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    शाट्यायनी उपनिषद -- नीचे शुक्ल यजुर्वेदान्तर्गत शाट्यायनीय उपनिषद् का मूल संस्कृ...

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    रावण के दस सिर उसकी पहचान का एक प्रमुख हिस्सा हैं। रामायण की अलग-अलग परंपराओं मे...

  • Her Silent Secret - 42

    कुछ हफ्ते बीत चुके थे। पहाड़ियों की ठंडी हवा और डॉ. आर्यन की नियमित थेरेपी ने सं...

  • चक्रवात

                     1 शशि की बेहोशी जब...

  • अनकहा सच (भाग-11)

    अनकहा सच____हितेश को यह सब बताने के बाद....राजू ने अपनी आँखों से बहते आँसुओं को...

  • 1926 की अमावस की वो खौफनाक रात - 23

    तहखाने के किवाड़ के पीछे से आती उस भयानक सरसराहट को भांपकर रुद्र प्रताप सिंह ने...

  • Mafia saiya chapter 6

    अध्याय 6 : तहखाने में दूसरी नित्यारुद्र ने नित्या को बेड पर धकेला तो था, पर उसकी...

  • वृषाली - अध्याय 1

    वृषाली अध्याय – 1 अंगराज या राधेय? मेरे प्रिय वाचक मेरी ये स्टोरी गुजराती भाषा म...

  • Mafia’s possession chapter 7

    अब तकफ़ना के जाने के बाद अब मैनेजर भी कुछ नहीं कर सकता था। वह खुद घबरा गया था कि...

  • DASTAN-E-KARB - भ्रम से परे क्या है? - Chapter 6 Scene 1

    "क्या चाचा कैसी चल रही है बिक्री आजकल?"  अलीपुर में रात की गिरती ठंडी चांदनी को...

1926 की अमावस की वो खौफनाक रात By RAAHULL SHARMA

भाग 1: देवपुर रियासत

सन 1926, भारत भूमि पर फिरंगियों का क्रूर शासन अपने चरम पर था।

चारों ओर गुलामी की ज़ंजीरें जकड़ी हुई थीं, लेकिन उसी दौर में राजपूताने और जंगलों के बीच ब...

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Mafia Saiya. By Shilpi Mishra

अध्याय 1 : पहली टक्कर

रायपुर की सबसे महंगी सड़क पर आज अजीब सा सन्नाटा था।

इस सन्नाटे की वजह थी एक काली जी-वैगन। उसकी स्पीड 150 के पार थी और उसके आगे-पीछे पाँच काली स्कॉर्पियो...

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Mafia's Possession. By Luna Rinn

देहरादून-Famoud Bar Clubदेहरादून का फेमस बार क्लब, यहां पर ऐसा कोई काम नहीं था, जो नहीं होता था। स्मगलिंग, ड्रग्स डीलिंग और भी ऐसे बहुत से इल्लीगल काम होते थे। बाहर से देखने में यह...

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DASTAN-E-KARB - भ्रम से परे क्या है? By Azoorey

"क्या है जिंदगी हक़िक़त या छलावा या कोई भ्रम? इतनी मुद्दत की जिंदगी जिसे हम हक़िक़त समझते रहे क्या वो छलावा थी, क्या सबकुछ सिर्फ एक भ्रम था? क्या हक़िक़ि ज़िंदगी अब शुरू हुई है...

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अंतर्निहित By Vrajesh Shashikant Dave

आठ वर्ष पूर्व :-

दूसरे दिन प्रात: ब्राह्म मुहूर्त से ही सेलेना की योग साधना प्रारंभ होनेवाली थी। सेलेना को रात्री भर निद्रा नहीं आई। कारण यह नहीं था कि पहाड़ पर सभी सुख सुविधा का...

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तुम मिले, जब मैं खुद से बिछड़ गई By Khwaab

कहते हैं कि ज़िंदगी में कुछ मुलाकातें अचानक होती हैं।
न कोई योजना होती है, न कोई इंतज़ार।
बस एक दिन कोई अनजान इंसान हमारी दुनिया में आता है और धीरे-धीरे हमारी कहानी का ऐसा हिस्सा...

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गैंगस्टर का सनकी इश्क By Sanju

लाई हूं, एक ऐसी स्टोरी जिसमे सस्पेंस और लव है जो शुरू होता है हरिद्वार के शहर से जहाँ पर हमारी प्यारी सी वैशाली शर्मा जो की साधरण से परिवार की है ।जिसकी शादी एक ऐसे इंसान से हो जात...

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CRAVE. By Aarika Shadow

एक 19 साल की लड़की आईने के सामने खड़ी थी। वह बिल्कुल नई नवेली दुल्हन की तरह लग रही थी।

उसकी आँखों में चमक थी और चेहरे पर अपार खुशी। वह खुद को आईने में ऐसे निहार रही थी, जैसे कोई...

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डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा की लघुकथाएँ By Dr. Pradeep Kumar Sharma

डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा की तीन लघुकथाएँ (1) लाइक एंड कॉमेंट्सरात के लगभग साढ़े ग्यारह बजे रामलाल जी का हृदय गति रुकने से देहांत हो गया। उनका बड़ा बेटा शंकरलाल गाँव से सैकड़ों मील दू...

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आईने में बदलता जीवन By Chandni choudhary

आज जब मैं खुद को आईने में देखती हूँ, तो कुछ अलग-सा महसूस होता है। आईने में चेहरा तो वही दिखाई देता है, लेकिन लगता है जैसे जीवन में न जाने कितने बदलाव आ गए हैं।

एक समय था, जब लोग...

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एक समय था, जब लोग...

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