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कर्म योग - 4

WHAT IS DUTY ?

एक बार एक सन्यासी था जो जंगल के बीचोंबीच रहता था । वो अपना पूरा दिन ध्यान लगाने मे और योग करने मे बीताता था। एक दिन वो पेड़ की नीचे आराम कर रहा था। अचानक से सुखी पतियाँ उसके ऊपर गिरने लगि, उसने ऊपर देखा, पेड़ पर एक कौआ और सारस बैठे लड़ रहे थे। वो हर जगह सुखी पतीयाँ फैला रहे थे । उस सन्यासी को गुस्सा या गया, उसने चिल्ला कर कहा " मुज पर पत्ते फेकने की तमहारी हिम्मत कैसे हुई ?'

उसने गुस्से से उन दोनों को देखा। उस सन्यासी की हेरानी का ठिकाना नहीं था जब उसने देखा की वो सारस और कौआ जल कर राख हो गए थे । वो अपनी शक्ति देख कर बहुत खुश हुआ ।

फिर उसके जंगल छोड़ने का वक्त आया। वो शहर मे भिक्षा मांगने चल गया। उसने एक दरवाजा खटखटाया और कहा, " माँ, मुजे खाने के लिए कुछ दीजिए"। उस औरत ने कहा " बीटा एक मिनिट रुको।" उस सन्यासी ने सोचा "इसकी इतनी हिम्मत की इसने मुजे इंतजार करने को कहा, इसे पता नहीं है मेरे पास कितनी शक्ति है ।"

सन्यासी ने इसे अपने मन में सोचा था। फिर उस औरत ने कहा " खुद के ऊपर इतना घमंड मत करो, मै वो कौआ या सारस नहीं हूँ।" मैंने तुम्हें इंतजार करने के लिए इसलिए कहा क्योंकि में अपने बीमार पती की सेवा कर रही हूँ। उसने बताया की उसने पूरी जिंदगी अपनी हर ड्यूटी को ठीक से करने की कोशिश की है। जब वो छोटी थी तो उसने अपने माता पिता की सेवा की। जब शादी हुई तो अपने पती की सेवा की। उसके लिए तो यही योग था।

इन्ही चीजों से उसे ज्ञान मिला था। इसलिए वो सन्यासी के मन को बात पढ़ पाई। वो जानती थी की सन्यासी ने जंगल में क्या किया था। उसने सन्यासी को अगले शहर जाने के लिए कहा। वहाँ एक कसाई (Butcher) था जिससे सन्यासी बहुत कुछ सिख सकता था।

सन्यासी ने सोचा "वो कसाई मुजे क्या सीखा सकता है ?' फिर भी वो उस शहर की और चला गया। वो वहाँ के मार्केट में पहुंचा। वहाँ उसे एक मोटा कसाई दिखाई दिया। वो मांस को काट कर अपने कस्टमर को दे रहा था। सन्यासी ने सोचा "हे भगवान मेरी मदद करना, में एक कसाई से बात करने जा रहा हूँ। वो तो पक्का एक शैतान का अवतार होगा।"

जब कसाई ने सन्यासी को वहाँ खड़ा देखा तो पूछा, "क्या आप वही हैं जिसे उस औरत ने भेजा हैं?" प्लीज थोड़ा इंतजार कीजिए, मुजे अपने कस्टमर का पहले ध्यान रखना है।" जब कसाई का काम पूरा हो गया तो उसने पैसे उठाए और सन्यासी को पीछे आने के लिए कहा। वो कसाई के घर पहुंचे। कसाई ने उसे फिर इंतजार करने के लिए कहा।

घर पर कसाई ने अपने बूढ़े माँ-बाप की सेवा की, उन्हे नहलाया, साफ कपड़े पहनाए, उनके लिए खाना बनाया फिर उन्हे खिलाया। उसके इस बात का पूरा ध्यान रखा की उन्हे ज़रा भी तकलीफ नया हो। उसके बाद उसने सन्यासी से बात की। उसने पूछा "स्वामीजी, मैं आपके लिए क्या कर सकता हूँ?" सन्यासी ने कसाई से भगवान और आत्मा के बारे में कुछ सवाल पूछे।

कसाई ने जवाब महाभारत के व्याध गीता से दिया। सन्यासी को बहुत आश्चर्य हुआ। एसा लग रहा था मानो कसाई बहुत ज्ञानी था, वो बहुत बुद्धिमान था। सन्यासी ने पूछा "आप इस शरीर में क्यों है ? आपके पास इतना अपार ज्ञान है फिर भी आप इतना गंदा काम क्यों करते है ?" कसाई ने कहा " सच तो ये है कोई भी काम गंदा, छोटा या बुरा नहीं होता। में इसी परिस्थिति में पैदा हुआ हु। मैं जब बच्चा था तब बहुत जल्दी कसाई का काम सिख गया था। मैं पूरी कोशिश करता हूँ की अपनी ड्यूटी को ठीक से पूरा कर पाऊँ।

कसाई अपने घर की सारी जिम्मेदारी अच्छे से निभाता था। वो अपने माँ-बाप का बहुत खयाल रखता था। वो सन्यासी नहीं था ना ही उसने दुनिया छोड़ कर जंगल में योग साधना की थी। फिर भी, कसाई को अपनी ड्यूटी का पूरा एहसास था और उसे पूरा करने के लिए उससे जो हो सकता था वो करता था।

इससे हमें ये सबक सीखने को मिलता है की अपने काम को पूजा की तरह ट्रीट करना चाहिए। उस पर पूरा ध्यान लगाना चाहिए। बस अपना काम करते रहिए, किसी और चीज के बारे में मत सोचिए। उस काम को करने से मिलने वाले फल के बारे में मन सोचिए। मुश्किलों के बारे में या रिजल्ट के बारे में भी मत सोचिए।

कहानी में, उस औरत और कसाई ने अपने हर कर्म को पूरे दिल से निभाया और इसी से उन्हे ज्ञान मिला। जो वर्कर अपने काम के रिजल्ट के बारे में सोचता है, जिसे फल से ज्यादा लगाव होता है वो अपनी ड्यूटी के लिए हमेशा शिकायत ही करता रहता है। वो कभी खुश नहीं होता क्योंकि उसे तो बस एक पहचान की तलाश रहती है।

लेकिन जिन्हे रिजल्ट से लगाव नहीं होता उनके लिए अपना काम ही खुशी का कारण बन जाता है। अपने दिए गए टास्क को वो खुशी खुशी स्वीकार करता है और उसे पूरे दिल से निभाता है। वो शांति और सुकून से जीता है क्योंकि उसने अपनी ड्यूटी को गले लगाया और पूरी तरह निभाया।

- SWAMI VIVEKANANDA.

KARMA YOGA (CC. GIGL)

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