सव्यसाची - भाग 2 DINESH DIVAKAR द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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सव्यसाची - भाग 2

इस आवाज को सुनकर मै बुरी तरह डर गया मै डरते हुए बोला "क..... कौन..??"

"मैं हूं अमृता" मेरे अंदर से आवाज आई।

अमृता... लेकिन तुम तो सपने में थी फिर, नहीं नहीं... मैं सपना देख रहा हूं...??"

अमृता "तुम सपना नहीं देख रहे हो ये हकीकत है और वो भी हकीकत ही था जिसे तुम सपना समझ रहे थे...!!"

"जो भी हो लेकिन तुम मेरे शरीर में क्या कर रही हो बाहर निकलो मेरे शरीर से...!!" मैंने डरते हुए बोला।

अमृता "नहीं निकलूंगी जब तक मेरा प्रतिशोध पुरा नही हो जाता तब तक मैं तुम्हारे शरीर में ही रहूंगी और तुम्हें मेरा साथ देना होगा।"

तभी किसी ने दरवाजा खटखटाया

"ओय हिरो, चल जल्दी से बाहर आ मुझे भी नहाना है" अनू चिल्लाई।

"हां रूक आता हूं" मैं बोला और सर खुजाता हुआ दरवाजा खोलकर बाहर निकलता हूं और अनू को देखकर वहां से जाने लगता हूं तभी अनू की आवाज आई "ओय सुन, ये अंजलि कौन है...??"

अंजलि...! अंजलि के नाम सुनकर मै चौंक गया जैसे मेरी चोरी पकड़ी गई हो।

"वो वो मेरी दोस्त हैं कालेज में!" मैंने धीमें स्वर में बोला।

"अच्छा बच्चू दोस्त कभी I love you नहीं बोलते अब सच सच बता वरना अभी पापा को बताती हूं" अनू धमकी देते हुए बोली।

"नहीं नहीं पापा को नहीं बताना... मैं बताता हूं लेकिन वादा कर तू मम्मी पापा को कुछ नहीं बताएगी" मैंने कहा।

अनू "कोशिश करूंगी"

"क्या..!!" मैं चौंकते हुए बोला।

अनू "अच्छा बाबा नहीं बताउंगी अब बताओ"

"जब मैं कालेज में नया नया एडमिशन हुआ था तब सीनियर्स ने मेरे रेंकिंग लेना का मन बनाया। सीनियर्स लडकीयां थी इसलिए उन्होंने मुझे पिटवाने का नया अंदाज निकाला.... मुझे एक गुलाब पकडा कर गेट से थोड़े दूर पर खड़ा करा दिया गया और आदेश दिया गया कि जो भी पहली लड़की उस गेट से अंदर आएगी उसे तुम्हें ये गुलाब देकर किस्स करना होगा।

मेरे लाख मना करने के बावजूद वे नहीं माने और आखिरकार मुझे वो काम करना ही पड़ा। गेट के पास एक लाल गुलाब लेकर खड़ा हो गया दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि मैं बचपन से ही लड़कियों के मामले में कमजोर था मैं मन ही मन दुआ कर रहा था कि आज कोई लड़की ना आए।

लेकिन किस्मत को तो कुछ और ही मंजूर था सामने से एक लड़की ब्लू ड्रेस में पुस्तक को अपने सीने से लगाए हुए आंखों में एक सुंदर सा चश्मा पहने हुए लेकिन नजरें झुकाए हुए आ रही थी। उसे देखकर मुझे लग रहा था जैसे हमारा रिश्ता जन्मों जन्मों का है मैं वहीं खड़े खड़े उसके ख्यालों में खोया था कि तभी किसी लड़की ने मुझे आवाज दिया वे सीनियर थे जो बोल रहे थे "आगे बढ़ो"

मैं भी तैयार होकर जंग के लिए निकल पड़ा और उसके सामने जाकर खड़ा हो गया वो रूक गई उसने अपने आंखें ऊपर कर मुझे देखने लगी उसके आंखों में मुझे मेरा पूरा संसार दिखने लगा मैंने उसे गुलाब दिया तो वो कन्फ्यूज थी कि मैं उसे गुलाब क्यो दे रहा हूं और उसके बाद समय आया मेरे पिटने का मैंने सोचा चलो जो होगा देखा जायेगा।

मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिया मेरे आंखे अपने आप बंद हो गया मेरे शरीर में जैसे 440 वोल्ट का करंट दौड़ रहा था। तभी वहां सीटियों के आवाज से मेरे आंखे खुल गई और तभी मेरे गालों पर एक जोरदार थप्पड़ रसीद हुआ और वो लड़की वहां से भाग ग‌ई मेरा चेहरा भी पीला पड़ चुका।

ऐसा मेरे साथ पहली बार हुआ था। वो लड़की ना जाने मेरे बारे में क्या सोच रही होगी और अगर उसने सर से मेरे बारे कम्प्लेन कर दिया तो मेरे पापा तो मुझे मार ही डालेंगे। बेटा दिवाकर तुने ये क्या किया अब तो तु ग‌या काम से!

अनू बीच में बोल पड़ी भवाह भाई इस बात पर तो तुम्हारी तारिफ बनती है आखिर तूने साबित कर दिया कि तू मेरा भाई है फिर आगे क्या हुआ...!!

"उसके बाद में उसे पुरे कालेज में ढूंढता रहा मुझे उसे सच सच बताना था और माफी भी मांगना था लेकिन वह कालेज में नहीं थी। पुरे सात दिन बाद वो कालेज आई मैंने बहुत बार कोशिश किया की जाकर उससे माफी मांग लूं लेकिन नहीं कर पाया वह भी फस्ट ईयर की स्टूडेंट थी।

कालेज से वो अकेली ही घर के लिए निकल पड़ीं मुझे उससे माफी मांगने का इससे अच्छा अवसर नहीं मिलने वाला था मैं भी उसके पीछे पीछे चला गया और तभी एक सुनसान जगह पर...!!

अनू चौंक कर बोली "क्या किया..??"

"सावधान इंडिया देख देखकर तो तू बिल्कुल सीआईडी बन चुकी है, कुछ नहीं हुआ बस मैं हिम्मत करके उसके सामने खड़ा हो गया और एक ही सांस में सब सच्चाई बोल दिया।

मेरी बात सुनकर वो जाने लगी मैंने सोचा वो अभी भी गुस्सा है लेकिन थोड़ी दूर जाने के बाद वो मुडकर मुझे देखने लगी उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान थी।

अनू "अच्छा तो ये हैं अंजलि की‌ कहानी।"

"हा खामखाह तेरे चक्कर में हारर कहानी में प्यार जोड़ना पड़ा... पता नहीं पाठक मेरे बारे में क्या सोच रहे होंगे। अच्छा तू अपना वादा याद रखना मैं कालेज जाता हूं।" यह कहकर मैं जाने ही वाला था कि वह फिर बोल पड़ी

"भाभी से मिलने"

"तू ना मार खायेगी मेरे हाथों से" मैंने झिझकाते हुए बोला।

अनू "अच्छा बाबा जाओ"

तभी इतने समय से चुप अमृता बोली "अरे तुम्हारी बहन तो बहुत खूबसूरत है यार चलो मैं तुम्हारे शरीर को छोड़कर उसके शरीर में चली जाती हूं...!!"

"नहीं उसे छूना भी मत" मैं चिल्लाया!

"क्या हुआ भ‌ईया किसे मत छुना" अनू घबरा कर बोली।

"कुछ नहीं तुम जल्दी से अपने कमरे में जाओ!" मैंने कहा।

"और तुम खबरदार जो मेरे परिवार के साथ कुछ किया तो!" मैं घबराते हुए बोला।

"ओके ओके वैसे भी मैं सिर्फ तुम्हारे ही शरीर में प्रवेश कर सकतीं हू!" अमृता फुसफुसाई फिर बोली "अच्छा ठीक है पहले तुम मुझे खाना खिलाओ बहुत भुख लगी है।"

डाइनिंग टेबल पर मां ने खाना परोसा खाने को देखकर वह भड़क गई और खाने की थाली को जमीन पर फेंक दिया।

मां "क्या हुआ बेटा खाना क्यो फेंक दिया!"

"कुछ नहीं मां वो बस गलती से हाथ लग गया ओके मैं जाता हूं" मैंने बात सम्हालते हुए बोला।

"तुमने खाना क्यो फेंक दिया तुम्हें तो बहुत भुख लगी थी ना?" मैंने अमृता से सवाल किया।

अमृता "वो घास फूस कौन गाएगा..!!"

"तो..." मैं बोला।

अमृता "मुझे मांस खाना है"

"हरगिज नहीं मैं शुद्ध शाकाहारी हूं मैं मांस नहीं खाऊंगा" मैं साफ मना करते हुए बोला।

अमृता "तुम्हें खाने के लिए कौन बोल रहा है.. मांस तो मैं खाऊंगी ना"

"लेकिन पेट में तो मेरे जाएगा ना" मैं बोला।

अमृता "अरे हां, तो क्या हुआ मुझे तो मांस ही खाना है अगर मुझे मांस नहीं मिला तो मैं तुम्हारे फैमली को खा जाउंगी!"

"ओके फाइन" न चाहते हुए भी मुझे चिकन खाना पड़ा लेकिन चिकन देखकर अमृता उस पर टूट पड़ी और ऐसे खाने लगी जैसे सालों से भुखी हो।

"अब चलो मुझे कालेज जाने के लिए लेट हो रहा है" मैंने कहा।

अमृता "नहीं मैंने सुना है खाना खाने के बाद आइसक्रीम खाना चाहिए मुझे आइसक्रीम खाना है"

"दिस इस टू मच... हम अभी कालेज जा रहे हैं" मैंने गुस्से से बोला।

अमृता "नहीं मुझे आइसक्रीम खानी है"

"जी करता है तुम्हें मार डालू" मैं गुस्से भरी आवाज में बोला।

आइसक्रीम खाने के बाद दोनों मतलब मै कालेज पहुंचता हूं कालेज में उसके दोस्त मेरा ही इंतजार कर रहे थे। हरीश मुझे गले लगाते हुए बोला "कैसा है दोस्त!"

लेकिन गले लगाने से पहले ही उसने हरीश को दूर हटा दिया!

हरीश "क्या हुआ यार"

"कुछ नहीं यार बस थोड़ी तबियत खराब है मैं तुम लोगों है बाद में बात करता हूं" यह कहकर मैं वहां से जाने लगा।

"तुमने उसे दूर क्यो ढकेला" मैंने आश्चर्य से पूछा।

अमृता "तो और क्या करती वो मुझे गले लगाने वाला था"

"वो तुम्हें नहीं मुझे गले लगा रहा था" मैं गुस्से से कहा।

अमृता "लेकिन मैं भी तो तुम्हारे शरीर में हू, ऐसे ही किसी को गले लगाने नहीं दूंगी"

"तो बाहर निकल जाओ ना" मैंने कहा।

अमृता "निकल जाऊंगी पर समय आने पर..!!"

तभी पीछे से किसी ने मुझे गले लगा लिया वो अंजलि थी

"अरे अंजलि तुम" मेरे चेहरे पर खुशी छा गई।

अंजलि "हां मैं ही हूं और मै तुमसे नाराज हू तुमने मुझे फोन क्यो नही किया इतने दिन तक..??"

"सारी यार वो थोड़ा बिजी था" मैंने सफाई दी।

तभी अमृता बोली "अच्छा तो ये हैं अंजलि, वैसे मानना पड़ेगा तुम्हारे च्वाइस को"

रात के बारह बज रहे थे सभी गहरी नींद में सो चुके थे लेकिन मैं अभी तक जाग रहा था तभी मैं उठकर बेंड में बैठ गया।

"क्या हुआ" अमृता ने सवाल किया।

"अगर तुम्हें मेरे शरीर में रहना है तो बताओ आखिर तुम हो कौन और तुम्हारा ये हाल कैसे हुआ...!!" मैंने सवाल किया क्यूंकि मुझे जानना था अमृता का सच।

अमृता ने बताना शुरू किया "कुछ महीने पहले तक मैं भी जिंदा थी। मैं ऐजेड नामक ग्रह से आई थी मेरे पिता वहां के राजा थे हमारे राजपरिवार को सव्यसाची कहते थे मैं उनकी राजकुमारी थी हम खुशी खुशी रह रहे थे लेकिन हमारे खुशीयों पर उनकी नजर लग गई...!!"

"किसकी नजर लग गई...??" मैंने सवाल किया।

अमृता "उन काली शैतानों की जो पुरे आकाश गंगा में भ्रमण करते हैं और ग्रहो में जाकर वहां का विनाश कर देते हैं सभी को मार डालते हैं समझ लो वो जिस ग्रह में जाते हैं वहां कयामत आता है। ऐसे ही उनकी नजर हमारे ग्रह पर पड़ चुका था उन्होंने सब को मार डाला। मेरे परिवार को भी मार डाला लेकिन मैं बच गई और भागते भागते यहां आ पहुंची...!!

और जब मैंने तुम्हें लोगों की मदद करतें हुए देखा तो मुझे लगा तुम अच्छे हो और मेरी मदद कर सकते हो इसलिए मैं तुम्हारे शरीर में प्रवेश हो गई। मैं तो उनकी नजरों से बच गई... लेकिन एक बुरी खबर है

"बुरी खबर..!! कैसी बुरी खबर..??" मैंने पूछा।

अमृता "हा वो काली शक्तियां पृथ्वी पर आ चुके हैं अगर उन्हें रोका नहीं गया तो पृथ्वी का नामोनिशान नहीं रहेगा उनकी शक्तियां अनंत है..!!"

"ओह नो, अब क्या होगा..!! क्या उन्हें रोकने का कोई उपाय नहीं है..!!" मैंने घबराते हुए बोला।

तभी टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज आ रहा था किसी अंजान शक्तियों ने मुम्बई को तहस-नहस कर दिया है लाखों लोगों के मरने की खबर आ रही है कोई भी समझ नहीं पा रहा है कि वो कौन है जो एक पल में ही सबकुछ तहस नहस कर दिया है क्या सरकार उन्हें रोक पायेंगे....!!

®®®Ꭰɪɴᴇꜱʜ Ꭰɪᴠᴀᴋᴀʀ"Ᏼᴜɴɴʏ"✍️

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