हाथी और बाघ – एक गाथा Bikash parajuli द्वारा जानवरों में हिंदी पीडीएफ

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हाथी और बाघ – एक गाथा

बहुत समय पहले की बात है। हिमालय की तराई में फैला एक घना और गहरा जंगल था। वहाँ ऊँचे-ऊँचे साल और सागौन के पेड़, बीच में बहती नदियाँ और चारों ओर हरियाली ही हरियाली थी। यह जंगल सैकड़ों तरह के जीव-जंतुओं का घर था।

इसी जंगल में एक विशालकाय हाथी रहता था, जिसका नाम था गजेंद्र। वह शक्तिशाली होते हुए भी दयालु था। कोई भी छोटा जानवर उसके पास आता, तो वह उसकी रक्षा करता। सारे जानवर उसे सम्मान से देखते और कहते –
“गजेंद्र भाई, तुम इस जंगल के सच्चे रक्षक हो।”

लेकिन उसी जंगल में एक खूंखार बाघ भी रहता था। उसका नाम था भयंकरी। उसकी आँखों में हमेशा शिकार की आग जलती रहती थी। जंगल के सब जानवर उससे डरते थे।

टकराव की शुरुआत

एक दिन नदी के किनारे हिरणों का झुंड पानी पीने आया। तभी भयंकरी बाघ वहाँ पहुँच गया। हिरण डरकर भागने लगे। तभी गजेंद्र वहाँ आया और उसने बाघ को रोकते हुए कहा –
“भयंकरी! ये नन्हें जीव तुम्हारे शिकार नहीं हैं। अगर भूख लगी है तो जंगल में और भी रास्ते हैं।”

बाघ ने गुर्राते हुए कहा –
“गजेंद्र! तुम कौन होते हो मुझे रोकने वाले? मैं इस जंगल का असली राजा हूँ। जिसकी ताकत होती है, वही नियम बनाता है।”

गजेंद्र ने शांति से कहा –
“राजा वही है जो सबकी रक्षा करे, डराए नहीं।”

दोनों के बीच यह विवाद धीरे-धीरे जंगल भर में चर्चा का विषय बन गया।

भयंकर युद्ध

कुछ ही दिनों बाद बाघ ने फिर से मासूम जानवरों पर हमला किया। इस बार गजेंद्र ने ठान लिया कि अब वह चुप नहीं रहेगा।
रात का समय था। चाँदनी जंगल पर बिखरी हुई थी। बाघ अचानक झाड़ियों से कूदा और एक नन्ही हिरनी पर झपटा। तभी गजेंद्र ने अपनी गर्जना से पूरा जंगल गूँजा दिया।

दोनों आमने-सामने आ गए।

बाघ बिजली की तरह छलाँग लगाता।

हाथी अपने विशाल दाँत और सूँड़ से उसका रास्ता रोक देता।


युद्ध घंटों चला। बाघ तेज और चालाक था, मगर गजेंद्र की शक्ति और धैर्य अपार था। आखिरकार गजेंद्र ने अपनी सूँड़ से बाघ को उठा कर दूर झाड़ियों में पटक दिया।

थका-हारा बाघ भाग खड़ा हुआ और समझ गया कि यह जंगल उसकी दहशत से नहीं, बल्कि गजेंद्र की दया और साहस से सुरक्षित रहेगा।

जंगल में शांति

उस दिन के बाद जानवरों ने गजेंद्र को अपना सच्चा राजा मान लिया। गजेंद्र ने कभी किसी पर अत्याचार नहीं किया। वह सभी के लिए न्यायप्रिय था।
बाघ भी धीरे-धीरे जंगल के दूसरे हिस्से में चला गया और फिर उसने छोटे जानवरों पर हमला करना छोड़ दिया।


कहानी की सीख

1. सच्चा राजा वह होता है जो सबकी रक्षा करे, न कि आतंक फैलाए।


2. शक्ति का उपयोग केवल दूसरों की भलाई के लिए करना चाहिए।


3. दया और साहस मिलकर ही असली नेतृत्व बनाते हैं।
शक्ति का सही उपयोग करना चाहिए – ताक़तवर होने का मतलब दूसरों को डराना नहीं, बल्कि उनकी रक्षा करना है।


4. सच्चा नेतृत्व दया और साहस से बनता है – जो सबको सुरक्षित रखे वही असली राजा कहलाता है।


5. अत्याचार टिकता नहीं – बाघ की तरह जो डर और लालच से जीते हैं, उनकी हार निश्चित है।


5. सद्भावना ही शांति लाती है – जब गजेंद्र ने सबकी रक्षा की, तभी जंगल में सुख-शांति आई।