Electron Repulsion–Balance Siddhant PrabhjotSingh द्वारा विज्ञान में हिंदी पीडीएफ

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Electron Repulsion–Balance Siddhant

Electron Repulsion–Balance Siddhant

(इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण–संतुलन सिद्धांत)
प्रस्तावना (Introduction)
परमाणु की संरचना को सामान्यतः नाभिक और इलेक्ट्रॉन के बीच आकर्षण बल के आधार पर समझाया जाता है। परंतु केवल नाभिकीय आकर्षण बल से न तो इलेक्ट्रॉनों की वास्तविक व्यवस्था को पूरी तरह समझा जा सकता है और न ही परमाणु की दीर्घकालिक स्थिरता को स्पष्ट किया जा सकता है।
इस कमी को दूर करने और परमाणु संरचना को संतुलित दृष्टिकोण से समझाने के लिए Electron Repulsion–Balance Siddhant प्रस्तुत किया गया है।
सिद्धांत का उद्देश्य
इस सिद्धांत का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि परमाणु की संरचना केवल नाभिक और इलेक्ट्रॉन के आकर्षण से नहीं बनती, बल्कि इलेक्ट्रॉनों का आपसी प्रतिकर्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
यह सिद्धांत यह समझाने का प्रयास करता है कि इलेक्ट्रॉन किसी निश्चित कठोर पथ पर नहीं चलते, बल्कि वे उन क्षेत्रों में व्यवस्थित होते हैं जहाँ नाभिकीय आकर्षण और इलेक्ट्रॉन–इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण के बीच संतुलन स्थापित होता है।
मुख्य नियम (शब्दों में)
इस सिद्धांत के अनुसार परमाणु के भीतर प्रत्येक इलेक्ट्रॉन पर एक साथ दो मूलभूत बल कार्य करते हैं।
पहला बल नाभिक द्वारा लगाया गया आकर्षण बल होता है, जो इलेक्ट्रॉन को नाभिक की ओर खींचता है।
दूसरा बल परमाणु में उपस्थित अन्य सभी इलेक्ट्रॉनों द्वारा लगाया गया आपसी प्रतिकर्षण बल होता है, जो इलेक्ट्रॉनों को एक-दूसरे से दूर बनाए रखता है।
परमाणु की स्थिरता तभी बनी रहती है जब किसी भी इलेक्ट्रॉन पर लगने वाला नाभिकीय आकर्षण बल और अन्य इलेक्ट्रॉनों से उत्पन्न कुल प्रतिकर्षण बल आपस में संतुलन बना लेते हैं।
जब इन दोनों बलों का संयुक्त प्रभाव शून्य हो जाता है, तब इलेक्ट्रॉन अपनी संतुलित स्थिति बनाए रखता है।

मुख्य सूत्र 

Σ F_nucleus + Σ F_electron-electron = 0


या

Atomic Stability = Nuclear Attraction + Electron Repulsion = 0

F_i = - k * ( Z * e^2 / r_i^2 ) + Σ ( j ≠ i ) [ k * ( e^2 / r_ij^2 ) ] = 0

खाली स्थान भरो:

यदि कुल बल = ______ ,
तो परमाणु स्थिर होता है।

उत्तर
यदि कुल बल = 0 ,
तो परमाणु स्थिर होता है।

जब नाभिकीय आकर्षण बल और इलेक्ट्रॉन–इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण बल आपस में बराबर और विपरीत होते हैं, तब उनका कुल योग शून्य हो जाता है और परमाणु स्थिर बना रहता है।

सूत्र की व्याख्या
पहला पद नाभिक और इलेक्ट्रॉन के बीच आकर्षण बल को दर्शाता है।
दूसरा पद अन्य सभी इलेक्ट्रॉनों द्वारा उत्पन्न प्रतिकर्षण बलों के योग को दर्शाता है।
जब इन दोनों बलों का योग शून्य होता है, तब इलेक्ट्रॉन संतुलन अवस्था में रहता है और परमाणु स्थिर बना रहता है।
शक्तिशाली संतुलन कथन
यदि किसी भी स्थिति में नाभिकीय आकर्षण प्रतिकर्षण से अधिक हो जाए, तो इलेक्ट्रॉन नाभिक की ओर गिरने लगेगा।
और यदि प्रतिकर्षण आकर्षण से अधिक हो जाए, तो इलेक्ट्रॉन परमाणु की सीमा से बाहर निकल जाएगा।
अतः परमाणु का अस्तित्व स्वयं इस बल-संतुलन का प्रमाण है।
सिद्धांत का महत्व
यह सिद्धांत स्पष्ट करता है कि:
इलेक्ट्रॉन केवल नाभिक के कारण नहीं टिकते
इलेक्ट्रॉन–इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण परमाणु संरचना का आधार है
कक्षाओं की बनावट, दूरी और व्यवस्था बल-संतुलन का परिणाम है
इलेक्ट्रॉन–इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण कोई गौण प्रभाव नहीं, बल्कि परमाणु की स्थिरता का अनिवार्य घटक है।
निष्कर्ष
Electron Repulsion–Balance Siddhant परमाणु को केवल आकर्षण पर आधारित प्रणाली न मानकर, उसे नाभिकीय आकर्षण और इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण के संतुलन से बनी एक स्वाभाविक, गतिशील और स्थिर संरचना के रूप में प्रस्तुत करता है।
यह सिद्धांत परमाणु संरचना को समझने के लिए एक संतुलित और तार्किक दृष्टिकोण प्रदान करता है।
प्रस्तुतकर्ता / प्रस्तावक
PRABHJOT SINGH