एक नया रास्ता - 3 Kishanlal Sharma द्वारा सामाजिक कहानियां में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
  • मंजिले - भाग 49

    परिक्रमा की ही साथ चलती पटरी की तरा है, एक से गाड़ी उतरी दूसर...

  • सीप का मोती - 5

    भाग ५ "सुनेत्रा" ट्युशन से आते समय पीछे से एक लडके का आवाज आ...

  • Zindagi

    Marriage is not just a union between two people. In our soci...

  • Second Hand Love

    साहनी बिला   आलीशान महलघर में 20-25 नौकर। पर घर मे एक दम सन्...

  • Beginning of My Love - 13

    ​शरद राव थोड़ा और आगे बढ़कर सुनने लगे कि वॉर्ड बॉय और नर्स क्य...

श्रेणी
शेयर करे

एक नया रास्ता - 3

और सुनीता तैयार हो गयी।और उसने समर्पण कर दिया।अनुराग कुशल खिलाड़ी की तरह पूरी रात उसकी देह से खेलता रहा।सुनीता अनुराग से प्यार करती थी इसलिए उसने समर्पण किया था।
समर्पण करने से पहले सुनीता ने एक बार भी नही सोचा कि शारिरिक मिलन औरत के लिए कितना असुरक्षित होता है।देह के मिलन से पहले औरत को कुछ बातें ध्यान रखनी चाहिए।हमारे देश मे समाज अभी भी पति पत्नी के बीच के शारिरिक मिलन को मान्यता देता है।अभी हमारा समाज कुंवारी माँ या विदेशों की तरह सिंगल मॉम की संस्कृति को मान्यता नही देता।कानूनी रूप से यह अवैध नही है।इसलिए अगर औरत बिना रिश्ते के समर्पण करे तो शारिरिक सम्बन्ध बनाने से पहले उसे सावधानी जरूर बरतनी चाहिये।ताकि गर्भ ठहरने की संभावना न रहे।
पर सुनीता ने ऐसा नही किया।वह अनुराग के बहकावे में आ गयी।और वहा से लौटने के बाद भी उसने कई बार ऐसा ही किया और उसके दिन चढ़ गए।
दिन चढ़ते ही सुनीता घबरा गयी।वह अनुराग के घर जा पहुंची।
"तुम यहाँ क्यो आयी हो"अनुराग उसे देखते ही बोला,"चलो"
और अनुराग,सुनीता को लेकर घर से बाहर चला आया।वह उसे एक रेस्तरां में ले गया था।
"अब बोलो क्या बात है?तुम परेशान नजर आ रही हो?"उसके चेहरे की तरफ देखते हुए वह बोला।
"मेरी कुछ भी समझ मे नही आ रहा।
,'
"क्या समझ मे नही आ रहा?'
"अनुराग मेरे दिन चढ़ गए है।"
"क्या?"
"हां अनुराग तुम्हारे अंश ने मेरे गर्भ में जगह बना ली है।""
" कही तुम्हे भरम तो नही हुआ?"सुनीता की बात सुनकर अनुराग बोला।
"नही अनुराग।यह भरम नही है "सुनीता ने अनुराग को अपने शरीर मे हो रहे परिवर्तनों के बारे में बताया था।उसकी बात सुनकर अनुराग बोला,"मतलब तुम कोई सावधानी नही बरतती थी।"
"मुझे क्या पता था कि ऐसा हो जाएगा।"
"खेर जो हो गया सो तो हो गया।मेरे साथ चलना।"
"कहा?"
"डॉक्टर के पास।"
"क्यो?"
"अरे सफाई करानी पड़ेगी।मेरा परिचित एक डॉक्टर है।"
"तो सफाई क्यो करवा रहे हो।"
"तो फिर और क्या उपाय है?"
"हम अगर शादी कर ले तो हमे सफाई कराने की जरूरत नही पड़ेगी।"
"क्या मतलब।"
"अगर हम शादी कर ले तो सफाई कराने की जरूरत नही पड़ेगी।""
"कैसी बात कर रही हो।दकियानूसी और बैकवर्ड,"अनुराग,सुनीता की बात सुनकर बोला,"सुनीता हमारे उच्च सभ्रांत परिवार में पर स्त्री से सम्बन्ध बनाना बुरा नही माना जाता।न जाने कितनी औरतों से सम्बन्ध रहते है।अगर शादी करने लगे तो न जाने कितनी शादी करनी पड़ेगी।""
"तो तुम मुझ से शादी नही करोगे,"अनुराग की बात सुनकर सुनीता बोली,"तुम्हे मुझ से नही मेरी देह से प्यार था।तुम मेरे शरीर का उपयोग करना चाहते थे।"
"सुनीता मैने तुमसे शादी करने का वादा कभी नही किया,"अनुराग बोला,"तुम्हारी देह को भी मैने जबरदस्ती नही पाया।तुम्हे मनाकर किया।"
"मतलब तुमने मुझे कहि का नही छोड़ा।"
सुनीता मध्यम वर्ग की थी। उसकी सोच भी वैसी ही थी।वह अनुराग से प्यार करती थी।उसका सोचना था कि अनुराग भी उसे चाहता है।उससे प्यार करता है।इसीलिए उसने यह सोचकर समर्पण कर दिया था कि जब शादी उसी से होनी है,तो क्या फर्क पड़ता है कि समर्पण शादी से पहले करो या बाद में?देह समर्पित करने से पहले एक बार भी ख्याल नही आया कि उससे शादी के बारे में पूछ लें।क्योंकि उसका मानना था प्यार की परिणीति। शादी ही होती है