ओर नियति,,
पता नहीं,,हमने उसे ढूंढने की कोशिश की पर उसका कुछ पता नहीं चला।।
ये सुनकर रिहान ने अपनी आँखें बंद कर ली,,उसकी आंखों से आशु बहने लगे ।।।।
प्रेजेंट टाइम।।।
“मैने तुम्हे ढूंढने की बहुत कोशिश की… सब ने कहा कि शायद तुम भी मर चुकी हो… पर मेरे दिल ने ये मानने से मना कर दिया।
दिन भगवान से यही प्रार्थना करता था कि तुम जहां कहीं भी हो, सेफ हो…”
रिहान की आवाज़ भर्रा गई थी। उसकी आंखें नम थीं, लेकिन नज़रें सिर्फ नियति पर टिकी हुई थीं।
“पर कई सालों तक जब तुम्हारे मिलने की कोई आस नहीं दिखी… तो मेरी हिम्मत जवाब देने लगी।
तुम्हारे जाने के बाद मैने अपने आप को पूरा काम में उलझा लिया था…
न ज्यादा किसी से बात करता था…”
वो हल्का सा हंसा, पर वो हंसी दर्द से भरी थी।
“पर फिर जब मैने तुम्हे इतने सालों बाद उस बंद चार दीवारों में देखा… तब लगा शायद मेरा कोई भ्रम है…
पर मेरा ये भ्रम कल टूट गया…”
उसने गहरी सांस ली, जैसे खुद को संभालने की कोशिश कर रहा हो।
“मैं तुम्हे बता नहीं सकता कि तुम्हे सुरक्षित देखकर मैं कितना खुश हूं… किट्टू…”
रिहान ने नम आंखों से नियति की तरफ देखा।
वहीं नियति… जो इतने देर से उसकी हर बात सुन रही थी…
न चाहते हुए भी उसकी आंखों में कैद आंसू अब रुक नहीं पाए।
एक-एक कर वो बहने लगे… और वो सिसकने लगी।
उसने जल्दी से अपने आंसू पोंछे… और रिहान की तरफ देखा—
जो पहले से ही उसे देख रहा था।
उसकी आंखों में पहले जो कठोरता थी… वो अब गायब हो चुकी थी।
उसकी जगह एक गहरा खालीपन उतर आया था।
नियति धीरे-धीरे उसके पास आई।
उसने उसकी आंखों में देखते हुए कहा—
“क्या जानना चाहते हो, तुम?”
उसकी आवाज़ कांप रही थी… लेकिन शब्द तेज थे।
“की मेरे पापा एक्सीडेंट नहीं बल्कि खून हुआ था…
यही की मेरी मां मेरे पापा के मृत शरीर को देख नहीं पाई…
यही की मात्र 14 साल की उम्र में अनाथ हो गई…
मेरे सारे चाहने वालों को मार दिया गया…”
कहते-कहते उसकी सांसें तेज हो गईं… और आवाज़ टूटने लगी।
“यही की मुझे फिजिकली ओर मेंटली असॉल्ट किया गया…
यही की मेरे साथ रेप करने की कोशिश की गई, एक बार नहीं… कई बार…”
इतना कहते ही वो खुद को संभाल नहीं पाई।
वो वहीं जमीन पर बैठ गई… और चीख-चीख कर रोने लगी।
“मुझे आज भी उसके गंदे हाथ अपने शरीर पर महसूस होते है…
यही की कभी-कभी मुझे खुद से घिन आती है…
यही जानना चाहते हो न तुम…”
उसकी आवाज़ अब टूटकर बिखर चुकी थी।
उसकी हर बात सुनकर रिहान जैसे अंदर से हिल गया था।
उसकी आंखों में आंसू भर आए…
उसके पैर लड़खड़ा गए।
उसने कभी सोचा भी नहीं था…
कि जिस लड़की की आंखों में वो कभी एक आंसू भी नहीं देख सकता था…
उसने पिछले दस सालों में इतना कुछ सहा होगा।
वो बस उसे देख रहा था—
अपने सामने बैठी उस लड़की को…
जो अब पागलों की तरह रो रही थी।
अगले ही पल रिहान तुरंत उसके सामने घुटनों के बल बैठ गया।
उसने बिना एक पल गंवाए उसका हाथ पकड़ा…
और उसे अपने सीने से लगा लिया।
उसका हाथ धीरे-धीरे नियति के सिर पर चलने लगा…
जैसे वो उसके सारे दर्द को शांत करना चाहता हो।
वहीं नियति…
जो इतने समय से प्यार और अपनापन तरस रही थी…
रिहान के इस तरह उसे गले लगाने से… वो पूरी तरह टूट गई।
उसने भी कसकर रिहान को गले लगा लिया…
मानो जैसे अगर उसने उसे छोड़ा…
तो वो फिर से हमेशा के लिए गायब हो जाएगा…।