संकट का दौर Md Siddiqui द्वारा नाटक में हिंदी पीडीएफ

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संकट का दौर

यह कहानी केवल मनोरंजन और संदेश के लिए है इसका किसी वास्तविक व्यक्ति या घटना से कोई संबंध नहीं है

मुगल सल्तनत का समय था बादशाह अकबर का दरबार हर रोज की तरह सजा हुआ था दरबार में संगीत हंसी-मज़ाक और बुद्धिमानी की बातें होती थीं पूरे राज्य में शांति थी बाज़ार गुलजार थे और लोग अपनी-अपनी जिंदगी में खुश थे।
सुबह होते ही बाजारों में चहल-पहल शुरू हो जाती थी। सब्ज़ी वाले आवाज़ लगाते 
ताज़ी सब्ज़ी ले लो सस्ती और बढ़िया
चाय की दुकानों पर लोग इकट्ठा होते हँसी-मज़ाक चलता

रामू नाम का एक आम आदमी हर रोज़ 5 रुपये में बिस्किट और चाय लेकर कहता 
भाई जिंदगी इससे ज्यादा क्या चाहिए
मोहन जवाब देता 
सही कहा बस ऐसे ही चलता रहे
हर चीज़ आसानी से मिल जाती थी लोग एक-दूसरे की मदद करते थे और जिंदगी में सुकून था

लेकिन एक दिन अचानक खबर आई 
राज्य पर बड़ा संकट आ गया है
कुछ ही दिनों में हालात बदलने लगे
बाजार धीरे-धीरे खाली होने लगे सामान कम होने लगा और लोगों के चेहरे से मुस्कान गायब होने लगी

काम-धंधा रुक गया
जो लोग रोज कमाकर खाते थे उनके लिए मुश्किलें बढ़ गईं
पहले दिन तो किसी तरह घर का राशन चला
दूसरे दिन बर्तन खाली होने लगे
तीसरे दिन कई घरों में चूल्हा तक नहीं जला 
रामू जो पहले हँसता रहता था अब परेशान था
वो बाजार गया और बोला 
भाई 5 रुपये वाला बिस्किट देना
दुकानदार हँसकर बोला 
अब वो 50 रुपये का हो गया है
रामू चौंक गया 
क्या ये बिस्किट है या सोना
दुकानदार बोला 
अरे भाई संकट का टाइम है जो मिलेगा महंगा मिलेगा

रामू मजबूरी में बिस्किट खरीदकर चला गया
उधर मोहन भी परेशान था
वो बोला 
पहले हम हँसी-मज़ाक करते थे अब हर चीज़ सोचकर खरीदनी पड़ रही है
गाँव के कई लोग भूखे रहने लगे
एक माँ अपने बच्चों को समझा रही थी 
आज कम खा लो कल कुछ अच्छा मिलेगा
लेकिन कल कब आएगा ये किसी को नहीं पता था
इसी बीच कुछ चालाक लोग इस संकट को मौका समझकर मुनाफा कमाने लगे

5 रुपये की चीज़ 50 में
2 रुपये की चीज़ 20 में बिकने लगी
दरबार में ये खबर पहुँची
अकबर बहुत नाराज़ हुए
उन्होंने तुरंत बीरबल को बुलाया 
बीरबल ये क्या हो रहा है
लोग परेशान हैं और कुछ लोग उनका फायदा उठा रहे हैं

बीरबल शांत खड़े रहे और बोले 
जहाँपनाह संकट इंसान की असली पहचान दिखाता है
अकबर ने कहा 
इसका हल क्या है
बीरबल बोला 
जहाँपनाह, अगर इजाजत हो तो मैं एक तरीका आज़माऊँ
अगले दिन पूरे शहर में ऐलान करवा दिया गया 
जो भी दुकानदार ज्यादा कीमत वसूलेगा, उसे दरबार में सम्मानित किया जाएगा
सभी दुकानदार खुश हो गए 
वाह ज्यादा कमाओ और इनाम भी पाओ
लेकिन शाम होते ही सिपाही हर उस दुकानदार को पकड़कर दरबार में ले आए जो महंगा सामान बेच रहा था

दुकानदार खुश होकर बोले 
जहाँपनाह, हम इनाम लेने आए हैं
अकबर ने बीरबल की तरफ देखा 
अब क्या
बीरबल मुस्कुराए 
जहाँपनाह इनका इनाम जनता के सामने दिया जाए
सभी दुकानदारों को चौराहे पर खड़ा कर दिया गया

और पूरे शहर को बुलाया गया
बीरबल ने जोर से कहा 
ये वो लोग हैं जिन्होंने आपके संकट को अपने मुनाफे का मौका बनाया
लोगों में गुस्सा फैल गया 
दुकानदार शर्म से सिर झुका लिए
अकबर ने आदेश दिया 
आज से हर जरूरी सामान की कीमत तय होगी
जो ज्यादा दाम लेगा, उसे सख्त सजा दी जाएगी
धीरे-धीरे हालात सुधरने लगे
कुछ अच्छे लोग आगे आए और गरीबों को खाना बाँटने लगे
रामू फिर से मुस्कुराने लगा 
और बोला 
अब लगता है, सब ठीक हो जाएगा
मोहन ने कहा 
हाँ क्योंकि अब लोग समझ गए हैं कि साथ रहना जरूरी है

दरबार में अकबर ने बीरबल से पूछा 
बीरबल आखिर ये सब क्यों हुआ
बीरबल ने मुस्कुराकर जवाब दिया 
जहाँपनाह, जब सब ठीक होता है तो लोग अच्छे बने रहते हैं
लेकिन जैसे ही संकट आता है, कुछ लोग अपना असली रंग दिखा देते हैं
अकबर ने कहा 
तो इसका असली दोषी कौन है
बीरबल ने गंभीर होकर कहा 
जहाँपनाह कड़वी सच्चाई यही है
गलत काम हम लोग खुद करते हैं
और दोष सरकार को देते हैं।
दरबार में सन्नाटा छा गया
क्योंकि ये बात हर किसी के दिल को छू गई थी

संकट हर देश पर आता है
लेकिन अगर लोग एक-दूसरे का साथ दें
तो कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती
और अगर लोग ही गलत रास्ता अपनाएं
तो कोई भी सरकार अकेले सब कुछ ठीक नहीं कर सकती

 इसलिए इंसानियत रखो साथ रहो और सही करो
मुश्किल समय में सरकार पर भरोसा रखना चाहिए