वो नंबर सात घंटे से मीरा के हाथ पर था। स्याही थोड़ी सी फैल गई थी — जैसे वो भी सीधी रहना नहीं चाहती थी।
मीरा विरासत क्षेत्र 4 की एक चाय की दुकान के बाहर बैठी थी। प्लास्टिक की कुर्सी। उसके सामने एक कप था जो अब ठंडा हो चुका था। उसने उसे छुआ नहीं था। उसका दिमाग कहीं और था — उस चार-शब्द के संदेश में, उस फ़ाइल नंबर में, उस बात में जो संभव ही नहीं होनी चाहिए थी।
मेमवॉल्ट का तंत्र बंद था। सरकार द्वारा प्रमाणित। कोई भी खरीदी हुई याद तक नहीं पहुँच सकता था — सिर्फ खरीदार। यह नियम था। यह कानून था। और फिर भी किसी ने यह संदेश छोड़ा था।
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फ़ाइल नंबर एक सामान्य मेमवॉल्ट लेनदेन पहचान संख्या थी — लेकिन आखिरी चार अंक अलग थे। सामान्य पहचान संख्याओं में सिर्फ अंक होते हैं। ये चार अक्षरांकीय थे: X-7-R-9।
मीरा ने अपना फ़ोन निकाला। मेमवॉल्ट का सार्वजनिक पोर्टल खोला। लेनदेन पहचान संख्या डाली। तंत्र ने एक पल लिया — फिर:
त्रुटि 404: फ़ाइल नहीं मिली। यह लेनदेन अस्तित्व में नहीं है।
लेकिन वो तो अभी — तीन घंटे पहले — वहाँ थी। उसने खुद वो फ़ाइल हस्ताक्षर की थी।
हाथ में नंबर। तंत्र में कुछ नहीं। जैसे वो कभी गई ही नहीं थी।
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"बैठो।" एक आवाज़ आई — धीमी, लगभग फुसफुसाहट। मीरा ने नज़र उठाई। एक लड़का था, शायद उससे थोड़ा बड़ा — 24-25 साल का। गहरे रंग की हुडी। चेहरा साधारण था, वो किस्म जो भीड़ में घुल जाती है। लेकिन आँखें नहीं घुलती थीं। वो देख रहा था जैसे पहले से जानता था वो क्या सोच रही है।
उसने बिना अनुमति के सामने वाली कुर्सी पर बैठकर अपना हाथ मेज़ पर रखा — एक मुड़े हुए कागज़ के साथ।
"मैंने तुम्हें वो पर्चा दिया था," उसने कहा। "मेमवॉल्ट में।"
मीरा की पहली प्रतिक्रिया थी उठना और भागना। दूसरी प्रतिक्रिया थी यह समझना कि वो पहले से भाग सकती थी — तीन घंटे से। लेकिन वो यहाँ बैठी थी। क्योंकि उसका एक हिस्सा जानना चाहता था।
"कौन है तू?" उसने पूछा। आवाज़ सपाट रही। अच्छी बात।
"मेरा नाम अर्जुन है।" उसने कागज़ सीधा नहीं किया। "और मैं वो इंसान हूँ जिसने पिछले महीने अपनी बहन की यादें खरीदी थीं — मेमवॉल्ट से।"
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चुप्पी। चाय की दुकान में कोई पुराना बॉलीवुड गाना बज रहा था — 2040 के दशक का कोई धुन, बिगड़े हुए लाउडस्पीकर से। बाहर होलोग्राम टिमटिमाते रहे। ज़िंदगी सामान्य थी। सिर्फ इस मेज़ के पास नहीं।
"बहन की यादें खरीदीं?" मीरा की आवाज़ में पहली बार कुछ दरार आई। "वो—"
"हाँ। कानूनी खरीद। मेमवॉल्ट प्रमाणित।" अर्जुन ने आखिरकार कागज़ खोला — एक छपी हुई लेनदेन रसीद थी। "लेकिन जब मैंने उसे देखना चाहा... वो यादें असली नहीं थीं।"
मीरा ने रसीद देखी। नाम के खाने में: विक्रेता: प्रिया वर्मा। खरीदार: अर्जुन वर्मा।
"वो यादें संपादित की गई थीं," अर्जुन ने कहा। "कुछ काट दिया गया था उनसे। ज़रूरी चीज़ें। और जो बचा था — वो एक संदेश था। मेरे लिए।"
"अगर यह पढ़ रहा है — तो वो लोग मुझे पहले से ढूँढ रहे हैं। तुम्हें भी ढूँढेंगे। X-7-R-9 को मत भूलना।"
मीरा का हाथ अपने आप अपनी कलाई पर गया — जहाँ वो नंबर लिखा था।
"तेरी यादों में भी वही कोड था?" अर्जुन ने सीधे पूछा।
उसने जवाब देने से पहले एक पल लिया। सिर्फ एक पल।
"हाँ।"
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अर्जुन ने अपनी जेब से एक छोटी सी चीज़ निकाली — पारदर्शी, अँगूठे के आकार की। उस पर मेमवॉल्ट का चिह्न था, लेकिन रंग अलग था। आधिकारिक इकाइयाँ नीली होती थीं। यह गहरी लाल थी।
"यह मेमवॉल्ट की काला बाज़ार इकाई है," उसने बिना किसी भाव के कहा। "इससे कोई भी बंद फ़ाइल तक पहुँच सकता है — सिर्फ 60 सेकंड के लिए। उसके बाद यह खुद नष्ट हो जाती है।"
"और तू चाहता है मैं अपनी फ़ाइल देखूँ।" यह सवाल नहीं था।
"नहीं।" अर्जुन ने चीज़ वापस रखी। "मैं चाहता हूँ तू समझे कि तेरे अंदर अभी भी कुछ है — जो तूने नहीं बेचा। जो वो लोग चाहते हैं।" उसने उठते हुए कहा: "और जो उन्होंने पहले से तेरी यादों में डाल दिया था — तुम्हें पता चले बिना।"
वो उठने लगा।
"रुक।" मीरा की आवाज़ अब सपाट नहीं थी। "वो लोग कौन हैं?"
अर्जुन एक पल के लिए रुका। मुड़ा नहीं। बस इतना बोला:
"मेमवॉल्ट के संस्थापक। और वो संगठन जो उन्हें असल में चलाता है — जिसका नाम किसी सरकारी दस्तावेज़ में नहीं है।"
फिर वो भीड़ में घुल गया। जैसे आया था — बिना किसी लहर के।
मीरा के हाथ में अभी भी वो नंबर था। X-7-R-9।
और पहली बार उस दिन — उसने चाय का कप उठाया। ठंडा था। उसने पिया फिर भी।
क्योंकि कुछ तो महसूस करना था।