बेफिक्री लड़की K T द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

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बेफिक्री लड़की

1] अजीब सी लड़की..

मैं हूं लड़की अजीब सी.....
सुनती तो सबकी, मगर करती सिर्फ अपने मन की हूं..
जब भी बारिश आती है, तो मैं सब कुछ भूल कर पूरे मन से भीगती हूं..
तेज हवाओं में भी, झूम के चलती हूं..
हां, मैं हूं लड़की अजीब सी, मगर प्यार अपनों से करती हूं।।

मैं पहाड़ों को देखकर, उनकी तरह विशाल बनना चाहतीं हूं..
मैं समुद्र से मिलने पर, उसके दूसरे किनारे पर पहुंचने की ख्वाहिश रखती हूं...
हां, मैं हूं लड़की अजीब सी, मगर प्यार अपनों से बहुत करती हूं।।

जो मुझे पसंद आए, उसका साथ कभी नहीं छोड़ना चाहती हूं..
जिससे मेरी हर बात पर लड़ाई हो, मैं उससे पूरा दिन बात करना चाहती हूं..
हां, मैं हुं लड़की अजीब सी, मगर प्यार अपनो से बहुत करती हूं।।

मैं बहुत emotional सी हूं, हर छोटी छोटी बातों पर रो देती हूं..
कभी कभी ऐसा लगता है, की मैं खुद को भी नहीं समझती हूं...
हां, मैं हूं लड़की अजीब सी....

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2] क्या लिखूँ ? ✍️

मैं अगर कुछ अपने बारे में लिखुं तो क्या लिखूँ?
क्या खुद को अच्छा या फिर बुरा लिखूँ....

कोई कहानी पूरी.. या फिर कोई ख्वाब अधूरा लिखूँ..
कोई मुझे क्या समझे मै आज खुद को क्या लिखुं

क्या मैं खुद को समझदार या फिर नादान परिंदा लिखूँ
मैं उम्र से खुद को बड़ा या फिर कोई छोटा बच्चा लिखुं..

क्या आज अपने इस पल को सुनहरा लिखूँ..
या फिर जो बरसो पहले खो गया उसको मैं आज लिखूँ..
क्या जो अभी तक खुद से भी न मिल पाई उसे लिखूँ..
या फिर जो दुनिया वाले मुझे समझ बैठे उसे ही लिखूँ..

मैं उलझी हुई हू खुद वो लिखूँ या दिखवा मे सुलझी लिखूँ
चलो जाने देती हू मैं खुद को बस एक मुसाफिर ही लिखूँ।।

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3] मैं ऐसी क्यूं हूं..?

जहां जाने की उम्मीद न हो वो वहां के ख्वाब देख लेती है,
जो उससे बहुत दूर हो उसको वो अपने करीब समझ लेती है
वो हर पल यूं ही पुराने गाने गाना पसंद करती है,
शाम को अकसर चाय के साथ नज्में भी गा लेती है
कभी कागज पर एक शब्द भी नहीं लिख पाती है,
तो कभी वो रास्तों में चलते महाकाव्य रच देती है।
वो अक्सर अकेले बैठ कर खुद से ही बात करती है
वो जिंदगी में खुशियों के बदले दर्द बाटती है,
उसकी हसी शाम होते ही गुम हो जाती है,
लेकिन हर सुबह फिर वो मुस्कुराती है।

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4] मेरे आइने वाली वो लड़की..

एक लड़की है जो मुझे मुझसे ज्यादा जानती है..
हां सही सुना आपने...
वो मेरे कमरे के आइने में रहती है।

मेरी कहानियों को बड़े इतिमिनान से सुनती है..
मेरे अनकहे अल्फाज़ भी बाखूबी समझती है..
हां वही लड़की जो मेरे कमरे के आइने में रहती है।

कुछ छुपाती हूं उससे तो वो पहले ही जान जाती है...
मेरे मुंह फेरने पर भी वो परेशानियां पहचान जाती है..
मेरे ख्वाबों की उड़ान वो मेरे साथ में भरती है
मेरे हारने पर वो मुझे हौसला भी देती है
हां जी हां वही लड़की जो मेरे घर के आइने में रहती है..

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5] पुराने ख्यालों वाली लड़की...

मैं पुराने गाने.. पुरानी फिल्मे, पुरानी किताबों में खोने वाली लड़की हूं,
मैं ज़िंदगी के अपने हर एक पल इनके साथ सुकून से जीती हूं...

अब तुम इसे पुराने ख्याल या पुरानी सोच कहना चाहो तो कह सकते हो,
पर तुम्हे भी पता है, की तुम भी तन्हाई में सहारा इन्ही का लेते हो...

अंतर बस इतना है, मैं इनके साथ अपने हर पल बांटती हूं
गम हो या खुशी हो हर पल मैं इनमे ही डूबना पसंद करती हूं...

और तुम आते हो इनके पास अपने जज्बात लेकर,
देते हो अपने पल उनको जब होते हो हालात से बेघर..

तुम भी कभी उनसे बिना किसी मतलब के इश्क निभाना,
इन पुराने गानों और पुरानी किताबों में कभी यूं ही खो जाना...

फिर तुम आना और मुझसे बताना की तुम्हे सुकून मिला या नहीं,
या फिर भी तुम यही कहोगे की मैं पुराने ख्यालों वाली लड़की हूं नई सोच की नही...

6] Dear me 💁🏻‍♀️
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तुम तो ऐसी नही थी न?

तुम तो पहले खुल के मुस्कुराया करती थी।
तुम यूं सब से घुल मिल जाया करती थी।
यूं ही तुमको पूरा दिन गुनगुना पसंद था।
एक प्यारा सा नूर तुम्हारे चहरे पर दिखता था।

अब क्या हो गया तुमको?

तुम यूं इतनी खामोश सी हो गई हो..
तुम अब मुस्कुराना भी तो भूल रही हो..
तुम्हारे आंखों में इतना सवाल क्यूं है..
तुम्हारे मन में समंदर की लहरें क्यूं हैं..

तुम अब किसी से बात भी नही करती..
क्यूं तुम हर बात पर हो चिढ़ती..
क्यूं तुमको ये अकेला और खालीपन रास आ गया..
ये तुम्हारा बिना वजह सजना संवरना कहा गया..

क्यू तुम अब रातों को जागने लगी हो..
क्या तुम अब खुद से भी लड़ने लगी हो..
ये तुमको क्या हो रहा ......
तुम तो ऐसी नही थी न?

अपका बहुत शुक्रिया पढ़ने के लिए🙏🏻💕
Writer ~ " kt✍️"