एपिसोड 18: सच की कड़वाहट और अहंकार का वार
अस्पताल के वेटिंग एरिया में रात का सन्नाटा गहरा गया था। ज़ोया सो रही थी। ज़ारा और अज़ीम खिड़की के पास खड़े बाहर की धुंधली रोशनी को देख रहे थे। ज़ारा की आँखों में एक अजीब सी नरमी थी।
ज़ारा और अज़ीम की बातचीत:
"अज़ीम," ज़ारा ने धीरे से पूछा, "ज़ोया जैसी चंचल और ज़िद्दी लड़की तुम्हें कैसे पसंद आ गई? और उसे तुममें ऐसा क्या दिखा कि उसने अपनी जान तक की परवाह नहीं की?"
अज़ीम मुस्कुराया, एक सादगी भरी मुस्कान। "मैम, पसंद आने के लिए वज़ह की ज़रूरत नहीं होती। वह पहली बार जब दरिया के किनारे आई थी, तो किसी शहज़ादी की तरह नहीं, बल्कि एक प्यासे परिंदे की तरह लग रही थी। उसे दौलत की नहीं, 'वक्त' की भूख थी। और मुझे... मुझे उसकी वो खामोशी पसंद आ गई जो उसके महँगे लिबास के पीछे छिपी थी। वह मुझसे बातें नहीं करती थी, वह अपनी रूह का बोझ हल्का करती थी।"
ज़ारा ने गहरी साँस ली। "उसने मुझे बताया कि तुम्हारी छोटी सी दुकान में उसे वो सुकून मिला जो उसे इस महल में कभी नहीं मिला। अज़ीम, तुम सच में बहुत अलग हो।"
मिस्टर खन्ना का जहर और ज़ारा का अपमान
अज़ीम कुछ कहने ही वाला था कि उसे बाहर की ताज़ी हवा की ज़रूरत महसूस हुई। वह जैसे ही गलियारे की ओर बढ़ा, सामने मिस्टर खन्ना खड़े थे। ज़ारा अभी अंदर ही थी।
मिस्टर खन्ना की धमकी:
मिस्टर खन्ना ने अज़ीम का रास्ता रोका और नफरत से फुसफुसाए, "सुनो लड़के! तमाशा बहुत हो गया। अब ज़ोया खतरे से बाहर है। ये लो अपनी कीमत और अभी इसी वक्त यहाँ से दफा हो जाओ। मुझे पता है तुम किस ताक में हो। मेरी बेटी के ज़रिए तुम मेरी दौलत तक पहुँचना चाहते हो, लेकिन याद रखना, मैं तुम्हें अपनी चौखट की धूल भी नहीं छूने दूँगी।"
अज़ीम की आँखों में स्वाभिमान की चमक जागी। "साहब, आपकी दौलत आपके लिए बहुत बड़ी होगी, मेरे लिए यह मिट्टी से ज़्यादा कुछ नहीं। मैं यहाँ आपकी तिजोरी के लिए नहीं, बल्कि ज़ोया साहिबा के उस वादे के लिए रुका हूँ जो मैंने उनसे किया था—कि जब तक वह ठीक नहीं हो जातीं, मैं उन्हें छोड़कर कहीं नहीं जाऊँगा। और अज़ीम अपना वादा नहीं तोड़ता।"
वह थप्पड़ जिसने सब कुछ बदल दिया
शोर सुनकर ज़ारा बाहर आ गई। उसने अपने पिता की गिरी हुई हरकत और अज़ीम के साथ उनकी बदतमीजी देख ली।
ज़ारा का विस्फोट:
"डैड! बस कीजिए!" ज़ारा चिल्लाई। "आप कितने गिर सकते हैं? यह इंसान आपकी बेटी की जान बचाकर खड़ा है और आप अभी भी इसे 'दौलत का लालची' कह रहे हैं? आप बहुत बुरे हैं मिस्टर खन्ना! मैं आपको छोड़ूँगी नहीं, आपकी इस साख और घमंड को मैं मिट्टी में मिला दूँगी! आप एक नाकाम पिता हैं!"
मिस्टर खन्ना का चेहरा गुस्से से तमतमा उठा। अपनी ही बेटी के मुँह से ऐसे शब्द सुनकर उनका आपा खो गया।
सन्नाटा और प्रहार:
अचानक गलियारे में एक गूँज उठी— 'चटाख!'
मिस्टर खन्ना ने ज़ारा के चेहरे पर एक ज़ोरदार थप्पड़ जड़ दिया। ज़ारा का चेहरा एक तरफ झुक गया, उसके बाल बिखर गए। अज़ीम सन्न रह गया। पूरे अस्पताल स्टाफ की नज़रें वहीं जम गईं।
ज़ारा ने धीरे से अपना हाथ अपने गाल पर रखा। उसकी आँखों में अब आँसू नहीं थे, बल्कि एक ऐसी नफरत थी जो मौत से भी ठंडी थी। उसने सिर उठाया और अपने पिता की आँखों में देखते हुए बेहद शांत आवाज़ में कहा:
"यह थप्पड़ आपने मुझे नहीं मारा मिस्टर खन्ना... यह आपने अपने साम्राज्य के ताबूत में आखिरी कील ठोंकी है। आज से आप मेरे पिता नहीं, बल्कि मेरे सबसे बड़े दुश्मन हैं। कल सुबह का सूरज आपकी बर्बादी की खबर लेकर आएगा। अब आप अपनी दौलत को बचाकर दिखाइये, क्योंकि मैं इसे आग लगाने आ रही हूँ।"
मिस्टर खन्ना का हाथ कांपने लगा। उन्हें अहसास हुआ कि उन्होंने ज़ारा को नहीं, बल्कि अपनी आखिरी ढाल को भी खुद से दूर कर दिया है।
सुल्तान की वापसी — शोहर अख्तर
अस्पताल के उस सुनसान कोने में ज़ारा अकेली बैठी थी। उसके गाल पर उँगलियों के लाल निशान अब नीले पड़ने लगे थे, पर उसकी आँखों में छाई खामोशी किसी बड़े कत्लेआम का संकेत दे रही थी। अज़ीम दूर खड़ा बेबसी से उसे देख रहा था, क्योंकि वह जानता था कि एक बेटी के लिए पिता का हाथ सबसे गहरा घाव देता है।
लंदन का मंजर: शोहर अख्तर का क्रोध
इधर, लंदन के सबसे ऊँचे टावर के टॉप फ्लोर पर बैठा शोहर अख्तर—जिसकी हुकूमत आधी दुनिया के बिज़नेस पर चलती थी—अपने हाथ में पकड़ा क्रिस्टल ग्लास चकनाचूर कर देता है। उसे इंडिया से खबर मिल चुकी थी कि उसकी ज़ारा पर हाथ उठाया गया है।
वह अपने मेंशन में बिजली की तरह दाखिल होता है। उसके सामने उसके सबसे ट्रेंड (Trained) बॉडीगार्ड्स की कतार खड़ी थी। शोहर की आँखों में वो नफरत और खूँखार चमक थी जिसे देखकर मौत भी रास्ता बदल ले।
"ज़ारा कहाँ है?" शोहर की आवाज़ किसी ठंडी आरी की तरह गूँजी।
"सर... मैम इंडिया गई हैं। कुछ पारिवारिक एमरजेंसी थी, इसलिए हमें बिना बताए..." बॉडीगार्ड का गला सूख गया।
'चटाख!' — शोहर ने उस बॉडीगार्ड को एक ऐसा ज़ोरदार थप्पड़ जड़ा कि वह फर्श पर जा गिरा।
"क्या तुम इस बात का इंतज़ार कर रहे थे कि उसे कुछ हो जाए, तब उसकी सुरक्षा करोगे? अगर मेरी ज़ारा को एक खरोंच भी आई, तो तुम सबकी सात पुश्तों की लाशें भी नहीं मिलेंगी!"
अस्पताल का अधिग्रहण और शोहर की एंट्री
शोहर अख्तर ने एक ही फोन कॉल पर उस पूरे अस्पताल को खरीदने का ऑर्डर दे दिया। अगले ही पल, इंडिया के उस शहर के आसमान में तीन प्राइवेट हेलीकॉप्टर्स की गड़गड़ाहट सुनाई दी।
अस्पताल में खौफ:
अस्पताल का डीन और पूरा स्टाफ पसीने से तर-बतर होकर गेट पर खड़ा था। शोहर अख्तर अपनी लंबी काली ओवरकोट पहने, हाथ में सिगार लिए अस्पताल के गलियारे में दाखिल हुआ। उसके पीछे काली वर्दी में कमांडोज की एक पूरी फौज थी।
मिस्टर खन्ना, जो अभी भी अपने अहंकार में गलियारे में टहल रहे थे, शोहर को देखकर ठिठक गए। उन्हें लगा था कि वह इस शहर के बेताज बादशाह हैं, पर शोहर के सामने वह एक मामूली प्यादे की तरह लग रहे थे।
शोहर और ज़ारा का मिलन:
शोहर सीधा उस कोने में गया जहाँ ज़ारा अकेली बैठी थी। उसने ज़ारा के चेहरे पर वो निशान देखा। शोहर का जबड़ा भिंच गया और आँखों में खून उतर आया। उसने ज़ारा को सहारा देकर खड़ा किया।
"किसने?" शोहर ने सिर्फ एक शब्द पूछा, पर उस शब्द में मौत की गूँज थी।
ज़ारा ने खामोशी से मिस्टर खन्ना की तरफ देखा। शोहर धीरे से मुड़ा। मिस्टर खन्ना के बॉडीगार्ड्स ने रास्ता रोकना चाहा, पर शोहर के कमांडोज ने उन्हें एक पल में घुटनों पर ला दिया और उनकी बंदूकें छीन लीं।
शोहर की चेतावनी:
"मिस्टर खन्ना," शोहर ने बेहद धीमी और डरावनी आवाज़ में कहा। "आपने जिसे थप्पड़ मारा है, वह सिर्फ आपकी बेटी नहीं है। वह शोहर अख्तर की जागीर है, मेरी रूह है। आपने अपनी बर्बादी के वारंट पर खुद दस्तखत किए हैं। यह अस्पताल अब मेरा है, यह शहर अब मेरा है। आज के बाद आप अपनी दौलत को नहीं, अपनी जान को बचाने की दुआ माँगिये।"
मिस्टर खन्ना का अहंकार अब धूल में मिल चुका था। उन्हें पहली बार अहसास हुआ कि उन्होंने जिस आग से खेलने की कोशिश की है, वह अब उन्हें ज़िंदा जला देगी।