दानव द रिस्की लव - 15 Pooja Singh द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

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दानव द रिस्की लव - 15

……Now on……




विवेक अदिति को लेने घर पहुंचता है ……

………Door bell ring ………

बबिता : आप …!

विवेक : बबिता अदिति कहां हैं ……!

बबिता : वो अपने कमरे में आराम कर रही है...…!

उबांक ये खबर लेकर तक्ष के पास जाता है ……

तक्ष : क्या बात है उबांक…?

उबांक : दानव राज वो लड़का आया है ….और अदिति को पुछ रहा हैं ….कही उसके कमरे में न चला जाए ……!

तक्ष : नही …..!

तक्ष नीचे जाता है ……

विवेक : बबिता अदिति को बोल दो मैं आया हूं ……!

बबिता : जी ….!

बबिता से पहले तक्ष अदिति के कमरे में चला जाता है और अदिति के रुप में आ जाता है ……

बबिता : अदिति दी ….विवेक जी आये है आपको बुला रहे है

अदिति (तक्ष ) : ठीक है …… मैं आती हूं …उबांक …इसका ध्यान रखना ……!

उबांक : जी ! दानव राज आप निश्चिंत रहिए ……!

अदिति (तक्ष ) : ठीक है ……!

……in dinning hall …….

विवेक : अदिति ….तुम ठीक हो ….!

अदिति (तक्ष ) : हां मुझे क्या हुआ ….?

विवेक : अरे ! वो मतलब नही है तुम आई क्यूं नहीं घर …कल कि बात को लेकर tensioned हो ……!

अदिति (तक्ष ) : नहीं मुझे rest करना था इसलिए नही आई ……!

विवेक : चलो ये बहाना छोड़ो और घर चलो मां बुला रही है... उन्होने कहा है ये उनका order है ……!

अदिति (तक्ष ) : ठीक है …मैं‌ change करके आती हूं ….!(चली जाती हैं....)

विवेक : ये अदिति कुछ अजीब क्यूं लग रही है.... मैं भी न क्या सोचता रहता हूं …..!

…….………

अदिति (तक्ष ) : चले ……!

विवेक : हां क्यूं नहीं ….!

……….in vivek house ….…

विवेक : चलो अंदर ……!

अदिति(तक्ष ) : हां ……!

विवेक : मां …अदिति ….!

मालती : आ गई मेरी बच्ची ……(गले लगा लेती हैं) …तबियत ठीक नहीं हैं अदिति ….!

आदित्य : अदि aunty कुछ पुछ रही है...

अदिति (तक्ष) : हां भाई …!

मालती : कोई बात नहीं , आओ बेटा …तुम्हे बहुत दिन से देखा नही इसलिए बुलवा लिया …!

अदिति (तक्ष) : हां ……!

आदित्य : (मन में) ये अदिति को क्या हुआ है ……?

विवेक : मां चलो lunch करते हैं ……!

मालती : हां ….चलो ….!

……After lunch ……

आदित्य इशान से बात कर रहा था …

विवेक : अदिति ….इतना क्यूं परेशान हो रही है... अब से हम rose valley नही जाएंगे.... बुल जाओ उस अघोरी कि बातों को ….!

अदिति (तक्ष ) : हां ….!

विवेक : क्या बात है आज मुझसे बातें नही करोगी ….मेरी sweet heart चुप अच्छी नही लगती …..!

अदिति (तक्ष ) : (मन में) …यही मौका इसका पता लगाने आखिर इसके पास आते ही मुझे हार क्यूं महसूस होती है ……विवेक ! एक बात पुछूं ….!

विवेक : हां क्यूं नहीं ……!

अदिति (तक्ष ) : विवेक अगर मैं किसी मुसीबत में फंस जाऊ तो क्या तुम

विवेक : मेरे होते हुए तुम कभी किसी मुसीबत में फंस ही नहीं सकती ……अदिति प्र करता हूं तुमसे तुम्हें किसी मुसीबत में कैसे फंसने दूंगा...

अदिति (तक्ष ) : इतना प्यार करते हो मुझसे ….

विवेक : बहुत
अदिति (तक्ष ) : अगर उस अघोरी कि कही बात सच हुई तो …!

विवेक : ओह अदिति तुम फिर उस अघोरी कि बात लेकर बैठ गई ….!

अदिति (तक्ष ) : बताओ न विवेक ….नही बताओगे ….मैं जा रही हूं ……!

विवेक : अदिति (चली जाती हैं....)

अदिति (तक्ष ) : भाई मुझे घर जाना है ……!

आदित्य : क्या हुआ अदि …!

चौधरी जी : लगता है आज अदिति कि तबियत ठीक नहीं हैं.

मालती : आपने ठीक कहा ……बेटा तू घर जा ….विवेक

विवेक : ठीक है मां ……चलो अदिति मैं छोड़ आता हूं....!

आदित्य : नही विवेक ..रहने दो हम साथ ही चले जाते है …!

विवेक : पर भाई

आदित्य : कोई नहीं विवेक ,हमारी बात भी हो गई ….lunch के लिए thanks aunty ji ……!

मालती : अदिति का ध्यान रखना …….!

आदित्य : जी ……चलो अदि ….!(दोनों चले जाते हैं)

विवेक : आज अदिति को क्या हो गया ….!

मालती : तबियत ठीक नहीं होगी उसकी …कल पुछ लेना परेशान मत हो ……!

विवेक : हां मां ….!

………in car ………

आदित्य : अदि क्या हुआ इस तरह

अदिति (तक्ष ) : भाई please मेरा सिर दर्द हो रहा हैं ….!

आदित्य :‌ कभी कभी तुझे समझना मुश्किल हो जाता है ….!

……in aditi's house ………

आदित्य : चल अब ….!

अदिति (तक्ष ) : हां भाई ………(मन में ) …इसका मतलब ये विवेक अदिति को बचाने के लिए कुछ भी कर सकता है …… नही इससे पहले ये मेरे लिए रूकावट बने मैं इसे खत्म कर दूंगा...

आदित्य : अदि क्या सोच रही है... जा आराम कर ले ….!

अदिति (तक्ष ) : हां भाई ……(अदिति चली जाती हैं). …

………in aditi s room ………

उबांक : आप आ गये दानव राज ….

तक्ष : हां उबांक ……सब ठीक है यहां ……!

उबांक : जी दानव राज ……आप कुछ परेशान से लग रहे है ……!

तक्ष : हां उबांक चलो अपने कमरे में ……!

उबांक : हां ….!

………in taksh room …….

तक्ष : उबांक ….उस लड़के को खत्म करना है ……!

उबांक : जो दोपहर आया था ……!

तक्ष : हां उबांक ……आज उसकी बातों से पता चला है ,वो मेरे रास्ते का कांटा है ….अदिति को बचाने के लिए वो कुछ भी कर सकता है ….मुझे अपने मकसद को पूरा करना है मैंने किसी भी तरह की रूकावट नहीं चाहिए ….तुझे मरना होगा …!

…….….Next day ……..

आदित्य : अदि ……आज बहुत जल्दी उठ गई ….…!

अदिति : जब कल सुबह से सोऊंगी तो अब ठोड़ी नींद आएगी ….!

आदित्य : कल सुबह से…… तू अभी भी नींद में है ……!

अदिति : आप क्या कह रहे हो ….पता नही सिर दर्द क्यूं हो रहा हैं अभी भी ….ताई एक गिलास गर्म पानी देना ….!

बबिता : अभी लाई……!(तभी तक्ष आता है)

आदित्य : तक्ष ….आओ नाश्ता कर लो ….!

तक्ष : हां ….!

आदित्य : अदि काॅलेज जाएगी …….!

अदिति : भैय्या..... आज Sunday है ……!

आदित्य : अदि तू पागल है …… आज Monday है ……!

अदिति confusion सी आदित्य को देख रही थी....




………to be continued ……