जादुई मुंदरी - 2 Darkness द्वारा प्रेरक कथा में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
  • भय से मुक्ति

    ऋगुवेद सूक्ति--(२५) की व्याख्या मंत्र (ऋग्वेद १/१४७/३)“दिप्स...

  • मंजिले - भाग 49

    परिक्रमा की ही साथ चलती पटरी की तरा है, एक से गाड़ी उतरी दूसर...

  • सीप का मोती - 5

    भाग ५ "सुनेत्रा" ट्युशन से आते समय पीछे से एक लडके का आवाज आ...

  • Zindagi

    Marriage is not just a union between two people. In our soci...

  • Second Hand Love

    साहनी बिला   आलीशान महलघर में 20-25 नौकर। पर घर मे एक दम सन्...

श्रेणी
शेयर करे

जादुई मुंदरी - 2

एक कोआ एक अंगुठी योगी के पैरों के पास रख देता है और योगी उसको उठकर अपनी उंगली में पहन लेता है।

मगर उसे बड़ा आश्चर्य होता है कि जब वह अंगूठी पहनते ही कौए को ये कहते हुए सुनता है।

ऐ मिहरबान बड़े योगी ! आज आप ने मेरी जान बचाई है।

और सब चिड़ियों और जानवरों पर आप हमेशा बड़ी मिहरबानी करते हैं।

इसलिए ये अंगुठी मै आपको भेंट करता हूं इसे कबूल किजिए। ये मुंदरी जादु की है।

और इस मे यह तासीर है कि जो कोई इसे पहनता है सब चिड़ियों की बोली समझ सकता है और उन्हें जिस काम का हुक्म देता है उसे इसके दिखाने से उसी वक्त करने के लिए तैयार हो जाते हैं । अगर इस वक्त हमारे लायक कोई काम हो तो हुक्म दीजिए।

यह सुनकर योगी ने कहा हां मेरा एक काम है। मैं पहले कश्मीर का राजा था,पर मेरे दामाद ने मुझे मेरी गद्दी से उतार कर मेरा राज छीन लिया और मैं यहां योगी के भेस में छुपा हुआ हूं। मै चाहता हूं कि मरने के पहले अपनी लड़की की जो की वहां रानी है कुछ खबर सुन लूं और राज की हालत भी जान लूं। अगर तुम पहाड़ों के पार कश्मीर जाकर खबर ले आओ तो बडा उपकार मानू।

बहुत अच्छा कह कर दोनों कौए वहा से उड़ चले और पल भर में योगी की नजरों से ग़ायब हो गए क‌ई दिन तक योगी ने उनको ना देखा। एक दिन वह शाम को अपनी मढ़ी के दरवाजे पर बैठा था।

उसे दो काले दाग से दूर आसमान में दिखाई दिए,

वह उसकी तरफ आ रहे थे और जब नजदीक आ गये वही दोनों कौए निकले।

आकर वे उसके पास एक तिपाई जो वहां पडी थी उस तिपाई पर बैठ गए और उनमें से एक कोआ कश्मीर जाने का नतीजा यो सुनाने लगा -

ऐ महाराज हम आपके लिए बुरी खबर लाए हैं।

रानी जानि की आप की बेटी तो इस दुनिया में से कुच कर ग‌ई है, और एक लड़की छोड़ ग‌ई है।

और आपके दामाद ने दूसरा विवाह कर लिया है पर पहली रानी के तोते से जो कुछ हमने सुना उससे जाना की नई रानी आपकी दोहती को बिल्कुल भी पसंद नहीं करती बल्कि उसे दुश्मन को नजर से देखती है।

और यह भी डर है की जब राजा जब शहर दे दूर शिकार के लिए जायेगा वो बेरहम रानी उस बगैर मां की बच्ची को मरवा डालेंगी यां किसी दूसरी तदबीर से अलहदा कर देगी।

उस बुढ़े बैरागी ने यह बात सुनकर बड़ा दुःख हुआ और फिक्र से पूरी रात नीद नही आई। 

सवेरा होने पर राजकी तरह वह कौए नदी किनारे जब फिर उडने आये,योगी ने उन्हें फौरन अपने पास बुलाया और कहा - ऐ नेक चिड़ियों,यह अंगुठी मेरी दोहती जाकर दे दो और उससे कहो कि जब उसे किसी तरह की मदद या सलाह मशविरा की जरूरत हो तो वह इसके जोर से चाहे जिस चिड़िया को बुला लिया करे हर एक चिड़िया उसे अपनी ताकत भर मदद देगी बस मै अपनी प्यारी दोहती को सिर्फ इतनी ही मदद पहुंचा सकता हूं।

और आंखों में आसूं भर अंगुठी उन कौओं को दे दी कौए यह कह कर की बहुत अच्छा महाराज हम आपके हुक्म के बमूजिब अंगुठी लड़की को दे देंगे।