( विज्ञानवाद)
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विज्ञान का अर्थ है विशेष ज्ञान, विशेष ज्ञान वह है, जो जीवन को जानने समझने में उपयोगी है। विज्ञानवाद के ४ स्तंभ है।
#१.भरम ---(आंतरिक और बाह्य)
(१) गलतफहमी
(२) कहानी
#२.सापेक्ष (व्यहवार)----( आंतरिक और बाह्य)
(१) किसी आधार पर टीका हुआ।
(२) किसी के द्वारा जाना और समझा गया।
#३.निरपेक्ष ( आत्मबोध)
(१) बोध - आंतरिक और बाह्य
(२) मृत्यु - बाह्य
#४.संसार के यथारूप से मुक्त होना।
(मोक्ष)
(१) निर्वाण- आंतरिक
(२) समाधि - आंतरिक
व्यहवार, और आत्मबोध की संभावनाओं से बना जीवन एक ही निश्चित गति को प्राप्त है, वह है मृत्यु। भरम में कुछ अमर होने की संभावना है, व्यहवार और आत्मबोध नश्वर है। और भरम ही व्यवहार, आत्मबोध की संभावनाओं का मूल उत्पन्न करता है।
इसी लिए भरम या कहानी पीढ़ी दर पीढ़ी चलते रहते है, उस से नई संभावनाए जन्म लेती है। भरम को विचार कहा गया है। विचार को ही विज्ञान,मन, भाग्य,साइकी,माया , idea,Life Script, कहा गया है। इसी लिए मन को देखा नहीं जा सकता।
व्यक्ति गलतफहमी और कहानी के अनुसार चलता है, इसी गलतफहमी और कहानी में उतार चढ़ाव और द्वंद्व उत्पन्न होते है। जब व्यक्ति गलतफहमी और कहानी को यथारूप जान लेता है, वह बोध को उपलब्ध होता है। मृत्यु को इस स्क्रिप्ट का अंत माना गया है, और इस स्क्रिप्ट को जीवन रहते हुए ,कहानी जानने वाला सुलझा हुआ, जानने वाला व्यक्ति कहा जाता है। जानने वाला व्यक्ति न बंधा हुआ है, न मुक्त है। वह केवल एक पात्र है।
बच्चे के जन्म के बाद उसके मस्तिष्क में कहानी रची और रचाई जाती है, जिसमें समाज,परिवार,धर्म,सरकार,विश्व, इतिहास, पर्यावरण ,युद्ध,महामारी जैसे महत्वपूर्ण घटक काम करते है, उसकी संगत और अपने कर्म भी महत्वपूर्ण घटक है। यही घटक जीवन में उठा पटक लाते है। चाहे आप इस विचार को अमर समझो या नश्वर इसका एक चक्र है और इसी चक्र को विश्व कहा गया है।
(मोक्ष की धारणा और आस्तिक मार्ग)
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कुछ लोग इस स्क्रिप्ट को अनंत मानते है, मतलब एक कहानी खत्म तो दूसरी शुरू होती है, और यह चक्र को जन्म और पुनःजन्म का चक्र माना गया हैं। व्यक्ति को एक से दूसरी स्क्रिप्ट के साथ बांधने वाला घटक कर्म है, और कर्म से उत्पन्न पाप और पुण्य की अवधारणा भी मानी गई है। इस जन्म मरण के चक्र में बंधा हुआ जीव संसारी होता है, इसी से मुक्त होने के बहुत मार्ग है, जिसमें एक मार्ग अष्टांग योग है। जो इस मार्ग को उपलब्ध होकर जन्म मृत्यु रूपी चक्र से मुक्त हो गया वह समाधि प्राप्त योगी मोक्ष मार्गी माना गया है, वह मुक्त है, वैरागी है, वह फिर से ऐक्टिंग नहीं करता। यानी फिर से गलत फहमी या कहानी नहीं पालता। बोध या समाधि कुछ लोगों को प्राप्त होती है वह बुद्ध पुरुष, संत, महात्मा कहलाते है। अंतहीन जन्मों का चक्र और मोक्ष का मार्ग प्राचीन मार्ग है, जिसे सनातन, जैन और बुद्ध मत ने अलग अलग तरीके से स्वीकार किया गया है। समाधि से मोक्ष की और जाने वाले मार्ग को आस्तिक मार्ग माना गया है, और ईश्वर को इस मार्ग का मूल माना गया है। कुछ लोग ईश्वर को प्राप्त करने हेतु अलग अलग प्रकार के उपाय करते है। ईश्वर को पाना ही समाधि प्राप्त करना है, यह धारणा भी प्रचलित है, भक्ति योग का मार्ग यह स्पष्ट करता है। जो निर्वाण या समाधि को प्राप्त हुए है उनके विचार या उनके सिखाए मार्ग अमर है, उनको बोधिसत्व, परमात्मा, तीर्थंकर , परब्रम्ह कहा गया है।
(तर्कबोध और नास्तिकता)
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नास्तिकता एक मार्ग है ,जो तर्क देता है कि कहानी में बंधन और मुक्ति दोनों ही कहानी है, दूसरे शब्दों में बंधन और मुक्ति भी एक प्रकार का विरोधाभास है।
भरम से लेकर मोक्ष तक सारा पुरुषार्थ कहानी ही है। मोक्ष के रस्ते पर चलकर निर्वाण या समाधि का रास्ता भरम से सदा के लिए मुक्त होना नहीं है। जैसे एक जादूगर अपने खेल को जानता है, फिर भी वह खेल दिखाता ही है। वह भरम दिखा कर ही मनोरंजन करता है। इसी लिए समाधि या निर्वाण को प्राप्त हुए विचार भी मुक्त नहीं है, वह अलग तरह के विरोधाभास को प्राप्त हुए है। और ईश्वर की अवधारणा तो छोटे भरम से मुक्त होने के लिए बड़ा भरम पालने जैसी है, क्योंकि जहाँ राम और शंकर की धारणा है वहां भूत ,प्रेत ,पिशाच आदि उपद्रवों की भी धारणा है, जहां भगवान की धारणा है, वहां शैतान की भी धारणा है।
इसी लिए आस्तिकता का मार्ग छोटी गलतफहमी को मिटाने के लिए बड़ी गलतफहमी को पालने का मार्ग है।
कहानियाँ अमर रहेंगी, इनके विचार भी परन्तु छोटी कहानियों के पार बड़ी कहानियों से जाने की बात का मार्ग पुराना है। पुराने विचार प्रेरणादाई हो सकते है परंतु उपद्रवी भी।
विज्ञान वाद अपनी स्क्रिप्ट में जो भी लिखा गया है, वह जानने का एक प्राचीन मार्ग है।