इश्क़ होना ही था - 2 Kanha ni Meera द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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इश्क़ होना ही था - 2

**"ओम नमः शिवाय**




** इश्क़ होना ही था part-2 **



अभी तक हमने देखा की दिया अपनी मम्मी के साथ काम कर रही होती है, तभी उसके फोन में किसीका मेसेज आता है और उसे देख कर ही वो बहोत खुश हो जाती है, थोड़ी देर में आने का कह कर वो आपने कमरे में चली जाती है...

वो पहले अपने कमरे का दरवाजा बंध करती हे और फिर बेड परबैठ कर अपने फोन को देखने लगती है और ख़ुशी से वो मेसेज खोलती है...

दिया इस मेसेज को देख कर खुश भी कैसे ना होती , जब एक महीने बाद उसके बॉयफ़्रेंड ने उसे मैसेज भेजा है...

मेसेज को वो जल्दी से खोलती है , वहां एक फ़ोटो होता है, और जैसे ही वह फ़ोटो देखती है, उसकी आँखों से आँसू आने लगते है...

"अगर आखिर में तुम किसी और के पास ही जाना था तो तुम मेरे पास आये है क्यू ...?"
दिया फोटो को देख कर बोलती है...

(मेसेज में उसके बॉयफ्रेंड के साथ एक लड़की थी और इसे देखने के बाद दिया समज जाती है की कब कोई उम्मीद भी नहीं रही की वो फिर से साथ हो सकते है और आज से वो अपनी जिनगी में आगे बढ़ने के बारे में सोचती है और कभी इस बारे में नहीं सोचेगी...)"


*****



कहते है ना की नया सवेरा एक नयी उम्मीद भी लेकर आता है तो इसी तरह एक उम्मीद के साथ आपने जीवन में आगे बढ़ने का सोचती है...

वो आपने काम ही कर रही थी तफी ही उसके फोन की रिंग बजती है उसे देख कर वो ख़ुशी से अपना फोन उठा लेती है....

फोन पर मिताली नाम लिखा हुआ होता है...

"हाय, तुमने आज हमें कैसे याद किया..."

दिया ख़ुशी से बोलती है...

"अब तुम तो मुझे याद करती नहीं हो...

तो मुझे ही फोन करना पड़ेगा ना..."

मिताली बोलती है....

"अरे है माफ़ करदो अब मुझे..."

दिया बोलती है...

"पहले ये सुनो की मेरे पास एक खुशखबरी है तुम्हारे लिए..."

मितली खुश होकर बोलती है...

"है तो जल्दी से बोलो ना..."

दिया भी उत्साहित होकर बोलती है...

"मेरी सदी की तारीख तय हो गई है..."

मिताली बोलती है...

"अरे ये तो सबसे अच्छी खबर है और कब की तारीख आयी है..."

दिया बोलती है...

"एक महीने बाद की तारीख आयी है..."

मिताली बोलती है...

"बधाई हो, मिताली...."

दिया बोलती है...

"तुमे जल्दी ही आना होगा..."

मिताली बोलती है...

"हां, मैं जल्दी आऊंगी..."

दिया बोलती है...

"मुझे तुम और भी एक बात बतानी थी..."

दिया बोलती है...

"हा, बोलो ना... "

मिताली बोलती है और दिया सारी बाते उसे बताने लगती है...

मिताली दिया क बचपन की दोस्त थी और वो पहले से उसके बॉयफ्रेंड के बारे में जानती थी और उसे वो बिलकुल पसंद नहीं था पर दिया के मानाने के वजग से वो कुछ नहीं कहती और उन दोनों के रिश्ते के बारे में कुछ नहीं कहती...

"मेने पहले ही बोला था की मुझे वो ठीक नहीं लागता..."

मिताली गुस्से में बोलती है...

"हा में जानती हु के मेने गलती की है पर अब मुझे कुछ समज नहीं आ रहा..."

दिया उदास हो कर बोलती है...

"कोई बात नहीं तुम उदास मत हो और बस यहाँ मेरे पास जल्द ही आ जाओ..."

मिताली उसे समजाती है...

"ठीक है..."

दिया बोलती है...

हां , अब में तुम बाद में फोन करती हु मुझे बहोत सारे काम करने है अभी..."

मितली बोलती है...

दिया भी उसे बाद में फोन करने का बोल कर फोन रख देती है...

दिया खुशी से भर जाती है और मिताली के साथ बात करने के बाद अपनी माँ के पास जाती है और मिताली के शादी की बात करती है...

सुनीता बहन भी यह सुन कर बहोत खुस हो जाते है...

"है तो तुमे बहोत सारी तैयारी भी करनी पड़ेगी..."

सुनीता बहन बोलते है...

"हा , और में अभी से ही तैयारी शुरू कर दूंगी..."

दिया भी ख़ुशी से बोलती है...

दिया अपनी माँ से बात करने के बाद जाने की तैयारी शरू कर देती है और देखते देखते दिन बीत जाते है और मितली के घर जाने का समय भी आ जाता है...

दिया अपनी एक दोस्त अहाना के साथ मिताली के घर पर जाने के लिए निकल जाती है...

वो अब इन साडी बातो में पुरानी बातो को धीरे धीरे भूलने लगी थी पर उसमे कुछ बदलाव भी आ गए थे जैसे की अब वो ज्यादा बोलती नहीं थी और अकेले रहना वो ज्यादा पसंद करने लगी थी...

दिया आज तो खुश थी क्युकी बहोत समय बाद उसका अहाना से मिलना हुआ था और अब तो वो अपने बहोत सारे दोस्तों से भी तो मिलने वाली थी...

वहां पहुंचकर वो दोनों पहले मिताली से ही मिलने के लिए जाते हो और उन दोनों को देख कर मिताली भी बहोत खुश हो जाती है...

"जाओ तुम दोनों थक गए होंगे तो तुम जाकर आराम कर लो..."

मिताली बोलती है और अपने कमरे में जाने का इसारा करती है...

वो दोनों भी हा कहकर वहा से मिताली के कमरे में चली जाती है और थोड़ी देर बाद मिताली के पास फिर से आ जाती है...

मिताली के कुछ रिस्तेदार आते है और वो उनके पास चली जाती है और अहाना को अपने घर से फोन आता है तो वो बात करने के लिए बहार जाती है...

दिया अकेली ही वहां बैठी होती हैऔर उसे फिर से सारी पुरानी बाते याद आने लगती है....

मिताली की नजर जब दिया पर पड़ती है तो उसे अकेले ऐसे उदास देख कर उसके पास आ जाती है...

"अरे क्या हुआ दिया..."

मिताली बोलती है...

"अरे कुछ नहीं..."

दिया अपने चहेरे पर मुस्कान लाकर बोलती है...

मिताली समज जाती है और उसे आपने साथ ले जाती है...

"तुम अब इसे अकेले नहीं बैठोगी और चलो मेरे साथ..."

मिताली बोलती है और दिया का हाथ पकड़ क्र उसे आपने साथ ले जाती है...

"क्या मिताली उसे सारी बाते भुला देगी...?"

"क्या दिया अब आगे बढ़ पायेगी...?"

"क्या अब कभी दिया की जिंदगी में कोई और आएगा...?"

ये जाने के लिए बने रहिये मेरे साथ....

इश्क़ होना ही था....

अगर मेरी कहानी आपको पसंद आये तो मुझे कमेन्ट कर के जरूर बताना...

इश्क़ होना ही था का part-3 आपके सामने 30 september को आ जायेगा...