हंसी के महा ठहाके - 2 - तैयारी धूम धड़ाके की Dr Yogendra Kumar Pandey द्वारा हास्य कथाएं में हिंदी पीडीएफ

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हंसी के महा ठहाके - 2 - तैयारी धूम धड़ाके की

तैयारी धूम धड़ाके कीमौजी मामा का मोहल्ला अपने आप में लघु भारत है।यहां की एक मुख्य गली के चारों ओर घर बने हुए हैं और वह गली भी एक बंद रास्ते में खत्म हो जाती है।इसका लाभ यह होता है कि मौजी मामा के मोहल्ले के लोग कोई भी छोटा आयोजन गली में ही दरी बिछाकर या कुर्सियां लगाकर कर लेते हैं।ऐसे आयोजनों के समय घरों के सामने दुपहियों की जो पार्किंग होती है,वह गली के प्रवेश द्वार के पास ही एक साथ हो जाती है और भीतर का पूरा रास्ता एक बड़े गलियारे के रूप में प्रोग्राम हाल की तरह इस्तेमाल हो जाता है।अब इस तरह के आयोजन के लिए धनराशि प्रत्येक घर से एक सुनिश्चत रकम के रूप में एकत्र की जाती है।बजट के हिसाब से पार्टी के आइटम बनते हैं।

इस बार नववर्ष में मोहल्ले के लोग तितर-बितर थे।कोई पिकनिक में बाहर गया था तो कई लोग पासपड़ोस के शहर के मंदिरों में दर्शनों के लिए निकल गए थे।एक या दो परिवार अंतर राज्यीय पर्यटन स्थलों टाईतक पहुंच गया था, जहां उनके द्वारा सोशल मीडिया की डीपी में लगाई गई फोटो अनेक लोगों के लिए कौतूहल और ईर्ष्या का कारण बन गई। शागिर्द सवाली राम मौजी मामा से मिलने के लिए बीच-बीच में आ जाते हैं। गुरु- चेला सुबह चाय पीने के लिए बैठे हुए थे कि एक सोशल मीडिया का स्टेटस दिखाते हुए सवाली ने पूछा- देख रहे हैं गुरुदेव,मिस्टर क फलां पर्यटन स्थल पर गए हैं।मौजी मामा - अच्छा तो है। बीच-बीच में घूमना फिरना भी जरूरी है।सवाली- लेकिन मिस्टर क ने फोटो उस स्मारक के साथ ऐसे खिंचवाई है,जैसे उन्होंने वह स्मारक खरीद लिया हो। फोटो को ध्यान से देखते हुए मौजी मामा ने खुश होते हुए कहा- अरे यह तो अच्छा है। तुम्हें इससे क्या तकलीफ हो रही है।अब सेल्फी लेने या फोटो खिंचवाने के लिए भी टैक्स लगवाने का सुझाव देने जा रहे हो क्या?सवाली -नहीं मामा जी,मेरी आपत्ति इस बात में है कि इसने बताया नहीं कि मैं वहां जा रहा हूं। मौजी मामा ने झिड़कते हुए सवाली से कहा- तुम कब से पब्लिक इनफार्मेशन सेंटर बन गए हो,जो कहीं जाने - आने के लिए तुम्हें हर बात बतानी पड़े।कोई दूसरा किसी टूरिस्ट स्पॉट में परिवार सहित जाकर आनंद उठा रहा है।तुमको तो खुश होना चाहिए …..फोटो देखकर…. और तुम हो कि कुड़मुड़ा रहे हो।अरे यहां कोई आयोजन करने के बारे में सोचो।नए साल का पहला हफ्ता निकल गया है।क्या महीना दो महीना बीतने के बाद नए साल की पार्टी मनाओगे? थोड़ा झेंपते हुए सवाली ने कहा- मैं इसी बात को लेकर आपसे चर्चा के लिए आया था। मोहल्ले की महिलाओं ने इस बार की न्यू ईयर पार्टी प्लान की है।सवाली ने मामा की ओर प्रोग्राम की लिस्ट बढ़ाई।अब प्रोग्राम शीट मामा के हाथ में आई तो एक दो चीजों की समीक्षा करने की उनकी भी पुरानी आदत है।वे कहा करते हैं कि ऐसा करने से व्यक्ति का महत्व बना रहता है।इस बार भी मामा ऐसा ही करने जा रहे थे।इस पर रोक लगाने के लिए सवाली ने पहले ही ब्रह्मास्त्र छोड़ दिया।सवाली-इस पार्टी के कार्यक्रम को मामी की अध्यक्षता में महिलाओं की एक उपसमिति ने ही फाइनल किया है। यह सुनकर मामा के चेहरे का रंग तुरंत बदल गया।उन्होंने तेजी से प्रोग्राम शीट की पंक्तियों को पढ़ते हुए एक बार देख लेने की औपचारिकता निभाई और मामी को याद कर तत्काल कहा -ओके,सवाली!बहुत बढ़िया कार्य योजना है। अप्रूव्ड। यह कहते हुए मामा हंस पड़े और सवाली मुस्कुरा उठे। डॉ. योगेंद्र कुमार पांडेय