जब ससुराल जाती है जो भी उसे समझाया जाता है वैसे ही करती जाती है।वो यहां अपने लिए कुछ नहीं सोच पाती है।
पति क्या खाएंगे?
सास ससुर क्या खाएंगे?
और अगर कोई और भी है तो सोचती है उनके लिए।
अपना पसंदीदा हर वो चीज भूल कर सबके मन का करने लग जाती है।
वैसे करते हुए उसे कितना भी दुख हो कभी दिखाती नहीं है।
पति तो समझ नहीं पाता या समझना नहीं चाहता है कि पत्नी को आखिर चाहिए ही क्या?
दो वक्त की रोटी, कपड़े, गहने ये सब ही चाहिए।
कभी अगर ग़लती से भी उसके मायके से भाई आ जाएं तो कानाफूसी
क्या हुआ अगर उसके मायके वाले आ जाएं। क्या आप कभी यह सोचते हो जो अपना सबकुछ छोड़कर एक बार पति के घर आ गई है। और फिर अपने जो उसको पाल पोस कर बड़ा किया। बचपन जहां पर एक साथ बिताए वो क्या शादी के बाद एक दम से छूट गया वो लोग कोई नहीं है। रिश्ता सब खत्म हो गया।
जब पति अपने माता-पिता के साथ बैठकर बात कर सकते हैं हंस बोल सकते हैं तो पत्नी क्यों नहीं?वो करें तो यह देखो कैसे दांत निकाल कर हंस रही है भाई के साथ। क्या उसके भाई बहन, मां बाप उसके लिए कुछ भी नहीं है अब ? क्यों कि शादी हो गई।पराई हो गई है?
शादी एक अभिशाप क्यों?
ये जो भी पहलू है जिंदगी में वो कभी खत्म नहीं होता है। हां मैं मानती हूं कि सब ससुराल वाले और पति ऐसा नहीं होते हैं पर जिसके साथ होता है उसका दोष क्या है? शादी मर्जी से हुआ भी तो क्या वो लड़की क्या जान पाती है वो जिसके साथ पुरी जिंदगी बिताने को तैयार हैं वो क्या उसके माता-पिता को अपना लेंगे?? वहीं उम्मीद फिर उस लड़की से क्यों करते हो जी??
वो भी एक इंसानी शरीर है कोई जानवर तो नहीं।।
क्या हुआ अगर लड़की शादी के बाद पति के पैसे से अपने माता-पिता को कुछ खरीद कर दे सकें।
क्यों नहीं दे सकती है?, क्या सिर्फ पति का हक है पत्नी के जिस्म पर ?? क्यों आखिर वो पैसे लेकर कुछ नहीं कर सकती हैं?? क्या हुआ अगर वो कुछ भी करना चाहें अपनी मर्जी से??पति सिर्फ अपना अधिकार दिखा सकता है क्या वो सच में प्यार करता है अपनी पत्नी से तो फिर सब चीजों पर समान अधिकार होना चाहिए।पति क्यों नहीं बोल सकता है कि तुम्हारे माताअपनी पत्नी से तो फिर सब चीजों पर समान अधिकार होना चाहिए।पति क्यों नहीं बोल सकता है कि तुम्हारे माता-पिता मेरे भी माता-पिता है और उनका सम्मान और सत्कार मुझे भी करना है।
वाह अगर यह सोच सबके पास हो तो पति-पत्नी में कोई तीसरा कभी नहीं आ सकता है और ना ही कोई ग़लत रास्ते पर।
शादी एक अभिशाप क्यों।
इस पर चर्चा करना आम बात नहीं है और सबके साथ ऐसा नहीं होता है पर जिसके साथ होता है वो तो जीते जी मर ही जाती है।
पति बोलते हैं कि सब कुछ तो है तुम्हारे पास फिर भी परेशान क्यों हो?पति जानने कि कोशिश भी नहीं करता कि आखिर क्यों वो ऐसे ही रहती है? खाना खाने को मिल रहा है,ए सी की ठंडी हवा मिल रहा है और सब कुछ है पर ये आंखों के नीचे ये काले घेरे क्यों? क्या चाहिए उसको?? थोड़ा सा सूकून चाहिए? थोड़ा सा करार चाहिए? कुछ बातें जो हम कहें उसका भी मान चाहिए? क्या हुआ अगर कुछ देना ही हो। शादी एक अभिशाप क्यों।
मुझे कभी ऐसा महसूस हुआ भी होगा कि शादी के बाद ससुराल में आएं हुए पंद्रह साल हो गए पर आज तक लगा तो कि यह घर भी मेरा है?
क्रमशः