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पेहचान - 9

वो पीहू को लेकर अपने cabin के अंदर गया । वो cabin के अंदर कदम रखा ही था की पीहू उसे जोरसे धक्का देकर अपने से दूर की, उससे पहले की अर्जुन कुछ बोलता पीहू उसके चेहरे पर चाटा जड़ते हुए बोली .............

what the hail! तुम खुदको क्या समझते हो हाँ? तुम्हे इतना समझाई पर फिर भी वही गलती

अरे पानी था, लापरवाही हुई मुझसे और मैं गिरी इतनी सी सिम्पल बात को लेकर तुमने इतना तमाशा क्यों किया ? मेरी ही गलती थी की मैं तुमपे भरोसा कर बैठी, छोड़ो जो हुआ सो हुआ ,अब मैं यहाँ काम नहीं कर सकती। मैं ये रिस्क नहीं ले सकती क्या पता कोई तुम्हारे और मेरे बारे मैं जान ले सो bye मैं जा रही हूँ ,बोलकर पीहू जाने लगी.

तभी अर्जुन ने रोकते हुए कहा please एक बार माफ करदो promise next time एसी गलती नहीं होगी । पीहू अपने आपको सांत करते हुए बोली देखो अर्जुन I know तुम मुझे लेकर बहुत serious हो और हो भी सकता है की तुम दोबारा ये गलती न करो पर अर्जुन मेरे लिए एक एक पल बहुत कीमती है और मैं कोई रिस्क नहीं ले सकती सो sorry bye , कहते हुए वो वहाँ से चलदी ।

अर्जुन बस पीहू को जाते हुए देख रहा था, अब उसे भी उसको रोकने की हिम्मत नहीं थी, उसकी नजरों मैं अफ़सोस साफ झलक रही थी पर अब करने को कुछ बचा ही नहीं था सिवाए खुदको कोसने के ।

पीहू अर्जुन के ऑफिस से निकलने के बाद करीब 2 घंटे बाद jungle के बीच एक घर के सामने पहुंची । कुछ सोचते हुए दरवाजा खट खटाइ, थोड़ी देर बाद एक अधेड़ उमर का इंसान दरवाजा खोला और एक रूखी आवाज़ मे पूछा क्या चाहिए?

पीहू बोली मदत

वो इंसान बोला क्या मदत और वो भी मैं , अरे! में तो बुढा हो चुका हूँ, तबियत भी खराब रहती है ,खुदका काम भी नहीं कर पाता भला मैं तुम्हारी क्या मदत करूँगा!

पीहू बोली, देखिये मैं जानती हूँ कि आप मशूर आयुर्वेद के डॉक्टर चम्पकलाल चड्ढा हैं ,मुझे आपसे मदत चाहिए please . वो बढ़ा आदमी ,गुस्से मैं आगया और चिड़ते हुए बोला ये पागल लड़की कौन हो तुम और ये क्या पागलो वाली बात कर रही हो कौन चम्पकलाल चड्ढा, यहाँ कोई चम्पकलाल चड्ढा नहीं रहते मैं ........ फिर रोकते हुए बोलो छोड़ो मैं जो भी हूँ तुम्हे उससे क्या जाओ यहाँ से कहकर दरवाजा बंद कर दिया ।

पीहू जितना पुकारी, दरवाज़ा खट खटाइ पर उस बूढ़े इंसान ने दरवाजा एक बार भी नहीं खोला तभी अचानक जोरोसे आंधी चलने लगी आसमान मैं काले बादल छा गए पर पीहू उस जगह से टस् से मस् नहीं हुई.......

देखते देखते जोरोसे बारिश होने लगी पर पीहू अभी भी वंही खड़ी थी एसे देखते देखते 12 घंटे गुजर गए रात के 1 बज चुके थे जानवरों की आवाज़ पुरे जंगल मे गूंज रही थी, जमीन पे कीड़े मकोडो की मानो जैसे जसन् चल रहा हो पर अभी भी पीहू वैसे ही खड़ी रही । इतना समय भीगने के बाद और बिना कुछ खाये पिये खड़ी रहने की वजह से पीहू बेहोस होकर गिरने लगी..............

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