इश्क और अश्क - 68 Aradhana द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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इश्क और अश्क - 68

अगस्त्य ने अपनी दोनों बाहों से Ratri को थाम लिया,
जैसे उसकी सारी दुनिया सिर्फ इसी पल में सिमट गई हो।

“Ankhe kholo… Ratri…”
उसकी आवाज़ का हर लफ़्ज़ एक गहरा सा प्यार और डर लेकर आ रहा था,
जैसे वक्त खुद रुका हुआ हो।

एक पल में ही Agastya की आँखें आँसुओं से भर गई…
और फिर उनमें ख़ून उतर आया, जैसे उसका दिल और दिमाग दोनों एक ही साथ झंझुटा रहे हों।

Ratri का कोई जवाब न आने पर,
उसने दांतों को पीसते हुए कहा:
“क्या याद दिलाया तुमने इसे…?
Jaan pyari है तो जितना पता सब बताओ…”

वो औरत, जो इस पूरी scene की गवाह थी,
थोड़ी देर के लिए डर से जम गई।

“Mujh lga ki ye pehle ki kuch baate yaad krna chahti…
par shyd ye galti se past life me pohoch gayi…
ye purane zamane ki bhasha me kuch bol rhi thi…
I'm sorry,”
उसने धीरे से कहा, जैसे हवा भी उसकी बात सुन रही हो।

Agastya ने कुछ और करने से पहले Ratri को hospital ले जाना ज़रूरी समझा।

उसने Ratri को अपनी दोनों बाहों में उठाया,
जैसे वो उसके लिए सबसे कीमती हो।

Car में लिटा कर,
उसने hospital की तरफ drive करनी शुरू की…
और हर पल, हर heartbeat में बस एक ही ख़याल था—Ratri की सुरक्षा।

Hospital में पहुँचते ही,
Agastya ने Ratri को बाहों में उठाया और पागलों की तरह चिल्लाने लगा:

“Doctor… Any doctor… Please…
Koi doctor नहीं है क्या इतने बड़े hospital में…
Koi to देख लो…”

उसकी आवाज़ टूट रही थी,
पर हर लफ़्ज़ एक ही दुआ था—Ratri के लिए, उसकी जान के लिए।

तभी कुछ ward boys और एक doctor stretcher लेकर आए।

Agastya ने Ratri को stretcher पर रखा और doctor के सामने अपनी desperation, अपना प्यार सब एक साथ बोल दिया:

“Please… save her… please…”

Doctor ने firmly कहा:
“We’ll do our best.”

जैसे ही pulse check किया गया, doctor ने frowning के साथ कहा:
“Pulse नहीं मिल रही… heartbeat भी weak है… ICU में ले चलो।”

सब लोग ICU की तरफ गए…
और Agastya… पीछे से Ratri का हाथ पकड़े हुए था।

पर जैसे ही ICU के दरवाज़े के अंदर कदम रखा,
हाथ उसके हाथ से छूट गया।

एक पल के लिए, दुनिया ठमी…
सिर्फ उनकी आँखें और उनके दिल की धड़कन सुनाई दे रही थी।

Agastya ने अपनी आँखों में दर्द और प्यार दोनों को महसूस किया…
और जैसे ही Ratri stretcher में अंदर गई,
उसने अपने दिल से बस एक ही दुआ की:

“Tum bach jao… aur hamesha mere paas raho… shayad bohot zyada maang rha hoo.....per zyda ho ya kam mujh tum chahiye "


बहुत देर हो चुकी थी, Ratri को अंदर ले जाया गया था।
Ratri की family भी हॉस्पिटल पहुँच चुकी थी।
सब प्रार्थना कर रहे थे, आँखें बंद किए, दिल धड़कते हुए।
हर किसी की सांसें थमी-सी लग रही थीं।

Agastya जमीन पर बैठा था, जैसे ज़िंदा लाश।
हाथ घुटनों पर टिकाए, हर सांस भारी, आँखों में दर्द और डर का संगम।
उसका दिल Ratri के लिए जोर-जोर से धड़क रहा था,
पर वो helpless था, बस देख सकता था।

तभी वहां A. V. आया।
किसी और से कुछ पूछना नामुमकिन था।
उसने Agastya का हाथ पकड़कर धीरे से बाहर ले आया।

A. V.: “Agastya, संभलो… और सोचो कि हम क्या कर सकते हैं।”

Agastya की आवाज़ कांप रही थी:
Agastya: “Ratri बहुत strong है… लेकिन उसकी हदें भी… बहुत डरावनी हैं।”

A. V.: “Tum और मैं जानते हैं कि ये कोई accident नहीं है…
ये सब उसी वजह से है… वो… shraap…”

तभी पीछे से आवाज़ आई:
“Shraap? कैसा shraap?”

दोनों पीछे पलटे—Anuj था।
उसकी आँखों में confusion, गुस्सा और डर, तीनों झलक रहे थे।
“Batao…”
Agastya और A. V. दोनों सोच में पड़ गए कि क्या बोले।

Agastya (धीमे से, लेकिन firm): “Tum जाओ अपनी बहन के पास…
बाकी मैं संभाल लूंगा।”

Anuj (गुस्से में): “Wo मेरी बहन है… और तुम्हारी कुछ नहीं…
Mujhको पूरा haq है जानने का।”

Agastya और Anuj की आँखों में tandav बढ़ रहा था।
सन्नाटा इतना गहरा था कि सिर्फ heartbeat सुनाई दे रही थी।

तभी पीछे से एक nurse आई:
“Ratri Mittal के guardian कौन हैं यहाँ?
उनके parents doctor के पास हैं और हमें urgently ये दवा चाहिए।”

Anuj बिना कुछ सोचे समझे चला गया।

A. V. ने Agastya की तरफ देखा, आँखों में चिंता:
“Ab tum क्या करोगे?”

Agastya (ग़ुस्से में, आँखें लाल):
“मैं इस शहर या India के सारे hypnotherapy centers बंद करवा दूंगा…
आग लगा दूंगा…”

इतना कहकर उसने अपना हाथ bagal ke pillar पर मारा।
जैसे ही हाथ हटाया, वहां से cement गिरने लगा।
जैसे किसी हथौड़े से जोरदार वार किया गया हो।

A. V. shocked हो गया:
“Kya tumhare पास आज भी शक्तियाँ हैं?”

Agastya खड़ा था, शरीर कांप रहा था,
दिल Ratri के लिए फटने को तैयार,
और आँखों में बस एक ही आग—use बचाने की आग।