इंतेक़ाम - भाग 36 Mamta Meena द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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इंतेक़ाम - भाग 36

आज दीपावली थी निशा ने भी अपने बच्चों की खुशी के लिए घर में थोड़ी बहुत सजावट की थी, फिर निशा ने शाम को अपने बच्चों और विजय अपनी सास के साथ दीपावली का त्यौहार मनाया,,,,,आज इतने दिनों बाद अपने बच्चों और बीवी के साथ दीपावली का त्यौहार मना कर विजय की आंखों में खुशी के आंसू छलक उठे थे,,,,विजय की मां भी आप अपने पोतों पतियों से बहुत प्यार करती उनके साथ खेलती उन्हें अपने हाथों से तरह-तरह के व्यंजन बना कर खिलाती, अब वह भी किसी भी तरह अपनी गलती का प्रस्ताव पश्चाताप करना चाहती थी,,,,,,आज भैया दूज थी निशा के ऑफिस की आज छुट्टी थी, निशा घर के कामों में लगी हुई थी तभी बेल बजी निशा ने जैसे ही दरवाजा खोला तो सामने सुनील दत्त अपने बच्चों के साथ खड़ा हुआ था,,,,,उन्हें देखकर निशा मुस्कुराते हुए बोली आइए आइए सर अंदर आइए यह कहकर निशा उन्हें अंदर ले आई और सोफे पर बिठाकर उनके लिए पानी ले आई,,,,,तभी अचानक निशा की सास आई और उन्हें हैरानी से देखने लगी,,,,तब निशा रसोई में से पानी लाकर सुनील दत्त और उसके बच्चों को देते हुए बोली यह है विजय की मां है,,,,सुनील दत्त ने हाथ जोड़कर उन्हें प्रणाम किया विजय की मां के भी अभी कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि हैं कौन है, वही विजय चेयर पर बैठा हुआ सुनील दत्त को देखकर अब और परेशान हो उठा,,,,,तभी निशा बोली सर आप इतनी सुबह-सुबह,,,,,यह सुनकर सुनील दत्त के बेटे बोले बुआ जी पापा तो अकेले ही आ रहे थे लेकिन हमने बोला कि हमें भी बुआ जी और गुनगुन दीपू से मिलना है,,,,,यह सुनकर सुनील दत्त बोले निशा आज भूल गई भैया दूज है और हर भैया दूज को एक भाई अपनी बहन के घर नहीं जाएगा तो और खा जाएगा,,,,,यह सुनकर निशा मुस्कुराते हुए बोली सॉरी भैया,,,,तब सुनील दत्त बोले कि अब मुझे कुछ जरूरी काम आ जाए उससे पहले ही जल्दी से मेरे और अपने भतीजे के भैया दूज का तिलक कर दो,,,,,यह सुनकर निशा बोली भैया अभी आई और वह मुस्कुराते हुए अंदर चली गई,,,,,विजय और विजय की मां को जब पता चला कि निशा और सुनील दत्त के बीच भाई-बहन का पवित्र रिश्ता है तो दोनों को ही अपनी सोच पर काफी पछतावा हो रहा था,,,,विजय सोचने लगा कि उसने सोच भी कैसे लिया कि निशा और सुनील दत्त के बारे में कुछ गलत, अरे उसकी निशा उससे गुस्सा हो सकती है लेकिन उसके सिवा किसी और के बारे में नहीं सोच सकती,,,, उसकी आंखों में यह सब कुछ सोचते हुए खुशी के आंसू छलक आए,,,निशा ने अंदर से भैया दूज का कुछ जरूरी सामान लाकर सुनील दत्त और उसके बेटों के तिलक किया और उन्हें नारियल आदि दिया,,,सुनील दत्त और उसके बेटों ने कुछ रुपए निकालकर निशा के हाथों में दिए और फिर अपने साथ लाए हुए कुछ उपहार कपड़े आदि निशा और गुनगुन और दीपू को भी दिए,,, सुनील दत्त ने विजय और उसकी मां से भी बड़े प्यार से बातें की और विजय को हिम्मत दी कि वह जल्दी ही ठीक हो जाएगा सुनील दत्त का व्यवहार देखकर विजय की आंखों में भी आंसू आ गए और वह मुस्कुरा दिया,,,,सुनील दत्त के बेटे को अपने घर आए देखकर गुनगुन और दीपू भी काफी खुश हो गए और भी लोग उनके साथ खेलने में बिजी हो गए,,,,,फिर निशा ने सबके लिए उनकी पसंद का खाना बनाया खाना खाने के बाद वे लोग वहां से सब से विदा होकर अपने घर वापस चले गए,,,,