प्यार… जुनून… और खतरनाक दुनिया का संगम।”
डॉ. सावी सिंह एक समझदार, मजबूत और दयालु डॉक्टर है, जिसकी जिंदगी पूरी तरह सामान्य थी—जब तक उसकी मुलाकात नहीं हुई रुद्राक्ष से।
रुद्राक्ष…
एक ऐसा नाम जिससे पूरा अंडरवर्ल्ड डरता है।
वह सिर्फ एक सफल बिजनेसमैन नहीं, बल्कि शहर का सबसे खतरनाक माफिया किंग है।
रुद्राक्ष की जिंदगी में बहुत लोग आए, लेकिन उसका दिल सिर्फ एक लड़की पर ठहर गया—सावी।
उसके लिए सावी सिर्फ एक लड़की नहीं, बल्कि उसकी जुनून, उसकी कमजोरी और उसकी ताकत बन जाती है।
लेकिन सावी के लिए यह रिश्ता आसान नहीं है।
एक तरफ है रुद्राक्ष का खतरनाक और पजेसिव प्यार…
और दूसरी तरफ है उसकी अपनी आज़ाद जिंदगी।
जब सावी रुद्राक्ष से दूर रहने की कोशिश करती है, तभी उसकी जिंदगी में शुरू होता है एक खतरनाक खेल—साजिश, एक्सीडेंट, जानलेवा हमले और छुपे हुए दुश्मन।
सावी पर हमला होता है…
वह मौत के करीब पहुंच जाती है…
और रुद्राक्ष का प्यार धीरे-धीरे एक निर्दयी माफिया के गुस्से में बदल जाता है।
अब यह सिर्फ प्यार की कहानी नहीं रही।
यह बन चुकी है—
प्यार और जुनून की कहानी
बदले और साजिश की कहानी
और उस माफिया की कहानी जो पूरी दुनिया से लड़ सकता है…
लेकिन अपनी सावी को खो नहीं सकता।
लेकिन सवाल अभी भी बाकी है—
क्या सावी रुद्राक्ष के खतरनाक प्यार को स्वीकार करेगी?
या फिर उनके बीच खड़ी यह अंधेरी दुनिया उनके रिश्ते को खत्म कर देगी?
और सबसे बड़ा सवाल—
कौन है वह असली दुश्मन जो सावी की मौत चाहता है?
......................
वो अनजानी रात....
रात का समय था. शहर की सडकों पर हल्की- हल्की बारिश हो रही थी. बारिश की बूंदें सडक पर गिरकर अजीब- सी खामोशी पैदा कर रही थीं. आम दिनों में यह शहर देर रात तक जागता रहता था, लेकिन उस रात सन्नाटा कुछ ज्यादा ही गहरा था.
शहर के सबसे मशहूर प्राइवेट Hospital“ सावी केयर हॉस्पिटल” की तीसरी मंजिल पर अपने केबिन में बैठी सावी फाइलें देख रही थी. दिनभर के मरीजों की रिपोर्ट्स, ऑपरेशन नोट्स और अगले दिन की अपॉइंटमेंट्स. सब कुछ वह खुद देखती थी.
सावी सिर्फ एक डॉक्टर नहीं थी.
वह उस Hospital की मालिक भी थी.
कम उम्र में ही उसने अपनी मेहनत से यह Hospital खडा किया था. उसके लिए मरीज सिर्फ मरीज नहीं होते थे. बल्कि जिम्मेदारी होते थे.
घडी की सुई रात के करीब साढे ग्यारह बजा रही थी.
सावी ने फाइल बंद की और खिडकी के पास जाकर खडी हो गई. बाहर बारिश की बूंदें शीशे पर गिर रही थीं. ठंडी हवा कमरे में आ रही थी.
तभी नीचे Hospital के गेट पर अचानक हलचल मच गई.
कुछ गाडियों के तेज ब्रेक लगाने की आवाज आई.
सावी ने खिडकी से नीचे देखा.
तीन काली एसयूवी Hospital के गेट पर आकर रुकी थीं.
उनमें से कुछ लोग जल्दी- जल्दी बाहर निकले. उनके चेहरे पर घबराहट और गुस्सा साफ दिख रहा था.
कुछ ही सेकंड में स्ट्रेचर पर एक घायल आदमी को लेकर वे लोग अंदर भागते हुए आए.
रिसेप्शन पर खडी नर्स घबरा गई.
डॉक्टर को बुलाओ. अभी! उन लोगों में से एक आदमी ने लगभग चिल्लाते हुए कहा.
नर्स ने तुरंत इंटरकॉम उठाया.
मैम. इमरजेंसी है.
सावी ने बिना देर किए सफेद कोट उठाया और तेज कदमों से नीचे की तरफ बढ गई.
इमरजेंसी वार्ड में पहुंचते ही उसने देखा कि स्ट्रेचर पर एक लंबा- चौडा आदमी पडा हुआ था. उसके कंधे के पास गहरा जख्म था और खून लगातार बह रहा था.
उसके चारों तरफ खडे लोग बेहद खतरनाक लग रहे थे.
उनकी आंखों में अजीब- सी सख्ती थी.
लेकिन सावी के लिए उस वक्त सिर्फ एक चीज मायने रखती थी—
मरीज की जान.
सभी लोग पीछे हटिए। सावी ने सख्त आवाज में कहा.
उसकी आवाज में ऐसा आत्मविश्वास था कि सभी लोग अनजाने में एक कदम पीछे हट गए.
सावी ने जल्दी से जख्म देखा.
बुलेट इंजरी है. तुरंत ऑपरेशन करना पडेगा। उसने नर्स से कहा.
नर्स ने डरते- डरते पूछा, मैम. पुलिस को.
सावी ने उसकी बात बीच में ही रोक दी.
पहले मरीज की जान बचाना हमारा काम है. बाकी बातें बाद में।
स्ट्रेचर को तुरंत ऑपरेशन थिएटर की तरफ ले जाया गया.
जब सावी ऑपरेशन की तैयारी कर रही थी, तभी उसकी नजर उस घायल आदमी के चेहरे पर पडी.
तेज नाक- नक्श. सख्त जबडा. और बंद आंखों में भी एक अजीब- सा रौब.
वह कोई आम आदमी नहीं लग रहा था.
लेकिन सावी ने इन बातों को ज्यादा महत्व नहीं दिया. उसने ग्लव्स पहने और ऑपरेशन शुरू कर दिया.
करीब एक घंटे तक ऑपरेशन चलता रहा.
कमरे में सिर्फ मशीनों की बीप- बीप की आवाज और सावी की शांत लेकिन तेज निर्देशों की आवाज सुनाई दे रही थी.
आखिरकार उसने गोली निकाल ली.
खून बहना बंद हो गया.
सावी ने गहरी सांस ली.
ऑपरेशन सफल रहा. मरीज खतरे से बाहर है। उसने कहा.
बाहर इंतजार कर रहे लोगों को जैसे राहत मिल गई.
उनमें से एक आदमी तुरंत फोन मिलाने लगा.
सर बच गए.
उसकी आवाज में राहत थी.
कुछ देर बाद मरीज को प्राइवेट Room में शिफ्ट कर दिया गया.
सावी आखिरी बार उसकी फाइल Check कर रही थी.
तभी बिस्तर पर लेटे उस आदमी की उंगलियां हल्की- सी हिलीं.
उसकी आंखें धीरे- धीरे खुलीं.
गहरी, तीखी और बेहद खतरनाक आंखें.
उसने सबसे पहले सामने खडी सावी को देखा.
कुछ सेकंड तक वह बस उसे देखता रहा.
सावी ने शांत स्वर में कहा,
आपका ऑपरेशन हो चुका है. अब आप सुरक्षित हैं. लेकिन आपको आराम की जरूरत है।
उस आदमी ने धीमी आवाज में पूछा,
आप. डॉक्टर हैं?
जी। सावी ने जवाब दिया.
वह आदमी कुछ पल चुप रहा.
फिर उसके होंठों पर हल्की- सी मुस्कान आई.
तो आज मेरी जान. आपने बचाई है।
सावी ने बहुत सामान्य तरीके से कहा,
यह मेरा काम है।
इतना कहकर वह मुडने लगी.
लेकिन तभी कमरे का दरवाजा खुला और एक आदमी अंदर आया.
वह बहुत घबराया हुआ था.
सर.
उसने जैसे ही बिस्तर पर लेटे आदमी को देखा, उसकी आवाज में सम्मान साफ झलक रहा था.
सर, सब ठीक है ना.
सावी को यह थोडा अजीब लगा.
वह आदमी तुरंत सावी की तरफ मुडा.
डॉक्टर. आपको पता भी है आपने किसकी जान बचाई है?
सावी ने भौंहें सिकोड लीं.
मेरे लिए हर मरीज सिर्फ मरीज होता है।
वह आदमी कुछ कहने ही वाला था कि बिस्तर पर लेटे आदमी ने हल्का- सा हाथ उठाकर उसे रोक दिया.
उसकी नजरें अब भी सावी पर टिकी हुई थीं.
फिर उसने शांत लेकिन बेहद भारी आवाज में कहा—
डॉक्टर. मेरा नाम है रुद्राक्ष शेखावत।
यह नाम सुनते ही कमरे में खामोशी छा गई.
सावी को इस नाम का ज्यादा मतलब नहीं पता था. लेकिन उसके आसपास खडे लोगों के चेहरे बदल गए.
क्योंकि यह नाम सिर्फ एक नाम नहीं था.
यह नाम था उस आदमी का.
जिसके डर से पूरे शहर के बडे- बडे लोग भी रास्ता बदल लेते थे.
माफिया किंग — रुद्राक्ष शेखावत.
लेकिन सावी के चेहरे पर कोई डर नहीं था.
उसने बहुत सामान्य स्वर में कहा,
ठीक है Mister शेखावत. अभी आपको आराम करना चाहिए।
इतना कहकर वह कमरे से बाहर निकल गई.
रुद्राक्ष कुछ सेकंड तक दरवाजे की तरफ देखता रहा. जहां से सावी गई थी.
उसकी आंखों में पहली बार एक अजीब- सी चमक थी.
जैसे किसी ने उसके अंदर कुछ बदल दिया हो.
दूसरी तरफ.
उसी समय शहर के पुलिस मुख्यालय में एक आदमी टेबल पर फाइलें फैला कर बैठा था.
उसकी आंखों में सख्ती और चेहरे पर गहरा आत्मविश्वास था.
यह था पुलिस ऑफिसर विक्रांत.
उसके सामने एक फाइल खुली थी.
फाइल के पहले पन्ने पर एक तस्वीर थी—
रुद्राक्ष शेखावत.
विक्रांत ने तस्वीर को घूरते हुए धीमे स्वर में कहा—
बहुत सालों से खेल खेल रहे हो तुम. रुद्राक्ष।
उसने फाइल बंद की.
लेकिन अब यह खेल खत्म होगा।
वह कुर्सी से उठा और खिडकी के पास जाकर खडा हो गया.
बारिश अब भी हो रही थी.
और शायद किस्मत भी उसी बारिश की तरह.
धीरे- धीरे तीन लोगों की जिंदगी को एक- दूसरे से जोडने वाली थी.
एक तरफ था
माफिया किंग — रुद्राक्ष.
दूसरी तरफ
ईमानदार पुलिस ऑफिसर — विक्रांत.
और उनके बीच थी
एक मासूम डॉक्टर — सावी.
जिसे अभी तक यह भी नहीं पता था कि उसकी एक छोटी- सी इंसानियत.
उसे शहर की सबसे खतरनाक कहानी का हिस्सा बना चुकी है.
और यह कहानी सिर्फ प्यार की नहीं होगी.