जलन (रहस्य रोमांच कथा - भाग-2) Ashwajit Patil द्वारा जासूसी कहानी में हिंदी पीडीएफ

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जलन (रहस्य रोमांच कथा - भाग-2)

अब तक आपने पढ़ा – साक्षी का उसके जन्मदिन के पार्टी में खून हो जाता है. इन्सपेक्टर यशोमी साक्षी की मां मालती, उसका भाई आरूप, बहन रूपल से सवाल जवाब करते हुए साक्षी के मर्डर केस को सुलझाने की कोशिश कर रही है अब आगे…..

 

थोड़ी ही देर में दामले घर की नौकरानी को बुला लाया. वह साठ साल की बूढ़ी औरत थी. पर अब भी उसका शरीर सीधा और चालीस साल के औरत की तरह गठीला था. यशोमी ने उसे अपने सामने बिठाकर सवाल करने शुरू किये. नौकरानी को उस घर में सभी अम्मा कहते थे. वह अपने उम्र के दसवें साल से उस घर में रह रही थी. उसकी दसवीं कक्षा तक की पढ़ाई बाबुजी ने ही करवाई थी. आगे अम्मा ने करीब-करीब वहीं सब बताया जो पहले तीनों ने बताया था. उसमें ज्यादा कुछ फर्क नहीं था. लेकिन अम्मा उससे भी कुछ ज्यादा जानती थी. अत: उससे वह उगलवाना बहुत जरूरी था ताकि केस सुलझाने में मदद मिल सके.

यशोमी ने उसे यकिन दिलाया की यदि वह उसके सवालो के जवाब देंगी तो ही वह साक्षी के साथ इंसाफ कर पायेगी. यशोमी उससे बाल की खाल निकालते हुए सवाल करने लगी. जिससे यशोमी को कुछ नये तथ्य पता चले.

उसे पता चला कि, मालती की शादी के बाद का पहला अफेयर उसके मैनेजर विनोद के साथ हुआ था. मालती जब अपने पिता की खस्ता होती तबीयत और फैक्ट्री में चल रही गड़बड़ी को लेकर परेशान थी तब विनोद ने उसे काफी मदद की और उससे नाजायज रिश्ता बनाया. जिससे उसे गर्भ ठहरा. लेकिन जैसे ही मालती को पता चला की विनोद ही फैक्ट्री में गड़बड़ कर रहा है तो मालती ने उसे जेल करवा दी.  

जब बाबुजी को पता चला कि लोकेश की गैरमाजूदगी में मालती को बच्चा हो रहा है और वह गैरपुरूषों से संबंध रखती है तो वे उससे और ज्यादा खफा हो गए थे इसलिए उन्होंने वह अजीबो-गरीब वसीयत बना दी.

साक्षी मालती की पहली संतान थी. अत: उसे सबसे खुब लाड़ प्यार मिला खास कर उसके नाना उससे बहुत प्यार करते थे. लेकिन उनके अंतिम समय में मालती साक्षी को उनके करीब नहीं जाने देती थी. बिस्तर पर पड़े-पड़े उनके पीठ में फफोले हो गए थे और उनमें किड़े बिलबिलाते थे. अम्मा, मालती और उनकी देखभाल के लिए रखी नर्स ही उनके कमरे में जाती थी. साक्षी इस बात के लिए अपनी मां से काफी नाराज रहने लगी.

उसके पिता लोकेश भी अपनी बेटी पर जान छिड़कते थे. तलाक होने के बावजूद वे हमेशा उससे मिलने आते. साक्षी दस साल की थी तब लोकेश उसे मिलने आया था और अपनी बेटी को कहानी सुनाकर सुला रहा था. तभी मालती ने आवाज देकर लोकेश को बुलाया. लोकेश कहानी अधुरी छोड़कर मालती के कमरे में चला गया. कुछ देर साक्षी लोकेश का इंतजार करती रही लेकिन जब पांच म‍िनट तक लोकेश नहीं आया तो वह उठकर अपने मम्मी के कमरे के दरवाजे के पास पहुंची. वहां दोनों तलाकशुदा पती-पत्नि का झगडा चल रहा था. मालती उससे कह रही थी की आज के बाद वो साक्षी से मिलने ना आये. साक्षी ने ये बात सुनी तो उसने पूरे घर में तोड़फोड़ मचा दी. उसके स्वभाव में काफी परिवर्तन आ गया. अपने मां के प्रति उसकी नाराजगी नफरत में बदल गई. उसे लगता उसकी मां उन सब को अलग कर रही है जो भी उससे प्यार करते है. उन्हें उससे मिलने से रोकती है.

उसके बाद तो उसे जब भी गुस्सा आता वह घर का सामान तोड़फोड़ करती, खुब चीखती चिल्लाती. यहां तक की उसने कभी किसी का लिहाज नहीं किया घर के सभी नौकरों को हाथ में जो आए फेंक कर मारा. अपने छोटे भाई-बहन को भी अपने धौंस में रखती यदि वे उससे मुँहजोरी करते तो उन पर हाथ भी उठाती थी.

आरूप प्रायमरी से मीडिल क्लास में पहुंचा उसे थोड़ी समज आने लगी तो वह अपनी मम्मी से दूर होते चला गया. वह उससे बात नहीं करता था. उसका कहना था कि उसके दोस्त उसकी मां के बारे में गंदी बातें करते है. उससे उसके असली बाप का नाम पूछते है. इसीलिए वह गुमसुम-सा रहने लगा. उसने नशा करना शुरू कर दिया था तो रूपल विनोद नाम के आदमी के साथ मिलती रहती थी. जिसके लिए उसकी मम्मी उसे मना भी करती थी. लेकिन रूपल ने विनोद से मिलना छोड़ा नहीं. विनोद रूपल को उसकी मम्मी और भाई-बहन के खिलाफ भडकाते रहता था.

एक दिन दोनों बहने आपस में लड़ रही थी. साक्षी ने रूपल पर हाथ उठाया तो रूपल ने भी फल काटने वाले चाकू से उस पर वार कर दिया था. साक्षी ने उस वार को अपने हाथ पर रोक लिया, उसके हाथ में गहरा घाव हो गया था. मालती ने डॉक्टर को बुलाकर उसकी मरहम पट्टी करवाई और जब उसे बुखार हुआ तो रात भर उसके सिरहाने बैठकर जागती रही. रूपल को एक कमरे में बंद कर दिया था. सुबह उसे बंद कमरे से बाहर निकालकर मालती ने उसे समझाया और दोबारा ऐसा ना करने का वचन लिया था.

मालती अपने तीनों बच्चों से खूब प्यार करती थी. सिर्फ वह उन्हें उतना समय नहीं दे पाती जितना एक मां को देना चाहिए. उसने कभी भी अपने बच्चों पर हाथ नहीं उठाया. उनकी गलती होने पर उन्हें प्यार से ही समझाया. उसकी एक ही आदत खराब थी उसने अपने ही फैक्ट्री के कुछ लोगों से नाजायज रिश्ते बना लिये थे और जब वह बहुत ज्यादा परेशानी में होती या उसकी चिड़चिड़ाहट बढ़ जाती उस समय वह बाजारू आदमियों तक को घर में बुला लेती थी. पर उन आदमियों का या बाहर वालों का साया तक उसने अपने बच्चों पर पड़ने नहीं दिया था.

इन तथ्यों को जानकर यशोमी फिर पेच में पड़ गई की यहां कौन है जो साक्षी की जान ले सकता है. वह पंद्रह साल की बच्ची जिसने गुस्से में चाकू मार दिया था या फिर वह भाई जिसे नशे की लत पड़ चुकी थी और जिसे पैसे मिलना बंद हो गये थे या फिर वह मां जो अपने बच्चों से बहुत प्यार तो करती थी लेकिन जिसके कई पुरूषों से नाजायज रिश्ते थे.

एक किरदार छूट रहा था वह था साक्षी का पिता यानी लोकेश. यशोमी ने अम्मा से लोकेश के बारे में पूछा तो अम्मा इतना ही बता पायी कि, लोकेश से उसके ज्यादा संबंध नहीं आये. वह इस घर में मुश्किल से एक-दो साल ही रहा होगा. वह अक्सर अपनी नौकरी के सिलसिले में बाहर ही ज्यादा रहता था. लेकिन जब भी वह यहां रहा वह सिर्फ साक्षी का ही लाड़ दुलार करता था. उसने अपने बेटे को भी कभी प्यार से अपनी गोद में नहीं उठाया था. उसे शक था की आरूप और रूपल उसकी संतान नहीं है. रूपल तो सच में उसकी संतान नहीं थी. आरूप के पैदा होने के कुछ ही दिन बाद लोकेश अपने जॉब के तहत एक प्रोजेक्ट के लिए राज्य से बाहर गया हुआ था और उसके वहां से लौटकर आने से पहले ही रूपल का जन्म हुआ था.

इस घटना ने मालती और लोकेश की दूरियां बढ़ा दी थी. रोज ही उनमें झगडे होते. इन झगडों से तंग आकर लोकेश ने यह घर ही छोड़ दिया और मालती ने तलाक लेकर उसे ही छोड़ दिया.

उस घर में सिर्फ चार लोगों का बयान लेते हुए कई घंटे बित गये थे. उसने दामले को सब कुछ समेटकर चलने का इशारा किया. गाडी में बैठते हुए यशोमी बोली, “प्रकाश, चलो सीधे लोकेश के घर चलते है. उसका भी बयान दर्ज कर लेते है.” गाडी फर्राटे से लोकेश के घर की ओर चल पड़ी. उसी समय पुलिस स्टेशन से कॉल आया और फोन पर ही लोकेश के बारे में खबरियों से प्राप्त कुछ खास जानकारी यशोमी को मिली.

यशोमी ने जैसे ही लोकेश के घर की डोरबेल बजाई. दरवाजा एक महिला ने खोला यशोमी को याद आया यह वहीं महिला थी जो हादसे वाली रात मालती के चक्कर आकर लडखडाने पर बोली थी कि, जो पचता नहीं वह पीना नहीं चाहिए…. ऐसा कुछ. पुलिस को सामने देख वह महिला बोली,

“किससे मिलना है ?”

“तुम्ही से मिलना था चलो अंदर बैठकर बातें करते है”

अब तक दरवाजा रोके खड़ी वह महिला वहां से हटी उसने यशोमी और उसकी टीम को अंदर आने दिया. तब तक बेडरूम से निकलकर लोकेश भी बाहर आ गया था. लेकिन यशोमी ने पहले उसी महिला से सवाल किया,

“हम यहां लोकेश से कुछ सवाल करने और उसका बयान लेने आये थे तुम यहां कैसे?”

“मै इनकी पत्नी हूं रिना इसीलिए मेरा हक बनता है इनके साथ रहने का.”

“कब हुई तुम्हारी शादी ?”

“बारह साल हुए है”

“तुम्हे कोई बच्चा नहीं है ?”

“एक बेटा है”

“साक्षी तुम्हारी सौतेली बेटी थी. तुम्हारे संबंध कैसे थे उसके साथ ?”

“वह मुझसे कभी बात नहीं करती थी. अपने पापा से मिलने आती थी. उनसे पैसे मांगती थी. उसके पापा उसे पैसे दे देते वह चुपचाप चली जाती.”

“उन दोनों बाप-बेटी में कैसा रिश्ता था ? तुम्हे कभी कुछ अजीब लगा…”

“ये तो वे दोनों बाप-बेटी ही जाने मै उनके बीच कभी आती नहीं थी.”

तत्पश्चात यशोमी ने उससे कुछ और सवाल किए उसके जवाब से कुछ खास जानकारी मिली नहीं. अब बारी थी लोकेश से पूछताछ करने की. यशोमी ने रिना को कॉफी बनाकर लाने को कहा और प्रकाश से बोली की इसकी कॉफी बन जाए तभी भी इसे इस कमरे में आने मत देना. तुम किचन के दरवाजे पर खड़े हो जाओ.

यशोमी ने लोकेश से कुछ बुनियादी सवालों के जवाब पा लेने के बाद पुछा, “तुम्हारी पत्नी ने बताया साक्षी तुमसे सिर्फ पैसे मांगने ही आती थी क्या ये सच है ?”

“हां… उसे जब भी पैसों की जरूर होती वह मुझसे पैसे मांगने आती थी और मै उसे दे देता था.”

“पर उसे पैसों की क्या जरूरत थी जबकि उसके खुद के बैंक खाते में काफी रूपये थे. उसकी मम्मी का एटीएम कार्ड उसके पास रहता था. उस अकाउंट से भी वह पैसे निकाल सकती थी. फिर वह तुमसे पैसे मांगने क्यों आती थी ?”

“मै उसका बाप था और एक बेटी का हक होता है बाप से पैसे मांगना”

“मै ये पूछ रही हूं मि. लोकेश की तुम्हारी बेटी के पास पैसे होते हुए भी वह तुमसे पैसे क्यों मांगती थी? उसके हक और अधिकार नहीं पूछे मैने.”

“इस प्रश्न का उत्तर साक्षी ही दे सकती थी जो अब नही है.”

“मुझे पता है वो नहीं है. लेकिन, तुम भी ये बात जानते हो. मुझे पता चला है… तुम जब भी साक्षी से मिलने जाते थे वह तुम्हारे अकाउंट में अपने या अपनी मम्मी के अकाउंट से हजारो रूपये ट्रांसफर करती थी. वही वापस मांगने पर तुम उसे इंस्टॉलमेंट में थोड़ी थोड़ी रकम लौटाते थे. अभी दो महिना पहिले ही उसने तुम्हारे अकाउंट में पाच लाख रूपये ट्रांसफर किये थे. तुम अपनी बेटी से किस बात के पैसे लेते थे.”

“वो …. वो … मै थोड़ी फायनान्शियल मुसिबत में था. मैने उससे मदद मांगी थी सो उसने कर दी. एक बेटी अपने बाप की इतनी मदद भी नहीं कर सकती क्या ?”

“कर सकती है मि. लोकेश, लेकिन उसने ये पैसे शायद तुमसे वापस भी मांगे होगे. क्योंकि पाच लाख रूपये कम नहीं होते. यह रकम उसने अपनी मम्मी के अकाउंट से दी थी. उसे अपनी मम्मी को भी तो जवाब देना था कि पाच लाख का क्या किया. वे पाच लाख तुमने उसे वापस किये या नहीं ?”

यशोमी के इस सवाल से लोकेश हड़बड़ा गया. उसे पता नहीं था कि यशोमी उसके बारे में इतनी जानकारी इकठ्ठा कर लेंगी. यशोमी आगे बोली, “मि. लोकेश तुम्हारा बैंक बैलेंस पूरा खाली पड़ा हुआ है और तुम पर दस से पंद्रह लाख का कर्जा है. मुझे नहीं लगता की तुमने अपनी बेटी को पाच लाख रूपये वापस किये होगे और वे रूपये कभी वापस ना करने पड़े इसीलिए तुमने ही अपनी बेटी को …”

“ये कैसी बात कर रही है मैडम आप… कुछ भी हो जाए वह मेरी बेटी थी और मै उससे बहुत प्यार करता था. उसे चोट पहुंचाने की मै सोच भी नहीं सकता. आप इतना बड़ा इल्जाम मुझ पर कैसे लगा सकती है.”

“मि. लोकेश आपकी फॅमिली का पूरा बॅकग्राउंड जांचा है मैने. तुम लोग एक-दूसरे के साथ क्या कर सकते हो अच्छे से समझ रहीं हूं. मेरे सामने ये प्यार-व्यार, इमोशनल ड्रामेबाजी कुछ भी काम नहीं आने वाली. जो केक का पीस तुमने अपनी बेटी को खिलाया उसी का कुछ हिस्सा उसने तुम्हारे मुँह में डाला. जिसे तुमने चबाने की जगह वहां से अलग होकर छींकने का अभिनय करते हुए मुँह में जो भी था सारा का सारा बाहर थूक दिया.” इतना बोलने के बाद यशोमी कुछ देर लोकेश की आंखों में देखती रहीं आगे बोली,

“आपने वह केक क्यों नहीं खाया मि. लोकेश ?”

“मुझे शुगर है”

“तुम उसे मना कर सकते थे. तुम्हारी बेटी तो जानती ही होगी. उसने कुछ बैड फील नहीं किया होता”

“मैडम उसका मन रखने के लिए मैने छोटा-सा टूकड़ा ही मुँह में लिया था और उसी समय मुझे छींक आ गई”

“ये मै वीडियो में देख चुकी हूं तुम्हारी छींक कितनी असली और कितनी नकली थी”

“तो क्या करता इतने लोगों के सामने मै अपनी बेटी को नीचा दिखाता. उसने खिलाया हुआ केक सबके सामने थूक देता. इसलिए मैने छींक आने का नाटक किया. मेरा इसके अलावा कोई दूसरा इरादा नहीं था. आपको लग रहा है कि जो पीस मैने साक्षी को खिलाया उसी में जहर था और वह जहर वाले पीस का कुछ हिस्सा अपने मुँह में रखकर थूक दिय तो ये बिल्कूल भी सच नहीं है.”

यशोमी अभी आगे कुछ और कहने ही वाली थी कि लोकेश ही बोल पड़ा, “अभी आप जा सकती है, जितनी आपको जानकारी देनी थी मै दे चुका हूं. आगे आपके किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए आप मुझे मजबूर नहीं कर सकती और अगर मुझ पर इल्जाम लगाना है तो पहले ठोस सबूत और वॉरंट के साथ आना” इतना बोलकर वह यशोमी से नजरे हटाकर दूसरी ओर देखने लगा.

पुलिस की गाड़ी स्टेशन की ओर चल पड़ी थी. दामले ने पूछा, “आगे क्या करना है मैडम?” यशोमी काफी गहरी सोच में थी अचानक से पूछे गये सवाल से मानों नींद से जागी,

“क्या पूछा तुमने?”

“येइ की आगे क्या करना है?”

“मै सोच रहीं थी दामले कि हमने जिस से भी बात की उन सभी के पास कुछ ना कुछ कारण है साक्षी के कत्ल का. पर इनमें से सबसे बड़ी वजह किसके पास थी ? या फिर कोई और वजह है जो हमारे ध्यान में नहीं आ रही है.”

“मैडम.. वो उसके छोटे भाई भैन इसके मरने के बाद तो पूरी प्रापरटी तो उनकीच होने वाली है ना.. वो भी तो मार सकते है और वो उसकी छोटी भैन वो तो उससे कित्ती नफरत करती है देखा आपने. मेरे कू तो लगता है वोइच होगी मडर्रर. सिर्फ हमकू सबूतीच ढूंढना पडे़गा.”

तभी गाडी में बैठी हवलदार गीता बोली, “मैडम मुझे भी दामले की बात में दम लगता है. हम उसके वो नाजायज बाप को पकड़ कर लाते है. उससे सब पता चल जायेगा.”

“हां कुछ तो जरूर पता चल सकता है, उसका स्टेटमेंट बहुत जरूरी है. लाओ उसे उठा कर जहां कहीं भी होगा.”

“मै अभीच कॉल लगा के ठाणा इन्चार्ज को बोलता हूं. वो विनोद के इलाके में डीवटी कर रहे कान्स्टेबल को बोलके अपने पोचते ही लेकर आयेगा”

स्टेशन पहुंचकर यशोमी और उसकी टीम को दस से पंद्रह मिनट ही हुए थे कि एक हवलदार विनोद को अपनी बाईक पर बिठाकर स्टेशन पहुंचा था.

स्टेशन आते ही विनोद बोला, “मुझे यहां क्यों बुलाया गया है ? मैने क्या किया ?”

यशोमी बोली, “तुमसे साक्षी मर्डर केस के बारे में कुछ पूछताछ करनी है”

“ओ मैडम…!, मेरा उस केस से कोई लेना देना नहीं है. उस बारे में आप मुझे ठाणे लाकर पूछताछ नहीं कर सकती. मै जा रहा हूं” वह पलट कर जाने लगा तो जो हवलदार उसे यहां लेकर आया था वह उसके सामने खड़ा हो गया. यशोमी बोली,

“तुम कहीं नहीं जा रहे हो जब तक हमें जवाब नहीं मिलते”

“तुम मुझे रोक नहीं सकती” और वह फोन निकालकर कोई नंबर ढूंढने लगा.

यशोमी बोली, “इसका फोन छीन लो” और वहां डयूटी पर डायरी मेंटेन करने वाले हवलदार से बोली, “इसके खिलाफ कोई केस दर्ज है क्या देखो.”

हवलदार ने अपने रजिस्टर के पन्नें पलटने शुरू किये और एक पेज पर रूक कर बोला, “मैडम, इस पर मारामारी, जान लेने की कोशिश और धमकी देने का केस दर्ज है किसी जमीन के विवाद को लेकर”

“ठीक है उस केस में इसकी गिरफ्तारी दिखाओं और इसे इटरोगेशन रूम में लेकर चलो”

यशोमी ने उसे इंटेरोगेशन रूम में ले जाकर पूछताछ की. पहले तो वह इधर-उधर की हांकता रहा लेकिन जब पुलिसिया डिग्री शुरू हुई तो तोते की तरह वह बकने लगा,

“मालती ने जेल भेजने के बाद छ: महीने की सजा काटकर जब बाहर आया तो मेरे मन में उसके लिए बदले की भावना भड़की हुई थी. लेकिन उससे बदला लेना आसान नहीं था. इसलिए मै पहले अपनी आर्थिक स्थिति सुधारना चाहता था. जिसके लिए मैने प्रॉपर्टी में दलाली का काम करना शुरू किया. उसके बारे में और जानकारी हासिल की. मुझे पता था रूपल मेरी ही बेटी है इसीलिए रूपल सात साल की थी तभी से मै नियमित रूप से उससे मिलने लगा. मैने उसे बताया कि मै ही उसका असली पिता हूं. तुम्हारा जन्म मेरी वजह से हुआ है इसीलिए तुमसे कोई प्यार नहीं करता, कोई तुम्हारी देखभाल अच्छे से नहीं करता, सब तुमसे नफरत करते है. तुम्हारी मां बहुत चालाक और स्वार्थी है उसने अपनी खुशी के लिए मेरा इस्तेमाल किया और मुझे झूठे केस में फंसा कर जेल भेज दिया जबकि मै तुम्हारी मां से शादी करना चाहता था तुम्हे पिता का प्यार देना चाहता था. मै रूपल को कुछ ना कुछ गिफ्ट देकर मालती और उसके बहन-भाई के खिलाफ भडकाता रहता था. मुझे इस बात का पता चल गया था कि साक्षी के मरने के बाद यह प्रॉपर्टी रूपल और उसके भाई के नाम होने वाली है. इसीलिए मै साक्षी को मौत के घाट उतारने की योजनाएं बनाने लगा. लेकिन साक्षी को खत्म करने का कोई मौका मुझे नहीं मिल रहा था.”

आगे वह अपने बयान में बोला, “मैडम मैने सोचा यदि रूपल खुद अपनी बहन को मार देती है और पकड़ी भी जाती है तो वह नाबालिग है उसे ज्यादा लंबी सजा नहीं होने वाली. यही सोचकर मै उसके मन में साक्षी को मारने के लिए नये नये तरकीब डालने लगा उसे भडकाने लगा. पर रूपल हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी. एक बार आधी अधूरी कोशिश की थी उसने. लेकिन एक वार करने के बाद खून देखकर डर गई थी दूसरा वार नहीं कर पाई. बर्थ-डे वाले दिन भी उसे मारने की प्लानिंग मैने उसे समझा दी थी बोला था की हम उसे जहर से मारेगे इसमें खून नहीं दिखता है. रूपल तैयार हो गई. मैने उसे जहर लाकर दिया था और बोला था ‍कि इसे साक्षी के ड्रिंक में मिला देना लेकिन उससे पहले ही केक खाते वक्त साक्षी की मौत हो गई. मुझे नहीं पता वह जहर रूपल ने केक में क्यों मिलाया. इस केस में मेरा नाम ना आये इसलिए मै तब से रूपल से मिला भी नहीं हूं और ना ही फोन पर बात की है.”

विनोद के कबूलनामे को सूनकर दामले और गीता के चेहरे प्रसन्नता से खिल गये उनका शक जो यकिन में तबदील हो गया था. यशोमी ने तुरंत रूपल के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट के लिए दस्तावेज तयार किये और फाईल बनाकर हवलदार के हाथों हेडक्वार्टर भेज दी. शाम हो गई थी अत: वारंट दूसरे दिन मिलने वाला था.

पर अब भी यशोमी को कुछ कमी लग रही थी. इस केस से संबंधित कुछ और लोगों के बयान लेने बाकी थे जिनमें एक  था साक्षी का वर्तमान प्रेमी हितेन शाह. उसने बर्ड-डे पार्टी में साक्षी के हाथों से केक खाने की जगह मुंह में दबाया हुआ केक बिना खुद का हाथ लगाये सीधे मुँह लगाकर खाया था और इस हरकत के लिए लोकेश ने उसे मुक्का जड़ दिया था. यशोमी ने प्रकाश को गाडी निकालने को कहा तो प्रकाश बोला, “कहां चलना है मैडम?”

“हितेन के घर चलते है. उसका स्टेटमेंट अभी बाकी है. इस करेक्टर को भी समझते है ये क्या बला है.”

“लेकिन विनोद ने कबुल कर लिया है की जहर उसी ने रूपल को लाकर दिया था”

“ये बात सच है प्रकाश लेकिन मुझे फिर भी कुछ मिसिंग लग रहा है. कुछ बातें तो रूपल की गिरफ्तारी के बाद ही क्लियर हो पायेगी कि उसने कैसे केक के पीस में जहर मिलाया. लेकिस उससे पहले मुझे कुछ और भी जानना है. इन लोगों की लाईफ इतनी जटिल है रिश्ते इतने उलझे हुए है कि पूछो मत. चलो चलते है.”

हितेन के फ्लैट में ताला लगा हुआ था. आस-पडोस से पूछने पर पता चला वह तो दो दिनों से आया ही नहीं है. यशोमी ने दामले को आदेश दिया, “दामले आईटी डिपार्टमेंट में फोन करके हितेन के सारे नंबर फारवर्ड करो और पूछो की उसकी लोकेशन ट्रेस हो सकती है क्या?”

हितेन का फरार होना यशोमी को खटक रहा था. यदि रूपल ने ये काम किया है तो हितेन फरार क्यों है ? थोड़ी ही देर में आईटी डिपार्टमेंट से सूचना प्राप्त हुई की भेज गये सारे नंबर इनएक्टिव है. लास्ट लोकेशन हितेन का घर ही था. यशोमी ने हितेन के फ्लैट का दरवाजा तोड़ने का आदेश दिया. अंदर दाखिल होकर एक-एक कमरे की तलाशी ली गई. पर संदेहजनक कुछ भी नहीं मिला. हितेन अपने कपड़े और जरूरी सारा सामान लेकर फरार हो गया था. एक दराज से पुराना मोबाईल मिला. “देखों चालू है क्या”

गीता ने उसे ऑन करने की कोशिश की पर वह ऑन नहीं हुआ तो गीता ने उस फोन से मेमरी कार्ड निकाल कर अपने फोन में लगाया. उस मेमरी कार्ड को चेक करने पर उसमें कई औरतों की तस्वीरे थी. मालती की कुछ पुरानी तस्वीरें दिखी साथ ही साक्षी और हितेन की साथ में ली गई तस्वीरें थी. कुछ एक-दूसरे को किस करते हुए सेल्फी थी.

            उन तस्वीरों के देखकर हवलदार गीता बोली, “मैडम लगता है कमीना मां-बेटी दोनों पर लाईन मारता था और सिर्फ मां-बेटी ही नहीं यहां तो कई और भी खूबसूरत खूबसूरत औरतों की तस्वीरें है.”

            “दामले इस हितेन की सारी जन्म कुंडली निकालने के लिए खबरियें लगा दो. ये पहले कहां रहता था? क्या करता था ? और अब ये कहां जा सकता है ?”

            “जी मैडम”

            “प्रकाश..! चलो मुझे घर छोड़ दो और तुम लोग भी अपनी छुट्टी करो. कल सुबह रूपल का वारंट लेकर उसे हिरासत में लेकर पूछताछ करना और इसकी तलाश यही काम रहेगा.”

            एक पंद्रह साल की बच्ची को हिरासत में लेकर पुलिस स्टेशन लाते हुए यशोमी को अच्छा तो नहीं लग रहा था पर वह अपना फर्ज निभा रही थी. रूपल के घर पहुंचते ही उसने काफी तमाशा भी किया और साथ चलने के लिए तैयार भी नहीं हो रही थी. ऐसे में गीता ने उसे थप्पड़ रसीद दिया था और वह भीगी बिल्ली बन गई थी. मालती ने भी उसकी गिरफ्तारी का भरपूर विरोध किया. कई फोन मिलाये पर समय पर उसे भी कोई मदद नहीं मिली.

            यशोमी की टीम उसे लेकर स्टेशन पहुंची. इंटेरोगेशन रूम में ले जाकर यशोमी उससे सवाल करने ही वाली थी कि मालती एडवोकेट के साथ वहां पहुंची. उनके हाथ में रूपल के बेल पेपर्स थे. यशोमी की समझ में नहीं आया की उसे इतनी जल्दी बेल कैसे मिल गई. यशोमी ने एडवोकेट से पूछा तो वह बोला,

“मैडम किसी की भी गिरफ्तारी से पहले अच्छे से स्डटी करनी चाहिए, पुख्ता सबुत जुटाने चाहिए, तुम्हारे पास मेरी क्लाइंट के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है. कोई सड़क छाप आदमी आकर तुम्हे बताता है कि यह खुन एक पंद्रह साल की बच्ची ने किया है और तुम उसे गिरफ्तार कर लेती हो.”

            यशोमी मन मसोस कर रह गई. वह रूपल से कुछ बातें जानना चाहती थी लेकिन अब वह मुमकिन नहीं था. वह बेल पर रिहा हो चुकी थी. अफसोस करते हुए हाथ पर हाथ धरे बैठना ये तो यशोमी ने सीखा ही नहीं था अत: सबुत जुटाने और हितेन का पता लगाने पुलिस स्टेशन से बाहर निकल गई.

            “दामले क्या हुआ अभी तक किसी भी खबरी ने हितेन के बारे में कुछ बताया नहीं क्या?”

            “अरे मॅडम.. ! वो उसको जानने पहचाने वालों पर अपने खबरिये बर्रा..बर नजर रखे हुए है. लेकिन वो साला किदर चुपा हुआ है पता नइ चल रा है”

            “एक काम करो उसके जान पहचान वालों के लिस्ट में उसके जो सबसे करीबी है उनके पते बताओं हम सीधे बात कर जानकारी निकालेगे.”

            इन्सपेक्टर यशोमी और उसकी टीम हर उस जगह पहुंची जहां हितेन के होने की संभावना थी. उसके पहचान वालों से पूछताछ की लेकिन हाथ कुछ लग नहीं रहा था. बैल के सींग की तरह गायब हो गया था हितेन. अपने प्रयासों की असफलता पर धीरे-धीरे हताश हो रही थी यशोमी की, तभी एक खबरी का फोन आया. उसने बताया कि हितेन कहां छुपा हुआ है. यशोमी ने बिना देरी किये प्रकाश को वहीं चलने को कहा तो प्रकाश बोला, “मैडम, वो यहां से 200 किमी की दूरी पर है. हमे पांच से छे घंटे लग जायेगे. रात में पहुंचेगे वहां.”

            “अब जो भी समय लगता हो प्रकाश हमे उस तक पहुंचना ही है”

मरता क्या न करता, प्रकाश ने गाडी उस दिशा में दौड़ा दी. हितेन जिस इलाके में छुपा हुआ था. यशोमी पहले उस इलाके के थानेदार से मिली. उसे बताया कि, वह यहां किस लिए आई है. इस इलाके की जानकारी ना होने की वजह से उसे थाने से कोई हवलदार चाहिए.

कई मुश्किलों का सामना करते हुए आखिर वे हितेन को अपने कब्जे में लेने में कामयाब हो ही गये. दूसरे दिन ग्यारह बजे तक वे अपने पुलिस स्टेशन पहुंचे थे. हितेन को लॉकअप में डालकर यशोमी पहले अपने घर पहुंची. फ्रेश होकर चाय नाश्ता लेकर तुरंत ही वह फिर पुलिस स्टेशन पहुंची. उसकी टीम के सभी लोग भी फ्रेश होकर यशोमी का इंतजार ही कर रहे थे.

हितेन को इंटेरोगेशन रूम में लाया गया. यशोमी उसके सामने बैठी थी तो दामले साइड में खड़ा था.

“हां तो मि. हितेन शुरू हो जाओं क्या कैसे किया और शहर छोडकर भागने की जरूरत क्यों पड़ी तुम्हे? साक्षी का कत्ल क्यों, किसलिए और कैसे किया?”

हितेन कोई मंजा हुआ हार्डकोर क्रिमिनल नहीं था. पहले तो वह मना करता रहा की उसने कुछ नहीं किया. लेकिन जैसे ही थर्ड डिग्री के डंडे पड़े उसने बताना शुरू किया,

“मै मालती के साथ स्कूल में एक ही कक्षा में पढ़ता था. जब हम आठवीं कक्षा में थे तभी से मै मालती को प्यार करने लगा था. मालती मुझे जरा भी भाव नहीं देती थी. जब हम जूनियर कॉलेज में थे तो मालती की मुलाकात हमारे कॉलेज के सामने इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ने वाले लोकेश से हुई वह उससे प्यार करने लगी. उनका प्यार देखकर मुझे काफी जलन होती. लेकिन मै कुछ कर नहीं सका. मालती ने बालिग होते ही उससे भागकर शादी भी कर ली. मै भी यह शहर छोड़कर दूसरे शहर चले गया. वहां मेरी लाइफ में एक औरत आई जिसने मुझे चिट किया. इस घटना ने मुझे बदल दिया और लगा औरतें प्यार के काबिल नहीं होती है. सिर्फ पैसा कमाओं और ऐश करो. उसके बाद मैन कई लड़कियों और औरतों को अपने प्यार के जाल में फंसाया और उनसे पैसे ऐंठे. दो साल पहले एक औरत से ऐसी ही ठगी की कोशिश में मेरे पिछे उसने गुंडे लगा दिये तो मै भागकर इस शहर आया.”

वह अपनी बात कहते कहते रूका तो यशोमी बोली, “आगे जारी रखो”

“मै यहां अपना शिकार ढूंढ ही रहा था कि मेरी मुलाकात मालती से हो गई. मालती को एक बड़े एम्पायर की मालकिन के रूप में देखकर मैने उसे ही अपना शिकार बनाने की सोची. मैने बाहर-बाहर से उसके बारे में जानकारी हासिल की. मुझे पता चला वह काफी सालों से अपने पति से तलाक लेकर तीन बच्चों के साथ अकेली रह रही है और उसके कई पुरूषों से नाजायज रिश्ते भी है. यह बात मेरे लिए फायदे की थी. मैने उसे बताया की मै बेरोजगार हूं और नौकरी की तलाश में हूं. पुरानी पहचाने के नाते उसने मुझे अपनी फैक्ट्री में नौकरी पर रख लिया. इतना ही नहीं बल्कि वह मेरे काफी करीब भी आई. उसने मुझसे भी अपने नाजायज रिश्ते बनाये. लेकिन उसकी एक बात मेरे ध्यान में आई. मै जब उसके करीब जाता या उससे इच्छा दर्शाता तो वह कभी मानती नहीं थी. उस समय मुझसे ऐसा बर्ताव करती जैसे वह मुझे जानती ही नहीं. कई बार मुझे उसने  झिड़क दिया था. मेरी समझ में नहीं आया कि मालती ऐसा बर्ताव क्यों करती है. मैने उसकी एक-एक हरकत को जांचना शुरू किया. तब मेरी समझ में आया कि, मालती जब भी तनाव में होती थी, परेशानी में होती थी तभी उसे किसी पुरूष की आवश्यकता होती थी अन्यथा व किसी को भी अपने आस-पास तक भटकने नहीं देती थी.”

“फिर आगे क्या हुआ? बोलते रहो मै सुन रही हूं.”

“जिन आदमियों ने उससे संबंध बनाए थे उनमें से कुछ लोगों ने उसे ब्लैकमेल करने की कोशिश भी की लेकिन वह किसी से डरी नहीं सीधे बोलती, चाहे तुम्हारे पास मेरी कैसी की फोटो या वीडियो हो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. सभी जानते है मै नाजायज रिश्ते रखती हूं मेरे अपने बच्चो से लेकर सारा शहर लेकिन तुमने ऐसी हिमाकत की तो ब्लैकमेल के इल्जाम में जेल चले जाओंगे. किसी की हिम्मत नहीं होती थी मालती से पंगा लेने की. मै भी समझ गया कि मैने गलत औरत को चुना है इसे ठगना बहुत मुश्किल है.”

“तो तुमने अपना टार्गेट बदल दिया और साक्षी के पीछे लग गये”

“हां… मालती को जरूरत होने पर वह सीधे अपने घर बुलाती थी. जहां मैने उसकी बेटी साक्षी को देखा उसकी आंखों में अपने मां के लिए तिरस्कार नजर आया. मेरी तरफ भी उसने गुस्से से देखा था. मुझे लगा यह सॉफ्ट टारगेट है जो अपनी मां से नफरत भी करती है. मैने कई दिनों तक उसका पीछा किया. वह किसी भाविक नाम के लड़के से प्यार करती थी. मैने यह बात जाकर मालती को बताई और उसे यह भी बताया की भाविक के परिवार का बैकग्राउंड अच्छा नहीं है. वे बहुत पैसे के लालची है. भाविक तुम्हारी बेटी को फंसाकर तुम्हारी प्रॉपर्टी हड़पना चाहता है. उसके कई सबुत भी मैने मालती के सामने रखे.”

वह आगे कुछ बोलने से रूका तो यशोमी बोली,

“हं….! आगे… आगे क्या हुआ”

“मालती इस बात परेशान हो गई. वह अपने तीनों बच्चों को बहुत प्यार करती थी. भले ही उसके अपने बच्चे उससे नफरत करते हो. लेकिन वह अपने बच्चों को सेफ रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकती थी. पहले उसने साक्षी को काफी समझाया उसे भाविक से मिलने के लिए मना किया लेकिन साक्षी ने उससे मिलना नहीं छोड़ा तो उसने भाविक को मिलने बुलाया और उसे साक्षी से दूर रहने को कहा. उसे कुछ पैसों का लालच भी दिया लेकिन भाविक मान नहीं रहा था तो, मालती ने अपना आखरी हथरिया निकाला. उसने अपने औरत होने का फायदा उठाया उसकी कामुक भावनाओं को उकसाकर उसके साथ संबंध बनाये. जिसकी एक पिक उसने मेरे मोबाईल पर भेजी.”

“और वहीं पिक तुमने साक्षी को दिखाई”

“हां… पहले तो साक्षी मुझसे बात करने को भी तैयार नहीं थी. लेकिन मैने जैसे ही उसे वह पिक दिखाई वह तिलमिला उठी और पैर पटकते हुऐ जाने लगी. मुझे पता था वह सीधे अपनी मां से मिलकर उससे झगडा करेंगी पर मैने उसे रोका और उससे हमदर्दी जताई. वह मुझे बोली भी की तुम भी तो मेरी मां के आगोश में पड़े रहते हो. तुम्हें मुझसे क्यों हमदर्दी होने लगी. तब मैं उसे बोला कि, तुम्हारी मां हम सब का इस्तेमाल करती है. उसके लिए हम सब खिलौने है. मै उसके साथ फैक्ट्री में काम करता हूं यदि उसकी बात नहीं मानूंगा तो वह मुझे नौकरी से निकाल देंगी. लेकिन मुझे ये सब पसंद नहीं है. ऐसे रिश्तों से मुझे नफरत है पर मै मजबूर हूं. एक तुम ही हो जो अपनी मां को सबक सिखा सकती हो. उसकी ऐसी हरकतें रोक सकती हो. साक्षी पर मेरी बातों का असर होने लगा. मैने उसे कहां तुम्हे अपनी मां को सबक सिखाना है तो उसी की भाषा में उसे सबक सिखाना होगा. तुम्हे कोई ऐसा साथी चाहिए जो तुम्हारी मां से डरे नहीं उसके झांसे में ना आये. जिसे पैसों का या औरतों का लालच ना हो.”

“और ऐसा साथी तुम्हारे सिवा और कौन हो सकता था, है ना…”

वह इधर उधर देखने लगा तो यशोमी बोली “आगे..”

“उसके बाद मेरी उसकी मुलाकाते बढ़ने लगी. मैने उसे पूरी तरह अपने शीशे में उतार लिया था. उसके मन में बिठा दिया था की उसके नाना ने सारी प्रॉपर्टी उसके नाम कर दी है इसीलिए उसकी मां उससे जलती है और वह अपनी बेटी को खुश देखना नहीं चाहती. तुम जिसे पसंद करती हो उसे वह तुमसे दूर कर देती है. जो तुम चाहती हो वह वो करने नहीं देती. पहले तुम्हें अपने नाना से दूर किया फिर पिता से फिर भाविक से और अब मै तुमसे मिलने लगा हूं यह बात उसे पता चली तो वह मेरे खिलाफ तुम्हे भडकाएगी. मेरे खिलाफ जहर उगलेगी. लेकिन तुम उसकी किसी भी बात का यकिन मत करना. मैने कभी उससे पैसे नहीं मांगे और ना ही उसे दूसरे इरादे से छूआ. उसका मुझ पर यकिन बढ़ते जा रहा था. वह मेरी बातों पर कितना अमल करती है यह जानने के लिए मैने उसकी परीक्षा ली. उसे रूपल के प्यार के बारे में बताया और उसे उकसाया कि वह तुम्हारी बहन नहीं है उसे एक विनोद नाम का आदमी मिलता है और तुम्हारे परिवार के खिलाफ भडका रहा है. वह भी तुमसे जलती है, तुमसे नफरत करती है. उसके साथ वही करो जो तुम्हारी मां ने तुम्हारे साथ किया है. इससे हमे पता चल जायेगा की तुम अपनी मां से उसी की तरह बदला ले सकती हो या नहीं. मेरे कहे मुताबिक उसने रूपल के दोस्तों से दोस्ती बढ़ायी. रोहित को घास डालने लगी. रोहित भी साक्षी पर मोहित हो गया था. साक्षी ने उसे एक लॉज में बुलाया. साक्षी को पता था विनोद उसका पीछा कर रहा है. लॉज के कमरे में जाते ही रोहित जैसे ही साक्षी की ओर बढ़ा साक्षी ने उसे दो चार थप्पड़ लगा दिये और आधे घंटे बाद वहां से बाहर निकले. विनोद ने इस बात का क्या मतलब निकालना था वह निकाला और रूपल को नमक मिर्च लगाकर बताया जिससे क्रोधित होकर रूपल ने साक्षी पर वार किया. मुझे लगा नहीं था की ये बात यहां तक बढ़ जायेगी लेकिन जो भी हुआ मेरे हित में था.”

“यानी तुम उनकी आपसी नाराजगी का फायदा उठा रहे थे. फिर उसके बाद…”

“साक्षी को रूपल के वार से चोट आई थी. लेकिन मैने उसे बताया की उसका तीर कितना सही निशाने पर लगा है. रूपल और रोहित में दुश्मनी हो गई है. इस बात से साक्षी को काफी सुकून मिला. वह बोली मुझे अब मजा आने लगा है आगे बोलो क्या करना है. इन लोगों को तड़पाने के लिए, दर्द देने के लिए मै कुछ भी कर सकती हूं. मैने उसे कहां तुम यदि अपनी मां को तड़पाना चाहती हो तो मेरे साथ कुछ किसींग वाली सेल्फी निकालों जिससे तुम्हारी मां जल भून जाएगी. वह तैयार हो गई. तस्वीरें निकाल कर एक-दो तस्वीरें साक्षी ने मालती के मोबाइल पर सेंड की और मालती की ओर से जिस प्रतिक्रिया की हम अपेक्षा कर रहे थे वैसा ही हुआ. मालती ने सबसे पहले मेरे बारे में खोजबीन शुरू की और मेरी सच्चाई जान गई की मै कितना बड़ा फ्रॉड हूं यही बात उसने साक्षी को समझायी मेरे खिलाफ कई सबूत भी दिखाये. लेकिन साक्षी पर तो मेरा नशा छाया हुआ था.”

दामले बीच में ही बोल पड़ा, “अबे कित्ता बड़ा कमिना है बे तू, एक सतरा-अठरा साल की बच्ची को चूतिया बनाकर उसी के मां के खिलाफ इत्ता जहर भर दिया कि तेरी सच्चाई सामने आने पर भी वह तेरेकू पहचान नइ रही थी. फिर आगे बता और क्या क्या गुल खिलाए तुने”

“साक्षी किसी भी तरह से मालती के समझाने से समझने वाली नहीं थी तो उसने मुझे बुलाया. वह मुझे सीधे सीधे धमकाने लगी कि, मै उसकी बेटी का पीछा छोड दूं अन्यथा वह मुझे जान से मरवाएगी. मै जानता था मालती अपने ही फैक्ट्री से जो खुद की लिए सैलरी लेती थी वह लाखों में थी और उन रूपयों को शेअर मार्केट में इन्वेस्‍ट कर उसने अपनी पर्सनल प्रॉपर्टी भी जमाई थी. उसने उसी शहर में एक दूसरा बंगला ले रखा था जिसकी इस समय किमत दस से बाहर करोड़ के आस-पास थी और मालती के पास लाखों के जेवर भी थे. मैने उससे सौदा किया कि वह मुझे पांच करोड़ दे दे मै साक्षी की जिंदगी से ही क्या इस शहर से चला जाऊंगा. लेकिन पांच करोड़ की रकम बहुत ज्यादा होती है. इतनी रकम उसके पास कैश के रूप में नहीं थी. और वह ऐसी औरत नहीं थी की ब्लैकमेल होकर किसी के सामने झुक जाये. वह मुझसे सीधे बोली यदि अभी इसी वक्त यह शहर छोड़कर नहीं गये तो तुम्हें पैसे देने की जगह किसी सुपारी किलर को दो-चार लाख देकर तुम्हारा कत्ल कर दूंगी. यह सारी बातें मैने साक्षी को बताई”

दामले फिर बीच में बोला. “ये भी कि तुने पांच करोड का सौदा किया… ये वाली भी”

हितेन ने दामले को देखा और मन में बुदबुदाया, “क्या बेवकूफ हवलदार है”

“ऐ क्या बोला”

“कुछ नहीं” यशोमी ने दामले को रोका और हितेन की ओर देखकर बोली, “तुम अपनी बात जारी रखो”

“मैने पांच करोड वाली बात छुपाकर उसे बाकी की सारी बातें बताई इतना ही नहीं उसमें ये भी जोड़ दिया कि मालती ने मेरे कत्ल की सुपारी भी किसी को दे दी है. जिस दिन मालती ने मुझे बुलाकर समझाया था उसी दिन से मेरी नौकरी से छूटी हो गई थी. इस बात को लेकर साक्षी ने अपनी मां से बहस की. साक्षी ने मुझे बताया की बहस के दौरान उसने अपनी मां को यह भी बताया कि यदि मेरा खून होता है या किसी भी तरह की हानी पहुंचती है तो उसके लिए वह अपनी मां को जेल करवा देंगी और उसे बताया कि बर्थ-डे वाले दिन वह सबके सामने अपनी हितेन के साथ सगाई का ऐलान करेंगी. साक्षी की इस बात ने मालती पर ऐसा असर डाला कि उसने फिर मुझे बुला लिया और पांच करोड़ देने के लिए राजी हो गई. सिर्फ उसे पैसों का बंदोबस्त करने के लिए समय चाहिए था पर मै उसे समय देने के मुड में नहीं था. मुझे यकिन दिलाने के लिए मालती ने अपने कुछ जेवर और पर्सनल अकाउंट से कैश निकलवाकर मुझे एक करोड़ रूपये दिये और बोली कि बाकी के चार करोड़ वह दस-पंद्रह दिनों में दे देंगी. पार्टी है सारे जेवर नहीं बेच सकती और शेअर मार्केट का पैसा आज उठाया तो उसे काफी कम पैसे मिलेगे कुछ दिन इंतजार करे तो शेअर की अच्छी किंमत आने पर वो सारा पैसा मुझे दे देंगी. जो औरत कभी किसी से ब्लैकमेल नहीं हुई वह मुझे पैसे दे रही थी यह मेरे लिए गर्व की बात थी तो उसके लिए अपने बच्चों कि चिंता, उनका भविष्य सुरक्षित करने की तड़प. साक्षी के लिए उसने अपनी खुद की जमापूंजी और जेवर तक दांव पर लगा दिये थे. वह अपने बच्चों के लिए मेरे सामने झुक गई थी इससे मेरे इगो को बहुत राहत पहुंची थी.”

वह थोड़ी देर सांस लेने के लिए रूका और फिर आगे बोलना शुरू किया,

“मुझे डर लगने लगा की कहीं साक्षी को यह पता ना चल जाये की मैने पैसे लिये है. मालती के बताने से तो विश्वास नहीं करेंगी. लेकिन किसी और तरीके से उसे पता चला तो मेरा पूरा प्लान फेल हो जायेगा. आगे के सारे कदम फुंक फुंक कर रखने थे. साक्षी ने अपनी मां को सगाई वाली बात बताई थी मैने साक्षी से पूछा क्या तुमने यह बात सीरियसली अपनी मां को बताई या सिर्फ मां को जलाने के लिए बोली. तो साक्षी ने कहां यह सच है. वो मुझसे शादी करने के लिए तैयार थी. उसने अपनी मां को नीचा दिखाने के लिए यह जिद्द पकड़ ली थी की वह मुझसे ही शादी करेगी. मेरे भी मन में लालच आ गया. यदि शादी हो जाती है तो ये पांच करोड तो समंदर में खसखस की तरह है. मै खुद इस पूरे जायदाद का मालिक बन जाऊंगा और यदि ना भी बन पाया शादी के बाद साक्षी मुझे लात मारकर भगा भी देंगी तो भी मै उससे पचास करोड तो कम्पन्सेशन मांग ही सकता हूं. मुझे पच्चीस करोड़ भी मिल जाय तो सौदा सस्ता नहीं है. लेकिन सबसे बड़ी रूकावट मालती थी. उसे रास्ते से हटाना जरूरी था. मैने एक सर्पमित्र से सांप का जहर खरीदा. उस जहर की एक बूंद भी अगर पेट में चली जाये तो दस से पंद्रह मिनट में तड़प तड़प कर मौत होती है. साक्षी के बर्थ-डे वाले दिन मै एक छोटी बोतल में वह जहर लेकर पार्टी में गया. मुझे पता था मालती हमेशा शराब पीती नहीं है पर जब भी पार्टी या अन्य कार्यक्रमों में दूसरों को साथ देने के लिए पीती है तो उसका अपना अलग प्याला होता है. उस दिन अम्मा ने वह प्याला पार्टी में टेम्पररी बनाएं गये बार काउंटर पर लाकर रख दिया था. शराब का दौर जैसे ही शुरू हुआ मै भी शराब पीने के बहाने काउंटर के पास गया और सबकी नजरो से बचाकर मालती के प्याले में उस बोतल से जहर की आठ-दस बूंदे डाल दी और उस बोतल को पड़ोसी के कंपाउंड वॉल में फेंक दिया.”

तभी यशोमी बोली, “लेकिन उस जहर से मालती नहीं साक्षी मरी है ये कैसे हुआ ?”

“बस यहीं मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि, मालती की जगह साक्षी की मौत कैसे हुई. जबकि उस प्याले से मालती ही शराब पी रही थी. जहर वाली शराब पीने के बाद भी उसने कई पैग और बनाएं और पी गई.”

“क्या तुमने अपनी आंखों से देखा मालती को शराब पीते हुए ?”

“जहर डालने के बाद तो मै तुरंत वहां से हट गया था मुझे बोतल फेंकनी थी. इसलिए मेरा ध्यान उस और नहीं कि मालती ने वह शराब पी या नहीं और पी तो कितनी देर बाद. लेकिन एक या दो बार मैने उसे खुद शराब पीते हुए देखा. या हो सकता है उसने उल्‍टी करने के कारण जहर उसके शरीर में फैल ही नहीं पाया.”

“मैडम ये झूठ बोल रा है, इसी ने साक्षी को जेर दिया और अब बता रा है कि मालती के दारू में जेर मिलाया था. साला इतना कांड किया तभीच यहां से अपना बोरीया बिस्तर लेकर फरार हुआ”

“नहीं, मैने मालती को ही जहर दिया था वह मर जाती तो सारी बाजी मेरे हाथ में होती मै साक्षी को अपनी उंगलियों पर नचाते हुए सब अपनी मर्जी का कर रहा होता. लेकिन साक्षी के मरने के बाद पूरी बाजी तो मालती के हाथ में थी वह अपनी बेटी की मौत के लिए मुझे जिम्मेदार मानती और जहर मैने खरीदा था ये बात जान जाती तो वह मुझे जेल होने से पहले ही मरवा देती. मै पुलिस से डरकर नहीं बल्कि मालती से डरकर यहां से भागा था.”

यशोमी भी सोचने लगी. हितेन यदि सारी बाते सच बता रहा है, जहर खरीदने की बात भी कबुल कर रहा है तो फिर अंत में यह ऐसे क्यों बाल रहा है कि जहर शराब में मिलाया था. साक्षी ने तो शराब पी भी नहीं थी उसने सिर्फ केक खाया था. यशोमी हितेन की ओर देखकर बोली,

“जरा दिमाग पर जोर देकर सोचो और बताओं कि क्या हुआ था. खास कर साक्षी को केक खिलाते हुए.” हितने सोचने लगा फिर जैसे उसे कुछ याद आया वह अपनी आंखे बड़ी करते हुए बोला,

“याद आया मैडम, मै जब साक्षी को बर्थ-डे विश करने और केक खिलाने उसके सामने पहुंचा तो उसी समय साक्षी जिस चाकू से केक काट रही थी वह चाकू जमिन पर गिर गया. वह कैसे गिरा या किसी ने जानबूझकर गिराया पता नहीं पर चाकू गिरा तो साक्षी ने अम्मा को जो हम सबके पीछे खड़ी थी उसे दूसरा चाकू लाने भेजा. अम्मा थोड़ी ही देर में घर के अंदर से फल काटने वाला दूसरा चाकू लेकर आई. अम्मा के हाथ से वह चाकू लोकेश ने लिया. चाकू का फल गिला नजर आ रहा था. शायद इसीलिए लोकेश ने जेब से टिशू पेपर निकाला और चाकू के फल को पोछकर साक्षी के हवाले किया. साक्षी ने उस चाकू से जो पीस काटा था उसे अपने मुँह में लेकर मुझे मुँह से ही जो हिस्सा बाहर था उसे खाने को कहा. मैने जैसे ही उस पीस का हिस्सा अपने दातों से काटा लोकेश ने मेरे मुँह पर मुक्का जड़ दिया. जिससे मेरे मुँह से केक का वह हिस्सा जमिन पर गिर गया. मुझे लगता है शायद मैने जिस शराब में जहर मिलाया था उसमें चाकू का फल डूबोकर अम्मा लेकर आई थी और लोकेश को वह गिला दिखा तो उसने टिशू पेपर से पोछा. लेकिन जहर की एक बूंद ही काफी है किसी की जान लेने के लिए चाकू पर लगा जहर केक पर आया और वह केक अकेली साक्षी ने खाया यदि लोकेश मुझे मुक्का नहीं मारता तो शायद मै भी साक्षी की तरह अपने ही लाये हुए जहर से मर जाता.”

हितेन की बात सुनकर जहां यशोमी का दिमाग काम करना बंद कर दिया था तो दामले ने बोल ही दिया, “मैडम मेरेकू लगता है अपना सर पटक दूं दिवाल से, अबे ये क्या है कभी इसने तो कभी उसने आखिर मर्डर किया किसने अब ये साला अम्मा पर इल्जाम लगा रा है कि वो जेर में चाकू डूबाकर लाइ थी.”

यशोमी बोली, “दामले इसे ले जाओ लॉकअप में डाल दो और प्रकाश को बोलो मुझे घर छोड दे एक-दो घंटे नींद लेने के बाद ही मेरा दिमाग काम करना चालु करेंगा.”

यशोमी एक-दो घंटे बोलकर तो गई थी लेकिन चार घंटे बाद पुलिस स्टेशन लौटी और आते ही सीधे कम्प्युटर रूम में चली गई और ऑपरेटर से बोली मुझे केक काटने वाली फुटेज दिखाओं. जब तक ऑपरेटर फुटेज चालु करता यशोमी ने दामले को आदेश दिया,

“दामले तुम एक काम करो हितेन से सर्पमित्र का पता पूछा और उस सर्पमित्र को उठाकर लाओ.”  

यशोमी बार-बार पार्टी का केक काटने वाला सीन देखने लगी. फिर ऑपरेटर से बोली, ये समय नोट करो और किसी दूसरे कैमरे या मोबाईल कैमरे की फुटेज इस समय वाली चेक करो. जिसमें केक काटते हुए नहीं तो बाहर कौन क्या कर रहा है ये दिखना चाहिए. ऑपरेटर ने सभी जो अलग-अलग लोगों के मोबाईल से फुटेज लिये थे उसे चेक करने लगा साथ ही बंगले के सीसीटीवी फुटेज भी देखने लगा. केक काटने वाले समय के अन्य फुटेज जब यशोमी ने आठ से दस बार देखे तो उसकी आंखे चमक उठी. वह झट से उठी और फॉरेन्सिक जांच की रिपोर्ट का पुलिंदा खोलकर बैठ गई. जिसमें से उसने कुछ कागजात छांट कर बाहर निकाले. तभी यशोमी को एक फोन आया. फोन किसी खबरिये का था उसने बताया लोकेश कुछ दिनों से अपने बेटे आरूप से कुछ ज्यादा ही मिलने लगा था. दोनों बाप-बेटे में कुछ खिचड़ी पक रही थी. यशोमी के लिए यह जानकारी भी चौकाने वाली थी.

उसने समय देखा यह सब करते करते उसे दो घंटे बित गये थे. तब तक एक हवलदार सर्पमित्र को पकड कर ले आया था. यशोमी ने सबसे पहले उसे लॉकअप में बंद हितने को दिखाया और पूछा,

“इसे जानते हो”  

सर्पमित्र समझ गया उससे जहर लेकर इस आदमी ने कोई अपराध किया है और पकड़ा गया है यदि वह इसे पहचानता है बोलेगा तो उसे भी जहर बेचने के इल्जाम में अंदर जाना पड़ेगा.   

“नहीं… कौन है ये. इनको मै पहली बार देख रहा हूं”

“दामले, इसकी याददाश्त वापस लाओं ये लोगों को पहचानना भूल गया है”

दामले ने वहीं खड़े खड़े अपने हाथ का डंडा उसके कुल्हे पर दे मारा. सर्पमित्र जोर से चिल्लाया. दामले का डंडा और चला और चला. उसके मुंह से जैसे चिख निकलती दामले का डंडा चलता. आखिर वह बोला,

“जानता हूं … जानता हूं सा’ब मारो मत”

दामले यशोमी की ओर देखकर बोला “लो मैडम याददाश्त वापस आ गई”

यशोमी ने सर्पमित्र से वहीं सवाल किया, “अब बताओं इसे जानते हो?”

“हां.. सा’ब ये मेरे से जहर लेने आया था.”   

“कितने लोगों ने तुमसे जहर खरीदा?”

“बस इसी ने सा’ब”

“तुम झूठ बोल रहे हो… दामले ये फिर याददा…”

“नहीं नहीं बताता हूं.. एक और भी था”

यशोमी ने अपने फोन में की एक तस्वीर उसे दिखाई, “ये है वो”

“हां”

“दामले इसे जहर बेचने के जुर्म में अंदर डाल दो और हितेन के साथ मत रखना”

यशोमी के सामने अब सब कुछ साफ साफ था. उसने सारे सबुत के दस्तावेज को सिलसिलेवार लगाया सभी के बयान और फुटेज के प्रिंट आऊट सभी कुछ जोडकर एक फाइल तयार की और खुद अपनी टीम के साथ हेडक्वार्टर के लिए रवाना हुई. वहां जाकर यशोमी ने कमिश्‍नर को पूरी रिपोर्ट दी सभी सबूत दिखाये जो की काफी पुख्ता थे. अब किसी भी तरह इस केस में बेल मिलने की कोई गुंजाइश नहीं थी इस बात से आश्वस्त होकर कमिश्‍नर ने मुजरीम के विरूद्ध अरेस्ट वॉरंट जारी कर दिया.

अपनी पुलिस गाडी में बैठते हुए यशोमी बोली, “दामले लोकेश को फोन लगाओ पूछो वह कहां है”  

दामले ने फोन मिलाया और बात करने पर बताया कि इस वक्त लोकेश मृत्यु के तीन दिनों बाद करने वाली धार्मिक विधी के लिए मालती के घर गया हुआ है.

“प्रकाश गाडी मालती के घर की ओर लो. सारे इकठ्ठा मिल जायेगे और सभी के सामने कातिल का असली चेहरा आ जायेगा”

मालती के बंगले के हॉल में सभी उपस्थित थे. यशोमी की पूरी टीम, मालती, आरूप, रूपल, अम्मा, लोकेश, उसकी पत्नी रिना और कुछ मेहमान भी. यशोमी ने गीता के हाथ में वॉरंट देकर कहा,

“गीता ये वॉरंट मालती को दिखाओं”

मालती ने वह वॉरंट देखा और कुछ बोलने ही वाली थी कि, यशोमी बोली,

“अब तुम कुछ भी नहीं बोल सकती हो मालती क्यों कि इस समय मेरे हाथ में जो फाइल है उसमें पूरे पुख्ता सबूत है अब तुम्हारा कोई वकील कातिल की जमानत नहीं करवा सकता. मेरे सामने तो सबकुछ साफ हो गया है कि कत्ल किसने और कैसे किया लेकिन अब भी मेरी समझ में नहीं आया की इस कत्ल की असली वजह क्या है”

तभी अम्मा सामने आते हुए बोली, “ठीक है मैडम लगाइए मुझे हथकड़ी मै चलने के लिए तैयार हूं”

“अम्मा तुम बहुत वफादार हो और बचपन से जिसे तुमने पाला हमेशा अपनी बेटी ती तरह चाहा तुम नहीं चाहती की वो जेल चली जाए. मै तुम्हारे जज्बातों की कद्र करती हूं और इस जलन और नफरत भरे घर में तुम जैसी प्यार और ममता से भरी हुई वफादार औरत का होना सच में एक मिसाल है. लेकिन तुम कातिल को बचा नहीं सकती.”

मालती एकदम से फूट फूट कर रोने लगी. कमरे में पूरा सन्नाटा छा गया था. सब उसी की ओर देख रहे थे. मालती ने अपने आंसू पोछे और बोलना शुरू किया,

“मै साक्षी को बहुत प्यार करती थी. मैने अपने तीनों बच्चों को बहुत चाहा उनके लिए कुछ भी करने को तैयार थी मै. लोगों ने भले ही मेरे बच्चों को मेरे खिलाफ भडकाया हो लेकिन मैने उन्हें जन्म दिया था भला मै कैसे उनसे नफरत करती. बच्चों की गलतियों को तो मां-बाप हमेशा ही माफ करते है. मेरे पिता भले ही मुझसे अपने अंतिम समय तक नाराज रहे हो लेकिन उन्होंने मुझे त्यागा नही. मुझ पर विश्वास कर अपने फैक्ट्री की सारी जिम्मेदारी मुझ पर डाली और मैने भी उनके विश्वास को तोड़ा नहीं. सारी मुसीबत की जड़ उनकी वसीयत थी जिसके चलते साक्षी इस पूरे प्रॉपर्टी की एकलौती मालिक हो जाती. साक्षी में परिपक्वता की कमतरता थी. वह जल्द ही किसी के भी बहकावे में आ जाती. उसके लिए मै खुद भी काफी हद तक जिम्मेदार थी. मेरी एक गंदी आदत ने मुझसे मेरे बच्चों को दूर कर दिया. विनोद ने मुसीबत के समय मेरा साथ दिया और मेरे दिमाग में यह बात बिठा दी की तनाव और परेशानी में संबंध करने पर तनाव से मुक्ति मिलती है और उसने मेरे साथ संबंध बनाकर मेरा फायदा उठाने लगा. यह बात जैसे ही मेरी समझ में आई मैने उसे जेल करवा दी. लेकिन तनाव में शारीरिक संबंध करने पर मुझे सच में राहत महसूस मिलती है यह बात मेरे दिलो-दिमाग पर इस कदर छा गई कि मै तनाव के समय सबकुछ भूलकर यह गलती करने लगी. इसके लिए मैने कभी किसी की परवाह नहीं की. लेकिन साक्षी अपने निर्णय लेने में कमजोर थी. वह हितेन के इशारे पर नाचने लगी. मै हितेन को उसके रास्ते से किसी भी तरीके से हटा देती. लेकिन वह अठारह की होने वाली थी और सब कुछ उसके नाम होने वाला था. वह काफी जिद्दी और बेवकूफ लड़की थी जिसके मन में अपने भाई और बहन के लिए रत्ति भर भी प्यार नहीं था. ऐसे में उसका एक फैसला सबकुछ तबाह कर देता. हितेन ने ऐसे हालात पैदा कर दिये कि, मेरे सामने कोई और रास्ता ही नहीं बचा था. मै हितेन को मार भी देती तो भी साक्षी मुझे उसकी हत्या के जुर्म में जेल भेज देती और मेरे दोनों बच्चों को घर से बेघर कर देती. उसके बाद फिर कोई और हितेन जैसा ठग आता जो साक्षी को बेवकूफ बनाकर मेरे पिता और मेरे द्वारा खड़े किये गये इस एम्पायर को हथीया लेता. मेरे तीन बच्चे है एक के लिए मै दो को मुसीबत ने नहीं डालना चाहती थी. इसीलिए मैने अपने मन को कड़ा करके यह निर्णय लिया जो मेरे लिए बहुत ही ज्यादा दर्दनाक और पीड़ादायक था.”

मालती चुप हो गई उसके मन की पीड़ा को जानकर हर कोई गमगीन हो गया था. एक मां ने ही अपनी बच्ची को जहर देकर मारा था ताकि उसके दूसरे दोनों बच्चे जी सके. मालती के दोनों बच्चों की आंखों से आंसूओं की धाराएं बहने लगी. वे अपनी जगह से उठे और मालती के पास अलग बगल जाकर बैठे और उससे लिपट गये और बोले,

“हमसे भी बहुत बड़ी गलती हो गई मम्मी, हमे माफ कर दो अब हम कभी एक-दूसरे से नफरत नहीं करेंगे, किसी के बहकावे में नहीं आयगे. हम नहीं जानते थे की तुम हमसे इतना प्यार करती हो.”

मालती ने दोनों बच्चों को प्यार से पुचकारा और अम्मा की ओर देखकर बोली, “अम्मा कानून मुझे क्या सजा देंगा और कब तक जेल में रखेगा ये तो पता नहीं, लेकिन अब मै इत्मीनान से अपने किये की सजा पा सकती हूं तुम मेरे बच्चों का ख्याल रखना, जो प्यार तुमने मुझे दिया वही इन बच्चों को देना, जो सिख मुझे दी वहीं इन बच्चों को देना.”

तभी लोकेश यशोमी से बोला,

“आपको मालती पर शक कैसे हुआ?”

“हितेन का बयान सुनने के बाद मेरे दिमाग में एक बात बार बार घुम रही थी कि हितेन ने मालती की शराब में जहर मिलाया था लेकिन मालती को कुछ नहीं हुआ और साक्षी की मौत हो गई. इसका मतलब साफ था कि मालती जानती थी की उसके शराब में जहर है और ये तभी मुमकिन है जब वह हितेन पर नजर रखे हुए हो. यही धागा पकड़ कर मैने खबरीए को फोन कर पता लगाया कि हितेन का कौन कौन पिछा कर रहा था. साथ ही मैने बार-बार वीडियो फुटेज देखी. ज्यादातर फुटेज केक काटने के ही थे लेकिन जिस समय केक खाया और खिलाया जा रहा था उस समय बाहर लॉन में खडे़ लोग क्या कर रहे थे इस और किसी का ध्यान नहीं था. बाहर की कोई फुटेज भी किसी कैमरे में नहीं थी लेकिन जो सीसीटीवी कैमरा बंगले में लगा हुआ था उसी सीसीटीवी कैमरे मे सच कैद हो गया. वह सीसीटीवी कैमरा टेम्पररी बने वॉशबेसीन को कवर कर रहा था. उस वॉश बेसीन के पास पानी यहां वहां गिरा हुआ था वहां की जमीन गिली थी. और मालती बार-बार अपना शराब का प्याला लेकर जाती और पीने का नाटक करते हुए शराब जमीन पर गिरा रही थी. दूसरे जब वह उल्‍टी करने पहुंची तो सबसे पहले अपने हाथों को रगड रगड कर धोने लगी. बार बार हैंड वॉश अपने उंगलियों और नाखुनों पर लगा रही थी. उसके तुरंत बाद ही वहां रखे एक गिलास में मालती ने हैंड वॉश लिक्विड पानी में मिलाया और पी गई जिससे उसे उल्टियां हुई ना की शराब की अधिकता से. शराब पीने का तो उसने सिर्फ नाटक किया था. तभी लिक्विड मिला गिलास वही पर गिर गया जिसमें थोडा पानी बचा हुआ था. यह सब काफी था मेरे लिए मालती को शक के घेरे में लाने के लिए. उसके बाद मैने फॉरेन्सिक रिपोर्ट चेक किये जिसमें एक गिलास में हैंड वॉश लिक्विड के होने की रिपोर्ट थी. अब आगे तुम बताओं मालती कि तुमने यह सब कैसे किया”

मालती ने पहले सभी की ओर देखा और बोलना शुरू किया, “हितेन से सौदा करने के बाद भी मुझे चैन नहीं मिल रहा था मुझे यकिन नहीं हो रहा था कि वह आसानी से पांच करोड़ लेकर शहर छोड़ कर चला जायेगा. इसलिए उसके पीछे मैने अपना आदमी लगा दिया था. वह पल पल की खबर मुझे देने लगा. मुझे पता चल गया था कि वह अब भी साक्षी को बरगला रहा है और उसने सर्पमित्र से जहर खरीदा है. मै समझ गई की जहर का इस्तेमाल वह किसी ना किसी को मारने के लिए करने वाला है और जहां तक संभव हो वह मुझे ही रास्ते से हटाने की कोशिश करेंगा. मैने साक्षी को समझाने की कोशिश की उसे बताया भी कि मै हितेन को एक करोड़ दे चुकी हूं और उसे चार करोड़ देने वाली हूं वह सिर्फ पैसों का भूखा है. लेकिन साक्षी ने मेरी बात का यकिन नहीं किया. वह बोली यदि ये सच भी है तब भी मै उससे शादी करूगीं ताकि तुम्हे और तुम्हारे उन दो नाजायज बच्चों को तकलिफ हो. तुम लोग सड़क पर आ जाओ. उसकी बात ने मुझे सोचने पर मजबुर कर दिया था. इसीलिए मैने भी उसी आदमी से जहर खरीदा जिससे हितेन ने जहर खरीदा था. पार्टी वाले दिन जब मै शराब ले रही थी उसी समय वह भी वहां खड़ा था मै चोर निगाहों से उसे ही ताड़ रहीं थी. उसे लगा कोई उसे देख नहीं रहा है उसने वह जहर मेरे प्याले में मिला दिया. जिसे मैने पीने का नाटक करते हुए जमीन पर गिरा दिया था. उसके बाद भी उस प्याले से कई बार मैने शराब ली लेकिन मेरे मन में डर बैठ गया था इसलिए एक बार भी मैने शराब नहीं पी और शराब पीने का और लडखडाने का नाटक करने लगी. जब केक काटने का समय हुआ तो पहले मैने अपनी पर्स से नेल पॉलिश निकाला और जहर मिला हुआ नेल पॉलिश अपने नाखुनों पर लगाया. साक्षी ने केक काटकर सबसे पहले मुझे ही खिलाया. मैने उसी पीस में अपने नाखुन गडा दिये और उसमें से थोड़ा सा खाते हुए अपनी उंगलियों को केक पीस में फंसाते हुए साक्षी के हाथ से ले लिया और पूरा पीस उसे खिला दिया. मेरी उंगलियों में क्रिम लगा हुआ था जिसे टिशू पेपर से पोछने के बजाय मै सीधे वाशबेसिन के पास गई और अपने हाथ अच्छे से धो डाले. मुझे लग रहा था मै सारे सबुत मिटा रही हूं. सब कुछ पानी में बहकर जा रहा है लेकिन यह भूल गई की मेरे ही घर के सीसीटीवी में यह हरकते कैद हो रही हैं.”

तभी यशोमी बोली, “शायद तुम एक बात और भुल गई हो, तुम्हारा पर्स कहां है” वह पर्स वहीं पर रखा हुआ था. यशोमी ने वह पर्स उठाया और उसे खोलकर देखा अंदर वही जहर युक्त नेल पॉलिस की बोतल रखी हुई थी.

यशोमी उस दिन जल्दी अपने घर पहुंची अपने परिवार के साथ बैठकर रात का खाना खाया अपने बच्चों को प्यार से उनके कमरे में ले जाकर सुलाया फिर अपने बेडरूम में आकर अपने पति को इस पूरे केस की दास्तां सूनाने लगी. पूरी दास्तान सूनने के बाद यशोमी का पति बोला,

“यशोमी, मुझे लगता है मालती अपनी बेटी का कत्ल करने की जगह कोई और भी रास्ता निकाल सकती थी वो काफी सुलझी हुई, दृढ़ संकल्प और हिम्मतवाली महिला थी.”

“ये सच है, पर समय, हालात और उस समय की हमारी मानसिकता हमारे विचारों को प्रभावित करते है तब हम कोई निर्णय लेते है. यह निर्णय कितना सही और कितना गलत है यह तो भविष्य तय करता है. मालती ने अपने जीवन के शुरूआत में कुछ गलत निर्णय लिए जो भविष्य में उसके और उसके बच्चों के लिए नुकसानदायक साबित हुए. मुझे डर लगता है मै भी अपने बच्चों को इस पुलिसिया नौकरी के कारण समय नहीं दे पाती. कहीं हमारे बच्चे भी मुझसे दूर न चले जाये.”

“ऐसा नही होगा यशोमी, उन्हें रास्ता दिखाने के लिए मै जो हूं मै उनके साथ हमेशा रहता हूं और अंत में मालती ने भी तो अपने बच्चों का प्यार और विश्वास पा ही लिया.”

“हां पर उसे इसकी काफी बड़ी किंमत चुकानी पड़ी.”

 

*** समाप्त***

 

अश्वजीत पाटील