स्वाभिमान Raju kumar Chaudhary द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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स्वाभिमान

आख़िर वह ऐसा कैसे कर सकता था? तीन साल के रिश्ते को उसने एक पल में तोड़ दिया और उसे किसी और के लिए छोड़ दिया। रिया जितना खुद को संभालने की कोशिश करती, आकाश के प्रति उसका गुस्सा उतना ही बढ़ता जाता।
उस शाम जब आकाश उससे मिलने आया, हमेशा की तरह शांत चेहरे के साथ, उसने साफ़ शब्दों में कहा,
“मैं तुमसे प्यार करता हूँ, रिया… लेकिन मुझे अपने भविष्य की भी चिंता है। आकांक्षा का परिवार बहुत अमीर है। वह अपने घर की राजकुमारी है। अगर मैं उससे शादी करूँगा तो मेरी ज़िंदगी बदल जाएगी। तुम मुझे सिर्फ़ प्यार दे सकती हो, लेकिन उसके पास दौलत और शोहरत दोनों हैं। वह पहले दिन से ही मुझमें दिलचस्पी रखती है। ऐसा मौका छोड़ना मेरे लिए बेवकूफ़ी होगी। तुम भी अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़ो। अगर तुम्हारा परिवार थोड़ा सक्षम होता, तो शायद मैं इस रिश्ते को शादी तक ले जाता… लेकिन तुम्हारे साथ मेरा कोई भविष्य नहीं है। इन तीन सालों को एक पुरानी याद समझकर भूल जाओ।”
इतना कहकर आकाश चला गया।
रिया वहीं स्तब्ध खड़ी रह गई। उसे सिर्फ़ प्यार खोने का दुख नहीं था, बल्कि इस बात का था कि उसे इसलिए छोड़ा गया क्योंकि उसका परिवार संपन्न नहीं था। कुछ देर वह पार्क की बेंच पर बैठी रही, फिर उठकर बिना सोचे-समझे चल पड़ी। घर जाने का मन नहीं था—माँ और छोटी बहन प्रिया तीन दिन के लिए बाहर गई हुई थीं।
चलते-चलते उसकी नज़र एक होटल पर पड़ी। वही जगह… जहाँ उसने पहली बार आकाश को देखा था। उसके कदम खुद-ब-खुद अंदर की ओर बढ़ गए।
अंदर जाकर वह कोने की एक मेज़ पर बैठ गई। यादें उसे घेरने लगीं। पास की मेज़ पर एक लड़का अकेला बैठा कुछ पी रहा था। तभी वेटर आया और बोला,
“मैडम, आप क्या लेंगी?”
रिया अपने ख्यालों में खोई हुई थी। दोबारा पूछने पर उसने बिना सोचे उस लड़के की तरफ़ इशारा कर दिया, “वही।”
कुछ ही देर में उसके सामने गिलास रख दिया गया। पास बैठा लड़का मुस्कुराया और बोला,
“तुम ये नहीं पी पाओगी।”
रिया ने चिढ़कर कहा, “आपको क्या समस्या है?”
वह फिर हँसा, “तुम्हें देखकर लगता है ये तुम्हारे बस की बात नहीं।”
पहले से ही गुस्से में भरी रिया ने गिलास उठाया और एक ही बार में पी गई। स्वाद उसे पसंद नहीं आया, लेकिन लड़के की चुनौती ने उसके अहंकार को जगा दिया। उसने दूसरा गिलास मंगवाया। लड़के ने भी दो और मंगवा लिए।
कुछ ही देर में रिया का सिर घूमने लगा। वह उठी, लेकिन लड़खड़ा गई। गिरने ही वाली थी कि उसी लड़के ने संभाल लिया।
“अगर खुद को संभाल नहीं सकतीं तो पीने क्यों आई थीं?” उसने झुंझलाकर कहा।
रिया को मितली आने लगी और वह वहीं उल्टी कर बैठी। लड़के के कपड़े खराब हो गए। अब वह पूरी तरह बेहोशी की हालत में थी।
लड़के जिसका नाम ऋषभ था ने वेटर को बुलाया, “सबसे अच्छा सूट अभी बुक करो।”
दस मिनट बाद वह रिया को कमरे में ले गया। सोफ़े पर लिटाया और खुद नहाने चला गया क्योंकि उसके कपड़े गंदे हो चुके थे। बाहर आकर देखा तो रिया अब भी उसी हालत में थी। उसने उसे उठाने की कोशिश की, लेकिन वह बेहोश थी। मजबूरी में उसने उसे बाथरूम में ले जाकर शॉवर के नीचे खड़ा कर दिया।
ठंडा पानी पड़ते ही रिया को थोड़ा होश आया। ऋषभ बोला,
“मैं बाहर जा रहा हूँ, तुम कपड़े बदलकर आ जाना।”
रिया ने किसी तरह खुद को संभाला। वहाँ बस एक बाथरोब था, वही पहनकर बाहर आई और बिस्तर पर गिरकर सो गई।
सुबह करीब दस बजे उसकी आँख खुली। सिर भारी था, पूरा शरीर दर्द कर रहा था। उसने देखा कि वह एक अनजान लड़के की बाँहों में थी। ऋषभ अभी भी सो रहा था।
उसे याद आया कि कल गुस्से और नशे में उसने अपनी सीमाएँ लाँघ दी थीं। वह तुरंत उठी, रिसेप्शन पर फोन कर कपड़े मँगवाए और जल्दी से तैयार हो गई।
जब वह जाने लगी, ऋषभ भी उठ चुका था। सिर पकड़कर बैठा था। उसने रिया का हाथ पकड़कर पूछा,
“कल रात… क्या हुआ था?”
रिया ने उसकी आँखों में देखा। उसे लगा कि उसे भी कुछ याद नहीं। ऋषभ ने कहा,
“तुमने बाहर मुझ पर उल्टी की, मैं भी नशे में था। तुम्हें यहाँ लाया, नहलाया… फिर हम सो गए। उसके बाद क्या हुआ, याद नहीं।”
रिया ने हल्की मुस्कान के साथ कहा,
“मेरा स्तर बहुत ऊँचा है। खुद को ज़्यादा खुशकिस्मत मत समझो। तुम कल कुछ करने की हालत में नहीं थे। अगली बार थोड़ा कम पिया करो।”
इतना कहकर वह चली गई।
ऋषभ ने गुस्से में तकिया फेंका। तभी उसकी नज़र चादर पर पड़े दाग पर गई। वह सन्न रह गया। रिया बिना कुछ पूछे चली गई थी, उसे दोष भी नहीं दिया। वह एक अनसुलझी पहेली बनकर रह गई।
रिया घर पहुँची, नहाई और ऑफिस चली गई। वहाँ उसकी सबसे करीबी दोस्त निशा मिली। उसने ध्यान से रिया को देखा और शरारती अंदाज़ में बोली,
“आख़िर आकाश को तीन साल बाद उसका हक़ मिल ही गया?”
रिया चौंकी, “क्या मतलब?”
निशा ने उसके गले पर नज़र डाली और धीरे से कहा,
“मैं प्यार के निशान देख रही हूँ।”
रिया घबरा गई और तुरंत स्कार्फ कसकर बाँध लिया।
निशा हँस पड़ी, “सच बताओ, कल तुम और आकाश के बीच क्या हुआ?”
रिया ने शांत स्वर में कहा,
“उस बेवकूफ़ ने मुझे किसी अमीर लड़की के लिए छोड़ दिया। इसलिए ज़्यादा चिंता मत करो।”
निशा कुछ पल चुप रही, फिर बोली,
“तो फिर तुम्हारी गर्दन पर ये निशान कैसे आए?”
रिया ने बस हल्की मुस्कान दी, फाइल खोली और काम में लग गई।
उसकी मुस्कान में दर्द भी था… और एक नया रहस्य भी।