वो जिंदा है 3
Concluding Part 3 -अभी तक आपने पढ़ा कि लता की हत्या करने के बाद नरेश के परिवार ने उसकी झूठी मौत की खबर सब को दी , अब आगे पढें …
मोहन के पिता ने घटना वाले दिन ही मोहन को तुरंत अपने परिवार के साथ गाँव छोड़ कर ससुराल जाने को कहा था . इतना ही नहीं मोहन के पिता ने उपरोक्त घटना के बाद आननफानन में कुछ गरीब बच्चों के पिता से सादे कागज पर साइन करा लिया था यह कह कर कि यह उनकी फीस माफ़ करने के लिए अर्जी देनी है . मोहन सिर्फ एक घर में पिता के साथ गया था बाकी तीन घरों में मोहन के पिता गए और पहले व्यक्ति का साइन किया पेपर दिखा कर उनका भरोसा जीत लिया . बाद में उस पेपर पर श्मशान में मोहन की अंतिम क्रिया का जिक्र कर एक और अतिरिक्त साक्ष्य बनवा लिया था . मोहन की माँ ने भी पड़ोसियों को सूचित किया कि उनके बेटे की ससुराल में अचानक मौत हो गयी है जिसके बाद कुछ पड़ोसिनें अपनी सहानुभूति व्यक्त करने उनके घर भी आई थीं .
लता की माँ अक्सर थाने जा कर पता करना चाहती थी कि हत्यारे का पता चला या नहीं . पर वह जब भी पुलिस से मिलने जाती उसे सुनने को मिलता “ मोहन मर चुका है . उसकी मृत्यु के सारे प्रमाण भी हमारे पास हैं . उसका केस बंद हो गया है . तुम क्यों बार बार यहाँ आ कर हम सब को परेशान करती हो ? तुम उसे जिंदा कर लाओ तब हम फिर से उस पर केस बनाते हैं . “
सीता ने कहा “ मैं नहीं मानती कि मोहन मर चुका है . “
दरोगा ने डांट कर कहा “ तुम्हारे नहीं मानने से क्या होता है , कानून उसे मृत मान चुका है और उसके मौत के सबूत भी मौजूद हैं . एक तुम्हारे नहीं मानने की क्या वजह है , जरा हम भी सुनें . “
“ मैंने उसके पिता या बेटे को सिर मुंडवाते कभी नहीं देखा है . “
“ हाँ , इस बारे में मैंने भी उसके पिता से बात किया था . उनका कहना है कि उनके यहाँ जो मुखाग्नि देता है सिर्फ वही सिर मुंड़वाता है और कोई नहीं .मुखाग्नि उसके साले ने दिया था , उसने सिर मुंडवा लिया था . अब जाओ मेरा सिर न खाओ , हमें और भी बहुत केस देखने हैं . “
इस बीच मोहन की पत्नी ने मोहन की बीमा की रकम के लिए LIC में अपना दावा पेश किया . उसको मोहन की मृत्यु पर जीवन बीमा से अच्छी रकम भी मिली . जल्दी ही मोहन के घर नयी मोटर साइकिल आ गयी और साथ साथ बड़े साइज के टी वी आदि अन्य साज सामान भी आये . उसकी पत्नी के पहनावे या श्रृंगार में कोई कमी या बदलाव नहीं आया था जिससे पता चले कि वह एक विधवा है . गाँव में भी प्रथा के अनुसार कोई श्राद्ध भोज की रस्म नहीं निभाई गयी थी . सीता ने महसूस किया कि जरूर दाल में कुछ काला है . लता के हत्यारे का पता लगा कर उसको सजा दिलवाना ही होगा .
वैसे भी सीता को पुलिस के जवाब से कभी संतोष नहीं हुआ था . उसने मन में दृढ़ निश्चय किया कि वह सच का पता लगा कर ही दम लेगी . उसने भी मोहन की ससुराल का पता लिया . वहां पहुँच कर उसने आस पड़ोस से पूछताछ किया कि मोहन की मौत के बारे में उन्हें क्या पता है . सभी से करीब करीब एक समान उत्तर मिला “ हमें बताया गया कि हैजा से अचानक उसकी मौत हुई थी . श्मशान में सिर्फ उसकी ससुराल वाले ही गए थे . मौत के बाद श्राद्ध आदि जैसा कोई रस्म होते नहीं देखा गया है . सिर भी सिर्फ उसके साले ने मुंडवाया था . हमलोगों से यही कहा गया कि उनके परिवार की प्रथा के अनुसार सिर सिर्फ मुखाग्नि देने वाला ही मुंड़वाता है . . “
इतना सब सुन कर सीता को लगा कि उसका शक सिर्फ निराधार नहीं हो सकता है - मोहन अभी मरा नहीं है . वह अपने गाँव वापस आयी . उसने जा कर इस बारे में एक वकील से भी बात की , वह भी यही बोला “ सिर्फ संदेह पर पुलिस दुबारा कैसे केस दर्ज करेगी . तुम सीधे कोर्ट में जा कर अर्जी दायर करो , जज के सामने अपना पक्ष प्रस्तुत करो . जब कोर्ट से दुबारा जांच का आदेश होगा तब पुलिस को कोर्ट का आदेश मानना ही पड़ेगा . “
“ मालिक , बिना आपकी मदद के मैं कचहरी तक नहीं जा सकती हूँ . आप अर्जी बनाएं , मैं जज साहब को सब बातें विस्तार से बताऊँगी . “
सीता का वकील एक नेक दिल इंसान था , उसने कोर्ट में अर्जी दिया . सीता ने रोते रोते पूरी बातें विस्तार से जज साहब को सुनाई . जज ने कुछ पल सोचने के बाद पुलिस को दोबारा FIR कर छानबीन करने का निर्देश दिया .
एक बार फिर से लता के कत्ल की छानबीन शुरू हुई . कोर्ट में बहस शुरू हुई . बचाव पक्ष (मोहन ) के वकील ने श्मशान के फोटो , दाह क्रिया का प्रमाणपत्र आदि सबूत पेश किया . मुद्दई ( सीता ) के वकील ने चिता पर मोहन का फोटो देख कर कहा “ इसके गले में वह ताबीज नहीं है जो घटनास्थल से मिला था . “
इस बारे में मोहन के परिवार या वकील को कुछ भी पता नहीं था फिर भी उसके वकील ने कहा “ ताबीज शौच करते समय खेत में गिर भी सकता है . “
सीता के वकील ने तुरंत कहा “ जरूर गिर सकता है , पर ठीक उसी जगह और उसी समय जहाँ लता का रेप और मर्डर हुआ हो , वहीँ पर ताबीज का गिरना जरूरी नहीं है . पॉइंट टू बी नोटेड माय लार्ड . “
फिर वकील ने कहा “ घटनास्थल पर जो खुरपी मिली है , वह लता की है . इस खुरपी से उसने मोहन पर वार किया था जिसके चलते इस पर अपराधी के खून के धब्बे भी मौजूद हैं . “
बचाव पक्ष के वकील ने कहा “ काबिल वकील साहब ने कहा है कि इस खुरपी पर मोहन के खून के निशान हैं . पर अभी इसे सिद्ध नहीं किया जा सकता है क्योंकि मोहन जिंदा ही नहीं है . हाँ अगर मेरे काबिल दोस्त मोहन को जिंदा कर अदालत में पेश करें तब उसका सैंपल ले कर हमलोग टेस्ट करा सकते हैं . बिना सैंपल मैच किये उनका कहना निराधार है . “ /
इसके बाद मोहन के पिता को गवाही के लिए बुलाया गया . वकील ने उनसे मोहन के डॉक्टर द्वारा इलाज की पर्ची पेश करने को कहा तब उन्होंने डॉक्टर का दिया डेथ सर्टिफिकेट दिखाई . वकील बोला “ यह तो कोर्ट रिकॉर्ड में भी है , मैंने देखा है . आखिर इलाज के दौरान उसे कुछ दवा दी गयी होगी .उसे हैजा हुआ था तब शायद उसे पानी चढ़ाना पड़ा होगा . मैं डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन यानि इलाज की पर्ची दिखाने को बोल रहा हूँ . “
“ इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है , शायद उसके साले के पास होगा . वही इलाज करा रहा था . “ सीता के वकील ने कोर्ट से कहा “ अब मोहन के साले और जिस डॉक्टर ने मोहन की मृत्यु का प्रमाण पत्र बनाया था उन्हें कोर्ट में बुलाया जाय . “
मोहन का साला कचहरी में हाजिर हुआ पर उसके पास भी इलाज की कोई पर्ची नहीं थी . तब वकील ने कहा “ इसका मतलब बिना दवा दारू और इलाज के आपलोगों ने उसे मरने दिया . पॉइंट्स टू बी नोटेड लार्ड . “
अब जिस डॉक्टर ने मोहन की मृत्यु का प्रमाण पत्र बनाया था उसे कटघरे में बुलाया गया . कोर्ट ने डॉक्टर से मोहन की इलाज का ब्यौरा माँगा . वह भी कुछ देने में असमर्थ था . तब वकील ने पूछा “ फिर आपने डेथ सर्टिफिकेट कैसे दे दिया ? “
“ इधर एक सप्ताह में उस मोहल्ले में हैजे से तीन मौतें हुईं थीं . मोहन के साले से मेरी पुरानी जानपहचान थी और उस पर मैं आँख मूँद कर भरोसा करता था . उस रात वह अचानक आया और बोला - मेरे बहनोई की मौत हो गयी है हैजे से और उसके घर वाले डेथ बॉडी ले कर अपने गाँव जाने वाले हैं . रास्ते में पुलिस स्टेशन पड़ता है , कहीं कोई रोके टोके तो कागजात दिखाना पड़ सकता है .डेड बॉडी टैक्सी पर है आप चाहें तो चल कर देख लें . मुझे उस पर बहुत भरोसा था इसलिए मैंने कोई शक नहीं किया और प्रमाण पत्र दे दिया . “
फिर जज ने दोनों तरफ के अन्य गवाहों को हाजिर करने के लिए कहा . मोहन के वकील ने कुछ बच्चों के पिता का दस्तख किया पेपर पेश किया . उन सभी से एक एक कर पूछा गया , सभी ने एक ही जवाब दिया “ हमें तो मोहन और उसके पिता ने सिर्फ इतना कहा कि यह पेपर हमारे बच्चों की फीस माफ़ करने की अर्जी मात्र है . हमारे भरोसे का गलत इस्तेमाल किया गया है हुजूर . हम उसकी मौत या दाह क्रिया के साक्षी नहीं है . “
अब मोहन के परिवार और उसके वकील के चेहरे का रंग उड़ने लगा था . सीता के वकील ने कोर्ट से कहा “ मोहन की मौत की पुष्टि नहीं की जा सकी है . मैं कोर्ट से अपील करता हूँ कि इसकी सघन इंक्वायरी की जाए . अभी तक मोहन के जितने गवाह मिले हैं सभी ने सत्य को छिपाया है . झूठी गवाही देने , सबूत छिपाने और सबूतों के छेड़छाड़ के लिए इन पर अविलम्ब मुकदमा चलाया जाये और उन्हें सख्त से सख्त सजा दी जाये .”
अगले दिन कोर्ट ने मोहन के माता पिता , पत्नी , साला और डॉक्टर सभी को अरेस्ट करने का आर्डर दिया . उन सभी को कानूनी प्रक्रिया के अंतर्गत सजा मिली .
जीवन बीमा कम्पनी ने भी मोहन और उसकी पत्नी पर जालसाजी से बीमा की रकम लेने के लिए केस किया .
उधर मोहन दूर कहीं उत्तर पूर्व में मजदूरी कर अपना निर्वाह कर रहा था . उसने अपना फोन बंद कर सिम को फेक दिया था . कभी कभी पब्लिक बूथ से घर का हालचाल ले लेता था . उस जब पूरे परिवार के जेल में होने की सूचना मिली तब उसने वापस अपने गाँव आ कर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया . खुरपी पर मिले ब्लड सैंपल भी मोहन के ब्लड ग्रुप से मैच कर रहा था .
मोहन पर बलात्कार , हत्या सहित कुछ अन्य धाराओं के अंतर्गत मुकदमा चला और उसे कठोर आजीवन कारावास की सजा मिली .
सीता देवी के चेहरे पर संतोष का भाव था . अपने वकील से वह बोली “ मेरी बेटी तो मुझे वापस नहीं मिल सकती है . उसके अपराधी को सजा दिलवाने से कम से कम उसकी आत्मा को शांति जरूर मिलेगी . “
THE END
नोट - यह कहानी पूर्णतः काल्पनिक है .