मुस्कराते चहरे की हकीकत - 12 Manisha Netwal द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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मुस्कराते चहरे की हकीकत - 12

सुबह 4:00 बजे अवनी के पास किसी का कॉल आता है और वह उठकर विवान को फोन लगाती है लेकिन विवान कॉल नहीं उठाता तो अवनी श्रेया के रूम से विवान के रूम में जाती है और विवान को उठाने की कोशिश करती है लेकिन विवान नहीं उठता फिर अवनी, विवान की कंबल खींचकर उसके पास आकर- विवान उठो,,, वरना मैं फिर से पानी डाल दूंगी.....
विवान, नींद में ही अवनी से- सोने दो यार.. सुबह-सुबह क्यों नींद खराब कर रही हो.. और फिर से कंबल ओढ़कर सो जाता है,,, इस बार अवनी ने अपने फोन में लाउड में गाने चलाएं और विवान के कान के पास रख दिया और खुद सोफे पर जाकर अपना सिर पकड़ कर बैठ गई और मन ही मन विवान की तरफ देखते हुए- कैसा इंसान है उठता ही नहीं, अभी नहीं उठा तो मैं अकेले चली जाऊंगी,,,,
म्यूजिक की आवाज तेज होने से विवान जल्दी से उठ जाता और अवनी की तरफ देखकर- अब कौन सा तूफान आ गया....
अवनी- मैं नित्या के पास जा रही हूं तुम्हें आना हो तो आओ वरना मैं जा रही हूं,,,,
अवनी वहां से निचे आ जाती हैं,,,,,
विवान, उसे जाते हुए देखकर- इतना भड़क क्यों रही हो आ रहा हूं ना.....
थोडी देर में विवान बाहर अपनी कार में आकर बैठता है जिसमें अवनी पहले से बैठी हुई थी दोनों वहां से हॉस्पिटल के लिए निकल जाते हैं
कुछ ही देर में दोनों हॉस्पिटल पहुंचते हैं और डॉक्टर से बात करके एक कमरे में जाते हैं जहां अवनी की ही हमउम्र एक लड़की बेड पर बैठी थी, रंग रूप में बिल्कुल अवनी जैसी चेहरे पर दर्द भरी मुस्कान और आंखों में आंसू लिए जैसे किसी का इंतजार कर रही हो,,,,
अवनी,कमरे के गेट से ही चिल्लाते हुए- नित्या....
नित्या अवनी को देखकर बेड से नीचे उतर जाती है और दौड़ते हुए आकर अवनी को गले लगा लेती है.......
बहुत देर तक दोनों यूंही एक दूसरे को गले लगाए चुपचाप आंसू बहाए जा रही थी
अवनी, नित्या के गालों पर हाथ फेरते हुए- अब नहीं.... बहुत बहा लिए आंसू.. अब और नहीं, अब मैं तुम्हारे साथ हूं ,कोई कहीं नहीं लेकर जाएगा तुम्हें.....
नित्या, रोते हुए- थैंक यू.. थैंक यू सो मच अवनी... हमें उस पापी के चंगुल से बचाने के लिए, उसने हमें बहुत कमजोर बना दिया था हमारे हाथों ड्रग्स सप्लाई करवाता था.. बहुत टॉर्चर करते थे वो लोग... (नित्या फिर अवनी के गले लगकर जोर- जोर से रोने लगती है)
अवनी, उसे चुप कराते हुए- बस नित्या अब देख तू बिल्कुल ठीक है और वो जेल में,,, अब तुम्हें डरने की कोई जरूरत नहीं है हम दोनों मिलकर उन बुरे दिनों की यादों को भुलाकर एक नई शुरुआत करेंगे, अब रोना बंद कर वरना मैं भी रोने लग जाऊंगी,,,
नित्या हल्का सा मुस्कुराती है और अवनी भी मुस्कुराकर नित्या को फिर से गले लगा लेती है
अवनी, नित्या से- तुम्हें पता है मैं किसे लेकर आई हूं यहां...
नित्या हैरानी से-किसे..?
इतने में विवान अंदर उनके पास आता है जो दरवाजे के बाहर खड़ा उन दोनों की बातें सुन रहा था
नित्या, विवान को देखकर खुशी से चिल्लाते हुए- विवान.. विवान तुम यहां कैसे...?
और विवान के पास आकर उसके गले लग जाती है
विवान- आई एम रियली सॉरी नित्या.... तुम इतनी बड़ी प्रॉब्लम में थी और मैंने तुम्हारे बारे में एक बार भी जानने की कोशिश नहीं की...
नित्या - इट्स ओके विवान.. तुम्हारी कोई गलती नहीं है,,,
विवान, नित्या के आंसू पूछते हुए- अब घर चले...
नित्या,अवनी की तरफ देखकर- पर अवनी....
विवान, नित्या की बात को समझते हुए-यह भी हमारे साथ ही चल रही है और तेरी तबीयत.. तबीयत तो ठीक है ना अब...
नित्या हा में सिर हिलाती है तीनों कार में आकर बैठ जाते और कार अग्रवाल मेनशन की ओर बढ़ती है कुछ देर में तीनों घर पहंचते हैं घर पर सब एक साथ मिलकर पूजा कर रहे थे, काव्या ने पूजा की थाली अपने हाथों में ले रखी थी और सबको आरती दे रही थी अवनी विवान और नित्या भी वहीं आ जाते हैं सब नित्या की तरफ देखते हैं,,,
कृष्णमूर्ति, नित्या के पास आकर उसके सामने हाथ जोड़ते हुए- मुझे माफ कर देना बेटा.. मैं तेरा ख्याल नहीं रख पाया....
शालिनी भी उसके पास जाती है शालिनी- हम भी तुम्हारे साथ हुए अन्याय के लिए उतने ही जिम्मेदार है.... बेटी का हक देने के लिए बोला था लेकिन.......
नित्या, कृष्णमूर्ति और शालिनी के गले लगकर- नहीं अंकल, आंटी... इसमें किसी की कोई गलती नहीं है आप लोगों ने कुछ नहीं किया एंड मैं तो आपसे फिर से मिलकर बहुत खुश हूं सोचा नहीं था दोबारा आपसे मिल पाऊंगी...
सुधा जी, पिछे से- क्यों नहीं मिल पाती दोबारा.. भगवान अच्छे लोगों के साथ कभी बुरा नहीं होने देते बेटा....
नित्या उनके पास जाकर उनके पैर छूती हैं और बाकी सब से भी मिलती है नित्या को देखकर सब बहुत खुश थे और अवनी को थैंक्यू बोल रहे थे कि उसकी वजह से नित्या फिर से घर पहुंच गई,,,,
कुछ देर तक सब लोग हॉल में बैठकर बातें करते हैं अवनी भी वही बैठी थी वह अपने फोन में टाइम देखती है 8:00 बज रहे थे और आज उसे ऑफिस भी जाना था
अवनी, काव्या के पास आकर- अब मुझे जाना होगा काव्या...(नित्या की तरफ देखकर) मेरी दोस्त का ख्याल रखना...
काव्या, कुछ बोलती उससे पहले ही अवनी नित्या के पास आकर- मै तेरे लिए बहुत ख़ुश हूं नित्या.... तुझे विवान जैसा अच्छा दोस्त मिला और इतना प्यारा परिवार..... अपना ध्यान रखना... मै चलती हूं मुझे ऑफिस जाना है...
नित्या, अवनी का हाथ पकड़कर- मुझे कुछ नहीं चाहिए... परिवार भी नहीं... प्लीज मुझे छोड़कर मत जा....
अवनी, नित्या को गले लगाकर- नहीं.... दो साल से तूने बहुत दर्द सहे है और वो जख्म मै कभी नहीं मिटा सकती,,,(अवनी, नित्या के गालों पर हाथ रखकर प्यार से) पता है तुम्हें परिवार में रहकर इंसान बड़े से बड़े दर्द को भुल जाता हैं दादा- दादी की कहानियां, मम्मा पापा का प्यार, चाचा चाची की दोस्ती, और भाई बहनों के साथ मस्ती कभी दर्द का अहसास होने ही नहीं देती... नित्या बिना परिवार के जिना क्या होता है ये हम दोनों अच्छे से जानते है.... इसलिए तु यहीं रहेगी,,,,,
सब अवनी के दर्द को महसूस कर रहे थे लेकिन किसी के पास कोई शब्द नही थे कहने के लिए,,,,,,,
सुधा जी- बेटा, आप आज कहीं नहीं जाओगे... आज करण और काव्या का रिसेप्शन है.....
अवनी, सुधा जी के पास आकर- नहीं दादी…. अभी मुझे ऑफ़िस निकलना है, बहुत दिनो से मैने छुट्टी ले रखी है अब जाना होगा, अर्जेंट है और अभिषेक कि आज कोर्ट में सुनवाई भी है वहां भी जाना है फ़िर घर भी देखना है रहने के लिए.....
काव्या, ज़ोर से- घर.... इतना पराया कर दिया तुमने मुझे अवि... वो हमारा घर है कोइ जरुरत नहीं है तुम्हे घर छोड़कर जाने की.....
अवनी, कुछ सोचकर काव्या से- अच्छा ठीक है कहीं नहीं जा रही मै घर छोड़कर... लेकीन अभी मै निकलती हूं....
अवनी वहां से जाने लगती है
काव्या, उसके पास आकर- वापस कब आ रही हैं यहां.....
अवनी, मुस्कराते हुए- ये तेरा ससुराल हैं मेरा नहीं, जो कभी भी मुंह उठाकर चली आउंगी.... अभी मुझे अपने करियर पर भी ध्यान देना है और अब मेरा कोइ काम भी नहीं है,,, हा अगर तुम्हें कभी मिलना हों तो आ जाना मेरे पास...
सब अवनी की इस बात पर हंसने लगते हैं और अवनी भी सबसे मिलकर बाहर आ जाती हैं,, विवान भी उसके पीछे पीछे आता है
विवान, दरवाजे के बाहर आकर अवनी के पीछे से- अरे मिश एक्सप्रेस थोडा धीरे चलो वरना फ़िर किसी का नुकसान करोगी.... (मुस्कराते हुए)
अवनि, पिछे मुडकर- तुम नहीं सुधरोगे मिस्टर...... अन्दर थोडी सी तारीफ़ क्या करदी,हीरो समझने लगे ख़ुद को....
विवान, अपनी कॉलर पडकर, बोहे ऊपर करते हुए-वो तो मैं हूं....
अवनी, उसे अजीब तरीके से घूरते हुए- तुम....
विवान, उसकी बात को काटते हुए- चलो छोड़ो.... वैसे तुम सच में वापस नहीं आ रही यहां....
अवनी- नहीं... अन्दर वाली बात दोहरानी पड़ेगी क्या....
विवान- रहने दो... मै भी यही चाहता था कि तुमसे कभी मुलाक़ात नहीं हो
अवनी, थोड़े गुस्से से- ओर तुमसे मुलाकात कोई करना भी नहीं चाहता मिस्टर विवान..
विवान- वैसे तुम मेरे घर नहीं आओगी.. लेकीन मै तो काव्या के घर आ सकता हूं ना (अवनी को चिड़ाते हुए)
अवनी, उसके थोडा और पास आकर- कोशिश भी मत करना... वरना मैं भुल जाऊंगी कि तुमने मेरी हेल्प की थीं,,,
इतना कहकर अवनी वहां से ऑफिस के लिए निकल जाती हैं विवान भी हसते हुए अपनी कार लेकर ऑफ़िस चला जाता है

Continue....