मोनिका :- "मैं कह रही हूँ—तुम जानवी से शादी कर लो।"
कमरे में जैसे हवा जम गई।
विकास :- "पागल हो गई हो? ( विकास अचानक खड़ा हो गया।) "वो अपनी यादें खो चुकी है, मोनिका! ये शादी नही होगा , वो कभी इसके लिए राजी नही होगी , क्योकी जानवी जानती है के इस समय कोई भी उसके याददाश्त जाने का फायदा उठा सकता है तो वो ऐसा कुछ भी नही करेगी ।
मोनिका भी खड़ी हुई, लेकिन उसकी आवाज़ शांत थी।
मोनिका :- यही तो तुम्हें करना है , उसे भरोसा दिलाना है के तुम्हारी जिंदगी मे जानवी कितना इंपॉर्टेट है । उसका भरोसा जितोगे तब ना वो तुमसे शादी करेगी ।
विकास :- "मतलब क्या है तुम्हारा साफ - साफ़ बोलो," ।
विकास ने दाँत भींचते हुए कहा।
मोनिका आगे बढ़ी।
मोनिका :- "देखो विकास, जानवी अभी कमज़ोर है। उसे सहारे की ज़रूरत है। और तुम उसे ऐसा दिखाओ के तुम… हमेशा से उसका सहारा बनना चाहते थे।"
विकास: - "लेकिन इस हालात में—"
मोनिका :- "इस हालात में ही तो!" ( मोनिका ने बात काट दी। ) "अगर जानवी की शादी हो गई, तो आदित्य भी पीछे हट जाएगा।"
विकास :- यह नाम…
विकास के सीने में चुभ गया।
विकास :- "आदित्य…"
मोनिका की आँखों में सख़्ती आ गई।
मोनिका :- "हाँ। क्योंकि तुम भी जानते हो—जब तक जानवी शादी नहीं करेगी, आदित्य किसी और से शादी नहीं करेगा।"
विकास खामोश हो गया।
मोनिका ने धीरे से कहा,--
मोनिका :- और जब जानवी तुम्हारी पत्नी होगी… तब आदित्य आज़ाद होगा।"
विकास ने उसकी तरफ़ देखा।
विकास :- "तुम्हारा मतलब…"
मोनिका की मुस्कान गहरी हो गई।
मोनिका :- जब तुम जानवी से शादी करोगे तब मैं आदित्य से शादी कर लूँगी।"
विकास के चेहरे पर हैरानी और गुस्सा एक साथ उभर आया।
विकास :- ओ .. "तो ये सब… एक सौदा है?" तुम मुझे इसिलिए ये सब करने के लिए बोल रही हो ताकी तुम्हारा रास्ता साफ हो जाए ।
मोनिका :- ये सौदा नही इसे समझदारी कहो ।
मोनिका ने ठंडे लहजे में कहा।
मोनिका :- तुम्हें जानवी और उसके साथ - साथ सारी दौलत तुम्हारी, जिसका तुम्हे कबसे इंतेजार है और मुझे आदित्य।"
विकास :- "और जानवी की मर्ज़ी?"
विकास ने तीखे स्वर में पूछा।
मोनिका कुछ पल चुप रही।
मोनिका :- "उसे क्या याद है, विकास?"
यह सवाल एक हथौड़े की तरह पड़ा।
विकास :- "तुम जानती हो तुम क्या कह रही हो? वो भरोसा करेगी मुझ पर।"
मोनिका ने बेरुख़ी से कहा।
मोनिका :- भरोसा टूटने से पहले ज़िंदगी आगे बढ़ जाएगी । "शादी के बाद यादें लौटी भी, तो सच बदल चुका होगा उसके बाद कुछ तुम्हारा । फिर कोई कुछ नही कर सकता ।
विकास पीछे हट गया।
विकास :- पर अगर उसे सब याद आ गया तो?"
मोनिका ने बिना हिचक कहा।
मोनिका :- "तो भी वो तुम्हारी पत्नी होगी । "समाज, रिश्ता, नाम… सब तुम्हारे साथ होगा।"
कमरे में खामोशी छा गई।
विकास की चुप्पी ने मोनिका को हिम्मत दी।
मोनिका :- "जानवी आज तुम पर भरोसा करती है । "उसे लगता है तुम उसका अपना हो। इस भरोसे को शादी में बदल दो।"
विकास ने पूछा।
विकास :- "और आदित्य?"
मोनिका की आवाज़ में कड़वाहट उतर आई।
मोनिका :- तुम्हों आदित्य की फिक्र है या अपनी , आदित्य ने हमेशा जानवी को चुना। पर अब मेरी बारी है।"
विकास ने खिड़की से बाहर देखा और कहा --
विकास :- पर ये क्या से शादी आदित्य होने देगा ? उसने पहले भी तो हमे जेल भेजने की धमकी दे चुका है ।
मोनिका :- कोर्ट ने उन दोनो को 6 महिना का समय दिया था जो अब पुरा होने वाला है । डिवोर्स को बाद तुम दोनो शादी कर लेना ।
विकास हल्की मुस्कान देकर कहता है --
विकास :- ये तुमने बहोत अच्छी खबर बताई मोनिका, एक बार यो डिवोर्स हो जाए , फिर कोई कुछ नही कर सकता ।
मोनिका ने अपना बैग उठाया और कहा --
मोनिका :- "वक्त कम है। जानवी की यादें किसी भी दिन लौट सकती हैं उससे पहले तु्हें अपना काम करना होगा ।
दरवाज़े पर रुककर उसने पलटकर कहा--
मोनिका :- , "सोच लो विकास… ये मौका दोबारा नहीं मिलेगा। जो करना है , यही सही वक्त है ।
दरवाज़ा बंद हो गया , कमरे में अब अकेला खड़ा विकास…
एक तरफ़ प्यार, दूसरी तरफ़ लालच, और बीच में—एक ऐसी लड़की, जो भूल चुकी थी कि उसका दिल किसके लिए धड़कता है।
विकास मोनिकी की बात को बहोत दैर तक सोचा और फिर अपने आप से कहता है --
विकास :- मोनिका की बात सही है , एक बार जानवी से शादी के बाद मैं उसकी सारी दौलत अपने नाम करा लुगां , फिर चाहे उसकी याददाश्त वापस ही क्यों ना आ जाए । पर उस अशोक का क्या , सबसे बड़ा कांटा तो वो अशोक है । उसका क्या करु । अगर जानवी राजी तो क्या करेगा वो बुड्डा ।
इतना बोलतर विकास जानवी को फोन करता है । जानवी फोन रिसिव करती है और कहती है --
जानवी :- हां विकास , कहां हो ? मैं कबसे तुम्हारा नम्बर ट्राय कर रही हूँ । पर तुम्हारा फोन ही नही लग रहा था ।
विकास :- मेरा फोन ... पर मेरा फोन तो ऑन है । नेटवर्क प्रॉब्लम होगा शायद । कुछ बात है क्या जानवी ?
जानवी :- हां.. वो मैं तुमसे कुछ कहना चाहती थी ।
विकास हैरानी से पूछता है --
विकास :- हां कहो ना जानवी क्या बात है ।
विकास मन ही मन सौचता है --
" कही जानवी को पुरानी बाते याद तो नही आ गई "
जानवी :- विकास , जिस तरह से मैं और तुम एक दुसरे से प्यार करते है और तुम तो जानते हो के मैं उस आदित्य से अपने पापा के कारण उससे शादी किया था । पर विकास अब मेरी कोई मजबूरी नही है , कल हमारा डिवोर्स कंफर्म हो जाएगा । और फिर हम लीगली अलग हो जाएगें , फिर वो कुछ नही कर पाएगा और हम दोनो परसो ही शादी कर लेगें ।
विकास जानवी की बात को सुमकर बहोत खुश हो जाता है और कहता है --
विकास :- जानवी तुम्हें पता है , मैं आज तुम्हारे पास ही आ रहा था , तुमसे यही कहने के लिए के अब हम शादी कर लेते है पर तुमने तो मेरी मन की बात बोल दिया । मैं तो डर रहा था , के कही तुम्हें ये ना लगे के मैं तुम्हारे याददाश्त जाने का फायदा उठा रहा हूँ ।
जानवी :- बस एक दिन और फिर हम दोनो को एक होने से कोई रोक. ही सकता ।
विकास :- और तुम्हारे पापा ? क्या वो मानेगें ?
जानवी :- वो मेरे खिलाफ अब नही जाएगें ।
विकास :- सबको ये बहोत अच्छी बात है । तो क्यों ना आज मिलकर हम दोनो कुछ करते है ।
जानवी :- तुम भी ना , अभी कुछ नही होगा । जो होगा सब शादी के बाद ।
विकास :- जानवी , प्लिज यार , कब तक इंतेजार कराओगी । एक किस तो करती हो ना ।
जानवी :- थोड़ा सा सब्र रखो , बस दो दिन की चो बात है ।
विकास :- पर जानवी. .
जानवी विकाय की बात को बिच मे काटकर कहती है --
जानवी :- बाय विकास , कल मिलते है कोर्ट मे तुम भी आना ।
विकास: - पर मेकी बात तो सुनो ।
जानवी फोन काट देती है -
विकास :- जानवी ...!
विकास फोन को दैखता है के जानवी ने फोन को कट कर दिया था । तब विकास कहता है --
विकास: - अब बस और दौ दिन उसके बाद जानवी और जानवी की दौलत दौनो ही मेरी । पहले तो मैं उस जानवी की खुबशरती का मजा लूगां फिर उसकी दौलत की ।
दुसरे दिन आदित्य कोर्ट जाने के लिए घर मे तैयार हो रहा था । के तभी कृतिका , तिरु , रमेश और रश्मी भी वहां पर आ जाती है । तिरु आदित्य से कहता है --
तिरु :- अरे भांजे ये सुबह - सुबह कहां के लिए चल दिए ?
आदित्य :- वो मामा जी आज डिवोर्स के लिए कोर्ट जाना है । उसी के लिए तैयार हो रहा था ।
आदित्य की बात को सुनकर सभी हैरान हो जाता है और तिरु कहता है --
तिरु :- क्या, आज डिवोर्स को लिए कोर्ट जाना है । पर भांजे जानवी ये क्यों कर रही है, क्या तुने उससे बात नही किया । अब तो तुम्हें उसे बता देना चाहिए के तुम कौन हो ।
कृतिका :- हां आदित्य , अगर जानवी को पता चला के कुम कौन हो तो वो जरुर तुम्हें समझेगी ।
रमेश :- तो चलो ना हम सब जाके जानवी को सब सच - सच बता देते है ।
आदित्य उन सभी को रौकते हूए कहता है --
आदित्य :- नही रुको तुम सब। ये सब बता के क्या करोगे । जानवी की याददाश्त चली गई है , अगर मैं ये सब उसे बता भी दूं तो भी उसो लगेगा के मैं कोई खेल , खेल रहा हूँ ।
रश्मी: - पर आदित्य , जानवी को सच पता होना चाहिए ।
आदित्य :- दैखो मुझे जो कहना था वो मैने कह दिया , पर अगर तुमलोगो को लगता है के जानवी को सच बताने से फायदा होगा । तो बेसक तुम लोग उसे सच बता सकते हो ।
आदित्य से इतना सुनकर सभी के चेहरे पर हसी आ जाता है और सभी आदित्य के साथ कोर्ट के लिए निकल जाता है ।
इधर जानवी भी घर से निकल रही थी तो अशोक जानवी से कहता है --
अशोक :- बेटा , आज तुम्हारी लाईफ का एक ऐसा दिन है जो मैं कभी सपने मे भी नही सौच सकता । एक बाप के लिए ये दिन दैखना बहोत मुश्किल होती है के उसकी बेटी का डिवोर्स हो जाए ।
जानवी :- ओहो । पापा , आप को खुश होना चाहिए के मैं एक ऐसे इंसान के चंगुल से आज आजाद हो जाउगीं जिसके कारण मुझे कभी खुशी नही मिली ।
अशोक :- बेटी तुम जानती नही हो के वो कौन है और हमारे कंपनी के लिए वो कितना कुछ किया है ।
जानवी :- कौन वो आदित्य । Common पापा , उसमे जानने के लिए ऐसा है ही क्या , और वो , वो हमारे कंपनी के लिए क्या ही कर सकता है , जो अपनी औकरी नही संभाल पाया वो मेरी कंपनी के लिए क्या करेगा ?
अशोक :- बेटी , तुम उसकी सच्चाई जानती नही हो ।
जानवी :- पापा ! अगर वो दुनिया का सबसे अमिर इंसान भी होता ना , तो भी मैं उससे नफरत ही करती ।
इतना बोलकर जानवी वहां से चली जाती है ।
अशोक जानवी की बात को सुनकर मायूस हो गया था और अशोक भी जानवी के साथ कोर्ट को लिए निकल जाता है ।
कोर्ट मैं आदित्य उसके मामा तिरु और बाकी के दोस्त भी पहूँच जाते है । सभी कार से उतरते है , तभी वहां पर एक और कार रुकती है और उसमे से जानवी और उसके पापा अशोक भी उतरते है । जानवी को दैखकर आदित्य इमोशनल हो जाता है । आदित्य जानवी की और दैखता है पर जानवी आदित्य की और दैखती भी नही है । तिरु आगे बड़कर जानवी के पास जाता है और कहता है --
तिरु :- बेटा जानवी कैसी.....
तिरु इतना बोलता है के जानवी तिरु के बात पूरी होने से पहले ही अपने पापा अशोक से कहती है --
जानवी :- चलिए पापा ।
जानवी वहां से चली जाती है , अशोक तिरु को दैखता है और मायुस होकर तिरु के सामने हाथ जोड़ता है और बिना कुछ कहे वहां से चला जाता है , सभी तिरु के पास आता है और तभी आदित्य कहता है --
आदित्य :- मैने तो आप लोगो से पहले भी कहा था के उसे समझाने का या बात करने का कोई फायदा नही । दैख लिया अब चलिए ।
कृतिका: - इतना घंमड, इतना एटिट्यूड, उसे ये भी एहसास ही नही है के तुमने उसको लिए क्या - क्या किया है ।
तभी अशोक वहां पर आ जाता है और आदित्य के सामने हाथ जोड़कर कहता है --
अशोक :- बेटा आदित्य, मुझे माफ कर देना , मैने जानवी को समझाने की बहोत कोशिस की पर वो सुनने को तैयार नही है , बेटा मैने अपनी बेटी की जिंदगी सुधारने के लिए तुम्हारी खराब कर दी । मैने उसो ये भी कहने की कोशिश की के तुम कौन हो , पर वो कहती है के अगर पुरी दुनिया के सबसे अमिर इंसान भी होगें तो भी तुम्हारे साथ नही रहेगा । मुझे माफ कर देना बेटा , मैं चाहकर भी जानवी कुछ नही कर सकता क्योकी डॉक्टर ने कहा है के उसो किसी भी तरह का प्रेशर नही डालना है । बेटा मेरी वजह से तुम्हें ...
अशोक आदित्य के सामने हाथ जोड़ता है तो आदित्य अशोक का हाथ पकड़ लेता है और कहता है --
आदित्य :- आप हाथ मत जोड़िए प्लिज , इसमे आपकी कोई गलती नही है , और हर बाप अपनी बोटी की अच्छे भविष्य के बारे मे सौचता है तो आपने भी वही सौचा । इसमे आपकी कोई गलती नही है और ना ही जानवी की क्योकी जानवी अपनी याददाश्त खो चुकी है इसिलिए उसे वो सब यात नही है ।
आदित्य इतना बोलतर जा ही रहा था के तभी वहां पर विकास आ गया । विकास शैतानी हसी देते हूए आदित्य के पास आता है और आदित्य की हालत पर तरस खाते हूए कहता है --
विकास :- छी छी छी ... आदित्य , बेचारा दैखो कैसी शकल हो गयी है बेचारे की । क्या - क्या सौच के रखा था और दैखो क्या हो गया । तु जानवी की दौलत को हड़पना चाहता था ना पर बेचारा तोरी ऐसी किस्मत कहा । आज तुम्हारा डिवोर्स और कल मेरी और जानवी की शादी । दैखो मैने कार्ड भी बना लिया है , और डिवोर्स को बाद येसा पहला इनविटेशन तुम्हारे लिए । तु्हें क्या लगता था के तुम ये अच्छा बनने का ढोंग करके जानवी का दिल जीत लोगे और उसकी दौलत पर कब्जा कर लोगे । हा हा हा हा ... पर किस्मत का खेल तो दैखो , कल हमारी शादी फिर उसकी. सारी दौलत मेरी । अहा.. पहले मैं उसके साथ सोउगां । फिर उसकी जवानी का मजा लुगां ।
To be continue.....731