किताब: राहत इंदौरी - दिलों पर राज करने वाला शायर parth Shukla द्वारा जीवनी में हिंदी पीडीएफ

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किताब: राहत इंदौरी - दिलों पर राज करने वाला शायर

किताब: राहत इंदौरी - दिलों पर राज करने वाला शायर


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भूमिका

जब भी हम उर्दू शायरी की बात करते हैं, तो कुछ नाम ऐसे होते हैं जो हर दिल में जगह बना लेते हैं। उन्हीं में से एक नाम है राहत इंदौरी। वो सिर्फ एक शायर नहीं थे, बल्कि वो लोगों के जज़्बातों की आवाज़ थे। उनका अंदाज़-ए-बयां, उनकी ग़ज़लों का जोश और उनकी जिंदगी की सादगी ने उन्हें हर उम्र के लोगों का चहेता बना दिया। इस अध्याय में हम राहत इंदौरी के जीवन की कहानी, उनकी शायरी, संघर्ष और सफलता की दास्तान को सरल भाषा में जानेंगे।


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अध्याय 1: बचपन और प्रारंभिक जीवन

राहत इंदौरी का जन्म 1 जनवरी 1950 को मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में हुआ। उनका असली नाम राहत कुरैशी था। उनके पिता रफ्तार खान और माता मकबूल उन निसा बहुत ही साधारण परिवार से थे। पिता एक कपड़ा मिल में काम करते थे और माँ गृहिणी थीं।

राहत साहब का बचपन संघर्षों से भरा था। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई नूतन स्कूल, इंदौर से की और फिर इस्लामिया कर्रिए कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। उसके बाद उन्होंने बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी, भोपाल से उर्दू साहित्य में एम.ए किया और डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी, औरंगाबाद से उर्दू में पीएचडी प्राप्त की।


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अध्याय 2: शिक्षक से शायर तक का सफर

राहत इंदौरी ने करियर की शुरुआत बतौर उर्दू प्रोफेसर के रूप में की। वे इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में उर्दू साहित्य पढ़ाते थे। लेकिन उनका असली जुनून शायरी था।

उन्होंने 1970 के दशक में मुशायरों में भाग लेना शुरू किया। उनकी आवाज़ में जो दम था, उनकी बातों में जो सच्चाई थी, वो सुनने वाले के दिल में उतर जाती थी। उनका अंदाज़ सबसे जुदा था - न शब्दों का दिखावा, न भावनाओं का दिखावा। जो दिल में था, वही जुबान पर।


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अध्याय 3: साहित्यिक योगदान

राहत इंदौरी की ग़ज़लों में प्रेम, विद्रोह, समाज की आलोचना, राजनीति पर कटाक्ष, और इंसानियत के संदेश मिलते हैं। उनके शेर सीधे दिल को छूते थे।

उनकी प्रमुख किताबें हैं:

मेरे बाद कौन आएगा

रुत

चाँद पिघलता रहा

धोनी जब तक हवा चलेगी

नाराज़


उनके शेर आम लोगों की जुबान पर चढ़ गए। जैसे:

> "बुलाती है मगर जाने का नहीं, ये दुनिया है इधर जाने का नहीं।"



> "सब के चेहरे थे धुंए से ढंके हुए, मैं किसे कहूं मेरा है और किसे पराया।"



उनकी शायरी में आम आदमी का दर्द था, मोहब्बत की मासूमियत थी और सिस्टम के खिलाफ आवाज़ उठाने का साहस था।


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अध्याय 4: मुशायरे का सितारा

राहत इंदौरी का नाम जब किसी मुशायरे में लिया जाता था, तो लोग उनकी बात सुनने के लिए बेताब हो जाते थे। उनका मंचीय अंदाज़ ऐसा था कि वे श्रोता से सीधे संवाद करते थे। वे अपने शेरों को ऐसे पढ़ते थे जैसे सामने बैठा हर इंसान उनसे खुद बात कर रहा हो।

उनकी आवाज़ में ग़ज़ब का जोश था, जो कहीं हँसी लाता था तो कहीं आँखें नम कर देता था। उन्होंने न केवल भारत में बल्कि पाकिस्तान, अमेरिका, दुबई और इंग्लैंड जैसे देशों में भी मुशायरे किए और लाखों लोगों का दिल जीत लिया।


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अध्याय 5: बॉलीवुड से नाता

राहत इंदौरी ने सिर्फ शायरी ही नहीं, बल्कि फिल्मों के लिए भी गीत लिखे। उन्होंने बॉलीवुड के लिए कई हिट गाने लिखे, जिनमें कुछ प्रमुख हैं:

"मुंबईया" (Mission Kashmir)

"चोरी चोरी जब नजरें मिलीं" (Kareeb)

"नींद चुराई मेरी किसने ओ सनम" (Ishq)


उनके लिखे गानों में भी वही शायरी वाली सादगी और गहराई दिखती थी।


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अध्याय 6: जीवन के संघर्ष और विचारधारा

राहत इंदौरी हमेशा सच बोलने वाले इंसान थे। वे कभी किसी से डरते नहीं थे। चाहे राजनीति हो या समाज, उन्होंने हमेशा अपनी बात खुलकर रखी। उनके शेरों में कई बार सिस्टम पर तीखा व्यंग्य मिलता है।

वे इंसानियत में विश्वास करते थे और धर्म को इंसान से ऊपर नहीं मानते थे। उनके लिए सबसे बड़ा धर्म था - सच्चाई और मोहब्बत।


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अध्याय 7: सोशल मीडिया पर लोकप्रियता

हाल के वर्षों में राहत इंदौरी सोशल मीडिया पर भी बेहद लोकप्रिय हो गए थे। उनके शेरों के वीडियो, मीम्स और स्टेटस लाखों लोगों ने शेयर किए। खासतौर पर युवाओं के बीच वे एक नई क्रांति बन गए थे।

उनका यह शेर तो हर युवा की जुबान पर था:

> "किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है।"



इस शेर के पीछे उनका भाव था कि देश किसी एक धर्म या जाति का नहीं, बल्कि हर उस इंसान का है जो यहाँ रहता है।


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अध्याय 8: अंतिम समय और विरासत

11 अगस्त 2020 को कोरोना वायरस के कारण उनका निधन हो गया। उनके निधन की खबर सुनते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया से लेकर साहित्यिक मंचों तक हर जगह राहत इंदौरी को श्रद्धांजलि दी गई।

आज भी उनकी शायरी लोगों के दिलों में जिंदा है। उनके शेर नए दौर के लोगों को भी उतने ही करीब लगते हैं जितने उनके जीवनकाल में थे।


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निष्कर्ष

राहत इंदौरी सिर्फ एक शायर नहीं थे, वो लोगों के जज़्बातों की आवाज़ थे। उन्होंने अपनी शायरी के जरिए मोहब्बत, इंसानियत और सच्चाई का संदेश दिया। उन्होंने दिखा दिया कि शायरी सिर्फ किताबों में पढ़ने की चीज नहीं, बल्कि उसे जिया भी जा सकता है।

उनकी शायरी आने वाले वक्त में भी लोगों के दिलों को छूती रहेगी। वे एक मिसाल हैं उन सभी के लिए जो अपनी बात बेझिझक कहने की हिम्मत रखते हैं।