.... अगर तुम साथ हो । vaishnavi Shukla द्वारा नाटक में हिंदी पीडीएफ

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.... अगर तुम साथ हो ।

                        अगर तुम साथ हो।

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शाम का समय......!!

उत्तर प्रदेश के एक छोटे और खूबसूरत गांव हरिपुर (काल्पनिक) , गांव में खेत खलिहान  और तालाब उसे खूबसूरत बना रहे है !....गांव के एक तरफ घना जंगल है...!!!

वही गांव के किनारे ,  तालाब के तरफ मुंह करके खड़ी एक लड़की ढलते हुए सूरज को देख रही है...जिसने हल्के गुलाबी रंग का फ्रॉक सूट पहना हुआ है...

उसके लंबे बाल हवा में लहरा रहे हैं....!!

तभी पीछे से एक लड़की जिसने नीले रंग की कुर्ती जींस पहनी है और बालों की एक साइड चोटी कर रखी है।

लड़की:(पीछे से आवाज देते हुए) दीदी अब घर चलो...!! मां ने कहा था शाम को जंगल के पास मत रुकना , 

(ये है नायिका की छोटी बहन: माही सिंह...उम्र: 17 साल ) 

(वह लड़की माही की आवाज नही सुनती...।)

माही:(थोड़ी तेज आवाज में) दीदी...!!

......माही की आवाज सुनकर ..तालाब के पास खड़ी लड़की पीछे पलटती है ।

(आंचल सिंह ...हमारी इस कहानी की नायिका ...उम्र:21 साल , सबसे प्यार करने वाली दिल की बहुत प्यारी...पर बाते करती ढेर सारी।)

(प्यारा सा चेहरा उस पर प्यारी स्माइल ।।....)


आंचल: क्या है माही..?? क्यों परेशान कर रही है ..!! 

माही:(उसके पास आकर) दीदी, बहुत देर हो  गई है अब चलो घर..!!

आंचल: तुझे पता है न...मुझे यहां कितना सुकून मिलता है ...!

माही: हां दीदी....मुझे पता है! की ये आपकी favrouit जगह है..!!

आंचल: तो क्यों डिस्टर्ब कर रही है?

माही:दीदी , मां ने कहा था ..शाम को जंगल की तरफ मत जाना ..!!

आंचल:(माही से थोड़ा आगे चलकर) उसकी चिंता तू मत कर..मां को मैं समझा लूंगी ..!!

माही:(उसके पास जाकर) और दादी का क्या??... हां ...!!(उसका हाथ पकड़ कर खींचते हुए) जल्दी चलो दीदी..वरना दादी की चार बाते सुननी पड़ेगी आपको..! और दो बाते मुझे भी सुना देंगी!

आंचल:(परेशान होकर उपर देखते हुए) हे भोलेनाथ..!!क्या कोई इंसान दो पल सुकून से नही रह सकता..!!

माही:अब चले...!!

आंचल: हां हां चल...!!

(दोनो  घर की ओर निकल जाती है....!!!)

इधर एक तरफ...एक गांव के अंदर घर का दृश्य....पूजा घर से एक बुजुर्ग महिला..बाहर आती है और छोटे से हॉल में एक लकड़ी के सोफे पे आकर बैठती है...!!

(ये हैं आंचल और माही की दादी : जानकी देवी....... आंचल को प्यार तो करती है ।।।पर ....आंचल और माही को हर काम में रोकती टोकती रहती है... पर हमारी आंचल इनकी बात एक कान से सुनकर दूसरे से निकाल देती है।)

जानकी जी: (सोफे पर बैठते हुए) बहुरिया ..तनिक एक कप चाय पिलाई दियो.!

(किचन से आवाज आती है)...जी अम्मा , अभी लाई!

(जानकी जी बार बार दरवाजे की और देख रही है ।)

थोड़ी देर में..!!

(एक महिला चाय हाथ में लेकर किचन से बाहर आती है..!!)

(ये है आंचल और माही की मां: गरिमा सिंह, सरल स्वभाव )

गरिमा:(जानकी जी को चाय देते हुए) लीजिए अम्मा..आपकी चाय..!!

जानकी : (चाय का कप लेते हुए) कहा है तुम्हारी दूनो बिटिया रानी... अभी घर आवे का समय नही हुआ।

(जानकी जी की बात सुनकर गरिमा दरवाजे की तरफ देखती है फिर दीवार पर लगी घड़ी को )

गरिमा: अम्मा.. वो दोनो  गांव के मंदिर गई थी....आती होंगी?

जानकी जी: हम्मम..!! (एक घूंट चाय का लेते हुए) हमको सब पता है वो कहा जाती हैं...!! ई दुनो के पांव कभी घर मां नही टिकते...दिन भर इधर उधर घूमो ...बस !! अब तुमही समझाओ ... हमरी बात तो सुन ने से रही।

गरिमा:अम्मा....बच्चियां है..!!आ जायेंगी!! (दरवाजे के तरफ देखते हुए मन में) कहा रह गई दोनो ..बोला था जल्दी आ जाना ।

जानकी जी: हम्मम।

(जानकी जी अपनी चाय पीने लगती है और गरिमा किचन में चली जाती है)

कुछ देर बाद...!!

आंचल और माही घर के दरवाजे के बाहर पर खड़ी होती है....

(आंचल  दरवाजे से  केवल सिर निकाल कर हॉल में नजर दौड़ाती है।)

आंचल:(माही से) दादी दिख नही रही हैं...चल जल्दी से कमरे में निकल जाते है। क्योंकि अभी कुछ सुनने का मन नही है मेरा..!! चल 

माही हां में सिर हिला देती है!

दोनो चुपके से कमरे में जाने लगती है तभी पीछे से आवाज आती है......रुको ।

दोनो अपने बढ़ते कदम रोक देती है ...!!

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आज के चैप्टर में इतना ही....आगे जानेंगे की किसने उन दोनो पीछे से रुकने को कहा ।