009 सुपर एजेंट ध्रुव (ऑपरेशन वुहान) - भाग 7 anirudh Singh द्वारा रोमांचक कहानियाँ में हिंदी पीडीएफ

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009 सुपर एजेंट ध्रुव (ऑपरेशन वुहान) - भाग 7

" थैंक यू प्रोफेसर.....मुझे लगा अब तक तो भूल गए होंगे आप ,हालांकि आप से यह दूसरी मुलाकात महज एक संयोग है।"
प्रोफेसर का शुक्रिया अदा करते हुये ध्रुव ने कहा।

"नही सुपर एजेंट ध्रुव ,कैसे भूल सकता हूँ तुमको.....लन्दन में हुए उस टेरेरिस्ट अटैक के दौरान एक तुम ही तो थे जिसने बिना जान पहचान के ही मुझे उस बिल्डिंग से सुरक्षित बाहर निकाला था, मेरी फैमिली कों बचाने के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा दी थी.....और ब्रिटेन पुलिस के एक्शन लेने से पहले ही उन आतंकवादियों को ढेर भी कर दिया था"

वह सारा वाकया प्रोफेसर की आंखों के सामने तैर रहा था।

"वह ड्यूटी थी मेरी,वह टेरेरिस्ट अगले कुछ दिनो मे ब्रिटेन स्थित इंडियन असेम्बली पर अटैक करने वाले थे,पर माफ कीजिएगा प्रोफेसर, मैं आपकी फैमिली को उस हादसे में जीवित न बचा सका,उसका अफसोस है मुझे।" ध्रुव ने खेद व्यक्त करते हुए कहा


"अफसोस तो जीवन भर इस बात का रहेगा कि उस अटैक के पीछे मेरे अपने देश का हाथ था, चाइना की इस खूनी नीति ने ही मेरा अपना घर ही उजाड़ दिया"
नेइयांग का अनुमान एकदम सही था,प्रोफेसर को सच्चाई का पता था.....

"और आज आपके देश की उसी खूनी नीति ने लाखो लाशो का ढेर लगाने का एक कुटिल षडयंत्र रचा है, अगर इसको रोका नही गया, तो चाइना के द्वारा शुरू किया गया यह जैविक युध्द, तीसरे विश्व युध्द का रूप ले लेगा।" ध्रुव ने प्रोफेसर के सामने चाइना द्वारा रचे जा रहे इस कुटिल षड्यंत्र के फलस्वरूप उत्पन्न होने वाली भावी समस्या के प्रति आशंका व्यक्त की।


"समझ सकता हूँ मैं......पर मैं यह सब नही होने दूंगा....इंसानियत अभी जिंदा है मिस्टर ध्रुव.....किस्मत तुम्हे सही जगह ले कर आई है.......आज मैं तुम्हारे सामने बहुत से ऐसे रहस्यों पर से पर्दा उठाऊंगा जिनके राजदार चंद लोग ही है, बैठ जाइये आप लोग।"
प्रोफेसर ने सामने रखे सोफे पर बैठने के लिए ध्रुव से इशारा किया और खुद भी चेयर पर बैठ गए।

" इस सब की शुरुआत आज से 8 साल पहले हुई थी,जब हमारे देश की गवर्नमेंट ने चाइना के वायरोलॉजी से सम्बंधित सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिकों की एक सीक्रेट मीटिंग वुहान शहर में आयोजित की थी,जिसमें मैं अपने स्टूडेंट हांग टिम ली के साथ शामिल हुआ था,गवर्नमेंट द्वारा इस दौरान 'प्रोजेक्ट वर्ल्ड वार-3' लांच किया गया,इसके अंतर्गत हम से एक ऐसे वायरस पर रिसर्च करने को कहा गया जिसका उपयोग तीसरे विश्वयुद्ध के दौरान चाइना की ओर से जैविक युध्द के रूप में की जा सके, चाइनीज रक्षा प्रमुख ने हमें आश्वासन दिया कि इस प्रकार के जैविक हमले का उपयोग हम सिर्फ ढाल के रूप में करेंगे,अर्थात हम युद्ध की पहल कभी नही करेंगे.....पर मेरे जैसे कुछ और वैज्ञानिक जो कि युद्ध मे भरोसा नही रखते थे,हमने इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने से इंकार कर दिया, क्योंकि हम अपने देश की खूनी नीति से वाफिक था,हमें पता था कि एक दिन इसी आविष्कार का प्रयोग चीन अपनी विश्व विजेता बनने की सनक को पूरा करने में करेगा,और यह इन्सानियत के विरुद्ध होगा......पर हांग टिम ली को हमारे रक्षा प्रमुख की बातों पर भरोसा हो गया, उसको इस प्रोजेक्ट में देश एवं स्वंय का भविष्य नजर आया और वह इसका हिस्सा बन गया...हालांकि उसके इस कदम को लेकर मुझसे मतभेद भी हो गए.....प्रोजेक्ट वर्ल्ड वार-3 की शुरुआत हो गयी,हांग-टिम-ली ने सबसे पहले अपनी जीतोड़ मेहनत और काबिलियत के दम पर एक ऐसे वायरस की संरचना को डीकोड करने में सफलता प्राप्त की,जो एक विशेष किस्म के कैमिकल के साथ रिएक्शन करके तबाही मचाने की पूरी क्षमता रखता था......टिम ली की गजब की प्रतिभा की वजह से उसे इस अभियान का चीफ बना दिया गया.......और फिर उसके नेतृत्व में बनाया गया वुहान की लैब में इस वायरस का एंटीडोट भी......हांग-टिम-ली बेहद खुश था,कम उम्र में ही उसने बड़ी कामयाबी हासिल की थी,उसे पूरा यकीन था कि उसके इस आविष्कार का उपयोग चाइना की रक्षा दुश्मनो से करने के लिए ढाल के रूप में किया जाएगा.........सब कुछ सामान्य सा चल रहा था.....पर एक दिन उसे हमारे देश की 'खूनी नीति' के इरादों की खबर प्रमाण सहित लग ही गयी.....उसे पता चल गया था कि उसके आविष्कार का उपयोग युध्द की शुरुआत करने के लिए होने वाला है.....दरअसल 'प्रोजेक्ट वर्ल्ड वार-3' का उद्देश्य ही तीसरे विश्व युध्द का आरम्भ करना था,वह भी जैविक हथियार के रूप में ईजाद किये गए वायरस के साथ......"

वायरस की उत्पत्ति के राज खोलती हुई प्रोफेसर सीवांग की जुबान अचानक से लड़खड़ाने लगी,उनके आंखों के सामने अचानक से ही अंधेरा छा रहा था....शायद उनका स्वास्थ्य अचानक से बिगड़ रहा था,और फिर अगले ही पल वह चक्कर खा कर कुर्सी पर ही बेहोश हो कर लुढ़क गए।

ध्रुव ने तुरंत कर प्रोफेसर को कुर्सी के सहित थाम कर नीचे गिरने से बचा लिया....बेहोश होते होते प्रोफेसर ने उंगली से कमरे के एक कोने में टेबल पर रखे फर्स्ट एड बॉक्स की ओर इशारा किया.......।


उधर भारत में
एक शॉपिंग मॉल में लगी हुयी बड़ी सी स्क्रीन पर एक हिंदी न्यूज चैनल में एक प्रतिष्ठित फीमेल एंकर द्वारा ब्रेकिंग न्यूज पढ़ कर सुनाई जा रही है।

"देश में वायरस तीसरी लहर आने की आहट फिर से तेज हो गयी है,आज अचानक से आंध्र प्रदेश में एक साथ कई नए मामले सामने आना बेहद चिंताजनक है,अब देखना यह है कि सरकार इस चुनौती से किस प्रकार निपटती है।"

रॉ मुख्यालय के मीटिंग हॉल का दृश्य-

डॉक्टर देसाई के चेहरे पर चिंता के भावों को स्पष्ट रूप से पढ़ा जा सकता था।
रॉ प्रमुख डॉक्टर देसाई को इस पूरे ऑपरेशन का चीफ बनाया था, इस पूरे मामले के सम्बंध में वही देश की सभी आर्म्ड फोर्स को हैंडल कर रहे थे।

"आखिरकार चांग ली ने अपना दांव चल ही दिया है,वह हमारी नाक के नीचे से निकल कर हमारे ही देश में यह सब कर रहा है, और हम कुछ नही कर पा रहे है, इस से बड़ी शर्म की बात और क्या हो सकती है....हम ट्रेस भी नही कर सकें उसको।"


अन्य अधिकारियों के बीच में बैठे इंडियन आर्मी से मेजर श्रीकांत बख्सी ने जबाब दिया
"सर, उसने हमसे पहले ही तैयारी कर के रखी थी,इसलिए हमसे दो कदम आगे हैं,लाख कोशिशों के बावजूद उसे ढूंढ नही सके हम......पर सर ट्रस्ट मी....बहुत जल्द हम उस तक पहुंच जाएंगे।"



"श्रीकांत,वक्त नही है हमारे पास, वह वायरस अटैक ऑल रेडी कर चुका है...अगले कुछ ही दिनों में स्थिति आउट ऑफ कन्ट्रोल हो जाएगी...."

तभी अचानक से मेजर बक्शी का फोन वाइब्रेंट किया...शायद कोई इमरजेंसी कॉल था, डॉक्टर देसाई से अनुमति लेने के पश्चात मेजर बक्शी ने कॉल अटेंड किया....
और फिर कुछ क्षणों बाद...
" विराज का फोन था सर.....एक गुड़ न्यूज है......हमारे सैटेलाइट्स ने बंगलुरू के पास वाले जंगलो में जमीन के नीचे एक बड़ा मूवमेंट कैच किया है....शायद बेसमेंट जैसा कुछ है....पूरा अनुमान है कि चांग ली का ठिकाना वही होगा....हमारी टीमें वहां के लिए निकल चुकी है सर"

यह समाचार सुन कर डॉक्टर देसाई के चेहरे पर उम्मीद की कुछ किरणें नजर आई।

"गुड़ श्रीकांत.....विराज को बोलो,पूरी तैयारी से अटैक करो उन पर,यह मौका हाथ से न निकल पाएं..... तुम खुद मॉनिटरिंग करो इस ऑपरेशन को और मुझे हर एक मिनिट की रिपोर्ट दो.........नाउ मीटिंग इज ओवर"


कुछ ही देर बाद कैप्टन विराज के नेतृत्व में इंडियन आर्म्ड फोर्सेस की एक बड़ी टुकड़ी ने आकाश और जमीन के रास्ते जंगल के उस मूवमेंट वाले क्षेत्र को घेर लिया था।


........ कहानी जारी रहेगी.......