जिंदगी की दूसरा किनारा
पार्ट 2
और
वही डॉक्टर उस लड़की को देखते हुए
अपने दोनों हाथों को नीचे टेबल पर रख देता है
और अपनी बातों को आगे बढ़ते हुए मुस्कुराते हुए कहता है
कभी मत सोचो कि तुम मरने वाली हो
यह सोचो कि तुम जिंदा दिल हो
और तुम्हें बस इस पल में जीना है
डॉक्टर जानता है कि वह लड़की दुखी है
पर वह सोच रहा है
ना उम्मीदें जिंदगी से अच्छा है
कि कोई उम्मीद हो बस लोग इस पल को काटना सीखे
जिंदगी अपने आप कट जाएगी
और
डॉक्टर उसे समझाने की कोशिश करता है
जीने का नजरिया बदलने की कोशिश करता है
पर वही लड़की में उम्मीद ना के बराबर दिख रही है
उसे देखकर ऐसा लगता है
कि वह बस सोना चाहती है
पलकों को बंद करना चाहती है
और खामोश हो जाना चाहती है
और तभी डॉक्टर अचानक से कहते हुए
ठहर जाता है
और फिर उस लड़की को देखते हुए
कुछ सेकेंड बाद
हल्के हाथ उस लड़की की तरह बनाते हुए
हल्की आवाज में कहता है।
है
डॉक्टर का कहने का मतलब था
कि सही से बैठो और मेरी बातें सुनो
और तभी डॉक्टर की सारी समझते ही
वह लड़की सीधे होते हुए टेबल से अपने हाथ हटाते हुए
कुर्सी पर ठीक से बैठ जाती है
और खाली फुंसी अधूरी मुस्कान मुस्कुराती है
और मुस्कुराते हुए कुछ सेकंड ठहर जाती है
और फिर उसके बाद डॉक्टर को देखते हुए
उदासी पान में
और हल्की ठेहराऊ भरी आवाज से कहती है
डॉक्टर यह सब बोरिंग है
मैं बस सोना चाहती हूं
शायद हमेशा के लिए
यह कहते हुए वह लड़की अपने दाएं हाथ उठाते हुए
अपने आधे चेहरे पर रखते हुए
और जोर से दबाकर फिरते हुए नीचे करता है
और फिर मुस्कुराती है
और वही डॉक्टर उस लड़की को देखते हुए
उस लड़की को मुस्कुराते हुए देखते हैं
और उनकी बातें सुनते हुए
फिर से मुस्कुराता है
और फिर से मुस्कुराते हुए
अपनी बातों को आगे बढ़ते हुए कहता है
मौत क्या है आज या कल तो आना ही है
और मौत से कौन डरता है
मौत की ख्याल छोड़कर जी भर इस पाल को जियो
बस जो तुम्हारे पास अभी है इस वक्त है
और
वही वह लड़की अपने हाथ को नीचे करते हैं
उस डॉक्टर की तरफ देखते हुए
मुस्कुराना छोड़ कर
उदासीपन से भर जाती है
और वही डॉक्टर उस लड़की से बातें करते हुए
अचानक से ठहर जाता है
और फिर कुछ सेकेंड तक उस लड़की को देखते हैं
और फिर से अपनी बातों को आगे बढ़ते हुए
ठेहराऊ भरी लहजे में कहता है
तुम्हारी सांसों पर किसी का जोर नहीं
तुम कोई चीज नहीं हो
तुम एक इंसान हो
तुम पर बस तुम्हारा हक है
और इस हक से
खुद पर अपना हक जमाओ
और वही करो जो तुम्हें पसंद है
और
वह लड़की डॉक्टर को देखते हुए
अचानक से
और घूरते हुए देखने लगती है
और हल्की सी मुस्कुराती है
और फिर देखते हुए गंभीर होकर
धीमी लहजे में कहती है
डॉक्टर क्या सच में मैं मरने वाली नहीं हूं
और लड़की की बातें इतनी मासूमियत से भरी हुई थी
कि
डॉक्टर उस लड़की की बातें सुनकर
अपने दाएं हाथ टेबल से उठाते हुए होठों पर रखता है
और हाथ को होठों पर रखते हुए
कुछ देर शांत रहतें हैं
और वही वह लड़की सवाल करने के बाद
बड़ी ही गंभीरता से डॉक्टर की तरफ देख रही है
जैसे कि उसे शक हो कि वह बहुत ज्यादा बीमार है
और डॉक्टर उसे कह रहा हो तुम बीमार नहीं हो
और वह खुद पर शक करते हैं
डॉक्टर से बड़ी मासूमियत से यह सवाल करती है
और वही डॉक्टर कुछ देर के बाद अपने होठों पर से अपने हाथ को नीचे करते हुए
और उस लड़की को देखते हुए
और हल्के जोरों से हंसने लगतें हैं
और वही डॉक्टर को हंसते हुए देखकर
वो लड़की बड़ी मासूमियत से
हल्के चेहरे को सीकोड़कर मुंह बनाते हुए
डॉक्टर को देखते हुए
हल्की मासूमियत भरी आवाज के साथ कहती है
डॉक्टर आप हंस क्यों रहे हैं
मैं सचमुच में पूछा
और वही
डॉक्टर उस लड़की के बातें सुनते हुए
और उसकी मासूम चेहरा देखते हुए
फिर से अपने हाथ को उठाकर अपने होंठों पर रखता है
और मुस्कुराता है
और मुस्कुराते हुए हल्की ऊंची लेहजे में कहता है
तुम कितनी नादान हो
और वही वह लड़की गल फूलते हुए
बड़ी मासूमियत से डॉक्टर की तरफ देख रही है
उनके बातें सुनते हुए
और वही फिर डॉक्टर अपनी होठों पर से हाथ हटाते हुए
अपने हाथ को नीचे करता है
और हल्के मंडी को झुकते हुए
अपने हाथ बराकर टेबल पर रखी हुई
टेबल पर रखी हुई पेन को उठना है
और सामने परी पेपर पर कुछ लिखते हुए
उस लड़की से कहता है
मैंने सारी दवाइयां लिख दी है
और फिर लिखते हुए हल्के सर उठाकर
उस लड़की की तरफ देखते हुए कहता है
घबरा मत
टाइम पर बस दवाइयां लेते रहना
और काम के अलावा कभी-कभी
यहां वहां जाओ घूमो फिर
और खुश रहो
और
वही वह लड़की डॉक्टर को देख रही है
खामोशीमां से
और डॉक्टर यह कहते हुए
अचानक से पेन को अपने हाथों से वही रखता है
और पेपर को अपने हाथों से उठाते हुए
उस लड़की की तरफ बढ़ते हुए
पेपर को उस लड़की के तरफ देता है
और हल्के लहजे में कहता है
तुम ठीक हो जाओ गी
और तभी वह लड़की हल्की सी मुस्कुराती है
और ब्रांच पर हाथ रखकर कुर्सी से उठाते हुए
डॉक्टर को देखते हुए
अपने हाथ डॉक्टर के हाथों की तरफ बढ़ाते हुए
उनके हाथों से पेपर लेता है
और मुस्कुराते हुए हल्की लहजे में कहती है
ठीक है डॉक्टर
और वही डॉक्टर भी उस लड़की को देखते हुए
और पेपर अपने हाथों से छोड़ते हुए
हल्के सीधे होते हैं
और
वही वह लड़की पेपर को अपनी तरफ लाते हुए
ऊंट खड़ी होकर थोड़ी साइड होती है
और डॉक्टर को देखते हुए
हल्की लहजे में डॉक्टर से कहती है
अब मैं चलती हूं
और वह डॉक्टर उस लड़की के तरफ देखते हुए
हल्के सीधे होते हैं
खड़ा होने की कोशिश करते हुए मुस्कुराते हुए
हां भरता है
और वही वह लड़की अचानक से मूरते हुए
मुस्कुरा कर
वहां से अपने कदम बढ़ाते हुए
उस कमरे से बाहर जाने लगती है
और वही वह डॉक्टर उसे लड़की को जाते हुए
गंभीरता से देखा है
और यह सिन यही खत्म हो जाता है
अगर यह कहानी आप सबको अच्छी लगे तो आगेपढ़ते रहिए
और कहानी कैसे रही कमेंट में बताना मत बोलिएगा
मैं आपकी प्रिय लेखक अभीनिशा❤️🦋💯