Devil, You Are Mine - 2 Miss Anonymous द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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Devil, You Are Mine - 2

राशि अपना सिट बेल्ट कसकर पकड़ कर बोली - श्रु धिरे चला वरना घर जल्दी पहुंचने के चक्कर में हमाए प्राण निकल जाएंगे।

श्रुति की खिलखिलाहट कार में गुंजि।वो हंसकर बोली - जब मेरी नॉर्मल स्पीड में तेरी ये हालत है तो जब मैं फास्ट चलाऊंगी तब तेरा क्या होगा? हम्म?

राशि और कसकर सिट बेल्ट पकड़ कर बोली- मेहरबानी करके तु प्लीज़ स्पीड कम कर दे... प्लिज।

श्रुति आंखें रोल करके कार की स्पीड कम कर देती है। तभी राशि रेडियो ऑन कर देती जिसपर तेज आवाज- Saturday... Saturday बज रहा था। मानो कान के पर्दे फट जाएंगे।

राशि और श्रुति एक साथ इरिटेट आवाज में बोली- मन के बच्चे तुझे हम छोड़ेंगे नहीं..!

श्रुति दूसरा सिडी लगाती है और कोई पंजाबी गाना बजने लगा। कार चलाते हुए श्रुति राशि से  बोली (जो अपने ख्यालों में खोई थी)- क्या हुआ किस सोच में गुम हो..?

राशि अपने पैर मोड़कर सिट पर पालथी मारकर बैठ गई और बोली- ये Saturday... Saturday सुनकर हमें भी पार्टी करने का मन कर रहा है। क्या बोलती है आज रात क्लब चलें क्या?

श्रुति कार पर अचानक ब्रेक लगा देती है और राशि का माथा छुकर बोली- तेरी तबियत तो ठीक है ना? ये मेरा मासुम सा बच्चा अचानक बड़ों वाली बातें कैसे करने लगा?

राशि पाउट बनाकर उसका हाथ अपने माथे से हटाकर बोली- I am serious shru.... वैसे भी तू कबसे जीद्द कर रही थी और आज तो फिर हमने अपने अपने स्ट्रीम में इतना अच्छा स्कोर किया है.... और अब कल से हमारी जिंदगी की नई सुबह होगी...तो क्यों आज कुछ इंट्रेस्टिंग किया जाए... What say...?

श्रुति उसके गाल खिंचकर- वाह पहली बार अपनी सोच मिली है... मुझे तो वैसे भी क्लब जाने का बहुत मन था मगर तू ही मना करती रही...अब जब तेरी हां है तो चलते आज की सारी रात तेरी...

राशि उसे सही करते हुए- मेरी नहीं हमारी....!

हां मेरी मां..मेरा वही मतलब था... मगर अभी घर चले वरना सरस्वती हमारी जान ले लेंगी... श्रुति गाड़ी स्टार्ट करते हुए बोली।

राशि उसे डांटकर- अरे पगली अपनी मां का कोई नाम लेता है क्या..? 

श्रुति हंसकर- मेरी प्यारी बहना...ये मेरा प्यार है तु नहीं समझेगी...! राशि चिढ़कर शांत हो जाती है।

कुछ ही देर बाद उनकी कार एक खूबसूरत बंगले के आगे आकर रूकी। गार्ड ने गाड़ी देखकर गेट खोला और श्रुति ने कार अंदर ले ली। बड़े से गार्डन से गुजरते हुए बंगले के सामने श्रुति ने गाड़ी रोका और दोनों लड़कियां जल्दी से घर के अंदर चली गई।

श्रुति अंदर जाते हुए जोर से चिल्लाई- सरु...सरु... कहां हो?  राशि उसे हल्का सा सर पर मारती है मगर श्रुति फिर भी आवाज लगाते रही।

थोड़ी ही देर में एक 45 वर्ष की खूबसूरत महिला। जिसने कॉटन की पिंक कलर की साड़ी पहना था, बालों का जुड़ा बनाए हाथों में एक-एक सोने का कंगन पहने कीचन से करछी लेकर निकलते हुए बोली- क्यों रे महारानी आज कौन सा कांड करके आई है जो युं गला फाड़ रही है...?

श्रुति एटिट्यूड से- सो मिसेज सरस्वती कपूर शर्त के मुताबिक मैंने पूरे यूनिवर्सिटी में टॉप मारा है...चाहे वो किसी भी स्ट्रीम के स्टूडेंट्स हो किसी के भी मुझसे ज्यादा नंबर नहीं आए हैं....!!

मिसेज सरस्वती कपूर बात को हवा में उड़ाते हुए- तो इसमें कौन सी नई बात है....?

श्रुति हैरानी से- मम्मी तुम भूल गई तुमने क्या प्रोमिस किया था...?

मिसेज कपूर अनजान बनते हुए- प्रोमिस..? कौन सा प्रोमिस? कैसा प्रोमिस... मुझे तो याद नहीं...!

श्रुति पैर पटकते हुए- सरु तुमने कहा था तुम मुझे एक हफ्ते के लिए अकेले घूमने जाने दोगी...!!

सरस्वती वापस किचन में जाते हुए- अच्छा...ऐसा मैंने कहा था? शायद...जा तुम दोनों फ्रेश होकर आओ तब-तक मैं याद करने की कोशिश करती हूं।।

श्रुति अपनी मां की बात सुनकर पैर पटकते हुए सिढियो से ऊपर की ओर चली गई। तभी सोफे पर बैठी राशी जो ये सारा ड्रामा देख रही थी किचन में जाकर अपनी मां को पिछे से हग करते हुए- मां तुम क्यों उस पगली को परेशान करती हो? पहले सारी छूट भी खूद देती हो फिर खुद ही उसे बांधने की कोशिश करती हो..🥲

सरस्वती जी मुस्कुराई और बोली- ये मेरे प्यार दिखाने का तरीका है तु नहीं समझेगी... और रही बात परेशान करने की तो मुझे इसमें बहुत मज़ा आता है.....दिल को अलग ही सूकून मिलता है।

राशि दोनों हाथों को  चेहरे के सामने जोड़कर हल्का झुककर- तुम दोनों मां-बेटी धन्य हो..रब जाने ये प्यार जताने का कौन सा अनोखा तरीका है....हमाए तो कुछ पल्ले ही नहीं पड़ता... कहकर पानी का बोतल उठाकर अपने कमरे में चली गई।

उधर श्रुति सिढिया चढ़ते हुए सेकेंड फ्लोर पर पहुंची और लेफ्ट साइड में बने तिसरे कमरे का दरवाजा खोला और अंदर चली गई। वो एक बड़ा सा कमरा था जिसका इंटिरियर काफी खुबसूरत था। कमरे की दिवारो को ब्लू और पर्पल कलर से पेंट किया गया था। बड़ा सा डबल साइज का बेड जिसपर ढेर सारे सोफ्ट टॉयज रखे हुए थे। एक स्टडी टेबल और श्रुति का फेवरेट डोर टु सिलिंग विंडो। एक तरफ सोफा और टेबल लगा हुआ था।।

वो जल्दी से कमरे में गई और तुरंत बाथरूम में चली गई। 15 मिनट बाद जब वो बाहर आई तो उसने एक पिंक कलर का बाथरोब पहना हुआ था। वो गुनगुनाते हुए वॉक इन‌ क्लोजेट की तरफ बढ़ी और अपने लिए एक क्रॉप टॉप और ट्राउजर निकालकर पहन लिया।

मिरर के सामने आकर उसने डेली स्किन केयर रूटीन फॉलो की और फिर अपने बालों का बन बना लिया और ट्राउजर में हाथ डालकर सिटी बजाते हुए निचे चली गई।

Australia,
      
एक बड़ा सा विला जिसके नेम प्लेट पर मलिक मैंसन लिखा हुआ था। जिसपर बहुत कड़ा पहरा लगा था। उस विला के लीविंग रूम का माहौल कुछ गर्म था।

एक बुजुर्ग महिला अपने सामने बैठे लड़के को डांटते हुए बोली- ईशान आखिर इंडिया जाने में प्रोब्लम क्या है?

ईशान शांति से- दादी मां आखिर आप क्यों जाना चाहती हैं वहां...? यहां सबकुछ तो है फिर क्यों आपको इंडिया जाना है?

बुजुर्ग महिला जिनका नाम दिव्या मलिक था अपनी रौबदार आवाज़ में बोली- ईशान अगर आप भूल रहे हैं तो हम आपको याद दिला दें कि इंडिया में परिवार है आपका... बहुत से लोग है जो आपका इंतजार कर रहे हैं।

ईशान  समझाने की कोशिश करते हुए- मगर दादी मां आप जानती है न....

दिव्या दादी- बस ईशान बहुत हुआ.. आखिर क्यों आप इंडिया नहीं जाना चाहते....नौ साल पहले बिना कुछ बताए आप यहां आ गए और अब वहां वापस जाना नहीं चाहते.। आखिर प्रोब्लम क्या है? क्या कोई ऐसी बात है जो आप हमसे छिपा रहे हैं?

ईशान दादी मां का हाथ पकड़ कर - नहीं दादी मां ऐसी कोई बात नहीं है। मैंने कहा था न मुझे आगे की पढ़ाई यहीं से करनी है और फिर मैंने यही बिजनेस स्टार्ट कर लिया...बस इसलिए ही....

दादी मां हाथ दिखाकर - बस ईशान अब और बहाने मत बनाइए। अगर आप अपनी इस बुढ़ी दादी की एक विश भी पूरी नहीं कर सकते ? तो ठीक है हम आज यहां से जा रहे हैं और वो सारे लोग आपका इंतजार कर रहे हैं उन्हें बता देते हैं कि आपको अपने देश से , अपने परिवार से ज्यादा ये अजीब सी जगह पसंद आ गई है.... कहकर वो उठ गई और बाहर की ओर जाने लगी।


To be continued.....