बड़े दिल वाला - भाग - 11 Ratna Pandey द्वारा प्रेरक कथा में हिंदी पीडीएफ

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बड़े दिल वाला - भाग - 11

अभी तक आपने पढ़ा कि अनन्या अपने पिता के दबाव और अनुराग की सहजता के कारण ससुराल लौट आती है। रास्ते में वह गुस्से में रहती है, लेकिन अनुराग उसे आश्वासन देता है कि वह उसकी इच्छा के बिना कोई कदम नहीं उठाएगा। घर पहुँचकर सब सामान्य दिखता है, परंतु अनुराग के मन में संदेह और सवाल उठने लगते हैं कि कहीं अनन्या की शादी उसकी मर्जी के खिलाफ तो नहीं हुई। अब इसके आगे -

अनुराग के ऑफिस जाने के बाद घर में ख़ुद को अकेला पाकर अनन्या बहुत खुश हो गई। वह आजाद पंछी की तरह महसूस कर रही थी। उसने सोचा, वीर की तो नाइट शिफ्ट चल रही है, क्यों न उसके घर जाकर वह उसे सरप्राइज दे। ऐसा सोचकर खुश होते हुए वह तैयार होने लगी।

तभी वीर का मैसेज आया, "मिस यू अनु, तुम्हारा इंतज़ार मुझे मार डालेगा। तुम अपने आप को तुम्हारे पति से बचा कर रख रही हो ना? मैंने तुम्हें कहा था ना कि तुम मुझे गंगा की तरह पवित्र मिलना, बिल्कुल अनछुई।"

अनन्या ने उसका मैसेज पढ़ कर कोई जवाब नहीं दिया और उससे मिलने पहुँच गई।

वहाँ पहुँच कर जैसे ही उसने दरवाज़ा खटखटाया, वीर ने दरवाज़ा खोला और वह अनन्या को देखकर ख़ुशी से उछल पड़ा।

उसने कहा, "अनु मेरी जान, मैं जानता था तुम भी मेरे लिए उतना ही तड़प रही होगी जितना मैं तड़प रहा हूँ, आ जाओ अंदर।"

अनन्या के अंदर आते ही वीर ने जल्दी से दरवाज़ा बंद कर लिया और उसे बाँहों में भरते हुए कहा, “अनु, आज हमारा अधूरा मिलन हम ज़रूर पूरा कर लेंगे। बहुत तरसाने के बाद मिल रही हो तुम," इस तरह कहते हुए वीर ने उसके होठों को अपने होठों से सील कर दिया।

अनन्या वीर की बाँहों में आकर खुश हो रही थी। तभी उसे अपने पापा की कही बात याद आ गई कि बेटा, मेरी इज़्ज़त का ख़्याल रखना, साथ ही उसकी नज़र अपने मंगल सूत्र पर पड़ी। ये बात दिमाग में आते ही अनन्या कांपने लगी और उसने तुरंत ही अपने आप को अलग करते हुए कहा, "वीर, आज नहीं।"

वीर ने झुंझलाते हुए कहा, "यह तुम क्या कह रही हो अनु? आज क्यों नहीं ...? कितनी मुश्किलों के बाद तो यह दिन आया है।"

अनन्या ने कहा, "वीर, तुम समझते क्यों नहीं ... मैं नहीं चाहती कि हमारे मिलन का अंजाम बुरा हो। पहले हम शादी करेंगे, उसके बाद ही हमारा अधूरा मिलन पूरा होगा।"

शादी शब्द सुनते ही वीर ने गुस्से में कहा, "अनु, शादी तो तुम पहले ही कर चुकी हो।" 

"तो मैं उसे तलाक दे दूंगी वीर और फिर हमेशा के लिए तुम्हारी ही तो रहूंगी।"

वीर का चेहरा उतर गया। आज भी उसका अधूरा मिलन अधूरा ही रह गया। अनन्या उसे किस करके वापस लौट गई। वीर को वह बताना भूल गई कि इन दिनों वह बिल्कुल आजाद है। वह एक हफ्ते तक रोज़ उससे मिलने आएगी।

अगले दिन वीर के पास जाने से पहले अनन्या ने अपने गले से मंगल सूत्र उतारकर अलमारी में रख दिया। वह सोच रही थी कि कल वीर उससे नाराज़ हो गया था लेकिन आज वह ऐसा नहीं होने देगी। उसने सच में वीर को बहुत इंतज़ार करवा दिया है, यही सब सोचते हुए वह वीर के घर पहुँच गई। 

वीर के घर पहुँच कर उसने देखा, आगे का दरवाज़ा तो खुला हुआ है। शायद वीर दरवाज़ा बंद करना भूल गया होगा। ऐसा सोचते हुए उसने धीरे से दरवाज़ा बंद कर दिया। वह जैसे ही वीर के कमरे तक पहुँची, उसने सुना अंदर से किसी लड़की की आवाज़ आ रही थी। वह लड़की वीर के साथ बिस्तर पर थी और उन दोनों के बीच वही सब कुछ चल रहा था जो एक पति-पत्नी के बीच होता है। अनन्या को उनकी आहें, गर्म सांसें सब कुछ सुनाई दे रही थीं। बीच-बीच में "आई लव यू" कहने की आवाज़ें भी आ रही थीं। 

रत्ना पांडे, वडोदरा (गुजरात)
स्वरचित और मौलिक 
क्रमशः