भिखारी का राज Raju kumar Chaudhary द्वारा प्रेरक कथा में हिंदी पीडीएफ

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भिखारी का राज

“जिसे उसने ‘भिखारी’ समझकर पानी तक नहीं दिया… अगले ही दिन वही आदमी निकला पूरे मॉल का नया मालिक!”


ग्रैंड प्लाज़ा मॉल के अंदर एक दुकान थी लक्स एंपोरियम। डिज़ाइनर बैग्स, महंगे जूते और लाखों रुपये के ब्रांडेड सामानों के लिए यह पूरे शहर में मशहूर थी। लेकिन उस दुकान की सबसे मशहूर चीज़ कोई बैग या जूता नहीं था… बल्कि एक लड़की थी।


उसका नाम था शीला।


दुकान के कर्मचारी उसे मज़ाक-मज़ाक में “क्वीन बी” कहते थे। और सच कहें तो उसे यह नाम बिल्कुल पसंद था। लंबी कद की, बेहद सुंदर, हमेशा महंगे परफ्यूम की खुशबू में डूबी हुई—शीला दुकान की टॉप सेल्स लेडी थी। हर महीने उसका ही नाम सेल्स बोर्ड के ऊपर लिखा होता।


लेकिन उसकी एक और पहचान भी थी…

घमंड।


शीला के लिए इंसान की कीमत उसके कपड़ों से तय होती थी। अगर ग्राहक ब्रांडेड कपड़े पहने हो, हाथ में महंगा फोन हो और गाड़ी की चाबी चमकती हुई दिखे तो शीला की मुस्कान भी चमक उठती।


लेकिन अगर कोई साधारण कपड़ों में आ जाए…


तो उसका व्यवहार बिल्कुल बदल जाता।


“एक्सक्यूज़ मी!” एक दिन उसने एक साधारण कपड़े पहने ग्राहक से तेज़ आवाज़ में कहा।

“यह बैग 1 लाख रुपये का है। अगर खरीदने के पैसे नहीं हैं तो इसे छूना भी मत। कहीं गंदा न हो जाए।”


दुकान में खड़े बाकी कर्मचारी एक-दूसरे को देखने लगे। किसी को हैरानी नहीं हुई। यह शीला का रोज़ का अंदाज़ था।


उस दिन दोपहर बहुत गर्म थी। मॉल के बाहर धूप ऐसी लग रही थी जैसे सड़क जल रही हो।


इसी गर्मी में एक बुजुर्ग आदमी धीरे-धीरे चलते हुए मॉल के अंदर आया। उसकी पोलो शर्ट पर पुराने धब्बे थे, पैरों में घिसी हुई चप्पलें थीं और हाथ में एक पुराना थैला।


वह बहुत थका हुआ लग रहा था। उसके माथे से पसीना टपक रहा था।


वह धीरे-धीरे चलते हुए दुकान के अंदर आया और वहां रखे वॉटर डिस्पेंसर की तरफ बढ़ा।


“बेटी…” उसने धीमी आवाज़ में शीला को पुकारा।

“क्या मैं एक गिलास पानी ले सकता हूं? बहुत प्यास लगी है। किराया खत्म हो गया था इसलिए पैदल आया हूं…”


शीला ने उसे सिर से पैर तक देखा।


और फिर उसका चेहरा ऐसे सिकुड़ गया जैसे उसने कोई गंदी चीज़ देख ली हो।


“ईव!” वह जोर से चिल्लाई।

“अंकल! यहां से हटो! यह पानी वीआईपी क्लाइंट्स के लिए है! यह कोई पब्लिक फाउंटेन नहीं है!”


बुजुर्ग ने थकी हुई आवाज़ में कहा,

“बेटी… बस आधा गिलास ही दे दो… गर्मी से चक्कर आ रहे हैं…”


लेकिन शीला का चेहरा और भी कठोर हो गया।


“कितना जिद्दी हो तुम!” उसने गुस्से में कहा।

“तुम्हारी बहुत बदबू आ रही है! बाहर जाओ! हमारी दुकान का माहौल खराब कर रहे हो!”


इतना कहकर उसने पास रखी अल्कोहल स्प्रे की बोतल उठाई और बुजुर्ग के सामने छिड़कने लगी जैसे वह कोई कीटाणु हो।


“गार्ड! गार्ड! इसे बाहर निकालो!”


गार्ड आगे बढ़ने ही वाला था कि तभी अचानक एक आवाज़ आई


“रुकिए!”


यह आवाज़ दुकान की जूनियर सेल्स लेडी आन्या की थी…


और अगले ही पल उसने ऐसा काम किया… जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को चौंका दिया।


स्याही से नहीं, दिल की धड़कनों से लिखता हूँ,

हर कहानी में अपना एक हिस्सा रखता हूँ।

कभी इश्क़, कभी संघर्ष, कभी सपनों की उड़ान,

हर भाषा में बस जज़्बातों का ही बयान।

अगर शब्दों में सुकून और तूफ़ान दोनों चाहते हो,

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