A. V.: “kya tumhare paas abhi bhi shaktiyaan hai…”
उसने Agastya के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा…
Agastya कुछ पल चुप रहा…
उसकी सांसें भारी थीं… आँखें लाल…
“Koi shakti nhi h mere pass, sb shapit hai…”
उसने दांतों को पीसते हुए A.V. का हाथ झटक दिया…
जैसे उस स्पर्श ने ही उसके अंदर के घाव को छू लिया हो।
A.V. कुछ पल उसे देखता रहा… फिर हल्की सी मुस्कान उसके होंठों पर आई…
पर वो मुस्कान… जीत की नहीं… टूटे हुए अहसास की थी…
“Theek h… shyd tum khud hi ratri ko theek nhi Krna chahte…
Ratri meri kbhi nhi ho skti, ye to me Usi Janam me smjh gya tha…
lekin iss bat ki khusi tb bhi thi aur ab bhi… ki wo tumhari bhi nhi hui…”
उसने एक हार भरी मुस्कान दी…
और मुड़कर चला गया…
Agastya वहीं खड़ा रह गया…
बिलकुल बेबस…
जैसे किसी ने उसकी रूह को जकड़ लिया हो…
तभी…
जैसे अचानक उसके दिमाग में कोई चिंगारी भड़की हो…
उसकी आंखें बदल गईं…
वो बिना कुछ सोचे… सीधे अपनी car की तरफ बढ़ा…
door खोला… जोर से बंद किया…
engine की आवाज़ के साथ…
उसका गुस्सा, डर और बेताबी… सब सड़क पर उतर आए…
Car एक घर के सामने आकर रुकी…
Ye Sayyuri ka ghar tha…
Agastya ने बिना रुके दरवाज़े पर password डाला…
और अंदर आ गया…
Sayyuri आराम से sofa पर बैठी थी…
जैसे उसे पहले से पता हो…
कि Agastya आने वाला है…
“Aao betho… coffee…!?”
फिर खुद ही मुस्कुराई…
“Ohh I’m sorry… tum to abhi ansoo pee rhe hoge… tb ki trha…”
वो बोलती ही जा रही थी…
कि तभी—
Agastya हवा की रफ्तार से उसके सामने आया…
और उसका गला दबा दिया…
उसकी पकड़ में सिर्फ गुस्सा नहीं था…
डर था… खो देने का डर…
Agastya: “Apna muh bnd rkho…”
अगले ही पल—
Sayyuri की आंखों में भी बिजली कौंधी…
उसने Agastya का हाथ झटका…
और एक ही झटके में उसे sofa पर नीचे लिटा दिया…
वो उसके बेहद करीब आ गई…
इतनी करीब… कि उसकी सांसें उसके चेहरे से टकराने लगीं…
“sapit hoo to kya hua… hoo to me bhi garud vanshaj…”
उसकी आवाज़ धीमी थी…
पर हर शब्द में ताकत थी…
“And mind it… ab to tum se zyda purani bhi… experienced bhi…
To aaida mere sath ye sab krne ki sochna bhi mat…”
उसने उसकी आंखों में झांकते हुए कहा—
“aur shyd tum bhool rhe ho ki inn bhigi ankho se garudo ki shaktiyaan aur bhi kam ho jati h…
aur tumhare paas to hai bhi nhi…
oops… tumne to tyaag di h…”
और वो पीछे हट गई…
Agastya उसी sofa पर बैठा रह गया…
सांसें तेज…
मुट्ठियां भींची हुई…
आंखों में बस एक ही चेहरा—Ratri…
कुछ पल की खामोशी…
फिर उसने धीरे से कहा—
“Mujh garud lok jana hai…”
Sayyuri एकदम रुक गई…
उसकी आंखें फैल गईं…
“Kya…? Tumhe…? Per tumne to use tyag dia tha…!”
Agastya ने बिना पलक झपकाए उसकी तरफ देखा…
“Ratri k lie !”
उसकी आवाज़ में कोई हिचक नहीं थी…
सिर्फ ज़िद…
“Garud pushp! Garud pushp lana hai ”
Sayyuri उसे देखती रह गई…
जैसे पहली बार उसे समझ आया हो—
ये सिर्फ एक आदमी नहीं…
ये उस हद तक जाने वाला इंसान है…
जहां से वापसी नहीं होती…
Tum shayad bhool rhe ho…
Ratri ka ghaav kisi astr aur shastra ka nhi h… uske khud k hi shrap ka h…
aur ese me Garud pushp kitna asar krega… aur karega bhi ki nhi… mujh nhi pta…”
—Sayyuri ne dheere se kaha…
उसकी आवाज़ में warning थी…
पर Agastya की आँखों में बस एक ही चीज़ थी—जिद।
कमरे में कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया…
तभी—
Agastya का phone बजा…
screen पर नाम चमका—A.V.
उसने बिना एक पल गँवाए phone उठाया—
A.V. (घबराई हुई आवाज़ में):
“Ratri ko bacha lo… uski halat…”
बस इतना सुनना था—
Agastya की सांस अटक गई…
दिल जैसे एक पल के लिए रुक गया…
और अगले ही पल—
उसने phone काट दिया।
उसकी आँखों में अब सिर्फ डर नहीं था…
खो देने का वहशत थी।
वो सीधा Sayyuri की तरफ मुड़ा—
“Sayyuri… mujh Garud lok jana hai…”
उसकी आवाज़ धीमी थी…
पर उसमें ऐसा आदेश था… जिसे टाला नहीं जा सकता था।
“aur agar tumhare paas... mere paas koi rasta nhi h wala dialogue h to mujh bata do kyuki vardaan kya kya kar sakta h…”
उसने एक कदम उसकी तरफ बढ़ते हुए कहा…
उसकी आँखों में अब आग थी…
और उस आग में Sayyuri भी साफ जलती दिख रही थी।
“wo me naa marne wali Sayyuri ko abhi maar k demo du…?”
कमरे की हवा अचानक भारी हो गई…
Agastya उसके बिल्कुल करीब आ चुका था…
इतना करीब कि दोनों की सांसें टकरा रही थीं…
उसकी आवाज़ अब फुसफुसाहट थी…
पर हर शब्द… मौत जैसा भारी—
“Mat majboor karo mujhe…”
Sayyuri कुछ पल उसे देखती रही…
उसकी आँखों में पहली बार… हल्का सा डर उभरा…
क्योंकि इस बार—
Agastya सिर्फ गुस्से में नहीं था…
वो टूट चुका था…
और टूटा हुआ इंसान… सबसे खतरनाक होता है।