अदृश्य पीया - 14 Sonam Brijwasi द्वारा आध्यात्मिक कथा में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

अदृश्य पीया - 14

(रात। कमरा शांत है। टेबल पर ग्रंथ खुला है, पास ही कौशिक का चश्मा।)
(सुनीति खिड़की के पास खड़ी है। चेहरे पर डर नहीं… एक अडिग फैसला।)
जब इंसान तय कर ले कि वो क्या खोने को तैयार है—
तब डर पीछे छूट जाता है।
(सुनीति पलटती है। कौशिक पास खड़ा है, घबराया हुआ।)

कौशिक बोला - 
तुम कुछ छुपा रही हो…
मैं महसूस कर सकता हूँ।

सुनीति (धीरे, पर मज़बूती से) बोली - 
मैं सच छुपा रही हूँ
ताकि आप बच सकें।

कौशिक (आवाज़ टूटती हुई) बोला - 
मैंने मना किया था…

सुनीति (हाथ पकड़कर) बोली - 
और मैंने शादी में वादा किया था—
हर हाल में आपके साथ रहने का।

(कौशिक कुछ नहीं कह पाता।)
(सुनीति अलमारी खोलती है। पुरानी फ़ाइलें, रिसर्च नोट्स निकालती है।)

वो लैब जहाँ से कौशिक गायब हुआ था… वहीं उसकी वापसी का रास्ता भी छुपा था।

(फ़ाइल पर नाम उभरता है— Project INV-07.)
(सुनीति कंप्यूटर पर डेटा देखती है।)

सुनीति (खुद से) बोली - 
इनविज़िबिलिटी सीरम…
डिस्कंटिन्यू नहीं हुआ था…

(स्क्रीन पर फ्लैश होता है— ‘Sample preserved for emergency use’)

सुनीति (धीमी सांस लेकर) बोली - 
मतलब…अब भी मौजूद है।

(कौशिक पास आ जाता है।)

कौशिक बोला - 
अगर पकड़ी गई तो…वो लोग तुम्हें—

सुनीति (आँखों में नमी, पर मुस्कान लेकर) बोली - 
तो भी ठीक है।

(वो उसका माथा छूती है।)

सुनीति बोली - 
आप अकेले नहीं रहे तो मेरा हर डर क़ुर्बान है।

(सुनीति मंदिर जाती है।बइस बार रोती नहीं।)

सुनीति बोली - 
भगवान… अगर मुझे अदृश्य होना पड़े…

(वो गहरी सांस लेती है।)

सुनीति बोली - 
तो बस इतना कर दीजिए कि मैं रास्ता न भूलूँ।

(घंटी अपने आप बज उठती है।)

(रात। वही पुरानी साइंस लैब। सुरक्षा लाइट्स, कैमरे।)
(चुपचाप अंदर घुसती है।)

ये चोरी नहीं थी… ये प्यार का मिशन था।

(फ्रिज़र खुलता है। नीली रोशनी।)
(एक शीशी— INV-07 : Invisibility Compound)
(सुनीति का हाथ काँपता है।)

सुनीति (फुसफुसाकर) बोली - 
बस थोड़ा सा… सिर्फ़ रास्ता पार करने के लिए।

(वो शीशी अपने बैग में रख लेती है।)
(अचानक— अलार्म की हल्की बीप।)
(सुनीति भागती है। तभी शीशी से एक बूँद उसके हाथ पर गिरती है।)
(उसकी उँगलियाँ धीरे-धीरे धुंधली होने लगती हैं।)

सुनीति (आश्चर्यचकित होकर) बोली - 
ये तो… अभी से—?

(वो अपने हाथ देखती है— आधा दिखाई दे रहा है, आधा नहीं।)

बलिदान हमेशा पूरा नहीं होता...कभी-कभी धीरे-धीरे शुरू होता है।
(सुनीति आँखें बंद करती है।)

सुनीति बोली - 
कौशिक जी…मैं आ रही हूँ…

अब सुनीति उस राह पर थी जहाँ से वापसी की गारंटी नहीं थी।
पर प्यार में गारंटी नहीं देखी जाती…सिर्फ़ भरोसा देखा जाता है।

(रात। सड़क पर स्ट्रीटलाइट्स जल रही हैं। सुनीति तेज़ क़दमों से चल रही है।)
(उसके पैर दिख रहे हैं… पर शरीर धुंधला होता जा रहा है।)

अदृश्य होना एक पल की घटना नहीं थी…भी ये हर क़दम के साथ
खुद से दूर जाने का सफ़र था।

(सुनीति अपने हाथ देखती है। अब सिर्फ़ हल्की-सी परछाईं बची है।)

सुनीति (काँपती आवाज़ में) बोली - 
बस घर पहुँच जाऊँ…
कौशिक जी को देख लूँ…।

(उसकी आवाज़ गूंजती है, पर चेहरा लगभग ग़ायब।)
(दरवाज़ा खुलता है।)

कौशिक (घबराकर) बोला - 
सुनीति…?

(कमरे में सन्नाटा।)

कौशिक बोला - 
तुम्हारी आवाज़…तुम यहीं हो न?

(सुनीति अंदर आती है। अब वो पूरी तरह अदृश्य है। सिर्फ़ उसकी साँसों की आवाज़।)

सुनीति (धीरे से) बोली - 
मैं यहीं हूँ…

(कौशिक का दिल बैठ जाता है।)
(कौशिक टेबल की ओर दौड़ता है। वही स्पेशल चश्मा उठाता है।)
(हाथ काँपते हैं।)

जिस चश्मे से उसने अपनी सच्चाई देखी थी…आज उसी से अपना प्यार देखने वाला था।
(वो चश्मा पहन लेता है।)

(कौशिक की आँखों के सामने सुनीति का रूप उभरता है—
हल्का, नीली रोशनी में घिरा।)

कौशिक (टूटती आवाज़ में) बोला - 
सुनीति…

(वो आगे बढ़ता है, पर हाथ खाली रह जाते हैं। क्योंकि सुनीति ने दवाई अपने ऊपर डाली नहीं थी dairect पी ली थी। जिससे वो किसी को छू भी नहीं पा रही थी।)
(कौशिक घुटनों के बल बैठ जाता है। आँसू ज़मीन पर गिरते हैं।)

कौशिक (रोते हुए) बोला - 
तुमने ऐसा क्यों किया…?
मैंने मना किया था न…।

(सुनीति उसके सामने बैठ जाती है—अदृश्य होते हुए भी पास।)

सुनीति (भावुक होकर) बोली - 
क्योंकि अगर मैं न करती तो आप खो जाते…।

कौशिक बोला - 
और मुझे बचाने के लिए खुद को खो देना सही था?

सुनीति बोली - 
प्यार में हिसाब नहीं होता कौशिक जी…

(वो उसका चेहरा छूना चाहती है, पर हाथ आर-पार निकल जाता है।)
(कौशिक अपनी हथेलियाँ अपने चेहरे पर रख लेता है।)

कौशिक बोला - 
मैं तुम्हें देख सकता हूँ…पर छू नहीं सकता…

(वो चीख पड़ता है।)

कौशिक बोला कि 
ये कैसी सज़ा है…!

सुनीति (हल्की मुस्कान के साथ) बोली - 
आप रोइए मत…कम से कम आप मुझे देख तो पा रहे हैं…।

(कौशिक सिर हिलाता है, आँसू थमने का नाम नहीं लेते।)

आगे क्या होगा क्या सुनीति हमेशा के लिए अदृश्य हो जाएगी?
क्या वो कौशिक को वापस लौटा पाएगी?
एक सुहागन जीतेगी या हारेगी?

अगर आपको कहानी पसंद आ रही हो तो follow जरूर करें। और ऐसी ही और भी कहानी पढ़ते रहिए। और comment करके जरूर बताइए कि कहानी में आपको क्या अच्छा लगा...।
तब तक के लिए धन्यवाद ...🤗🤗🤗🤗