खर्राटे: कारण, प्रभाव और समाधान
खर्राटे केवल एक सामाजिक उपद्रव नहीं, बल्कि एक शारीरिक स्थिति है, जो नींद के दौरान श्वसन मार्ग में रुकावट के कारण उत्पन्न होती है। यह स्थिति तब बनती है जब गले और मुंह के शिथिल ऊतकों से हवा के गुजरने पर कंपन होता है। नींद की प्रक्रिया में यह व्यवधान न केवल खर्राटे लेने वाले व्यक्ति बल्कि उनके साथ सोने वालों के जीवन की गुणवत्ता को भी प्रभावित करता है। यह लेख खर्राटों के वैज्ञानिक कारणों, उनसे उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं और उनके प्रभावी निवारण पर केंद्रित है।
खर्राटों के प्रमुख कारण
शोध के अनुसार, खर्राटे मुख्यतः तीन श्रेणियों में बांटे जा सकने वाले कारकों से उत्पन्न होते हैं: शारीरिक संरचना, जीवनशैली, और चिकित्सीय स्थितियाँ। शारीरिक संरचना के अंतर्गत, जन्मजात रूप से गले का संकरा होना, बढ़े हुए टॉन्सिल, या मोटी जीभ हवा के मार्ग को बाधित कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, नाक के अंदर हड्डी का टेढ़ापन या नाक के पॉलिप्स भी खर्राटों का एक सामान्य कारण हैं। जीवनशैली से जुड़े कारकों में सबसे प्रमुख है अधिक वजन, जिसके कारण गले के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी श्वसन नली पर दबाव डालती है। पीठ के बल सोने की आदत भी गुरुत्वाकर्षण के कारण जीभ और गले के ऊतकों को पीछे की ओर धकेलती है, जिससे रुकावट पैदा होती है। सोने से पहले शराब का सेवन या नींद की गोलियाँ गले की मांसपेशियों को अत्यधिक शिथिल कर देती हैं, जबकि धूम्रपान श्वसन मार्ग में सूजन और जलन पैदा करता है। चिकित्सीय स्थितियों में स्लीप एपनिया सबसे गंभीर है, जिसमें नींद के दौरान सांस बार-बार रुकती और शुरू होती है। इसके अलावा, एलर्जी और सर्दी के कारण नाक बंद होने से भी खर्राटे आने की संभावना बढ़ जाती है।
स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव
लगातार खर्राटे लेना न केवल साथी सोने वाले व्यक्ति को परेशान करता है, बल्कि स्वयं खर्राटे लेने वाले के लिए भी गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है। गहरी नींद के बाधित होने से दिन भर थकान और सुस्ती बनी रहती है, जिससे कार्यक्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलने से संज्ञानात्मक क्षमता में गिरावट आती है, जिसके परिणामस्वरूप एकाग्रता और याददाश्त कमजोर होती है। दीर्घकालिक रूप से, इस स्थिति से उच्च रक्तचाप, हृदयाघात और स्ट्रोक जैसे हृदय संबंधी रोगों का खतरा बढ़ जाता है। लगातार थकान और अपर्याप्त नींद से चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग की समस्या भी हो सकती है, जो व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है।
निवारण और उपचार के उपाय
खर्राटों का उपचार उनके कारणों पर निर्भर करता है और इसे तीन स्तरों पर समझा जा सकता है। जीवनशैली में सुधार सबसे प्रभावी दीर्घकालिक उपाय है, जिसके अंतर्गत वजन नियंत्रण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। वजन कम होने से गले की चर्बी घटती है और श्वसन मार्ग स्वतः ही खुल जाता है। पीठ के बजाय करवट लेकर सोने की आदत डालना भी अत्यंत लाभकारी है, जिसके लिए पीठ पर तकिया लगाकर रखा जा सकता है। सोने से पहले शराब और धूम्रपान से परहेज करना भी खर्राटों को कम करने में सहायक होता है। घरेलू और सहायक उपायों के रूप में, नाक बंद होने पर सलाइन स्प्रे या नेजल स्ट्रिप्स का उपयोग किया जा सकता है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से मुंह और गले की चिपचिपाहट कम होती है, जिससे कंपन घटता है। अतिरिक्त तकिये का उपयोग करके सिर को थोड़ा ऊंचा रखने से भी जीभ आगे की ओर खिसक जाती है। जब ये उपाय पर्याप्त न हों तो चिकित्सीय हस्तक्षेप आवश्यक हो जाता है। डेंटल उपकरण या ओरल एप्लायंस नामक विशेष माउथपीस जबड़े और जीभ को आगे की स्थिति में रखते हैं, जिससे श्वसन मार्ग खुला रहता है। स्लीप एपनिया के रोगियों के लिए CPAP मशीन स्वर्णिम उपचार है, जो मास्क के जरिए हवा का निरंतर दबाव बनाकर श्वसन मार्ग को खुला रखती है। यदि समस्या नाक के पॉलिप्स, टेढ़े सेप्टम या बढ़े टॉन्सिल के कारण हो, तो शल्य चिकित्सा एक स्थायी समाधान हो सकता है।
निष्कर्ष
खर्राटे एक सामान्य समस्या है, लेकिन इसे अनदेखा करना गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है। अधिकतर मामलों में जीवनशैली में बदलाव से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। हालांकि, यदि जीवनशैली में बदलाव के बावजूद खर्राटे बने रहें या सांस रुकने के लक्षण दिखें, तो बिना देरी किसी निद्रा रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। समय पर पहचान और उचित उपचार से न केवल खर्राटों से मुक्ति पाई जा सकती है, बल्कि संभावित गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों से भी बचा जा सकता है।
· विवेक रंजन श्रीवास्तव