिलचस्प हैं आप, डॉक्टर।
सावी ने उसकी पट्टी ठीक की और फाइल बंद कर दी.
आपकी दवाई समय पर दी जाएगी. अगर दर्द बढे तो नर्स को बता दीजिए।
इतना कहकर वह मुड गई.
लेकिन दरवाजे तक पहुंचते- पहुंचते रुद्राक्ष की आवाज फिर आई.
डॉक्टर.
सावी रुकी.
हां?
रुद्राक्ष कुछ सेकंड चुप रहा.
फिर बोला,
कल रात अगर आप नहीं होतीं. तो शायद मैं जिंदा नहीं होता।
सावी ने शांत स्वर में कहा,
एक डॉक्टर का काम ही यही है।
और वह कमरे से बाहर चली गई.
रुद्राक्ष कुछ देर तक उसी दरवाजे को देखता रहा.
उसकी आंखों में वही चमक लौट आई थी.
उसने धीरे से अपने एक आदमी से कहा,
इस डॉक्टर के बारे में सब पता करो।
वह आदमी तुरंत बोला,
जी सर।
रुद्राक्ष ने खिडकी के बाहर देखते हुए कहा,
नाम. सावी।
उसके होंठों पर हल्की- सी मुस्कान आ गई.
दिलचस्प लडकी है।
उधर उसी समय शहर के पुलिस मुख्यालय में माहौल थोडा अलग था.
ऑफिस के अंदर विक्रांत अपनी टीम के साथ Meeting कर रहा था.
टेबल पर कई फाइलें और फोटो फैले हुए थे.
विक्रांत ने एक फोटो उठाई.
वह फोटो थी — रुद्राक्ष शेखावत की.
यह आदमी इस शहर के आधे से ज्यादा अवैध कारोबार को कंट्रोल करता है। विक्रांत ने कहा.
एक जूनियर ऑफिसर बोला,
सर, लेकिन उसके खिलाफ पक्के सबूत कभी नहीं मिलते।
विक्रांत की आंखों में सख्ती आ गई.
मिलेंगे।
उसने फोटो टेबल पर रखा.
हर अपराधी गलती करता है. और उस गलती का इंतजार करना ही पुलिस का काम है।
तभी एक कांस्टेबल जल्दी- जल्दी अंदर आया.
सर. एक खबर मिली है।
विक्रांत ने नजर उठाई.
क्या?
कल रात रुद्राक्ष शेखावत घायल हो गया था. और उसे एक प्राइवेट Hospital में एडमिट किया गया है।
विक्रांत तुरंत खडा हो गया.
कौन सा हॉस्पिटल?
सावी केयर हॉस्पिटल।
विक्रांत की आंखों में चमक आ गई.
तो आखिरकार शेर घायल हुआ है.
उसने तुरंत अपनी जैकेट उठाई.
चलो।
करीब आधे घंटे बाद पुलिस की एक गाडी सावी केयर Hospital के सामने आकर रुकी.
गाडी से उतरा विक्रांत.
उसकी चाल में आत्मविश्वास और आंखों में सख्ती थी.
वह सीधे रिसेप्शन की तरफ बढा.
मैं पुलिस ऑफिसर विक्रांत हूं। उसने अपना आईडी दिखाते हुए कहा.
मुझे यहां भर्ती एक मरीज से मिलना है।
रिसेप्शनिस्ट थोडी घबरा गई.
सर. Kiss मरीज से?
विक्रांत ने सीधा जवाब दिया—
रुद्राक्ष शेखावत।
यह नाम सुनते ही आसपास खडे स्टाफ के चेहरे बदल गए.
उसी समय पीछे से एक शांत आवाज आई.
माफ कीजिए. लेकिन बिना मरीज की अनुमति के आप उससे नहीं मिल सकते।
विक्रांत मुडा.
उसके सामने खडी थी सावी.
सफेद कोट. आत्मविश्वास से भरी आंखें. और बेहद शांत चेहरा.
विक्रांत ने उसे ध्यान से देखा.
आप?
मैं इस Hospital की मालिक और डॉक्टर हूं।
सावी ने साफ स्वर में कहा.
विक्रांत कुछ पल उसे देखता रहा.
फिर बोला,
आपको पता है आपने किसे एडमिट किया है?
सावी ने शांत जवाब दिया,
एक घायल इंसान को।
विक्रांत की आंखों में हल्की- सी मुस्कान आई.
वह सिर्फ घायल इंसान नहीं है. वह इस शहर का सबसे बडा माफिया है।
सावी कुछ सेकंड चुप रही.
जैसे वह यह बात पहली बार सुन रही हो.
लेकिन फिर उसने बहुत सामान्य स्वर में कहा,
मेरे लिए वह अभी भी एक मरीज है।
विक्रांत ने गहरी सांस ली.
डॉक्टर. आप शायद समझ नहीं रही हैं. यह आदमी बहुत खतरनाक है।
सावी ने सीधा जवाब दिया,
और मैं डॉक्टर हूं. मेरे लिए हर जान बराबर होती है।
कुछ सेकंड दोनों एक- दूसरे को देखते रहे.
जैसे दो बिल्कुल अलग दुनिया के लोग अचानक आमने- सामने आ गए हों.
फिर विक्रांत ने हल्का- सा सिर हिलाया.
ठीक है।
उसने कहा,
लेकिन याद रखिए. यह आदमी मुसीबत को अपने साथ लेकर चलता है।
इतना कहकर वह मुड गया.
लेकिन जाते- जाते उसने एक बार फिर सावी की तरफ देखा.
और उस पल उसे यह बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि.
जिस डॉक्टर से वह अभी मिला है.
वह जल्द ही उसकी जिंदगी का भी सबसे बडा हिस्सा बनने वाली है.
और दूसरी तरफ.
ऊपर कमरे में बैठा रुद्राक्ष शेखावत अभी भी खिडकी से बाहर देख रहा था.
उसे यह भी नहीं पता था कि.
जिस लडकी ने उसकी जान बचाई है.
वही लडकी अब उसकी सबसे बडी कमजोरी बनने वाली है.
और शायद.
सबसे बडा जुनून भी.