शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (80) Ramesh Desai द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (80)

             

                 शहद की गुड़िया- प्रकरण 80


           " दादू को ईश्वर ने तीन गुड़िया का प्यार दिया था. उस बात से  उन्हें बड़ी ख़ुशी मिली थी. उन्होंने सदैव पैसों से ज्यादा प्यार को अधिक अहमियत दी थी. उन्हें यह संपत्ति असीमित मात्रा में पर्याप्त हुई थी."

            " इस लिये उन्होंने सदैव भगवान का एहसान माना था."

            " इस संपत्ति की बदौलत उन्हें अनेकानेक लोगो का प्यार, सन्मान हांसिल हुआ था. "

            " सालो बीत गये थे. फिर भी वह अनन्या को भूला नहीं पाये थे. वह घर बदल कर दूसरी जगह रहने गई थी. वह कहाँ गई थी?  दादू को उस का पता नहीं था.दादू ने उस के जूने पड़ोसी को पूछकर उस का अता पता प्राप्त किया था."

            " वह उसे मिलना चाहते थे. "

            " और एक दिन उसे मिलने चला गये थे. "

              " उन्हें देखकर दोनों बडे ख़ुश हुए थे."

              "  उस की दो बेटियां थी. जिस की शादी हो गई थी. उस के अलावा एक लड़का था जो केनेड़ा में सेटल हो गया था. पिछ्ली उम्र में दोनों अकेले हो गये थे., "

               " और पुरानी यादें ताजा हो गई थी. "

                " सुहानी के साथ उन्होंने ने जो गलत हरकते की थी. उस का इजहार करते हुए सच्चाई का पर्दा फार्श किया था . और उस के लिये ललिता पवार को हीं दोषित ठहराया था. अनन्या ने उन की बात का बिना को दलील या सवाल   स्वीकार लिया था."

                " उस से वापस मिलने का मौका मिला था. उस बात से दादू बड़ी ख़ुशी प्राप्त हुई थी."

                 " बाद में ज़ब भी मौका मिलता था वह फोन पर उस से बात करते थे. "

                  "ऐसी हीं टेलिफोनिक बातचीत के दौरान उन्हें मालूम हुआ था. उस की दोनों किडनी फैल हो गई है.  वह डायालिसीस पर जी रही थी. "

               " यह जानकर वह उसे अस्पताल में देखने गये थे. "                

               " वह तो करीब करीब कोमा की स्थिति में थी. उस से बात करने का क़ोई संभव नहीं था. वह उसे देखकर  चुपचाप घर चले आये थे. "

               " दो दिन बाद अख़बार में फोटो सहित उस की तस्वीर छपी थी."

              " सुनकर दादू को झटका लगा था."

               "  सही समय में उस ने दादू को मदद की थी.

               "   यह बात वह भूल नहीं पाये थे. "

               " दादू ने उसे एक चिट्ठी लिखी थी, जिस में उसे भगवान का स्थान दिया था... उस पर अनन्या ने दादू को कहां था. "

                " I am not your lover! "

                " यह बात बार बार उन के कानो में दस्तक दे रही थी."

                 " उन की कौन सी  कौन सी बात ने उसे ऐसा मानने के लिये प्रेरित किया था."

                " अगर दादू ने ऊस से प्यार किया था तो उस में क़ोई गलती या पाप नहीं था.  प्यार कभी भी, कहीं भी किसी से भी हो सकता हैं. "

                " वह कहकर किया नहीं जा सकता हैं. "

               " उन्होंने कभी अनन्या का प्यार छिन लेने की, उन के बीच दीवार बनने ने बारे मे प्रत्याशित रूप में कभी सोचा भी नहीं था. फिर भी उस ने दादू को अपनी  सगाई के बारे में बताने का सौजन्य नहीं दर्शाया था. "

                " यह बात दादू को सर्प डंस की भ्रान्ति चुभ रही थी."

                " इस परिस्थिति के लिये शायद मैं खुद हीं दादू जिम्मेदार थे. "

                 " उन्होंने निशा के भाई के सामने जो बबडाट किया था, उसी ने दादू के पैरों पर कुल्हाड़ी मारी थी..और उस में अनन्या के कथित गुरु- गोड़ फादर ने अहम भूमिका निभाई थी."

               " दादू ने अनन्या के चरण छूकर अपनी गलती का स्वीकार किया था, जो वाकई में उन की गलती नहीं थी बल्कि उन दोनों के दुहेरे व्यवहार का नतीजा था. उन्हों ने हीं दादू को  बड़ी उलझन में डाल दिया था. "

              " लेकिन ऐसी बातों का क़ोई मतलब नहीं था."

               " अगर अनन्या ने उन्हें रोता देखकर हमदर्दी नहीं जताई होती तो उन्हें उस के प्रति क़ोई लगाव पैदा नहीं हुआ होता." 

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              " निशा ने दादू की जिंदगी में नकारात्मक भूमिका निभाई थी. वह क्या चाहती थी? दादू से बात करती थी. उन का साथ भी पसंद करती थी. लेकिन उस ने कभी क़ोई पॉजिटिव मूव नहीं की थी."

              " एक बार दादू उस के भाई के साथ उस की मौसी के घर गये थे. उस वक़्त निशा वहाँ मौजूद थी. और वह दोनों अकेले साथ में घर आये थे. उस वक़्त उन दोनों लोग 20-25 मिनिट  साथ रहे थे. लेकिन ना जाने क्या बात हुई थी. उन के बीच कोई बात नहीं हुई थी.  दिल में भी क़ोई ऐसा भाव पैदा नहीं हुआ था ."

               " तब से दादू ने उस के बारे में सोचना बंद कर दिया था."

                 " फिर भी एक बार दादू बाहर चाली में बैठे थे. ऊस वक़्त निशा उधर आई थी. उन्होंने अपनी एक टांग को हटा लिया था और बाद में अपनी दोनों टांगो के बीच भींस लिया था. और वह हसकर चली गई थी. यह बात उन्हें ऐसा सोचने पर मजबूर कर रही थी, उस को दादू के प्रति कुछ लगाव था."

               " लेकिन  इस मुआमले में उस की ख़ामोशी ने दादू को कुछ सोचने का मौका नहीं दिया था."

              "  उसी दौरान उन्हों ने भी घर बदल दिया था.. और उसे मिलने का क़ोई मौका नहीं बचा था."

            " एक बार दादू और वह हिंडौले पर बाजु बाजु में बैठे थे. दादू ने ऊस के कंधो पर हाथ ऱख दिया था. तब ऊस की छाती का उभार देखने का मौका मिला था.. वह ऊस के साथ बहुत कुछ करना चाहते थे लेकिन मौका नहीं मिला था. "

             " उस के भाई भाभी के साथ उन का अच्छा व्यवहार था. वह उन के  साथ फ़िल्म देखने भी जाते थे. उस का बड़ा भाई दादू को भी फ़िल्म देखने ले जाता था."

             "   उस के परिवार में सब लोग दादू जानते थे. वह उस के नये घर में भी गये थे और उसे मिल नहीं पाये थे  क्यों की उस की शादी हो गई थी."

             " उन के जाने के बाद एक नया परिवार वहाँ रहने आया था. किशोर भाई घर के मुख्य सभ्य थे. उन की बीवी एक लडके को जन्म देकर गुजर गई थी. उस के बाद उन्हों ने आनंदी बहन से दूसरा ब्याह किया था. और इस शादी से उन्हों ने तीन पुत्र और एक पुत्री का उपहार दिया था."

              " उन्हें सिगरेट, तम्बाकू खाने की बूरी आदत थी, इस वजह से उन की मौत हो गई थी.."

               उन का पहला लड़का अनिश उस वक़्त 15-16 साल का हो गया था. उसे पढ़ाई, लिखाई में क़ोई दिलचस्पी नहीं थी. आनंदी बहन को उस की क़ोई फ़िक्र चिंता नहीं होती थी. वह सदैव खुद के बच्चों की देखभाल में व्यस्त रहते थे."

               " ललिता बहन का परिवार हमारे पड़ोस में रहने आया था. उस के कुछ हीं दिनों में किशोर भाई गुजर गये थे. "

             "  एक पल उन्हें ख्याल आया था. उन के मनहूस कदम से ऐसी स्थिति निर्माण हुई थी."

              " उस  वक़्त सहानुभूति जताने के बहाने ललिता पवार को आनंदी बहन के घर में दाखिल होने का मौका मिला था. अनिश भी अपने पिता की मृत्यु से काफ़ी प्रताड़ित था.. इस स्थिति में सुहानी भी हमदर्दी जताने के बहाने अपनी मा के साथ घर गई थी और बहुत जल्द वह एक दूसरों के करीब आ गये थे."

           " और सुहानी का अनिश के साथ तीसरा प्रेम और रोमांस शुरू हो गया था. "

          "  वह दोनों अपनी धुन में मस्त हो गये थे. वह सब के होते हुए भी कुछ ना कुछ हरकते करते रहते थे."

            " सुहानी का क़ोई व्रत था. उस के लिये जगराता था. उसे पूरी रात जागना था. उस के लिये घर के सभी सदस्यों के साथ मैंने भी उसे जगाने के लिये उस के घर गया था."

           " उस वक़्त दादू ने जो कुछ देखा था उसे देखकर उन्हें चककर आ गये थे . उस के बारे में दादू ने जो कुछ सुना था. उस का सबूत उन के सामने आ गया था. "

            "हमारे पड़ोस में आने से पहले सुहानी के दो लड़को के साथ चककर चल रहे थे, जिस के बारे में खुद आरती ने मुझे बताया था."

              " अनिश और सुहानी की कहानी जेट स्पीड से आगे बढ़ रही थी, उन को रोकने वाला क़ोई नहीं था.

               "  ललिता पवार तो उस के मुआमले में बिल्कुल मुंगे मंतर बन गये थे.

                         000000000000   (क्रमशः)