हिंदू और ईश्वर Shivangi Pandey द्वारा कुछ भी में हिंदी पीडीएफ

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हिंदू और ईश्वर

ईश्वर के नाम पर जितनी कमाई हिन्दू धर्म में है किसी और धर्म में नहीं। ईश्वर का प्रतीक , मूर्ति आदि चीजों की हम पूजा करते है क्योंकि हमने अपने ईश्वर को अपने जैसा ही माना है तो फिर इतनी ज्यादा भद्दगी क्यों फैला रखी है धर्म के नाम पर ।

शादी के कार्ड पर,  धूप दीप हर पूजन सामग्री पर   ईश्वर का चित्र प्रयोग होने के बाद कहीं कूड़ेदान में कहीं सड़क पर पैरों के नीचे पड़ा रहता है वहां कोई कद्र भी नहीं करता जब तक प्रतीक मंदिर में न हो घर में ना हो  । तब सनातनी कहां मर जाते है आखिर ।

मूर्ति खंडित होने पर फेंक देंगे कहीं पेड़ के नीचे मंदिर किनारे गंदगी में ,  नहीं तो घर में अपशगुन होगा क्या स्वार्थ है फिर कहते है हम ईश्वर से प्रेम करते है लेकिन तभी तक जब तक घर में सुख शांति बनी रहे । कितनी ही खंडित मूर्तियां सड़कों के किनारे पेड़ों पर वाहनों की धूल फांक रही घर में रखी तो अपशगुन होगा वाह री मतलबी पाखंडी लोग ।

एक नया ट्रेंड आया है राधा कृष्ण का रूप रख कर दो लोग शादियों में एंटरटेन करते है लोगों का  । वो दूल्हा दुल्हन इतने बड़े राजा रानी हो गए है कि राधा कृष्ण के प्रतीक को नचवा रहे वाह वाह  सनातनी लोग। मैं एक शादी में गई थी मैंने देखा मन तो किया पहले दो दो तमाचा जड़ दूं  लेकिन क्या कर सकते है वो तो पैसा कमाने में लगे है क्योंकि उन्हें भी पता है धर्म के नाम पर राधा कृष्ण बनो या नचनिया क्या फर्क पड़ता है  पैसा  मिलना चाहिए  । 

बौड़म तो वो लोग है जो ये सब शादियों में करवाते है फिर उसी ईश्वर की पूजा करके शादी संपन्न होती है अरे  हां कुछ लोग भोले के भक्त है तो कहीं कहीं पर शंकर पार्वती भी दिख जाते है अपने ईश्वर  की जितनी गती हिंदुओं ने की है शायद ही किसी धर्म ने की हो और कहते है हम सनातनी है धर्म की शुरुआत ही होती है धर्म ग्रन्थ से पढ़ता कोई नहीं  सनातनी सब है

  महान सनातनी तो इंस्टाग्राम और फेसबुक वाले है इनके हिसाब से सनातनी होने का पहला कर्तव्य मुस्लिम धर्म को नीचा दिखाना है भले ही गीता पूरे जीवन में न पढ़ी हो ये भी न पता हो उपनिषद् क्या है बकवास करने को कह दो बिना सर पैर की बिना तर्क की बातें करेंगे जिनका समाज से तो संबंध है लेकिन धर्म से नहीं ।एकदम चरम पर दोगले बाजी और पाखंड चालू  है पहले अपने ही आराध्य की इज्जत करना सीख लो भगवा दुपट्टे डालने से हनुमान जी प्रसन्न नही होते  , और सनातनी का स्टेटस लगाने से भगवान को घंटा फर्क नहीं पड़ता ।

अपने ही ईश्वर के सम्मान के लिए अपनों से ही लड़ाई पहले करनी पड़ेगी , हिंदू को पहले  ये समझने की जरूर है ईश्वर से प्रेम क्या है ।  दूसरे धर्म से बहस करने के लिए आपका ज्ञान भी तो उच्च होना चाहिए जो कि है नहीं । व्हाट्सएप और फेसबुक यूनिवर्सिटी से पढ़ के आपको स्टेटस और स्टोरीज मिल सकती है ईश्वर नहीं , ज्ञान नहीं  ।