Flames of Love - 1 books and stories free download online pdf in Hindi

फ्लेम्स ऑफ लव - भाग 1

"तुम मेरे दिल की धड़कन हो, मेरे दर्द की दवा हो,
तुम्हारी आंखों में मेरी दुनिया बसी है।
तुम मेरे दिल के सुकून हो,
तुम्हारा प्यार मेरे लिए एक चमत्कार है जो दिल की सारी दरारें भर देता है।
तुम मेरे जीवन की खुशियां हो,
तुम्हारा प्यार मेरे लिए अनमोल खजाना है।"

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गर्मी का मौसम था। सूरज ढलने वाला था। खचाखच जाम से भरी सड़कों के बीच से निकलते हुए वह जल्दी जल्दी अपने घर की तरफ़ जा रही थी। वह दिनभर भागदौड़ करकर थक चुकी थी अब वह बस अपने अपार्टमेंट में जाकर आराम करना चाहती थी। थोड़ी देर चलते चलते वह अपने अपार्टमेंट में पहुंच गई थी। उसने लाइट और पंखा चालू किया और फिर अपना बैग टेबल पर रखकर पंखे के नीचे सोफे पर लेट गई।
वह एक छोटा सा अपार्टमेंट था जो उसके लिए काफी था। दरवाज़ा खुलते ही बैठक का कमरा था जिसपर थ्री सीटर सोफ़ा और एक कॉफी टेबल रखी हुई थी। कमरे के एक किनारे पर जूते रखने की जगह थी जो दरवाज़े के पास थी। बैठक के बाएं तरफ एक छोटा सा किचन था। किचन के सामने कुर्सी मेज रखी हुई थी जिसमें बैठकर वह खाना खाया करती थी। दाएं तरफ बेडरूम था और उससे सटा हुआ बाथरूम था। उसका घर छोटा था लेकिन साफ सुथरा और सुंदर था।
लेटे–लेटे उसने अपने बैग से फोन निकला और अपनी मां को कॉल लगाया दो तीन घंटी जाने के बाद उसकी मां ने फोन उठा लिया।
"आज भी मैं दिनभर भागती रही और कुछ भी नहीं मिला" उसने अपनी मां से उदासी भरे स्वरों में कहा।
"कोई बात नहीं बेटा तू हिम्मत मत हारना क्या पता किसी दिन तेरा सलेक्शन हो जाए" उसकी मां ने दूसरी तरफ से कहा।
"मां में एक हफ्ते से 9 कंपनियों में इंटरव्यू दे चुकी हूं लेकिन कहीं से भी मुझे कॉल नहीं आया....शायद मुझमें ही कोई कमी है इसीलिए मुझे कोई भी रखना नहीं चाहता" उसने दुखी होते हुए कहा।
"तुझमें कोई कमी नहीं है तू उदास मत हो देखना तेरा सलेक्शन जरूर होगा...अच्छा बता तूने खाना बना लिया?" उसकी मां ने उससे पूछा।
"नहीं मां अभी–अभी तो मैं घर पहुंची हूं थोड़ी देर में बनाऊंगी" उसने कहा।
"ठीक है बेटा ख्याल रखना सब सही होगा, अपार्टमेंट का दरवाज़ा ठीक से बंद कर लेना" उसकी मां ने उसे समझाते हुए कहा।
"हां हां मैं ख्याल रखूंगी..कल बात करते हैं" इतना कहकर उसने फोन काट दिया और खाना बनाने के लिए उठ गई।
उसका नाम वामिका श्रीवास्तव था वह 24 साल की सुंदर लड़की थी। उसके पिता की उसके बचपन में ही एक्सीडेंट के कारण मृत्यु हो गई थी जब वह 9 साल की थी। उसका जीवन सदैव उत्तम नहीं था। उनकी मां को काफ़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा ताकि वह अपनी बेटी को अच्छी जिंदगी दे सकें वह वह नौकरी चाहती थी ताकि वह अपनी मां और खुद को बेहतर जीवन दे सके,किराया चुका सके और अपने और मां के लिए एक बढ़िया सा अपार्टमेंट खरीद सके। वह मुंबई के किसी कोने में एक छोटे से अपार्टमेंट में अकेले रहती थी। सप्ताह के अंत में वह अपनी मां से मिलने जाया करती थी जो की उसके घर से दो घंटे की दूरी पर था। आज वह इसी आस में थी की उसे कोई कंपनी से कॉल आ जाए।
मुंबई शहर में एक बड़ी सी हवेली जिसके चारों तरफ बॉडीगार्ड्स थे। उस हवेली के अंदर चार बेडरूम, दो गेस्टरूम एक बड़ी सी किचन, डाइनिंग टेबल जिसपर बारह लोगों के बैठने की जगह थी और एक बड़ा सा बैठक का कमरा था। वह हवेली शहर के जाने माने बिजनेसमैन मिस्टर पाटनकर जी की थी। अब उनका बिजनेस अब उनके बड़े बेटे अद्वित पाटनकर का हो चुका था।
अद्वित आठाइस वर्ष का एक आकर्षक नौजवान युवक था। वह बहुत बुद्धिमान व्यक्ति था और काफ़ी मेहनती था। लेकिन उसे गुस्सैल स्वभाव की समस्या थी। उसे छूने से नफरत थी उसे नहीं पसंद था की कोई उसे छुए वह असहज महसूस करता था।
अपने पिता का व्यवसाय संभालने के बाद उसने अपना खुद का व्यवसाय शुरू किया। उसकी कंपनी स्टार इनोवेटेक्स पूरे भारत में बहुत सफल कंपनी थी यह भारत के बाहर भी माल निर्यात करती थी। वह अपनी कम्पनी का ऑनर और सीईओ था। उसने सबसे कम उम्र के उद्यमी के तहत कई पुरस्कार भी जीते थे। उसकी गड़ना देश के सबसे अमीर व्यक्तियों में होती थी। वह अक्सर काम के सिलसिले में विदेश ही रहता था और साल में दो बार भारत आता थाउसकी अनुपस्थिति में उसका सौतेला भाई एकांश पाटनकर जिसे उसने मैनेजर की पोस्ट पर रखा था कम्पनी का कार्यभार संभालता था।

एकांश बहुत ही कामचोर व्यक्ति था वह अपने बड़े भाई को सफलता से चिड़ता था और कम्पनी को हथियाना चाहता था जिसे उसके भाई ने अपनी मेहनत से सफ़ल बनाया था। वह अक्सर अपना सारा काम असिस्टेंट को दे देता था और खुद या तो ऑफिस में बैठकर सो जाता था या अय्यासी करने चले जाता था। उसके असिस्टेंट मिस्टर राहुल बहुत ही मेहनती व्यक्ति थे वे पूरी ईमानदारी से सारा काम करते थे।
कुछ ही दिनों में अद्वित वापस आने वाला था इसलिए ऑफिस में सभी लोग फुर्ती से अपना काम कर रहे थे ताकि किसी को भी उसकी डांट न सुननी पड़े। सभी लोग उसके गुस्से से डरते थे इसलिए अपना जल्दी काम पूरा करने की कोशिश कर रहे थे।अगले दिन सुबह वामिका की नींद फोन की घंटी की आवाज़ से टूट गई उसने बंद आंखों से फोन उठाया और अपने कान पर लगाया दूसरी तरफ से एक व्यक्ति की आवाज़ आई ,"हेलो क्या मिस वामिका श्रीवास्तव है?"
"हां मैं ही हूं आप कौन बोल रहे हैं" वामिका अभी भी आधी नींद में थी।
"जी में स्टार इनोवेटेक्स से बोल रहा हूं हम आपको बताना चाहते हैं कि आपका हमारी कंपनी में एक रिसेप्शनिस्ट के तौर पर सलेक्शन हो गया है और आप आज से ज्वाइन कर सकती हैं।" उस आदमी ने कहा। ये सुनकर उसकी नींद झट से खुल गई और वह जल्दी से उठकर बैठ गई "क्या सच में?.. मैं सेलेक्ट हो गई" वामिका ने उत्साहित स्वरों में कहा। "हां मिस श्रीवास्तव आपकी शिफ्ट सुबह नौ बजे से शाम सात बजे तक की है और हम आपको एक डिसेंट सैलरी 55,000 ऑफर कर रहें हैं। तो क्या आप ज्वाइन कर रही हैं?" दूसरी तरफ से उस आदमी ने वामिका से कहा।"जी जरूर मैं आज से ही ऑफिस ज्वाइन कर रही हूं। मैं समय पर पहुंच जाऊंगी" इतना कहकर उसने जल्दी से फोन काटकर अपनी मां को कॉल लगाया।
"मां मुझे आज जॉब का ऑफर आ गया और काफ़ी अच्छी सैलरी भी है अब हमारी जिंदगी अच्छी होने वाली है" वामिका ने उत्साहित स्वरों में कहा।
"मैंने कहा था ना कि तू कर लेगी अब बता कब से ज्वाइन कर रही है?" उसकी मां ने उससे पूछा ।
"बस आज से ही कर रही हूं अभी नौ बजे तक पहुंचना है" इतना कहकर उसने घड़ी पर देखा तो साढ़े सात बज चुके थे।
"हे भगवान! में कितनी देर तक सो गई साढ़े सात हो गए है मैं फोन रखती हूं मुझे पहले दिन ही लेट नहीं होना" इतना कहकर उसने फोन काटा और तैयार होने चली गई।तैयार होते होते उसे एक घंटा लग गया था। ऑफिस उसके घर से बीस मिनट की दूरी पर था वह समय पर पहुंच सकती थी उसने अपने अपार्टमेंट के दरवाज़े पर ताला लगाया और एक नए सफ़र की शुरुआत के लिए निकल पड़ी।
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~फ्लेम्स ऑफ लव~



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