वो जिंदा है 2
Part 2 - अभी तक आपने पढ़ा कि लता को अश्लील चिठ्ठी लिखने के लिए नरेश का नाम स्कूल से काट दिया गया , अब आगे पढें …
नरेश का नाम स्कूल से काट दिया गया . उसके चाचा मोहन को यह खबर तुरंत मिली . उसने हेडमास्टर से रिक्वेस्ट किया कि उसे माफ़ कर दिया जाए पर हेडमास्टर ने कहा “ स्कूल में अनुशासन भी उतना ही जरूरी है . और तुम्हारा भतीजा दो साल से एक ही क्लास में फेल कर रहा है . इतने दिनों में तुमलोग भी उसे सही रास्ता नहीं दिखा सके . अब कुछ नहीं हो सकता है . अगर आगे नरेश के खिलाफ कोई शिकायत मिली तो अभी सिर्फ एक साल के लिए निकाला है , इसके बाद स्कूल से सदा के लिए नाम काट दूंगा और उसे हवालात भी जाना पड़ सकता है . “
हेडमास्टर के फैसले से नरेश और मोहन दोनों बहुत क्रोधित थे . इसके लिए दोनों लता को सबक सिखाना चाहते थे . मोहन ने कहा “ तू चिंता न कर . तुम्हें कुछ नहीं करना है , अब आगे मैं लता से बदला लूँगा . “
जाड़े का दिन था , शाम को जल्दी ही अँधेरा घिर आता था . लता की माँ ने कहा “ आज घर में कोई सब्जी नहीं है , जल्दी से जा कर खेत से कुछ आलू निकाल कर ला , अँधेरा होने जा रहा है . “
लता का खेत घर से थोड़ी ही दूरी पर था . उसे खेत तक जाने में चंद मिनट ही लगे होंगे . वह खेत से निकाले आलू एक थैले में रख कर जल्दी जल्दी घर लौट रही थी . मोहन लता से बदला लेने के लिए मौके की तलाश में लगा था . उस दिन शनिवार था , उसने सोचा कि यही मौका है लता को सबक सिखाने का .
मोहन किसी खेत में घात लगा कर बैठा था . उसने पीछे से आ कर लता का मुंह बांधा और उसे उठा कर पास के गन्ने के खेत में ले गया . लता ने मोहन की पकड़ से अपने को आजाद करने के लिए पूरा प्रयास किया पर एक हट्टेकट्टे पुरुष के आगे एक कम उम्र की कमजोर लड़की लाचार थी . फिर उसने अपनी कमर से खुरपी निकाल कर मोहन पर वार किया . मोहन के एक हाथ पर चोट लगी . मोहन ने गुस्से में आ कर उसके हाथ से खुरपी छीन कर फेंक दिया .फिर उसने लता के साथ अपना मुंह काला किया . इतना ही नहीं मोहन ने उसके कुछ अश्लील फोटो बनाये और कहा “ तुम अपना मुंह बंद रखना . अगर यह बात किसी और के कान में पड़ी तो तुम्हारी खैर नहीं है और ये तुम्हारे फोटो लाखों लोगों तक मिनटों में पहुंचा दूंगा . तुम्हारे पूरे खानदान की इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी . तुम किसी को अपना मुंह दिखाने लायक नहीं रहोगी और तुम्हारी विधवा माँ तुहारी शादी भी नहीं सकेगी . समझ गयी न ? “
मोहन जब जाने लगा तब लता ने चिल्ला कर कहा “ तुम मुझे कायर समझते हो . तुम क्या बताओगे दुनिया को मैं खुद चिल्ला चिल्ला कर बताऊंगी जो दुष्कर्म तुमने मेरे साथ किया है . मैं तुम्हें जेल तक पहुँचाऊँगी . तुम देख लेना . “ इतना बोल कर लता ने शोर मचाना शुरू किया . फिर लता मोहन को अपने पैरों से मारने लगी . मोहन का गुस्सा अब चरम सीमा पर था . उसने सोचा कि इसे जिन्दा छोड़ना ठीक नहीं है . मोहन ने गला दबा कर लता को मार डाला .
इधर लता को घर आने में देर होने से उसकी माँ सीता उसे ढूढ़ने निकली . वह पहले आलू के खेत के पास गयी , वहां बेटी को न देख कर वह चिंतित हुई . वह काफी घबरा गयी थी . थोड़ी दूर जाने पर उसके पैर से कुछ टकराया तो उसने देखा कि वह लता का आलू का थैला था , कुछ आलू जमीन पर भी बिखरे पड़े थे . उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था वह करे तो क्या करे . लता को ज्यादा इधर उधर घूमने की आदत भी नहीं थी . उसने बेटी की दो सहेलियों के घर जा कर भी पूछा पर वहां पर लता के बारे में कुछ भी पता नहीं चला . वह रोती चीखती घर आयी पर रात भर सो नहीं पायी . वह बेटी का इंतजार करती रही , जरा सी आहट पर तुरंत जा कर दरवाजा खोल कर देखती पर हर बार निराशा ही हाथ लगती थी .
सुबह तड़के सीता को अपने घर के बाहर कुछ लोगों की आवाजें सुनायी दी . एक दो आदमी जो सुबह शौच के लिए निकले थे , वे गन्ने के खेत में किसी लड़की की लाश देखने की बात कर रहे थे . यह सुन कर सीता बहुत डर गयी , वह दौड़ी दौड़ी गन्ने के खेत पर गयी . उसने खेत में अपनी बेटी की लाश देखी . लता की लाश के पास ही में एक ताबीज और उसकी खुरपी पड़ी थी . उसने ताबीज उठा कर अपनी गिरह में बाँध ली . उसने ऐसा ताबीज मोहन को गले में पहने भी देखा था . घटना की सूचना मिलते पर तब तक पुलिस भी घटनास्थल पर आ गयी . उसने पास पड़ी खुरपी अपने पास रख ली . सीता तो यह सब देख कर बेहोश हो गिर गयी .
पड़ोस के गाँव में सीता का बड़ा भाई रहता था . गाँव के एक आदमी ने मोटर साइकिल से जा कर लता के मामा को इस दुखद घटना की खबर दी . खबर मिलते ही मामा अपने बेटे के साथ बहन के घर आया . खैर जो होना था वह तो हुआ ही . लता के ममेरे भाई ने मुखाग्नि दिया और लता का दाह संस्कार पूरा हुआ . लता का पूरा परिवार बहुत दुखी था पर नियति के आगे किसी का वश नहीं चलता है .
इधर मोहन ने घर आकर अपने पिता को यह घटना बताई . उस के पिता ने उसे तुरंत गाँव से भागने की सलाह दी .
उधर पुलिस ने अपनी करवाई भी शुरू की . पुलिस ने जब सीता से पूछा कि उसे किसी पर शक है तो उसने मोहन का नाम लिया और उसका ताबीज, जो घटनास्थल से उसे मिला था , दिखाया . पुलिस जब मोहन के घर पूछताछ करने गयी तब उसके पिता से दरोगा ने पूछा “ मोहन कहाँ है ? मोहन से लता की हत्या के बारे में पूछताछ करनी है . लता के परिवार वालों को उस पर लता की हत्या करने का शक है . “
पिता ने कहा “ यह कैसे हो सकता है ? मोहन तो गाँव में है ही नहीं , वह अपनी पत्नी और बेटे के साथ कल ही ससुराल गया है . हमलोगों को रात में फोन से सूचना मिली है कि उसे हैजा हो गया है . उसकी तबीयत कुछ ज्यादा खराब है . वैसे तो उसे सोमवार सुबह को लौटना है पर अब शायद वह सोमवार को नहीं लौट सके . “
दरोगा बोला “ वह जैसे ही आये उसे थाने भेज देना . “
सोमवार को सुबह सुबह दरोगा फिर मोहन के घर आया तो घर पर ताला लगा था . पड़ोस में पूछताछ करने पर पता चला कि सभी लोग मोहन के ससुराल गए हैं , उसकी तबीयत बहुत ख़राब थी . पुलिस ने मोहन की ससुराल का पता लगाना चाहा पर तुरंत कुछ पता नहीं चला .
उधर मोहन के ससुराल में लोगों ने मोहन को बचाने के लिए एक अलग प्लान बनाया था . सोमवार देर रात को श्मशान में अर्थी में कफ़न में लिपटे मोहन को ले गए . चिता पर लेटे कफ़न में उसका फोटो लिया और इसके तुरंत बाद नाटकीय ढंग से मोहन वहां से निकल भागा . फिर चिता में आग लगा कर मोहन को जलाने का नाटक किया गया . श्मशान से उसकी दाह क्रिया का एक सर्टिफिकेट भी ले लिया . इसके अलावे कस्बे के एक डॉक्टर से भी एक मोटी देकर हैजे से उसकी मौत होने का सर्टिफिकेट भी बनवा लिया . इस तरह मोहन ने अपनी मौत का नाटक रचा और कानून के अनुसार उसकी मृत्यु का औपचारिक प्रमाण पत्र भी बनवा लिया गया . पुलिस के मोहन की ससुराल पहुँचने के पहले ही कानून की नजर में मोहन मर चुका था . कुछ दिनों के बाद मोहन के घर वाले अपने गाँव लौट आये .
क्रमशः ( अंतिम भाग में )