हुक्म और हसरत - 11 Diksha mis kahani द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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हुक्म और हसरत - 11

🌷🌷हुक्म और हसरत 🌷🌷

अर्जुन+सिया
                 =  #ArSia (अर्सिया)😊



🎀🎀🎀

रात को सिया अपने कमरे में अकेली बैठी थी।

उसने उन सारे पलों को याद किया —
जब अर्जुन ने उसे ज़हर से बचाया,
जंगल से उठाया,
गोली से ढका,
और हर बार — खुद से ज्यादा उसकी साँसों की फ़िक्र की।

“क्यों हर बार तूफ़ान मुझे नहीं, अर्जुन को चोट पहुँचाता है…?”

इसका जवाब आसान था,वो सिया का अंगरक्षक था,पर सिया...उसके लिए वो कही ज्यादा मायने रखने लगा था।


---

"वो हर बार मुझे मौत से बचाता है…
और मैं हर बार उसकी खामोशी में ज़िंदा हो जाती हूँ।”

सिया अर्जुन की बातों से आहत थी।
"तुम्हारी धड़कन थी… और मेरा कर्तव्य।"

उसने दो दिन से अर्जुन से कोई बात नहीं की।
वो नज़रें चुराती रही, और जब अर्जुन कुछ कहना चाहता —
वो खामोशी से पलट जाती।

अर्जुन बस एकटक देखता —
“उसकी चुप्पी... मेरी सज़ा बन गई है।

**
अगले दिन होटल का स्टाफ अर्जुन का सामान दूसरे कमरे में भेज रहा था।
सिया अकेली थी, जब उसे अर्जुन का बैग पड़ा दिखा।

उसे खोजते हुए एक चमड़े की पुरानी डायरी हाथ में आई।
साफ़, सलीके से रखी… लेकिन अंदर कुछ टूटा-बिखरा सा था।

सिया ने पन्ने पलटने शुरू किए —
माँ की तस्वीरें, छोटी उम्र के अर्जुन के स्केच, और फिर...

“मैंने अपनी माँ को मरते देखा…
और उस इंसान को मुस्कुराते हुए महल से बाहर जाते हुए।”

“मुझे सिखाया गया था कि राजा न्याय करता है…
पर मेरा ‘राजा’ मेरी माँ के आँसू भी खरीद ले गया।”

“उसी दिन मैंने फैसला लिया —
मैं भी राजा बनूंगा… पर उनकी तरह नहीं।”

सिया का गला भर आया।
अर्जुन… जिसका अतीत इतना शांत लगता था — उसमें आग थी, राख थी, और अकेलापन था।

**
मीरा महल लौट चुकी थी, लेकिन विक्रांत को लेकर उसका शक गहराता जा रहा था।

एक रात, जब वो अपनी गैलरी में बैठी थी,
विक्रांत का कॉल उसके मोबाइल पर गलती से ब्लूटूथ स्पीकर में कनेक्ट हो गया।

उसने बात नहीं की — बस सुना।

“राजकुमारी से नज़दीकियाँ बना रहा हूँ।
जैसे ही उनके बॉडीगार्ड को साइड करना होगा, मुझे बताना।”

मीरा का हाथ काँप गया।

“ये सिर्फ़ एक प्रेम कहानी नहीं है…
ये साज़िश है।”
मीरा ने सब कुछ सुना… पर अब सवाल था —
क्या वो सिया को सच बताएगी,
या साज़िश की ये चुप्पी उसे भी खामोश कर देगी?"

**

महल की छत पर चाँदनी फैली थी।
काव्या अपने स्केच बुक में कुछ बना रही थी।

तभी विवेक आया — उसके हाथ में गुलाब का एक फूल।

“आपके स्केच में रंग कम होते हैं,”
“क्या मैं एक रंग जोड़ सकता हूँ?”

काव्या ने देखा — उसकी आँखों में हँसी थी।

“रंगों से मत डरो, मिस काव्या,”
“कभी-कभी सबसे खूबसूरत चीज़ें वही होती हैं जो अनकही रहती हैं।”

काव्या ने उसकी तरफ़ देखे बिना कहा —

“आप जैसे लोग… शब्दों से ज्यादा खतरनाक होते हैं।”

“तो आप मुझसे डरती हैं?”
“नहीं… पर थोड़ा सतर्क रहती हूँ।”
काव्या ने उसकी तरफ देख मुस्कुरा दिया।

रात को सिया बालकनी में खड़ी थी —
अर्जुन नीचे लॉन में खड़ा था, चुप, शांत।

सिया ने डायरी अपने सीने से लगाई —
वो अब उसे सिर्फ़ एक बॉडीगार्ड नहीं समझती थी।

“वो जो खुद के जख़्म किसी को दिखाता नहीं…
क्या मैं उसकी मरहम बन सकती हूँ?”

"वो दूर खड़ा था… पर उसके हर दर्द की स्याही अब मेरे हाथों में थी।”
अर्जुन को जब पता चलेगा कि सिया ने उसकी डायरी पढ़ी —
तो क्या वो और टूटेगा?
या… वो अपने अतीत को सिया के सामने उघाड़ देगा?"इसका जवाब तो भविष्य में पता चलेगा।


---

भारत की टॉप इंटरनेशनल कंपनियों में से एक है — एस.(S.) कॉर्पोरेशन।


इस मल्टीनेशनल एंटरप्राइज़ का हेडक्वार्टर मुंबई के हाई-टेक एरिया में स्थित है,
लेकिन इसके शाखाएं लंदन, दुबई, न्यूयॉर्क और सिंगापुर तक फैली हैं।


कंपनी रियल एस्टेट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक सिक्योरिटी और रॉयल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवेलपमेंट के क्षेत्र में अग्रणी है।
पर सबसे हैरानी की बात ये है — एस. कॉर्पोरेशन का सीईओ कोई सार्वजनिक चेहरा नहीं है।

बोर्ड मीटिंग्स, विदेशी सम्मेलनों और निवेशक बैठकों में एक ही नाम लिया जाता है:
"मिस्टर एस."

कोई नहीं जानता कि वो दिखता कैसा है।
उसकी तस्वीर कभी प्रकाशित नहीं हुई।
वो ईमेल्स, कॉल्स और इंटरनल सिक्योरिटी सिस्टम से ही संवाद करता है।

कुछ लोगों का मानना है कि वो पूर्व राजघराने से है।
कुछ कहते हैं कि वो एक मिलिट्री बैकग्राउंड से आया है।
पर सच क्या है — एस. कॉर्पोरेशन के अंदर भी लोग बस कयास लगाते हैं।

जो स्पष्ट है, वो है उसके फैसलों की सटीकता, उसके प्रोजेक्ट्स की साख, और
उसके साए जैसी मौजूदगी।

राजनीति से लेकर रॉयल्स तक —
हर कोई उस नाम से डरता है।
एक रहस्यमयी इंडियन सीईओ,
जिसका नाम सिर्फ़ दस्तावेज़ों में था — चेहरा किसी ने नहीं देखा।

“मिस्टर. एस.” — यही उनका नाम था।

बोर्ड मीटिंग में आज सीईओ पहली बार वर्चुअली शामिल हुआ।

चेहरा ढका था। आवाज़ गहरी, ठंडी और स्पष्ट।

"इमोशन इज अ लग्जरी, एंड आई डोंट इन्वेस्ट इन लॉसेज.”

कुछ क्षणों को छोड़ दिया जाए तो…
उस सीईओ की आँखों बर्फ  जैसी ठंडी थी।



---

सिया के जीवन में एक चीज़ ऐसी थी जो किसी को नहीं पता थी —


उसका पियानो से रिश्ता।
दीवार पर एक पुराना मेडल लटक रहा था —
"नेशनल यंग पायनिस्ल्ट अवार्ड, पेरिस – विनर: सिया राठौर"

हाँ… सिया भारत की पहली रॉयल पियानो आर्टिस्ट थी,
पर यह बात सिर्फ़ कुछ जर्नल्स और उसकी माँ जानती थीं।

महल की छत पर एक पुराना स्टोर रूम था।
वहीं एक कोना, जहाँ उसने पहली बार एक पुराना टूटा हुआ पियानो देखा था।
नोट्स तो बिगड़े हुए थे, पर सुरों ने उसके दिल में जगा दी थी जुनून की चिंगारी।

रात के वक़्त, जब पूरा महल सोता था,
वो चुपचाप छत पर जाती, किताबों से सीखा हुआ नोटेशन पढ़ती,
और उंगलियों को सुरों पर चलाना सीखती।

कक्षा 8 में उसने एक छुपे नाम से इंटरनेशनल पियानो प्रतियोगिता में भाग लिया —
और तीसरा स्थान हासिल किया।

कॉलेज के दिनों में 3 गोल्ड मेडल, 1 स्पेशल रिकग्निशन अवॉर्ड, और
यूनिवर्सिटी की तरफ से इटली के पियानो फेस्टिवल में इनविटेशन मिला।

लेकिन ये सब उसने अपने परिवार से छुपाया।
खासतौर पर अपने पिता से।

राजा साहब को संगीत से लगाव नहीं था।
उनकी नज़र में कला सिर्फ़ प्रदर्शन थी — कोई “गंभीर भविष्य” नहीं।

सिया ने बचपन से ये सीखा था कि जो दिल की सुनेगा, वो घर से दूर हो जाएगा।🥹
इसलिए उसने अपने सुरों को सीने में दफ़न कर लिया —
बस जब कभी बहुत टूटी हुई होती…
तो पियानो की चाभियाँ उसकी सिसकियाँ बन जातीं।🥺🥺

आज भी जब अर्जुन उसके करीब आता,❤️
तो सिया का मन करता वो उसकी धड़कनें सुनाए… पियानो के सुरों में।✨🙌
पर नहीं — वो सिर्फ़ एक राजकुमारी थी, जिसकी आवाज़ सिर्फ़ आदेश देती है, संगीत नहीं।💗

आज भी जब रात के सन्नाटे में जब सब सो रहे थे,
सिया महल के एक पुराने कोने में चुपचाप पियानो के पास बैठी थी।✨✨


उसके हाथों की उंगलियाँ जब कीज पर चलीं —🙌🙌
तो जैसे हर धुन में उसका अधूरा अतीत बोलने लगा।

राग यमन, राग दरबारी — हर सुर में एक छुपा दर्द था।🥺

अभी सब सो रहे थे, लेकिन एक जोड़ी आँखें जाग रही थीं...
👀👀
वो कोई नौकर नहीं था, न ही कोई अंगरक्षक।

वो उस पियानो रूम के बाहर एक पुराने CCTV कैमरे से सिया को देख रहा था।👀👀

आईपैड पर एक स्क्रीन झलक रही थी —
जिस पर सिया की हर हरकत, हर सुर रिकॉर्ड हो रहे थे।

उसने धीमे से एक फाइल खोली —
"Operation राजसी मोहरा"🌚🌚

और मुस्कुराते हुए फुसफुसाया —

"शिकार अपने आप चाल चल रहा है... अब बस वक्त का इंतज़ार है।"
जिस कमरे में सिया ने खुद को सबसे महफ़ूज़ समझा था…
वहीं से उसकी जासूसी की जा रही थी।😈😈
और वो शख्स — जो अब तक उसकी परछाई भी नहीं बना था…
अब उसकी हर साँस का हिसाब रख रहा था।"

"हर जवाब के पीछे एक राज छुपा है… और हर राज के पीछे एक धोखा।”😈😈

आपसे कुछ सवाल... जवाब दीजिए कमेंट में👇

1.क्या सिया को अर्जुन की डायरी पढ़ने का हक़ था? या वो उसकी हद से बाहर गई?

2.क्या अर्जुन का दर्द सिया को उससे और जोड़ रहा है — या तोड़ रहा है?

3.मीरा ने जो सुना, क्या वो सही था... या कोई खेल है विक्रांत का?

4.क्या मिस्टर S. वही है जो हम सोच रहे हैं?😏😏😏

5.और... पियानो रूम के बाहर जो देख रहा था — वो कौन हो सकता है? कोई नया दुश्मन?

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आपके हर कमेंट से मुझे लिखने की और हिम्मत मिलती है ✨


*** जारी(...)

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अगले अध्याय में सिया का सामना होगा एक ऐसे सच से…
जो उसकी दुनिया हिला देगा।

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~ आपकी अपनी, Diksha Singhaniya "मिस कहानी"
#हुक्म_और_हसरत 🔥